Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 4 / 317

Book 1 - Adhyaya 4

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पूर्ण अध्याय पाठ38 श्लोक

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अध्याय ४

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे विषयनिरूपणं नाम तृतीयो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- ४ रुद्र उवाच ।सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च ।वंशानुचरितं चैव एतद् ब्रूहि जनार्दन

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe viṣayanirūpaṇaṃ nāma tṛtīyo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 4 rudra uvāca / sargaśca pratisargaśca vaṃśo manvantarāṇi ca / vaṃśānucaritaṃ caiva etad brūhi janārdana

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णुकी महिमा तथा उनके अवतारोंका वर्णन नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्। ऋषियोंने कहा-- है सूतजी! आप तो सब

English

All this visible universe* with its manifest and unmani*

अध्याय ४

श्लोक 2

हरिरुवाच ।शृणु रुद्र प्रवक्ष्यामि सर्गादीन्पापनाशनाम् ।सर्गस्थितिलयान्तां तां विष्णोः क्रीडां पुरातनीम्

hariruvāca / śṛṇu rudra pravakṣyāmi sargādīnpāpanāśanām / sargasthitilayāntāṃ tāṃ viṣṇoḥ krīḍāṃ purātanīm

हिन्दी अर्थ

देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥ कुछ जानते हैं, इसलिये हम सब आपसे पूछते हैं

English

laCSUss Pkilotophy bcsds soul, as opposed to P wt fSs

अध्याय ४

श्लोक 3

नरनारायणो देवो वासुदेवो निरञ्जनः ।परमात्मा परं ब्रह्म जगज्जनिलयादिकृत्

naranārāyaṇo devo vāsudevo nirañjanaḥ / paramātmā paraṃ brahma jagajjanilayādikṛt

हिन्दी अर्थ

“नरश्रेष्ठ भगवान् श्रीनरनारायण और भगवती कि देवताओंमें सर्वश्रेष्ठ देव कौन हैं, ईश्वर कौन हैं सरस्वती तथा व्यासदेवको नमन करके पुराणका और कौन पूज्य हैं? ध्यान करनेके योग्य कौन हैं? इस प्रवचन करना चाहिए।' जगतूके स्त्रष्टा, पालनकर्ता और संहर्ता कौन हैं?

English

With rajas element in profusion, the four*faced Brahmi takes a physical body and creates the movable and the immovable.

अध्याय ४

श्लोक 4

तदेतत्सर्वमेवैतव्द्यक्ताव्यक्तस्वरूपवत् ।तथा पुरुषरूपेण कालरूपेण च स्थितम्

tadetatsarvamevaitavdyaktāvyaktasvarūpavat / tathā puruṣarūpeṇa kālarūpeṇa ca sthitam

हिन्दी अर्थ

जो जन्म और जरासे रहित कल्याणस्वरूप- किनके द्वारा यह (सनातन) धर्म प्रवर्तित हो रहा है अजन्मा तथा अजर हैं, अनन्त एवं ज्ञानस्वरूप हैं, और दुष्टोंके विनाशक कौन हैं? उन देवका कैसा महान् हैं, विशुद्ध (मलरहित), अनादि एवं स्वरूप है? किस प्रकार इस सम्पूर्ण जगतूकी सृष्टि हुई पाञ्चभौतिक शरीरसे हीन हैं, समस्त इन्द्रियोंसे है? किन व्रतोंका पालन करनेसे वे देव संतुष्ट

English

The creator creates hinuelf along with the deities and human beings within the cosmic egg. He protects what is to be protected.

अध्याय ४

श्लोक 5

व्यक्तं विष्णुस्तथाव्यक्तं पुरुषः काल एव च ।क्रीडतो बालकस्येव चेष्टास्तस्य निशामय

vyaktaṃ viṣṇustathāvyaktaṃ puruṣaḥ kāla eva ca / krīḍato bālakasyeva ceṣṭāstasya niśāmaya

हिन्दी अर्थ

रहित और सभी प्राणियोंमें स्थित हैं, मायासे परे हैं, उन सर्वव्यापक, परम पवित्र, मङ्गलमय, अद्वय भगवान् श्रीहरिकी मैं वन्दना करता हूँ । मैं मन- वाणी और कर्मसे विष्णु, शिव, ब्रह्मा, गणेश तथा

English

The creation of mahaP (the cosmically great) is the first one. It is a metamorphosis of Brahman. The second creation is called bkiia sargCy i.e. the creation of the intrinsic essences (tanmatras) of elements.

