Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
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अध्याय 6 / 90

Adhyaya 6

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पूर्ण अध्याय पाठ37 श्लोक

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अध्याय ६

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे इन्द्रविक्रियानाम पञ्चमो ऽध्यायः षष्ठो ऽध्यायः पक्षिण ऊचुः रामः पार्थे परां प्रीतिं ज्ञात्वा कृष्णस्य लाङ्गली ।चिन्तयामास बहुधा किं कृतं सुकृतं भवेत्

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe indravikriyānāma pañcamo 'dhyāyaḥ ṣaṣṭho 'dhyāyaḥ pakṣiṇa ūcuḥ rāmaḥ pārthe parāṃ prītiṃ jñātvā kṛṣṇasya lāṅgalī / cintayāmāsa bahudhā kiṃ kṛtaṃ sukṛtaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

ईर्ष्या और द्वेष भी नहीं होगा। तुम पुनः काम-क्रोधसे मुक्त होकर देवत्वको प्राप्त कर लोगे।” तदनन्तर वे विश्वेदेव अपने अंशसे कुरुवंशियोंके घरमें अवतीर्ण हुए। वे ही द्रौपदीके गर्भसे उत्पन्न पाँचों पाण्डवकुमार थे। महामुनि विश्वामित्रके शापसे ही उनका विवाह नहीं हुआ। जैमिनि! इस प्रकार हमने पाण्डवकुमारोंकी

English

The plough-armed Rdma, knowing the perfect affection of Kfish^a for Arjuna, deliberated much — " Can what has been

अध्याय ६

श्लोक 2

कृष्णेन हि विना नाहं यास्ये दुर्योधनान्तिकम् ।पाण्डवान् वा समाश्रित्य कथं दुर्योधनं नृपम्

kṛṣṇena hi vinā nāhaṃ yāsye duryodhanāntikam / pāṇḍavān vā samāśritya kathaṃ duryodhanaṃ nṛpam

हिन्दी अर्थ

कथासे सम्बन्ध रखनेवाली बातें तुम्हें बतला दीं। अब और क्या सुनना चाहते

English

done be better done? Without Kfishna, assuredly, I will not

अध्याय ६

श्लोक 3

जामातरं तथा शिष्यं घातयिष्ये नरेश्वरम् ।तस्मान्न पार्थं यास्यामि नापि दुर्योधनं नृपम्

jāmātaraṃ tathā śiṣyaṃ ghātayiṣye nareśvaram / tasmānna pārthaṃ yāsyāmi nāpi duryodhanaṃ nṛpam

हिन्दी अर्थ

जैमिनि बोले--आपलोगोंने क्रमशः मेरे प्रश्नोंके उत्तरमें ये सारी बातें बतायीं। अब मुझे हरिश्वन्द्रकी शेष कथा सुननेके लिये बड़ा कौतूहल हो रहा है। अहो, उन महात्माने बहुत बड़ा कष्ट उठाया। श्रेष्ठ पक्षियो! क्या उन्हें इस दुःखके अनुरूप ही कोई सुख भी कभी प्राप्त हुआ?

English

I will myself bathe myself at holy bathing places, so long as it oondnces *to the ending of the Kurus and P^rt(Javas."

अध्याय ६

श्लोक 4

तीर्थेष्वाप्लावयिष्यामि तावदात्मानमात्मना ।कुरूणां पाण्डवानां च यावदन्ताय कल्पते

tīrtheṣvāplāvayiṣyāmi tāvadātmānamātmanā / kurūṇāṃ pāṇḍavānāṃ ca yāvadantāya kalpate

हिन्दी अर्थ

पक्षियोंने कहा--विश्वामित्रकी बात सुनकर राजा दु:खी हो धीरे-धीरे आगे बढ़े। उनके पीछे नन्‍्हे-से पुत्रको गोद लिये रानी शैब्या चल रही थीं। दिव्य वाराणसीपुरीके पास पहुँचकर राजाने विचार किया कि यह काशी मनुष्यकी भोग्य भूमि नहीं है, इसपर केवल शूलपाणि भगवान् शड्करका अधिकार है;

English

I will myself bathe myself at holy bathing places, so long as it oondnces *to the ending of the Kurus and P^rt(Javas."

