Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
24
अध्याय 24 / 90

Adhyaya 24

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अध्याय २४

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे मदालसोपाख्याने कुवलयाश्वपातालगमनं नाम त्रयोविंसो ऽध्यायः चतुर्विशो ऽध्यायः जड उवाच कृताहारं महात्मनामधिपं पवनाशिनाम् ।उपासाञ्चक्रिरे पुत्रौ भूपालतनयस्तथा

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe madālasopākhyāne kuvalayāśvapātālagamanaṃ nāma trayoviṃso 'dhyāyaḥ caturviśo 'dhyāyaḥ jaḍa uvāca kṛtāhāraṃ mahātmanāmadhipaṃ pavanāśinām / upāsāñcakrire putrau bhūpālatanayastathā

हिन्दी अर्थ

पुत्रोंके नामपर सात खण्ड बने, उनके नाम इस प्रकार हैं--उद्धिद, वैष्णव, सुरथ, लम्बन, धृतिमान्ू, प्रभाकर तथा कापिल। शाल्मलद्दीपके स्वामी वपुष्मानके भी सात पुत्र हुए-- शत, हरित, जीमूत, रोहित, वैद्युत, मानस और केतुमान्। इनके नामपर भी पूर्ववत् उक्त द्वीपके सात खण्ड बनाये गये। प्लक्षद्वीपके स्वामी मेधातिथिके भी सात ही पुत्र हुए और

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 2

कथाभिरनुरूपाभिः स महात्मा भुजङ्गमः ।प्रीतिं सञ्जनयामास पुत्रसख्युरुवाच च

kathābhiranurūpābhiḥ sa mahātmā bhujaṅgamaḥ / prītiṃ sañjanayāmāsa putrasakhyuruvāca ca

हिन्दी अर्थ

उनके नामसे प्लक्षद्वीपके भी सात खण्ड बन गये। उन खण्डोंके नाम इस प्रकार हैं-- शाकभव, शिशिर, सुखोदय, आनन्द, शिव, क्षेमक तथा ध्रुव। प्लक्षद्वीपसे लेकर शाकद्वीपतकके पाँच द्वीपोंमें वर्णाश्रम-धर्म विभागपूर्वक स्थित है। वहाँ धर्मका सदा

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 3

तव भद्र ! सुखं ब्रूहि गेहमभ्यागतस्य यत् ।कर्तव्यमुत्सृजाशङ्कां पितरीव सुतो मयि

tava bhadra ! sukhaṃ brūhi gehamabhyāgatasya yat / kartavyamutsṛjāśaṅkāṃ pitarīva suto mayi

हिन्दी अर्थ

स्वाभाविक रूपसे पालन होता है। कभी किसी जीवकी हिंसा नहीं की जाती। उन पाँचों द्वीपों और उनके वर्षोमें सब धर्म सामान्य रूपसे सर्वत्र प्रचलित हैं।

English

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अध्याय २४

श्लोक 4

रजतं वा सुवर्णं वा वस्त्रं वाहनमासनम् ।यद्वाभिमतमत्यर्थं दुर्लभं तद्वृणुष्व माम्

rajataṃ vā suvarṇaṃ vā vastraṃ vāhanamāsanam / yadvābhimatamatyarthaṃ durlabhaṃ tadvṛṇuṣva mām

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मन! राजा प्रियव्रतने आग्नीध्रको जम्बूद्वीपका राज्य दिया था। उनके नौ पुत्र हुए, जो प्रजापतिके समान शक्तिशाली थे। उनमें सबसे बड़ेका नाम नाभि था, उससे छोटा किम्पुरुष था। तीसरेका नाम हरि, चौथेका इलावृत, पाँचवेंका रम्य, छठेका हिरण्यक, सातवेंका कुरु, आठवेंका भद्राश्व और नवेंका केतुमाल था। इन पुत्रोंक नामपर ही जम्बूद्वीपके नौ खण्ड

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 5

कुवलयाश्व उवाच तव प्रसादाद्भगवन् ! सुवर्णादि गृहे मम ।पितुरस्ति ममाद्यापिन किञ्चित् कार्यमीदृशम्

kuvalayāśva uvāca tava prasādādbhagavan ! suvarṇādi gṛhe mama / piturasti mamādyāpina kiñcit kāryamīdṛśam

हिन्दी अर्थ

हुए। हिमवर्षको छोड़कर शेष जो किम्पुरुष आदि वर्ष हैं, उनमें सुखकी अधिकता है और बिना यत्न किये स्वभावसे ही वहाँ सब कामनाओंकी सिद्धि होती है। उनमें किसी प्रकारके विपर्यय (असुख, अकाल मृत्यु आदि) तथा जरा-मृत्युका कोई भय नहीं है और न वहाँ धर्म- अधर्म अथवा उत्तम, मध्यम, अधम आदिका ही कोई भेद है। उन आठ वर्षो्में न चार