अध्याय ४

श्लोक 6

अनादिनिधनो धाता त्वनन्तः पुरुषोत्तमः ।तस्माद्भवति चाव्यक्तं तस्मादात्मापि जायते

anādinidhano dhātā tvanantaḥ puruṣottamaḥ / tasmādbhavati cāvyaktaṃ tasmādātmāpi jāyate

हिन्दी अर्थ

देवी सरस्वतीको सर्वदा नमस्कार करता हूँ।

English

the leeoDd of the three comtituent qualrties fsiw of all

अध्याय ४

श्लोक 7

तस्माहुद्धिर्मनस्तस्मात्ततः खं पवन स्ततः ।तस्मात्तेजस्ततस्त्वापस्ततो भूमिस्ततो ऽभवत्

tasmāhuddhirmanastasmāttataḥ khaṃ pavana stataḥ / tasmāttejastatastvāpastato bhūmistato 'bhavat

हिन्दी अर्थ

एक बार सर्वशास्त्रपारङ्गत, पुराणविद्याकुशल, शान्तचित्त महात्मा सूतजी तीर्थयात्राके प्रसङ्गमें

English

A fabulous period of dine, a day of BradunA (sP {AITM)i in., fi». 160; liSge {AITM) fn. n, p ff; SSD p. a6t).

अध्याय ४

श्लोक 8

अण्डो हिरण्मयो रुद्र तस्यान्तः स्वयमेव हि ।शरीरग्रहणं पूर्वं सृष्ट्यर्थं कुरुते प्रभुः

aṇḍo hiraṇmayo rudra tasyāntaḥ svayameva hi / śarīragrahaṇaṃ pūrvaṃ sṛṣṭyarthaṃ kurute prabhuḥ

हिन्दी अर्थ

स्थित होकर भगवान् विष्णुका ध्यान करने लगे। ऐसे उन क्रान्तदर्शी तपस्वीका दर्शन करके नैमिषारण्यवासी शौनकादि मुनियोंने उनकी पूजा की और स्तुति करते हुए उनसे यह निवेदन

English

Prajapati created cows from ids belly and sides. Horses, elephants, buffaloes, camels, sheep etc. woe created from his feet.

अध्याय ४

श्लोक 9

ब्रह्मा चतुर्मुखो भूत्वा रजोमात्राधिकः सदा ।शरीरग्रहणं कृत्वासृजदेतच्चराचरम्

brahmā caturmukho bhūtvā rajomātrādhikaḥ sadā / śarīragrahaṇaṃ kṛtvāsṛjadetaccarācaram

हिन्दी अर्थ

सकलकरणहीनं सर्वभूतस्थितं तं हरिममलममायं सर्वगं वन्द एकम्॥ नमस्यामि हरिं रुद्रं ब्रह्माणं च गणाधिपम्। देवीं सरस्वतीं चैव मनोवाक्कर्मभिः सदा॥ (१। १-२)

English

From his hair were produced medicinal beibs and fruitbearing plants. The cow, goat, ram, horses, mule, donkey—

अध्याय ४

श्लोक 10

अण्डस्यान्तर्जगत्सर्वं सदेवासुरमानुषम् ।स्रष्टा सृजति चात्मानं विष्णुः पाल्यं च पाति च

aṇḍasyāntarjagatsarvaṃ sadevāsuramānuṣam / sraṣṭā sṛjati cātmānaṃ viṣṇuḥ pālyaṃ ca pāti ca

हिन्दी अर्थ

होते हैं? किस योगके द्वारा उनको प्राप्त किया हुए,जो सिद्धोंमें सर्वश्रेष्ठ हें और जिन्होंने कालके जा सकता है? उनके कितने अवतार हैं ? उनकी प्रभावसे लुप्त हो चुके सांख्यशास्त्रकी शिक्षा दी। वंश-परम्परा कैसी है? वर्णाश्रमादि धर्मोके छठे अवतारमें भगवान् नारायणने महर्षि अत्रिकी प्रवर्तक एवं रक्षक कौन हैं ? है महामते श्रीसूतजी ! पत्नी अनसूयाके गर्भसे ' दत्तात्रेय' के रूपमें अवतीर्ण

English

The brShiruajAs were bom of his mouth. Thtkfatriyas originated from his arms. The v»iyas came out of his thighs and the iudras out of his feet.