अध्याय ६

श्लोक 5

इत्यामन्त्र्य हृषीकेशं पार्थ-दुर्योधनावपि ।जगाम द्वारकां शौरिः स्वसैन्युपरिवारितः

ityāmantrya hṛṣīkeśaṃ pārtha-duryodhanāvapi / jagāma dvārakāṃ śauriḥ svasainyuparivāritaḥ

हिन्दी अर्थ

अतः यह मेरे राज्यसे बाहर है। ऐसा निश्चय करके दुःखसे पीड़ित हो उन्होंने अपनी अनुकूल पत्नीके साथ पैदल ही काशीमें प्रवेश किया। पुरीमें प्रवेश करते ही उन्हें महर्षि विश्वामित्र सामने खड़े दिखायी दिये। उन्हें उपस्थित देख राजा हरिश्वन्द्र हाथ जोड़कर विनीत भावसे खड़े हो गये और बोले--'मुने! ये मेरे

English

holy bathing places, which are to bo visited in future. Having drank his draught, he then marched to the flourishing park of Raivata,* taking with him the intoxicated Apsaras-like Revati.

अध्याय ६

श्लोक 6

गत्वा द्वारवतीं रामो हृष्टपुष्टजनाकुलाम् ।श्वो गन्तव्येषु तीर्थेषु पपौ पानं हलायुधः

gatvā dvāravatīṃ rāmo hṛṣṭapuṣṭajanākulām / śvo gantavyeṣu tīrtheṣu papau pānaṃ halāyudhaḥ

हिन्दी अर्थ

प्राण, यह पुत्र और यह पत्नी यहाँ प्रस्तुत हैं। इनमेंसे जिसकी आपको आवश्यकता हो, उसे उत्तम अर्घ्यके रूपमें स्वीकार कीजिये अथवा हमलोग यदि आपकी और कोई सेवा कर सकते हों तो उसके लिये भी आज्ञा दीजिये।'

English

raka. Arriving at Dvaravati, which was thronged with glad and well-fed citizens, R^ma Halayudha drank a draught at the

अध्याय ६

श्लोक 7

पीतपानो जगामाथ रैवतोद्यानमृद्धिमत् ।हस्ते गृहीत्वा समदां रेवतीमप्सरोपमाम्

pītapāno jagāmātha raivatodyānamṛddhimat / haste gṛhītvā samadāṃ revatīmapsaropamām

हिन्दी अर्थ

विश्वामित्र बोले--राजर्ष!! आज एक मास पूर्ण हो गया। यदि आपको अपनी बातका स्मरण हो तो मुझे राजसूय-यज्ञके लिये दक्षिणा दीजिये।

English

holy bathing places, which are to bo visited in future. Having drank his draught, he then marched to the flourishing park of Raivata,* taking with him the intoxicated Apsaras-like Revati.

अध्याय ६

श्लोक 8

स्त्रीकदम्बकमध्यस्थो ययौ मत्तः पदा स्खलन् ।ददर्शच वनं वीरो रमणीयमनुत्तमम्

strīkadambakamadhyastho yayau mattaḥ padā skhalan / dadarśaca vanaṃ vīro ramaṇīyamanuttamam

हिन्दी अर्थ

हरिश्वन्द्रने कहा--तपोधन! अभी आज ही महीना पूरा हो रहा है। उसमें आधा दिन शेष है। इतने समयतक और प्रतीक्षा कीजिये। अब अधिक देरी नहीं

English

Encircled by a bevy of maidens, the hero went on, intoxicated, stumbling in his walk. And ho saw a forest, fascinating, beyond

अध्याय ६

श्लोक 9

सर्वर्तुफलपुष्पाढ्यं शाखामृगगणाकुलम् ।पुण्यं पद्मवनोपेतं सपल्वलमहावनम्

sarvartuphalapuṣpāḍhyaṃ śākhāmṛgagaṇākulam / puṇyaṃ padmavanopetaṃ sapalvalamahāvanam

