Isha Upanishad
ईशावास्योपनिषद्
(Īśāvāsyopaniṣad)One of the shortest and most profound Upanishads. It discusses the nature of the Self (Atman) and the Absolute (Brahman) in just 18 verses.
मार्गदर्शित अध्ययन
Isha Upanishad
ईशावास्योपनिषद्
ईशावास्य उपनिषद् सिखाता है कि यह संपूर्ण जगत ईश्वर से व्याप्त है। इसका मुख्य संदेश है कि संसार में रहते हुए कर्तव्य करें, पर भीतर से आसक्त न हों।
1
अध्याय
18
श्लोक
श्लोक पाठ पुस्तकालय में
upanishad
स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण
धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)
६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्थाअपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Isha Upanishad
ईशावास्योपनिषद्
Kanva Recension, Shukla Yajurveda Samhita Ch. 40
Shankaracharya Dashopanishad Bhashya Edition, Motilal Banarsidass.
Göttingen Register of Electronic Texts in Indian Languages (GRETIL)
डिजिटल पुरालेख देखें18 canonical mantras concluding the Shukla Yajurveda Samhita (Madhyandina recension counts 17 verses).
Shankaracharya Dashopanishad Bhashya Edition, Motilal Banarsidass.
18 canonical mantras concluding the Shukla Yajurveda Samhita (Madhyandina recension counts 17 verses).