अध्याय ४

श्लोक 11

अपसंह्रियते चान्ते संहर्ता च स्वयं हर ।ब्रह्मा भूत्वासृजद्विष्णुर्जगत्पाति हरिः स्वयम्

apasaṃhriyate cānte saṃhartā ca svayaṃ hara / brahmā bhūtvāsṛjadviṣṇurjagatpāti hariḥ svayam

हिन्दी अर्थ

इन सबको और अन्य विषयोंको हमें बतायें होकर राजा अलर्क और प्रह्लद आदिको आन्वीक्षिकी तथा भगवान् नारायणको सभी उत्तम कथाओंका (ब्रह्म) विद्याका उपदेश दिया । सातवें अवतारमें वर्णन करें । श्रीनारायणने इन्द्रादि देवगणोंके साथ यज्ञका अनुष्ठान सूतजी बोले--हे ऋषियो! मैं उस किया और इसी स्वायम्भुव मन्वन्तरमें वे आकूतिके

English

The world of Brahma can be attained by the hfdhmanas, that of Sakra (Indra) by Ksiriyas. The goal of vaiiyas is the world of the Maruts and that of itUra is the world of Gandharvcs.

अध्याय ४

श्लोक 12

रुद्ररूपी च कल्पान्ते जगत्संहरते ऽखिलम् ।ब्रह्मा तु सृष्टिकाले ऽस्मिञ्जमध्यगतां महीम्

rudrarūpī ca kalpānte jagatsaṃharate 'khilam / brahmā tu sṛṣṭikāle 'smiñjamadhyagatāṃ mahīm

हिन्दी अर्थ

गरुडमहापुराणका वर्णन करता हूँ, जो सारभूत है गर्भसे रुचि प्रजापतिके पुत्ररूपमें ' यज्ञदेव' नामसे और भगवान् विष्णुको कथाओंसे परिपूर्ण है। अवतीर्ण हुए। आठवें अवतारमें वे ही भगवान् प्राचीन कालमें इस पुराणको श्रीगरुडजीने कश्यप विष्णु नाभि एवं मेरुदेवीके पुत्ररूपमें “ऋषभदेव' ऋषिको सुनाया था और मैंने इसे व्यासजीसे सुना नामसे प्रादुर्भूत हुए। इस अवतारमें इन्होंने नारियोंके

English

Again those who are steady in the hrahmacarya- VTAta (celibacy) attain brhmaloka} and the householders steadfast in the performance of their ordained duties attain the Pfdjdpaty world.

अध्याय ४

श्लोक 13

दंष्टूयोद्धरति ज्ञात्वा वारहीमास्थितस्तनूम् ।देवादिसर्गान्वक्ष्ये ऽहं संक्षेपाच्छृणु शङ्कर !

daṃṣṭūyoddharati jñātvā vārahīmāsthitastanūm / devādisargānvakṣye 'haṃ saṃkṣepācchṛṇu śaṅkara !

हिन्दी अर्थ

था। है क्रषियो! भगवान् नारायण ही सब देवोंमें उस आदर्श मार्ग (गृहस्थाश्रम)-का निदर्शन किया, श्रेष्ठ देव हैं। वे ही परमात्मा एवं परब्रह्म हैं।जो सभी आश्रमोंद्वारा नमस्कृत है। ऋषियोंकी उन्हींसे इस जगतूकी उत्पत्ति, स्थिति और संहारकी प्रार्थनासे भगवान् श्रीहरिने नवें अवतारमें पार्थिव क्रियाएँ होती हैं । वे जरा-मरणसे रहित हैं। वे शरीर अर्थात् “पृथु'का रूप धारण किया और

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 14

(१)प्रथमो महतः सर्गो विरूपो ब्रह्मणस्तु सः ।(२) नन्मात्राणां द्वितीयस्तु भूतसर्गो हि स स्मृतः

(1)prathamo mahataḥ sargo virūpo brahmaṇastu saḥ / (2) nanmātrāṇāṃ dvitīyastu bhūtasargo hi sa smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

भगवान् वासुदेव अजन्मा होते हुए भी जगतूकी (गोरूपा पृथिवीसे) दुग्धरूपमें (अन्नादिक) रक्षाके लिये सनत्कुमार आदि अनेक रूपोंमेंमहौषधियोंका दोहन किया, जिससे प्रजाओंके अवतार ग्रहण करते हैं । जीवनको रक्षा हुई । दसवें अवतारमें ' मत्स्यावतार' हे ब्रह्मन्! उन भगवान् श्रीहरिने सर्वप्रथम ग्रहणकर इन्होंने चाक्षुष मन्वन्तरके बाद आनेवाले

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 15

(३)वैकारिकस्तृतीयस्तु सर्गस्त्वैन्द्रियकः स्मृतः ।इत्येष प्राकृतः सर्गः सम्भूतो बुद्धिपूर्वकः