हिन्दी अर्थ

यों कहकर विश्वामित्र चले गये। उस समय राजा इस चिन्तामें पड़े कि पहले स्वीकार की हुई दक्षिणा मैं इन्हें किस प्रकार दूँ। क्‍या मैं अपने प्राण त्याग दूँ? इस अकिज्चन दशामें किधर जाऊँ? यदि प्रतिज्ञा की हुई दक्षिणा दिये बिना ही मर जाऊँ तो ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेके कारण पापात्मा समझा

English

compare, loaded with the fruits and flowers of every season, thronged with troops of monkeys, sacred, dotted with clumps of

अध्याय ६

श्लोक 10

स शृण्वन् प्रीतिजननान् बहून् मदकलान् शुभान् ।श्रोत्ररम्यान् सुमधुरान् शब्दान् खगमुखेरितान्

sa śṛṇvan prītijananān bahūn madakalān śubhān / śrotraramyān sumadhurān śabdān khagamukheritān

हिन्दी अर्थ

जाऊँगा और मुझे अधम-से-अधम कीटयोनिमें जन्म लेना पड़ेगा। अथवा यह दक्षिणा चुकानेके लिये अपनेको बेचकर किसीकी दासता स्वीकार कर लूँ? बस, अपनेको बेचना ही ठीक है।

English

lotus-flowers, a great forest abounding in pools. Listening to the copious, pleasure-inspiring, love-soft, beautiful, car-delighting, melodious songs poured forth from the mouths of the birds, he

अध्याय ६

श्लोक 11

सर्वर्तुफलभाराढ्यान् सर्वर्तुकुसुमोज्ज्वलान् ।अपश्यत् पादपांस्तत्र विहगैरनुनादितान्

sarvartuphalabhārāḍhyān sarvartukusumojjvalān / apaśyat pādapāṃstatra vihagairanunāditān

हिन्दी अर्थ

राजा हरिश्वन्द्र अत्यन्त व्याकुल एवं दीन होकर नीचा मुख किये जब इस प्रकार चिन्ता कर रहे थे, उस समय उनकी पत्नीने नेत्रोंसे आँसू बहाते हुए गदठ्गदवाणीमें कहा--“महाराज! चिन्ता छोड़िये। अपने सत्यकी रक्षा कीजिये। जो मनुष्य सत्यसे विचलित होता है, वह श्मशानकी भाँति त्याग देने योग्य है।

English

saw the trees there, loaded with the weight of the fruits of every season, bright with the blossoms of every season, ren-

अध्याय ६

श्लोक 12

आम्रानाम्रातकान् भव्यान् नारिकेलान् सतिन्दुकान् ।आविल्वकांस्तथा जीरान् दाडिमान् बीजपूरकान्

āmrānāmrātakān bhavyān nārikelān satindukān / āvilvakāṃstathā jīrān dāḍimān bījapūrakān

हिन्दी अर्थ

नरश्रेष्ठट पुरुषके लिये अपने सत्यकी रक्षासे बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं बतलाया गया है। जिसका वचन निरर्थक मिथ्या) हो जाता है, उसके अन्निहोत्र, स्वाध्याय तथा दान आदि सम्पूर्ण कर्म निष्फल हो जाते हैं। धर्मशास्त्रोंमें बुद्धिमान् पुरुषोंने सत्यको ही संसारसागरसे तारनेके लिये सर्वोत्तम

English

dered resonant by the birds; — mango trees, hog-plums,! kamarangaSjJ cocoanuts, and tindaka trees, § and little bel

अध्याय ६

श्लोक 13

पनसान् लकुचान् मोचान् नीपांश्चातिमनोहरान् ।पारावतांश्च कङ्कोलान् नलिनानम्लवेतसान्

panasān lakucān mocān nīpāṃścātimanoharān / pārāvatāṃśca kaṅkolān nalinānamlavetasān