English

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अध्याय २४

श्लोक 6

ताते वर्षसहस्राणि शासतीमां वसुन्धराम् ।तथैव त्वयि पातालं न मे याञ्चोन्मुकं मनः

tāte varṣasahasrāṇi śāsatīmāṃ vasundharām / tathaiva tvayi pātālaṃ na me yāñconmukaṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

युगोंकी व्यवस्था है, न छः ऋतुओंकी। वहाँ किसी विशेष ऋतुके कोई चिह्न नहीं दीख पड़ते। आग्नीध्रकुमार नाभिके पुत्र ऋषभ और ऋषभके भरत हुए, जो अपने सौ भाइयोंमें सबसे बड़े थे। ऋषभ अपने पुत्रको राज्य दे महाप्रव्रज्या (संन्यास) ग्रहण करके तपस्या करने लगे। वे महर्षि पुलहके आश्रममें ही रहते थे। उन्होंने हिम नामक वर्षको, जो सबसे

English

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अध्याय २४

श्लोक 7

ते स्वर्ग्याश्च सुपुण्याश्च येषां पितरि जीवति ।तृणकोटिसमं वित्तं तारुण्याद्वित्तकोटिषु

te svargyāśca supuṇyāśca yeṣāṃ pitari jīvati / tṛṇakoṭisamaṃ vittaṃ tāruṇyādvittakoṭiṣu

हिन्दी अर्थ

दक्षिण है, अपने पुत्र भरतको दिया था; इसलिये महात्मा भरतके नामपर इसका नाम

English

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अध्याय २४

श्लोक 8

मित्राणि तुल्यशिष्टानि तद्वद्देहमनामयम् ।जनिता ध्रियते वित्तं यौवनं किन्नु नास्ति मे

mitrāṇi tulyaśiṣṭāni tadvaddehamanāmayam / janitā dhriyate vittaṃ yauvanaṃ kinnu nāsti me

हिन्दी अर्थ

भरतके पुत्र सुमति हुए, जो बड़े धर्मात्मा थे। भरतने उनको राज्य देकर वनका आश्रय लिया। राजा प्रियव्रतके पुत्रों तथा उनके भी पुत्र-पौत्रोंने स्वायम्भुव मन्वन्तरमें सात द्वीपोंवाली पृथ्वीका उपभोग किया। द्विजश्रेष्ठ! यह मैंने तुम्हें स्वायम्भुव मन्वन्तरकी सृष्टि

English

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अध्याय २४

श्लोक 9

असत्यर्थे नृणां याञ्चाप्रवणं जायते मनः ।सत्यशेषे कथं याञ्चां मम जिह्वा करिष्यति

asatyarthe nṛṇāṃ yāñcāpravaṇaṃ jāyate manaḥ / satyaśeṣe kathaṃ yāñcāṃ mama jihvā kariṣyati

हिन्दी अर्थ

जम्बूद्वीप और उसके पर्वतोंका वर्णन

English

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अध्याय २४

श्लोक 10

यैर्न चिन्त्यं धनं किञ्चिन्मम गेहे ऽस्ति नास्ति वा ।पितृबाहुतरुच्छायां संश्रिताः सुखिनो हि ते

yairna cintyaṃ dhanaṃ kiñcinmama gehe 'sti nāsti vā / pitṛbāhutarucchāyāṃ saṃśritāḥ sukhino hi te

हिन्दी अर्थ

क्रौष्ठकिने पूछा--ब्रह्मन्! द्वीप, समुद्र, पर्वत और वर्ष कितने हैं तथा उनमें कौन- कौन-सी नदियाँ हैं? महाभूत (पृथ्वी) और लोकालोकका प्रमाण क्या है? चन्द्रमा और सूर्यका व्यास, परिमाण तथा गति कितनी है? महामुने! ये सब बातें मुझे विस्तारपूर्वक

English

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अध्याय २४

श्लोक 11

ये तु बाल्यात् प्रभृत्येव विना पित्रा कुटुम्बिनः ।ते सुखास्वादविभ्रंशान्मन्ये धात्रैव वञ्चिताः

ye tu bālyāt prabhṛtyeva vinā pitrā kuṭumbinaḥ / te sukhāsvādavibhraṃśānmanye dhātraiva vañcitāḥ

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी बोले-ब्रह्मन! समूची पृथ्वीका विस्तार पचास करोड़ योजन है। अब उसके सब स्थानोंका वर्णन करता हूँ, सुनो। महाभाग! जम्बूद्वीपसे लेकर पुष्करद्वीपतक जितने द्वीपोंकी मैंने चर्चा की है, उन सबका विस्तार इस प्रकार है। क्रमश: एक द्वीपसे दूसरा द्वीप दुगुना बड़ा है; इसी क्रमसे जम्बूद्वीप, प्लक्ष, शाल्मल, कुश, क्रौज्च, शाक और