(3)vaikārikastṛtīyastu sargastvaindriyakaḥ smṛtaḥ / ityeṣa prākṛtaḥ sargaḥ sambhūto buddhipūrvakaḥ

हिन्दी अर्थ

कौमार-सर्गमें (सनत्कुमारादिके रूपमें) अवतार प्रलयकालमें (निराश्रित) वैवस्वत मनुको पृथ्वीरूपी धारण करके कठोर तथा अखण्ड ब्रह्मचर्यत्रतका नौकामें बैठाकर सुरक्षा प्रदान की । ग्यारहवें अवतारमें पालन किया। दूसरे अवतारमें उन्हीं यज्ञेश्वर देवों और दानवोंने समुद्र-मन्थन किया तो उस श्रीहरिने जगत्की स्थितिके लिये (हिरण्याक्षकेसमय भगवान् नारायणने 'कूर्म'रूप ग्रहण करके

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 16

(४)मुख्यसर्गश्चतुर्थस्तु मुख्या वै स्थावराः स्मृताः ।(५)तिर्यक्स्रोतास्तु यः प्रोक्तस्तिर्यग्योन्यः स उच्यते

(4)mukhyasargaścaturthastu mukhyā vai sthāvarāḥ smṛtāḥ / (5)tiryaksrotāstu yaḥ proktastiryagyonyaḥ sa ucyate

हिन्दी अर्थ

द्वारा) रसातलमें ले जायी गयी पृथिवीका उद्धार मन्दराचल पर्वतको अपनी पीठपर धारण किया। करते हुए “वराह'-शरीरको धारण किया। तीसरे उन्होंने बारहवें अवतारमें ' धन्वन्तरि' तथा तेरहवें ऋषि-सर्गमें देवर्षि (नारद)-के रूपमें अवतरित अवतारमें “मोहिनी "का रूप ग्रहण किया और इसी होकर उन्होंने “सात्वत तन्त्र' (नारदपाझरात्र)-का स्त्रीरूपमें उन्होंने (अपने सौन्दर्यसे) हैत्योंको मुग्ध

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 17

(६) तदूर्ध्वस्तोतसां षष्ठो देवसर्गस्तु स स्मृतः ।(७) ततोर्ऽवाक्स्रोतसां सर्गः सप्तमः स तु मा नुषः

(6) tadūrdhvastotasāṃ ṣaṣṭho devasargastu sa smṛtaḥ / (7) tator'vāksrotasāṃ sargaḥ saptamaḥ sa tu mā nuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

विस्तार किया, जिससे निष्काम कर्मका प्रवर्तन करते हुए देवताओंको अमृतपान कराया। चौदहवें हुआ। चौथे ' नरनारायण '-अवतारमें भगवान् श्रीहरिने अवतारमें भगवान् विष्णुने नृसिंह'का रूप धारणकर धर्मकी रक्षाके लिये कठोर तपस्या की और वे अपने तेज नखाग्रोंसे पराक्रमी हैत्यराज

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 18

(८)अष्टमो ऽनुग्रहः सर्गः सात्त्विकस्तामसस्तु सः ।पञ्चैते वैकृताः सर्गाः प्राकृतास्तु त्रयः स्मृताः

(8)aṣṭamo 'nugrahaḥ sargaḥ sāttvikastāmasastu saḥ / pañcaite vaikṛtāḥ sargāḥ prākṛtāstu trayaḥ smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

अवतारमें भगवान् श्रीहरि कपिल '-नामसे अवतरित चटाई बनानेवाला व्यक्ति तिनकेको चीर डालता है।

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 19

प्राकृतो वैकृतश्चापि (९) कौमारो नवमः स्मृतः ।स्थावरान्ताः सुराद्यास्तु प्रजा रुद्र ! चतुर्विधाः

prākṛto vaikṛtaścāpi (9) kaumāro navamaḥ smṛtaḥ / sthāvarāntāḥ surādyāstu prajā rudra ! caturvidhāḥ

हिन्दी अर्थ

काण्ड गरुडपुराणकी वक्त-श्रोतृ-परम्परा १३

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 20

ब्रह्मणः कुर्वतः सृष्टिं जज्ञिरे मानसाः सुताः ।ततो देवासुरपितॄन्मानुषांश्च चतुष्टयम्

brahmaṇaḥ kurvataḥ sṛṣṭiṃ jajñire mānasāḥ sutāḥ / tato devāsurapitṝnmānuṣāṃśca catuṣṭayam