हिन्दी अर्थ

साधन बताया है। इसी प्रकार जिनका मन अपने वशमें नहीं है, ऐसे पुरुषोंको पतनके गर्तमें गिरानेके लिये असत्यको ही प्रधान कारण बताया गया है।- कृति नामके राजा सात अश्वमेध और एक राजसूय-यज्ञका अनुष्ठान करके भी एक ही बार असत्य बोलनेके कारण स्वर्गसे गिर गये थे। महाराज! मुझसे पुत्रका जन्म

English

trees,* cumin, f pomegranates, J citrons, § jack trees, || mon- key-jack trees,!^ plantain trees, and very charming ka- dam trees,** and par^vata tree8,tt kankola treo8,JJ nalina

अध्याय ६

श्लोक 14

भल्लातकानामलकांस्तिन्दुकांश्च महाफलान् ।इङ्गुदान् करमर्दांश्च हरीतक-विभीतकान्

bhallātakānāmalakāṃstindukāṃśca mahāphalān / iṅgudān karamardāṃśca harītaka-vibhītakān

हिन्दी अर्थ

हरिश्वन्द्र बोले--कल्याणि! यह सनन्‍्ताप छोड़ो और जो कुछ कहना चाहती थी, उसे साफ-साफ कहो।

English

trees, §§ docks, |1|1 marking-nut trees, en^iBu^^'inyroba-

अध्याय ६

श्लोक 15

एतानन्यांश्च स तरून् ददर्श यदुनन्दनः ।तथैवाशोक-पुन्नाग-केतकी-बकुलानथ

etānanyāṃśca sa tarūn dadarśa yadunandanaḥ / tathaivāśoka-punnāga-ketakī-bakulānatha

हिन्दी अर्थ

रानीने कहा--महाराज! मुझसे पुत्रका जन्म हो चुका है। श्रेष्ठ पुरुष स्त्री- संग्रहका फल पुत्र ही बतलाते हैं। वह फल आपको मिल चुका है, अतः मुझीको बेचकर ब्राह्मणको दक्षिणा चुका दीजिये।

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 16

चम्पकान् सप्तपर्णांश्च कर्णिकारान् समालतीन् ।पारिजातान् कोविदारान् मन्दारान् बदरांस्तथा

campakān saptaparṇāṃśca karṇikārān samālatīn / pārijātān kovidārān mandārān badarāṃstathā

हिन्दी अर्थ

महारानीका यह वचन सुनकर राजा हरिश्वन्द्र मूर्च्छित हो गये। फिर होशमें आनेपर वे अत्यन्त दुःखी होकर विलाप करने लगे--“कल्याणी! यह महान् दुःखकी बात है, जो तुम मुझसे ऐसा कह रही हो।” यों कहकर नरश्रेष्ठ हरिश्वन्द्र पृथ्वीपर गिर पड़े और मूर्च्छित हो गये। महाराज हरिश्वन्द्रको पृथ्वीपर पड़ा देख

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 17

पाटलान् पुष्पितान् रम्यान् देवदारुद्रुमांस्तथा ।सालांस्तालांस्तमालांश्च किंशौकान् वञ्जुलान् वरान्

pāṭalān puṣpitān ramyān devadārudrumāṃstathā / sālāṃstālāṃstamālāṃśca kiṃśaukān vañjulān varān

हिन्दी अर्थ

रानी अत्यन्त दुःखित होकर बड़ी करुणाके साथ बोलीं--“हा महाराज! यह किसका चीता हुआ अनिष्ट फल आपको प्राप्त हुआ? आप तो रंकुनामक मृगके रोएँसे बने हुए कोमल एवं चिकने वस्त्रपर शयन करने योग्य हैं, किन्तु आज भूमिपर पड़े हैं। जिन्होंने करोड़ोंसे भी अधिक गोधन ब्राह्मणोंको दान दिया है, वे

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 18

चकोरैः शातपत्रैश्च भृङ्गराजैस्तथा शुकैः ।कोकिलैः कलविङ्कैश्च हारीतैर्जोवजीवकैः

cakoraiḥ śātapatraiśca bhṛṅgarājaistathā śukaiḥ / kokilaiḥ kalaviṅkaiśca hārītairjovajīvakaiḥ