English

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अध्याय २४

श्लोक 12

तद्वयं त्वत्प्रसादेन धनरत्नादिसञ्चयान् ।पितृमुक्तान् प्रयच्छामः कामतो नित्यमर्थिनाम्

tadvayaṃ tvatprasādena dhanaratnādisañcayān / pitṛmuktān prayacchāmaḥ kāmato nityamarthinām

हिन्दी अर्थ

पुष्करद्वीप स्थित हैं। ये क्रमश: लवण, इक्षु, सुरा, घृत, दही, दूध और जलके समुद्रोंसे घिरे हुए हैं। ये समुद्र भी एककी अपेक्षा दूसरे दुगुने बड़े हैं।

English

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अध्याय २४

श्लोक 13

तत् सर्वमिह संप्राप्तं यदङ्घ्रियुगलं तव ।मच्चूडामणिना स्पृष्टं यच्चाङ्गस्पर्शमाप्तवान्

tat sarvamiha saṃprāptaṃ yadaṅghriyugalaṃ tava / maccūḍāmaṇinā spṛṣṭaṃ yaccāṅgasparśamāptavān

हिन्दी अर्थ

अब मैं जम्बूद्वीपकी स्थितिका वर्णन करता हूँ। इसकी लंबाई-चौड़ाई एक लाख योजनकी है। इसमें हिमवान्, हेमकूट, निषध, मेरु, नील, श्वेत तथा शृज्गी--ये सात वर्षपर्वत हैं। इनमें मेरु तो सबके बीचमें है, उसके सिवा जो नील और निषध नामक दो और मध्यवर्ती पर्वत हैं, वे एक-एक लाख योजनतक फैले हुए हैं। निषधसे दक्षिणमें तथा नीलसे उत्तरमें

English

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अध्याय २४

श्लोक 14

जड उवाच इत्येवं प्रसृतं वाक्यमुक्तः पन्नगसत्तमः ।प्राह राजसुतं प्रीत्या पुत्रयोरुपकारिणम्

jaḍa uvāca ityevaṃ prasṛtaṃ vākyamuktaḥ pannagasattamaḥ / prāha rājasutaṃ prītyā putrayorupakāriṇam

हिन्दी अर्थ

जो दो-दो पर्वत हैं, उनका विस्तार क्रमश: दस-दस हजार योजन कम है। अर्थात् हेमकूट

English

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अध्याय २४

श्लोक 15

नाग उवाच यदि रत्नसुवर्णादि मत्तो ऽवाप्तुं न ते मनः ।यदन्यन्मनसः प्रीत्यै तद्ब्रूहि त्वं ददाम्यहम्

nāga uvāca yadi ratnasuvarṇādi matto 'vāptuṃ na te manaḥ / yadanyanmanasaḥ prītyai tadbrūhi tvaṃ dadāmyaham

हिन्दी अर्थ

योजनतक फैले हुए हैं। वे सभी दो-दो हजार योजन ऊँचे और उतने ही चौड़े हैं। इस जम्बूद्वीपके छः वर्षपर्वत समुद्रके भीतरतक प्रवेश किये हुए हैं। यह पृथ्वी दक्षिण और उत्तरमें नीची और बीचमें ऊँची तथा चौड़ी है। जम्बूद्वीपके तीन खण्ड दक्षिणमें हैं और तीन खण्ड उत्तरमें। इनके मध्यभागमें इलावृत वर्ष है, जो आधे चन्द्रमाके आकारमें स्थित है।

English

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अध्याय २४

श्लोक 16

कुवलयाश्व उवाच भगवंस्त्वत्प्रसादेन प्रार्थितस्य गृहे मम ।सर्वमस्ति विशेषेण सम्प्राप्तं तव दर्शनात्

kuvalayāśva uvāca bhagavaṃstvatprasādena prārthitasya gṛhe mama / sarvamasti viśeṣeṇa samprāptaṃ tava darśanāt

हिन्दी अर्थ

उसके पूर्वमें भद्राश्व और पश्चिममें केतुमाल वर्ष है। इलावृत वर्षके मध्यभागमें सुवर्णमय मेरुपर्वत है, जिसकी ऊँचाई चौरासी हजार योजन है। वह सोलह हजार योजन नीचेतक पृथ्वीमें समाया हुआ है तथा उसकी चौड़ाई भी सोलह हजार योजन ही है। वह शराव (पुरवे))की आकृतिका होनेके कारण चोटीकी ओर बत्तीस हजार योजन चौड़ा है।