हिन्दी अर्थ

पंद्रहवें अवतारमें “वामन 'रूप धारणकर वे राजा अवतारमें भगवान् कलियुगको सन्धिके अन्तमें बलिके यज्ञमें गये और देवोंको तीनों लोक प्रदान देवद्रोहियोंको मोहित करनेके लिये कीकट देशमें करनेकी इच्छासे उनसे तीन पग भूमिकी याचना जिनपुत्र 'बुद्ध'के नामसे अवतीर्ण होंगे और इसके की। सोलहवें (परशुराम नामक) अवतारमें पश्चात् कलियुगको आठवीं सन्ध्यामें अधिकांश राजवर्गके

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 21

सिसृक्षुरम्भांस्येतानि स्वमात्मानमयूयुजत् ।व्यक्तात्मनस्तमोमात्रादुद्रिक्तास्तत्प्रजापतेः

sisṛkṣurambhāṃsyetāni svamātmānamayūyujat / vyaktātmanastamomātrādudriktāstatprajāpateḥ

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणद्रोही क्षत्रियोंके अत्याचारोंको देखकर उनको समाप्त होनेपर वे ही श्रीहरि विष्णुयशा नामक क्रोध आ गया और उसी भावावेशमें उन्होंने इक्कीस ब्राह्मणके घरमें “कल्कि' नामसे अवतार ग्रहण करेंगे । बार पृथिवीको क्षत्रियोंसे रहित कर दिया। तदनन्तर है द्विजो! (मैंने यहाँपर भगवान् नारायणके सत्रहवें अवतारमें ये पराशरद्वारा सत्यवतीसे (व्यास- कुछ ही अवतारोंकी कथाका वर्णन किया है । सत्य

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 22

सिसृक्षेर्जघनात्पूर्वमसुरा जज्ञिरे ततः ।उत्ससर्ज ततस्तां तु तमोमात्रात्मिकां तनूम्

sisṛkṣerjaghanātpūrvamasurā jajñire tataḥ / utsasarja tatastāṃ tu tamomātrātmikāṃ tanūm

हिन्दी अर्थ

नामसे) अवतरित हुए और मनुष्योंको अल्पज्ञताको तो यह है कि) सत्त्वगुणके अधिष्ठान भगवान् जानकर इन्होंने वेदरूपी वृक्षको अनेक शाखाओंमें विष्णुके असंख्य अवतार हैं। मनु, वेदवेत्ता तथा विभक्त किये । श्रीहरिने देवताओंके कार्योको करनेकी सृष्टिप्रवर्तक सभी ऋषि उन्हीं विष्णुकी विभूतियाँ इच्छासे राजाके रूपमें ' श्रीराम'-नामसे अद्वारहवाँकही गयी हैं। उन्हीं मनु आदि श्रेष्ठ ऋषियोंसे इस

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 23

तमोमात्रा तनुस्त्यक्ता शङ्कराभूद्विभावरी ।यक्षोपक्षांसि तद्देहे प्रीतिमापुस्ततः सुराः

tamomātrā tanustyaktā śaṅkarābhūdvibhāvarī / yakṣopakṣāṃsi taddehe prītimāpustataḥ surāḥ

हिन्दी अर्थ

अवतार लेकर समुद्रबन्धन आदि अनेक पराक्रमपूर्ण जगत्को सृष्टि आदि होती है, इसीलिये व्रत कार्य किया उन्नीसवें तथा बीसवें अवतारमें श्रीहरिने आदिके द्वारा इनकी पूजा करनी चाहिए। प्राचीन वृष्णिवंशमें कृष्ण” एवं “बलराम ' का रूप धारण कालमें भगवान् वेदव्यासने इसी ' गरुडमहापुराण' को करके पृथ्वीकै भारका हरण किया। इक्कीसवें मुझे सुनाया था। (अध्याय १)

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 24

सत्त्वोद्रिक्तास्तु मुखतः संभूता ब्रह्मणो हर ! ।सत्त्वप्राया तनुस्तेन सन्त्यक्ता साप्यभूद्दिनम्

sattvodriktāstu mukhataḥ saṃbhūtā brahmaṇo hara ! / sattvaprāyā tanustena santyaktā sāpyabhūddinam

हिन्दी अर्थ

गरुडपुराणकी वक्तु-श्रोतृ-परम्परा, भगवान् विष्णुद्वारा अपने स्वरूपका वर्णन तथा गरुडजीको पुराणसंहिताके प्रणयनका वरदान

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 25

ततो हि बलिनो रात्रावसुरा देवता दिवा ।सत्त्वमात्रां तनुं गृह्य पितरश्च ततो ऽभवन्

tato hi balino rātrāvasurā devatā divā / sattvamātrāṃ tanuṃ gṛhya pitaraśca tato 'bhavan