हिन्दी अर्थ

ही ये मेरे प्राणनाथ महाराज इस समय धरतीपर सो रहे हैं! हाय! कितने कष्टकी बात है। अरे ओ दुर्देव! इन महाराजने तेरा क्‍या बिगाड़ा था, जो इन्द्र और भगवान् विष्णुके तुल्य होकर भी ये यहाँ मूर्च्छित दशामें पड़े हैं! इतना कहकर सुन्दरी शैब्या पतिके दुःखोंके असह्य बोझसे पीड़ित हो स्वयं भी गिरकर मूर्च्छित

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 19

प्रियपुत्रैश्चातकैश्च तथान्यैर्विविधैः खगैः ।श्रोत्ररम्यं सुमधुरं कूजद्भिश्चाप्यधिष्ठितम्

priyaputraiścātakaiśca tathānyairvividhaiḥ khagaiḥ / śrotraramyaṃ sumadhuraṃ kūjadbhiścāpyadhiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

इसी बीचमें महातपस्वी विश्वामित्रजी भी आ धमके। उन्होंने राजा हरिश्वन्द्रको मूर्च्छिंत होकर भूमिपर पड़ा देख उनपर जलके छीटें डाले और इस प्रकार कहा--'राजेन्द्र! उठो, उठो। यदि तुम्हारी दृष्टि धर्मपर हो तो मुझे पूर्वोक्त दक्षिणा दे दो। सत्यसे ही सूर्य तप रहा है। सत्यपर ही पृथ्वी टिकी हुई है। सत्य-

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 20

सरांसि च मनोज्ञानि प्रसन्नसलिलानि च ।कुमुदैः पुण्डरीकैश्च तथा नीलोत्पलैः शुभैः

sarāṃsi ca manojñāni prasannasalilāni ca / kumudaiḥ puṇḍarīkaiśca tathā nīlotpalaiḥ śubhaiḥ

हिन्दी अर्थ

भाषण सबसे बड़ा धर्म है। सत्यपर ही स्वर्ग प्रतिष्ठित है। एक हजार अभश्वमेध और एक सत्यको यदि तराजूपर तोला जाय तो हजार अश्वमेधसे सत्य ही भारी

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 21

कह्लारैः कमलैश्चापि आचितानि समन्ततः ।कादम्बैश्चक्रवाकैश्च तथैव जलकुक्कुटैः

kahlāraiḥ kamalaiścāpi ācitāni samantataḥ / kādambaiścakravākaiśca tathaiva jalakukkuṭaiḥ

हिन्दी अर्थ

तुम्हें निश्चय ही शाप दे दूँगा।। इतना कहकर विश्वामित्र चले गये। इधर राजा हरिश्वन्द्र उनके भयसे व्याकुल हो उठे। सोचने लगे--'हाय! मैं अधम कहाँ भागकर जाऊँ।” उनकी दशा क्रूर स्वभाववाले धनीसे पीड़ित निर्धन पुरुषकी-सी हो रही थी। उस समय उनकी पत्नीने फिर कहा--“नाथ! मेरी बात मानकर

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 22

कारण्डवैः प्लवैर्हंसैः कूर्मैर्मद्गुभिरेव च ।एभिश्चान्यैश्च कीर्णानि समन्ताज्जलचारिभिः

kāraṇḍavaiḥ plavairhaṃsaiḥ kūrmairmadgubhireva ca / ebhiścānyaiśca kīrṇāni samantājjalacāribhiḥ

हिन्दी अर्थ

वैसा ही कीजिये, अन्यथा आपको शापाग्निसे दग्ध होकर मरना पड़ेगा।” जब पत्नीने बार-बार उन्हें प्रेरित किया, तब राजा बोले--'“कल्याणी! मैं बड़ा निर्दयी हूँ। लो, अब तुम्हें बेचने चलता हूँ। क्रूर-से-क्रूर मनुष्य भी जो कार्य नहीं कर सकते, वही आज मैं करूँगा।” पत्नीसे यों कहकर राजा व्याकुलचित्तसे नगरमें