English

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अध्याय २४

श्लोक 17

कृतकृत्यो ऽस्मि चैतेन सफलं जीवितञ्च मे ।यदङ्गसंश्लेषमितस्तव देवस्य मानुषः

kṛtakṛtyo 'smi caitena saphalaṃ jīvitañca me / yadaṅgasaṃśleṣamitastava devasya mānuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

मेरुपर्वतका रंग पूर्वकी ओर सफेद, दक्षिणकी ओर पीला, पश्चिमकी ओर काला और उत्तरकी ओर लाल है। यह रंग क्रमश: ब्राह्मण, वैश्य, शूद्र तथा क्षत्रियका है। मेरुपर्वतके ऊपर क्रमश: पूर्व आदि दिशाओंमें इन्द्रादि आठ लोकपालोंके निवासस्थान हैं। इनके बीचमें ब्रहद्माजीकी सभा है। वह सभामण्डप चौदह हजार योजन ऊँचा है। उसके नीचे विष्कम्भ

English

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अध्याय २४

श्लोक 18

ममोत्तमाङ्गे त्वत्पादरजसा यदिहास्पदम् ।कृतं तेनैव न प्राप्तं किं मया पन्नगेश्वर

mamottamāṅge tvatpādarajasā yadihāspadam / kṛtaṃ tenaiva na prāptaṃ kiṃ mayā pannageśvara

हिन्दी अर्थ

(आधार) रूपसे चार पर्वत हैं, जो दस-दस हजार योजन ऊँचे हैं। वे क्रमश: पूर्व आदि दिशाओंमें स्थित हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं--मन्दर, गन्धमादन, विपुल और सुपार्श्च। इन चारों पर्वतोंके ऊपर चार बड़े-बड़े वृक्ष हैं, जो ध्वजाकी भाँति उनकी शोभा बढ़ाते हैं।

English

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अध्याय २४

श्लोक 19

यदि त्ववश्यं दातव्यो वरो मम यथेप्सितः ।तत्पुण्यकर्मसंस्कारो हृदयान्मा व्यपैतु मे

yadi tvavaśyaṃ dātavyo varo mama yathepsitaḥ / tatpuṇyakarmasaṃskāro hṛdayānmā vyapaitu me

हिन्दी अर्थ

मन्दराचलपर कदम्ब, गन्धमादन पर्वतपर जम्बू, विपुलपर पीपल तथा सुपाश्वके ऊपर बरगदका महान वृक्ष है। इन पर्वतोंका विस्तार ग्यारह-ग्यारह सौ योजनका है। मेरुके पूर्वभागमें जठर और देवकूट पर्वत हैं, जो नील और निषध पर्वततक फैले हुए हैं। निषध और पारियात्र--ये दो पर्वत मेरुके पश्चिम भागमें स्थित हैं। पूर्ववाले पर्वतोंकी भाँति ये भी

English

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अध्याय २४

श्लोक 20

सुवर्णमणिरत्नादि वाहनं गृहमासनम् ।स्त्रियो ऽन्नपानं पुत्राश्च चारुमाल्यानुलेपन्

suvarṇamaṇiratnādi vāhanaṃ gṛhamāsanam / striyo 'nnapānaṃ putrāśca cārumālyānulepan

हिन्दी अर्थ

नीलगिरितक फैले हुए हैं। हिमवान् और कैलासपर्वत मेरुके दक्षिण भागमें स्थित हैं। ये पूर्वसे पश्चिमकी ओर फैलते हुए समुद्रके भीतरतक चले गये हैं। इसी प्रकार उसके उत्तर भागमें शूड्रवान् और जारुधि नामक पर्वत हैं। ये भी दक्षिण भागवाले पर्वतोंकी भाँति समुद्रके भीतरतक फैले हुए हैं। द्विजश्रेष्ठ! ये मर्यादा-पर्वत कहलाते हैं।

English

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अध्याय २४

श्लोक 21

एते च विविधाः कामा गीतवाद्यादिकञ्च यत् ।सर्वमेतन्मम मतं फलं पुण्यवनस्पतेः

ete ca vividhāḥ kāmā gītavādyādikañca yat / sarvametanmama mataṃ phalaṃ puṇyavanaspateḥ

हिन्दी अर्थ

हिमवान् और हेमकूट आदि पर्वतोंका पारस्परिक अन्तर नौ-नौ हजार योजन है। ये इलावृतवर्षके मध्यभागमें मेरुकी चारों दिशाओंमें स्थित हैं। गन्धमादन पर्वतपर जो जामुनके फल गिरते हैं, वे हाथीके शरीरके बराबर होते हैं। उनमेंसे जो रस निकलता है, उससे जम्बू नामकी नदी प्रकट होती है, जहाँसे जाम्बूनद नामक सुवर्ण उत्पन्न होता है। वह