हिन्दी अर्थ

ऋषियोंने पुनः कहा--(हे सूतजी महाराज!) सर्वज्ञके स्वरूपका परज्ञान भी आपको है। आपको महात्मा व्यासजीने विष्णुकथासे आश्रित इस है विप्रवृन्द! मैंने व्यासदेवके सामने जब ऐसी श्रेष्ठ गरुडमहापुराणको किस प्रकार सुनाया था? जिज्ञासा की तो उन्होंने मुझसे जो कुछ कहा था, वह सब आप हमें विधिवत् सुनानेको कृपा करें।वह सब मैं आप सभीसे कह रहा हूँ, सुनें।

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 26

सा चोत्सृष्टाभवत्सन्ध्या दिननक्तान्तरस्थितिः ।रजोमात्रां तनुं गृह्य मनुष्यास्त्वभवंस्ततः

sā cotsṛṣṭābhavatsandhyā dinanaktāntarasthitiḥ / rajomātrāṃ tanuṃ gṛhya manuṣyāstvabhavaṃstataḥ

हिन्दी अर्थ

सूतजी बोले-एक बार मुनियोंके साथ मैं व्यासजीने कहा--हे सूतजी ! ब्रह्माजीने जिस बदरिकाश्रम गया था। वहाँपर परमेश्वरके ध्यानमें प्रकार नारद एवं प्रजापति दक्ष आदिसे तथा मुझसे निमग्न भगवान् व्यासका मुझे दर्शन हुआ। उन्हेंइस पुराणकी कथा कही थी, उसी प्रकार मैं प्रणाम करके मैं वहींपर बैठ गया और उन गरुडमहापुराणको सुनाता हूँ। आप सब (उसे) सुनें।

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 27

सा त्यक्ता चाभवज्ज्योत्स्ना प्राक्सन्ध्या याभिधीयते ।ज्योत्स्ना रात्र्यहनी सन्ध्या शरीराणि तु तस्य वै

sā tyaktā cābhavajjyotsnā prāksandhyā yābhidhīyate / jyotsnā rātryahanī sandhyā śarīrāṇi tu tasya vai

हिन्दी अर्थ

मुनीश्वरसे मैंने पूछा-हे व्यासजी! आप परमेश्वर सूतजीने पूछा--(हे भगवन्!) ब्रह्माजीने देवर्षि भगवान् श्रीहरिके स्वरूप और जगत्को सृष्टि नारद और प्रजापति दक्षसहित आपसे किस प्रकारके आदिको मुझे सुनायें, क्योंकि मैं जानता हूँ कि पवित्र एवं सारतत्त्व बतानेवाले पुराणको कहा था? आप उन्हीं परम पुरुषका ध्यान कर रहे हैं और उन व्यासजीने कहा--एक बार नारद, दक्ष तथा

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 28

रजोमात्रां तनु गृह्य क्षुदभूत्कोप एव च ।क्षुत्तृट्क्षामा अमृग्भक्षा राक्षसा रक्षणाच्च ये

rajomātrāṃ tanu gṛhya kṣudabhūtkopa eva ca / kṣuttṛṭkṣāmā amṛgbhakṣā rākṣasā rakṣaṇācca ye

हिन्दी अर्थ

भृगु आदि ऋषियोंके साथ मैं ब्रह्मलोकमें विद्यमान जिनमें सम्पूर्ण जगतका वास है । प्रलयकालमें श्रीब्रह्माजीके पास गया और उन्हें प्रणामकर मैंने जिनमें सम्पूर्ण जगत् प्रविष्ट हो जाता है, सब प्रार्थना की कि है प्रभो! आप हमें सारतत्त्व प्रकारसे अपनेको उन्हींकी शरणमें करके मैं उन्हींका बतानेको कृपा करें। चिन्तन करता हूँ। जिन सर्वभूतेश्वरमें सत्त्वगुण,

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 29

यक्षाख्या जक्षणाज्ज्ञेयाः सर्पा वै केशसर्पणात् ।जाताः कोपेन भूतास्ते गन्धर्वा जज्ञिरे ततः

yakṣākhyā jakṣaṇājjñeyāḥ sarpā vai keśasarpaṇāt / jātāḥ kopena bhūtāste gandharvā jajñire tataḥ

