अध्याय २३
श्लोक 2.10.1
॥ अथ खल्वात्मसंमितमतिमृत्यु सप्तविधँ सामोपासीत हिंकार इति त्र्यक्षरं प्रस्ताव इति त्र्यक्षरं तत्समम्
|| atha khalvAtmasaMmitamatimR^ityu saptavidha{\m+} sAmopAsIta hiMkAra iti tryakSharaM prastAva iti tryakSharaM tatsamam
हिन्दी अर्थ
वह लो इस प्रकार गायत्रसं्ञक सामको प्राणो प्रतिष्ठित जानता है, प्राणवान् होता है, पूरणं आयुका उपमोग करता है, परशस्त जीवनखाम करा हे, प्रना जर पञ्चओंद्ारा महान् होता है तथा कीतिके द्वारा मी महान् कलकरणो मवतीत्येतत् । सर्व. उयोगुज्ज्वलं जीवति । महा- नभवति प्रजादिमिमंहां च कीर्त्या वह जो हस पकार इस गाः जानता है, प्राणवान् होता है अविक इद्दियवान् होता ह, ३
English
Next let a man meditate on the sevenfold Sâman which is uniform in itself and leads beyond death. The word hiṅkâra has three syllables, the word prastâva has three syllables: that is equal (sama).