English

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अध्याय २४

श्लोक 22

तस्मान्नरेण तन्मुलः कार्यो यत्नः कृतात्मना ।कर्तव्यः पुण्यसक्तानां न किञ्चिद्भुवि दुर्लभम्

tasmānnareṇa tanmulaḥ kāryo yatnaḥ kṛtātmanā / kartavyaḥ puṇyasaktānāṃ na kiñcidbhuvi durlabham

हिन्दी अर्थ

नदी जम्बूवृक्षके मूलभूत मेरुपर्वतकी परिक्रमा करती हुई बहती है और वहाँके निवासी उसीका जल पीते हैं। भद्राश्ववर्षमें भगवान् विष्णु हयग्रीवरूपसे, भारतवर्षमें कच्छपरूपसे, केतुमालवर्षमें वाराहरूपसे तथा उत्तरकुरुमें मत्स्यरूपसे विराजते हैं।

English

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अध्याय २४

श्लोक 23

अश्वतर उवाच एवं भविष्यति प्राज्ञ ! तव धर्माश्रिता मतिः ।सत्यञ्चैतत् फलं सर्वं धर्मस्योक्तं यथा त्वया

aśvatara uvāca evaṃ bhaviṣyati prājña ! tava dharmāśritā matiḥ / satyañcaitat phalaṃ sarvaṃ dharmasyoktaṃ yathā tvayā

हिन्दी अर्थ

द्विजश्रेष्ठ! मन्दर आदि चार पर्वतोंपर जो चार वन और सरोवर हैं, उनके नाम सुनो। मेरुसे पूर्वके पर्वतपर चैत्ररथ नामक वन है, दक्षिण शैलपर नन्दन वन है, पश्चिमके पर्वतपर वैभ्राज वन है और उत्तरवाले पर्वतपर सावित्र नामक वन है। पूर्वमें अरुणोद, दक्षिणमें मानस, पश्चिममें शीतोद और उत्तरमें महाभद्रनामक सरोवर है। शीतार्त, चक्रमुछ्ज, कुलीर,

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 24

तथाप्यवश्यं मद्गेहमागतेन त्वयाधुना ।ग्राह्यं यन्मानुषे लोके दुष्प्राप्तं भवतो मतम्

tathāpyavaśyaṃ madgehamāgatena tvayādhunā / grāhyaṃ yanmānuṣe loke duṣprāptaṃ bhavato matam

हिन्दी अर्थ

तथा देवशैल--ये महान् पर्वत मन्दराचलसे पूर्व दिशामें स्थित हैं। त्रिकूट, शिखराद्रि,

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 25

जड उवाच तस्यैतद्वचनं श्रुत्वा स तदा नृपनन्दनः ।मुकावलोकनञ्चक्रे पन्नगेश्वरपुत्रयोः

jaḍa uvāca tasyaitadvacanaṃ śrutvā sa tadā nṛpanandanaḥ / mukāvalokanañcakre pannageśvaraputrayoḥ

हिन्दी अर्थ

एकशुड़र, महाशैल, राजशैल, पिपाठक, पञ्चशैल, कैलास और हिमालय--ये मेरुके दक्षिणभागमें स्थित हैं। सुरक्ष, शिशिराक्ष, वैदूर्य, पिड़ल, पिउजर, महाभद्र, सुरस, कपिल, मधु, अज्जन, कुक्कुट, कृष्ण, पाण्डुर, सहस्रशिखर, पारियात्र और शुड्भवान्ू--ये मेरुके पश्चिम विष्कम्भ विपुल गिरिसे पश्चिममें स्थित हैं। शड्खकूट, वृषभ, हंसनाभ, कपिलेन्द्र,

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 26

ततस्तौ प्रणिपत्योभौ राजपुत्रस्य यन्मतम् ।तत् पितुः सकलं वीरौ कथयामासतुः स्फुटम्

tatastau praṇipatyobhau rājaputrasya yanmatam / tat pituḥ sakalaṃ vīrau kathayāmāsatuḥ sphuṭam

हिन्दी अर्थ

--ये सभी पर्वत मेरुके उत्तरभागमें स्थित हैं। इन पर्वतोंकी कन्दराएँ बड़ी मनोहर हैं। हरे- भरे वन और स्वच्छ जलवाले सरोवर उनकी शोभा बढ़ाते हैं। वहाँ पुण्यात्मा मनुष्योंका जन्म होता है। द्विजश्रेष्ठ! ये स्थान इस पृथ्वीके स्वर्ग हैं। इनमें स्वर्गसे भी अधिक गुण हैं। यहाँ नूतन पाप-पुण्यका उपार्जन नहीं होता। ये देवताओंके लिये भी पुण्यभोगके ही स्थान

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 27

पुत्रापूचतुः ततो ऽस्य पत्नी दयिता श्रुत्वेमं विनिपातितम् ।अत्यजद्दयितान् प्राणान् विप्रलब्धा दुरात्मना

putrāpūcatuḥ tato 'sya patnī dayitā śrutvemaṃ vinipātitam / atyajaddayitān prāṇān vipralabdhā durātmanā