हिन्दी अर्थ

: ब्रह्माजी बोले--यह गरुडमहापुराण अन्य सभी रजोगुण एवं तमोगुण एक सूत्रमें अवगुम्फित मणियोंके शास्त्रोंका सारभूत है। प्राचीन कालमें भगवान् समान विद्यमान रहते हैं, जो हजार नेत्र, हजार विष्णुने अन्य देवताओंसहित रुद्रदेव (शिव) और चरण, हजार जंघा तथा श्रेष्ठ मुखसे युक्त हैं, जो मुझसे जिस प्रकार इसे कहा था, उसी प्रकार मैं भी सूक्ष्मसे भी सूक्ष्म, स्थूलसे भी स्थूल, गुरुसे गुरुतम

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 30

गायन्तो जज्ञिरे वाचं गन्धर्वाप्सरसश्च ये ।स्वर्गं द्यौर्वक्षसश्चक्रे सुखतो ऽजाः स मुष्टवान्

gāyanto jajñire vācaṃ gandharvāpsarasaśca ye / svargaṃ dyaurvakṣasaścakre sukhato 'jāḥ sa muṣṭavān

हिन्दी अर्थ

इसका वर्णन आपसे कर रहा हूँ। और पूज्योंमें पूज्यतम तथा श्रेष्ठोंमें भी श्रेष्ठतम हैं, “. - 'च्यासजीने कहा-- भगवान् श्रीहरिने अन्य देवोंके जो सत्योंके परम सत्य और सत्यकर्मा कहे गये हैं साथ रुद्रदेबको किस प्रकारसे सारभूत और महान् जो (पुराणोंमें) पुराणपुरुष और द्विजातियोंमें ब्राह्मण अर्थ बतलानेवाले इस गरुडमहापुराणको सुनाया हैं, जो प्रलयकालमें सङ्कर्षण कहलाते हैं; में उन्हीं

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 31

सृष्टवानुदराद्राश्च पार्श्वाभ्यां च प्रजापतिः ।पद्य्भां चैवान्त्यमातङ्गान्महिषोष्ट्राविकांस्तथा

sṛṣṭavānudarādrāśca pārśvābhyāṃ ca prajāpatiḥ / padybhāṃ caivāntyamātaṅgānmahiṣoṣṭrāvikāṃstathā

हिन्दी अर्थ

था? है ब्रह्मन्! उसे आप सुनायें। परम उपास्यकी उपासना करता हूं ब्रह्माजी बोले--एक बार इन्द्रादि देवताओंके जिन सत्-असत्से परे, ऋत (सत्यस्वरूप), साथ मैं कैलासपर्वतपर पहुँच गया। वहाँ मैंने देखा एकाक्षर (प्रणवस्वरूप) परब्रह्मको देव, यक्ष, कि रुद्रदेव शङ्कर परम तत्त्वके ध्यानमें निमग्न हैं । राक्षस और नागगण अर्चना करते हैं, जिनमें सभी

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 32

ओपध्यः फलमूलिन्यो रोमभ्यस्तस्य जज्ञिरे ।गौरजः पुरुषो मेध्यो ह्यश्वाश्वतरगर्दभाः

opadhyaḥ phalamūlinyo romabhyastasya jajñire / gaurajaḥ puruṣo medhyo hyaśvāśvataragardabhāḥ

हिन्दी अर्थ

मैंने प्रणाम करके उनसे पूछा-हे सदाशिव! आपलोक उसी प्रकार स्फुरित होते हैं, जिस प्रकार किस देवका ध्यान कर रहे हैं? मैं तो आपसेजलमें छोटी-छोटी मछलियाँ स्फुरित होती हैं, अतिरिक्त अन्य किसी देवताको नहीं जानता हूँ। इन जिनका मुख अग्नि, मस्तक द्युलोक, नाभि आकाश, सभी देवताओंके साथ उस परम सारतत्त्वको जाननेकी चरणयुग्म पृथ्वी और नेत्र सूर्य तथा चन्द्र हैं; ऐसे

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 33

एतान् ग्राम्यान्पशून्प्राहुरारण्यांश्च निबोध मे ।श्वापदं द्विखुरं हस्तिवानराः पक्षिपञ्चमाः

etān grāmyānpaśūnprāhurāraṇyāṃśca nibodha me / śvāpadaṃ dvikhuraṃ hastivānarāḥ pakṣipañcamāḥ

हिन्दी अर्थ

मेरी इच्छा है। अतः आप उसका वर्णन करें उन (विष्णु)-देवका मैं ध्यान करता हूँ।

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 34

औदकाः पशवः षष्ठाः सप्तमाश्च सरीसृपाः ।पूर्वादिभ्यो मुखेभ्यस्तु ऋग्वेदाद्याः प्रजज्ञिरे

audakāḥ paśavaḥ ṣaṣṭhāḥ saptamāśca sarīsṛpāḥ / pūrvādibhyo mukhebhyastu ṛgvedādyāḥ prajajñire