हिन्दी अर्थ

हैं। इन पर्वतोंपर विद्याधर, यक्ष, किन्नर, नाग, राक्षस, देवता तथा गन्धर्वोंके सुन्दर एवं विशाल वासस्थान हैं। वे परम पवित्र तथा देवताओंके मनोहर उपवनोंसे सुशोभित हैं।

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 28

केनापि कृतवैरेण दानवेन कुबुद्धिना ।गन्धर्वराजस्य सुता नाम्ना ख्याता मदालसा

kenāpi kṛtavaireṇa dānavena kubuddhinā / gandharvarājasya sutā nāmnā khyātā madālasā

हिन्दी अर्थ

वहाँके सरोवर भी बड़े सुन्दर हैं। वहाँ सब ऋतुओंमें सुख देनेवाली वायु चलती है। इन पर्वतोंपर मनुष्योंमें कहीं वैमनस्य नहीं होता।

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 29

कुतज्ञो ऽयं ततस्तात ! प्रतिज्ञां कृतवानिमाम् ।नान्या भार्या भवित्रीति वर्जयित्वा मदालसाम्

kutajño 'yaṃ tatastāta ! pratijñāṃ kṛtavānimām / nānyā bhāryā bhavitrīti varjayitvā madālasām

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार मैंने चार पत्रोंसे सुशोभित पार्थिव कमलका वर्णन किया है। भद्राश्व और भारत आदि वर्ष चारों दिशाओंमें इस कमलके पत्र हैं। मेरुके दक्षिणभागमें जिस भारत नामक वर्षकी चर्चा की गयी है, वही कर्मभूमि है। अन्य स्थानोंमें पाप-पुण्यकी प्राप्ति नहीं होती। अतः भारतवर्षको ही सबसे प्रधान समझना चाहिए। क्योंकि वहाँ सब कुछ प्रतिष्ठित

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 30

द्रष्टुं तां चारुसर्वाङ्गीमयं वीर ! ऋतध्वजः ।तात ! वाञ्छति यद्येतत् क्रियते तत् कृतं भवेत्

draṣṭuṃ tāṃ cārusarvāṅgīmayaṃ vīra ! ṛtadhvajaḥ / tāta ! vāñchati yadyetat kriyate tat kṛtaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

है। भारतवर्षसे मनुष्य स्वर्गलोक, मोक्ष, मनुष्यलोक, नरक, तिर्यग्योनि अथवा और कोई गति--जो चाहे प्राप्त कर सकता है।

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 31

अश्वतर उवाच भूतैर्वियोगिनो योगस्तादृशैरेव तादृशः ।कथमेतद्विना स्वप्नं मायां वा शम्बरोदिताम्

aśvatara uvāca bhūtairviyogino yogastādṛśaireva tādṛśaḥ / kathametadvinā svapnaṃ māyāṃ vā śambaroditām

हिन्दी अर्थ

श्रीगड़ाजीकी उत्पत्ति, किम्पुरुष आदि वर्षोकी विशेषता तथा भारतवर्षके विभाग, नदी, पर्वत और जनपदोंका

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 32

जड उवाच प्रणिपत्य भुजङ्गेशं पुत्रः शत्रुजितस्ततः ।प्रत्युवाच महात्मानं प्रेमलज्जासमन्वितः

jaḍa uvāca praṇipatya bhujaṅgeśaṃ putraḥ śatrujitastataḥ / pratyuvāca mahātmānaṃ premalajjāsamanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--द्विजश्रेष्ठ!! विश्वयोनि भगवान् नारायणका जो ध्रुवाधार- नामक पद है, उसीसे त्रिपथगामिनी भगवती गड़्का प्रादुर्भाव हुआ है। वहाँसे चलकर वे सुधाकी उत्पत्तिके स्थान और जलके आधारभूत चन्द्रमण्डलमें प्रविष्ट हुईं और सूर्यकी किरणोंके सम्पर्कसे अत्यन्त पवित्र हो मेरुपर्वतके शिखरपर गिरीं। वहाँ उनकी चार धाराएँ

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 33

मायामयीमप्यधुना मम तात ! मदालसाम् ।यदि दर्शयते मन्ये परं कृतमनुग्रहम्

māyāmayīmapyadhunā mama tāta ! madālasām / yadi darśayate manye paraṃ kṛtamanugraham

हिन्दी अर्थ

हो गयीं। मेरुके शिखरों और तटोंसे नीचे गिरती-बहती गड़ाका जल चारों ओर बिखर गया और आधार न होनेके कारण नीचे गिरने लगा। इस प्रकार वह जल मन्दर आदि चारों पर्वतोंपर बराबर-बराबर बँट गया। अपने वेगसे बड़े-बड़े पर्वतोंको विदीर्ण करती हुई गड़ाकी जो धारा पूर्व दिशाकी ओर गयी, वह सीताके नामसे विख्यात हुई। सीता चैत्ररथ

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 34

अश्वतर उवाच तस्मात् पश्येह वत्स ! त्वं मायाञ्चेद् द्रष्टुमिच्छसि ।अनुग्राह्यो भवान् गेहं बालो ऽप्यभ्यागतो गुरुः

aśvatara uvāca tasmāt paśyeha vatsa ! tvaṃ māyāñced draṣṭumicchasi / anugrāhyo bhavān gehaṃ bālo 'pyabhyāgato guruḥ

हिन्दी अर्थ

नामक वनको जलसे आप्लावित करती हुई वरुणोद सरोवरमें गयी और वहाँसे शीतान्त पर्वत तथा अन्य पहाड़ोंको लाँघती हुई पृथ्वीपर पहुँची। वहाँसे भद्राश्ववर्षमें होती हुई समुद्रमें मिल गयी। इसी प्रकार मेरुके दक्षिण गन्धमादनपर्वतपर जो गड़ाकी दूसरी धारा गिरी, वह अलकनन्दाके नामसे विख्यात हुई। अलकनन्दा मेरुकी घाटियोंपर फैले हुए नन्‍्दन

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 35

जड उवाच आनयामास नागेन्द्रो गृहगुप्तां मदालसाम् ।तेषां संमोहनार्थाय ज्जल्प च ततः स्फुटम्

jaḍa uvāca ānayāmāsa nāgendro gṛhaguptāṃ madālasām / teṣāṃ saṃmohanārthāya jjalpa ca tataḥ sphuṭam

हिन्दी अर्थ

वनमें, जो देवताओंको आनन्द प्रदान करनेवाला है, बहती हुई बड़े वेगसे चलकर मानसरोवरमें पहुँचीं। उस सरोवरको अपने जलसे परिपूर्ण करके गड़ा शैलराजके रमणीय शिखरपर आयीं। वहाँसे क्रमश: दक्षिणमें स्थित समस्त पर्वतोंको अपने जलसे आप्लावित करती हुई महागिरि हिमवानपर जा पहुँचीं। वहाँ भगवान् शड्करने गड़ाजीको अपने

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 36

दर्शयामास च तदा राजपुत्राय तां शुभाम् ।सेयं न वेति ते भार्या राजपुत्र ! मदालसा

darśayāmāsa ca tadā rājaputrāya tāṃ śubhām / seyaṃ na veti te bhāryā rājaputra ! madālasā

हिन्दी अर्थ

शीशपर धारण कर लिया और फिर नहीं छोड़ा। तब राजा भगीरथने आकर उपवास और स्तुतिके द्वारा भगवान् शिवकी आराधना की। उससे प्रसन्न होकर महादेवजीने गड़ाको छोड़ दिया। फिर वे सात धाराओंमें विभक्त होकर दक्षिण समुद्रमें जा मिलीं। उनकी तीन धाराएँ तो पूर्व दिशाकी ओर गयीं। एक धारा भगीरथके पीछे-पीछे दक्षिण दिशाकी ओर बहने

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 37

जड उवाच स दृष्ट्वा तां तदा तन्वीं तत्क्षणात् विगतत्रपः ।प्रियेति तामभिमुखं ययौ वाचमुदीरयन् ।निवारयामास च तं नागः सो ऽश्वतरस्त्वरन्

jaḍa uvāca sa dṛṣṭvā tāṃ tadā tanvīṃ tatkṣaṇāt vigatatrapaḥ / priyeti tāmabhimukhaṃ yayau vācamudīrayan / nivārayāmāsa ca taṃ nāgaḥ so 'śvatarastvaran

हिन्दी अर्थ

स्वरक्षुके नामसे विख्यात हुई। वहाँसे वैराज पर्वतपर होती हुई स्वरक्षु शीतोद सरोवरमें गयी और उसे आप्लावित करके त्रिशिख पर्वतपर पहुँच गयी। फिर वहाँसे अन्य पर्वतोंके शिखरोंपर होती हुई केतुमालवर्षमें पहुँचकर खारे पानीके समुद्रमें मिल गयी। मेरुके उत्तरीय पाद सुपार्श्वपर्वतपर गिरी हुई गड़ाकी धारा सोमाके नामसे विख्यात हुई और सावित्र वनको

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 38

अश्वतर उवाच मायेयं पुत्र ! मा स्प्राक्षीः प्रागेव कथितं तव ।अन्तर्धानमुपैत्याशु माया संस्पर्शनादिभिः

aśvatara uvāca māyeyaṃ putra ! mā sprākṣīḥ prāgeva kathitaṃ tava / antardhānamupaityāśu māyā saṃsparśanādibhiḥ