हिन्दी अर्थ

- श्रीरुद्र्जीने ब्रह्माजीसे कहा- मैं तो जिनके उदरमें स्वर्ग, मर्त्यं एवं पाताल ये सर्वफलदायक, सर्वव्यापी, सर्वरूप, सभी प्राणियोंके तीनों लोक विद्यमान हैं। समस्त दिशाएँ जिनकी हृदयमें अवस्थित परमात्मा तथा सर्वेश्वर उन भुजाएँ हैं, पवन जिनका उच्छ्वास है, मेघमालाओंका भगवान् विष्णुका ध्यान करता हूँ। है पितामह ! उन्हीं समूह जिनका केश-पुझ्ज है, नदियाँ ही जिनके

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 35

आस्याद्वै ब्राह्मणा जाता बाहुभ्यां क्षत्त्रियाः स्मृताः ।ऊरुभ्यां तु विशः सृष्टाः शूद्रः पद्य्भाम जायत

āsyādvai brāhmaṇā jātā bāhubhyāṃ kṣattriyāḥ smṛtāḥ / ūrubhyāṃ tu viśaḥ sṛṣṭāḥ śūdraḥ padybhāma jāyata

हिन्दी अर्थ

विष्णुकी आराधना करनेके लिये मैं शरीरमें भस्म सभी अङ्गोंकी सन्धियाँ हैं और चारों समुद्र तथा सिरपर जटाजूट धारण करके व्रताचरणमेंजिनकी कुक्षि हैं, जो कालातीत हैं, यज्ञ एवं सत्- निरत रहता हूँ। जो सर्वव्यापक, जयशील, अद्वैत, असतूसे परे हैं, जो जगत्के आदि कारण तथा निराकार एवं पद्मनाभ हैं, जो निर्मल (शुद्ध) तथा स्वयं अनादि हैं, ऐसे उन नारायणका मैं चिन्तन

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 36

ब्रह्मलोको ब्राह्मणानां शाक्रः क्षत्त्रियजन्मनाम् ।मारुतं च विशां स्थानं गान्धर्वं शूद्रजन्मनाम्

brahmaloko brāhmaṇānāṃ śākraḥ kṣattriyajanmanām / mārutaṃ ca viśāṃ sthānaṃ gāndharvaṃ śūdrajanmanām

हिन्दी अर्थ

पवित्र हंसस्वरूप हैं, मैं उन्हीं परमपद परमेश्वर करता हूँ। भगवान् श्रीहरिका ध्यान करता हूँ। इस सारतत्त्व जिनके मनसे चन्द्रमा, नेत्रोंसे सूर्य और मुखसे (श्रीविष्णु) -के विषयमें उन्हींके पास चलकर हम अग्नि उत्पन्न है, जिनके चरणोंसे पृथिवीकी, सभीको पूछना चाहिए। : कानोंसे दिशाओंकी और मस्तकसे स्वर्गकी सृष्टि

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 37

ब्रह्मचारिव्रतस्थानां ब्रह्मलोकः प्रजायते ।प्राजापत्यं गृहस्थानां यथाविहितकारिणाम्

brahmacārivratasthānāṃ brahmalokaḥ prajāyate / prājāpatyaṃ gṛhasthānāṃ yathāvihitakāriṇām

हिन्दी अर्थ

काण्ड गरुडपुराणकी वक्तृ-श्रोतृ-परम्परा १५

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

अध्याय ४

श्लोक 38

स्थानं सप्तऋषीणां च तथैव वनवासिनाम् ।यतीनामक्षयं स्थानं यदृच्छागामिनां सदा

sthānaṃ saptaṛṣīṇāṃ ca tathaiva vanavāsinām / yatīnāmakṣayaṃ sthānaṃ yadṛcchāgāmināṃ sadā

हिन्दी अर्थ

हुई है, जिन परमेश्वरसे सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, और अन्य देवोंके साथ आप उसका श्रवण करें-- मन्वन्तर तथा वंशानुचरित प्रवर्तित हुआ है; उन मैं ही सभी देवोंका देव हूँ। मैं ही सभी देवकी मैं आराधना करता हूँ । परम सारतत्त्वका लोकोंका स्वामी हूँ । देवोंका मैं ही ध्येय, पूज्य ज्ञान प्राप्त करनेके लिये हम सभीको उन्हींकी और स्तुतियोंसे स्तुति करने योग्य हूँ । है रुद्र! मैं

English

The fo rested well ers (vinaprasthas) attain the world of the seven //u. The sannydsins go at will to the imperishable region.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 4
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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