हिन्दी अर्थ

पवित्र करती हुई महाभद्र सरोवरमें जा पहुँची। वहाँसे शड्खकूट पर्वतपर जा क्रमश: वृषभ आदि शैलमालाओंको लाँघती हुई उत्तरकुरु नामक वर्षमें बहने लगी। अन्ततोगत्वा महासागरमें जा मिली।

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 39

ततः पपात मेदिन्यां स तु मूर्च्छापरिप्लुतः ।हा प्रियेति वदन् सो ऽथ चिन्तयामास भामिनीम्

tataḥ papāta medinyāṃ sa tu mūrcchāpariplutaḥ / hā priyeti vadan so 'tha cintayāmāsa bhāminīm

हिन्दी अर्थ

द्विजश्रेष्ठ) इस प्रकार मैंने तुम्हें गड़ाजीकी उत्पत्तिका वृत्तान्त कह सुनाया। साथ ही जम्बूद्वीपका निवेश और उसके वर्ष-विभाग भी बतला दिये। किम्पुरुष आदि समस्त वर्षोमें प्रजा बड़े सुखसे रहती है। उसे किसी प्रकारका भय नहीं सताता। उनमें कोई छोटा-बड़ा या ऊँच-नीच नहीं होता। जम्बूद्वीपके नवों वर्षों सात-सात कुल पर्वत हैं और प्रत्येक देशमें

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 40

अहो स्नेहो ऽस्य नृपतेर्ममोपर्यचलं मनः ।येनायं पातनो ऽरीणां विना शस्त्रेण पातितः

aho sneho 'sya nṛpatermamoparyacalaṃ manaḥ / yenāyaṃ pātano 'rīṇāṃ vinā śastreṇa pātitaḥ

हिन्दी अर्थ

पर्वतोंसे निकली हुई अनेकानेक नदियाँ हैं। विप्रवर! किम्पुरुष आदि जो आठ वर्ष हैं, वहाँ

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 41

मायेति दर्शिता तेन मिथ्या मायेति यत्स्फुटम् ।वाय्वम्बुतेजसां भुमेराकाशस्य च चेष्टया

māyeti darśitā tena mithyā māyeti yatsphuṭam / vāyvambutejasāṃ bhumerākāśasya ca ceṣṭayā

हिन्दी अर्थ

पृथ्वीसे ही प्रचुर जल निकलता है; किन्तु भारतवर्षमें वर्षाके जलसे विशेष कार्य चलता है। उक्त आठ वर्षोमें वार्क्षी, स्वाभाविकी, देश्या, तोयोत्था, मानसी तथा कर्मजा सिद्धियाँ मनुष्योंको प्राप्त होती हैं। कामना पूर्ण करनेवाले कल्पवृक्ष आदि वृक्षोंसे जो सिद्धि प्राप्त होती है, उसे वार्क्षी-सिद्धि कहते हैं। स्वभावसे ही प्राप्त होनेवाली सिद्धि स्वाभाविकी

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 42

जड उवाच ततः कुवलयाश्वं तं समाश्वास्य भुजङ्गमः ।कथयामास तत् सर्वं मृतसञ्जीवनादिकम्

jaḍa uvāca tataḥ kuvalayāśvaṃ taṃ samāśvāsya bhujaṅgamaḥ / kathayāmāsa tat sarvaṃ mṛtasañjīvanādikam

हिन्दी अर्थ

कहलाती है। देशसे या स्थानविशेषसे जो कार्यसिद्धि होती है, उसका नाम देश्या है। जलकी सूक्ष्मतासे होनेवाली सिद्धि तोयोत्था कही गयी है। ध्यानसे ही प्राप्त होनेवाली सिद्धिको मानसी कहते हैं तथा उपासना आदि कर्मसे जो सिद्धि प्राप्त होती है; वह कर्मजा कहलाती है। किम्पुरुष आदि वर्षो्में युगकी व्यवस्था और आधि-व्याधि नहीं है। वहाँ पाप-पुण्यका

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

अध्याय २४

श्लोक 43

ततः प्रहृष्टः प्रतिलभ्य कान्तां प्रणम्य नागं निजगाम सो ऽथ ।सुशोभमानः स्वपुरं तमश्वम् आरुह्य संचिन्तितमभ्युपतेम्

tataḥ prahṛṣṭaḥ pratilabhya kāntāṃ praṇamya nāgaṃ nijagāma so 'tha / suśobhamānaḥ svapuraṃ tamaśvam āruhya saṃcintitamabhyupatem

हिन्दी अर्थ

अनुष्ठान भी नहीं देखा जाता।

English

The first day of the lunar fortnight, if the hdddha he f formed on it^ is auspicious for the acquisition of wealth; ^

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 24
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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