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 23

क्रमेणेत्थं वनं शौरिर्वोक्षमाणो मनोरमम् ।जगामानुगतः स्त्रीभिर्लतागृहमनुत्तमम्

krameṇetthaṃ vanaṃ śaurirvokṣamāṇo manoramam / jagāmānugataḥ strībhirlatāgṛhamanuttamam

हिन्दी अर्थ

गये और नेत्रोंसे आँसू बहाते हुए गद्गदकण्ठसे बोले।

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 24

स ददर्श द्विजांस्तत्र वेदवेदाङ्गपारगान् ।कौशिकान् भार्गवांश्चैव भारद्वाजान् सगौतमान्

sa dadarśa dvijāṃstatra vedavedāṅgapāragān / kauśikān bhārgavāṃścaiva bhāradvājān sagautamān

हिन्दी अर्थ

राजाने कहा--ओ नागरिको! तुम सब लोग मेरी बात सुनो, क्या तुम मेरा परिचय पूछ रहे हो? लो, सुनो, मैं मनुष्य नहीं, अत्यन्त क्रूर प्राणी हूँ; क्योंकि अपनी प्राणप्यारी पत्नीको यहाँ बेचनेके लिये आया हूँ। यदि आपलोगोंमेंसे किसीको मेरी इस प्राणोंसे भी बढ़कर प्रियतमा पत्नीसे दासीका काम लेनेकी

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 25

विविधेषु च सम्भूतान् वंशेषु द्विजसत्तमान् ।कथाश्रवणबद्धोत्कानुपविष्टान् महत्सु च

vividheṣu ca sambhūtān vaṃśeṣu dvijasattamān / kathāśravaṇabaddhotkānupaviṣṭān mahatsu ca

हिन्दी अर्थ

आवश्यकता हो तो वह शीघ्र बोले; इस असहा दुःखमें भी जबतक मैं जीवन धारण किये हुए हूँ, तभीतक बात कर ले।

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 26

कृष्णाजिनोत्तरीयेषु कुशेषु च वृषीषु च ।सूतञ्च तेषां मध्यस्थं कथयानं कथाः शुभाः

kṛṣṇājinottarīyeṣu kuśeṣu ca vṛṣīṣu ca / sūtañca teṣāṃ madhyasthaṃ kathayānaṃ kathāḥ śubhāḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर कोई बूढ़ा ब्राह्मण सामने आकर राजासे बोला--“दासीको मेरे हवाले करो। मैं इसे धन देकर खरीदता हूँ। मेरे पास धन बहुत है और मेरी प्यारी पत्नी अत्यन्त सुकुमारी है। वह घरके काम-काज नहीं कर सकती। इसलिये यह दासी मुझे दे दो। तुम अपनी इस पत्नीकी कार्यदक्षता, अवस्था, रूप और

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 27

पौराणिकीः सुरर्षोणामाद्यानां चरिताश्रयाः ।दृष्ट्वा रामं द्विजाः सर्वे मधुपानारुणेक्षणम्

paurāṇikīḥ surarṣoṇāmādyānāṃ caritāśrayāḥ / dṛṣṭvā rāmaṃ dvijāḥ sarve madhupānāruṇekṣaṇam

हिन्दी अर्थ

स्वभावके अनुरूप यह धन लो और इसे मेरे हवाले करो।” ब्राह्मणके ऐसा कहनेपर राजा हरिश्वन्द्रका हृदय दुःखसे विदीर्ण हो गया। वे उसे कोई उत्तर न दे सके। तब उस ब्राह्मणने राजाके वल्कल-वस्त्रमें उस धनको अच्छी तरह बाँध दिया और उनकी पत्नीको खींचकर वह अपने साथ ले चला। माताको इस

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 28

मत्तो ऽयमिति मन्वानाः समुत्तस्थुस्त्वरान्विताः ।पूजयन्तो हलधरमृते तं सूतवंशजम्

matto 'yamiti manvānāḥ samuttasthustvarānvitāḥ / pūjayanto haladharamṛte taṃ sūtavaṃśajam

हिन्दी अर्थ

दशामें देखकर बालक रोहिताश्व रो उठा और हाथसे उसका वस्त्र पकड़कर अपनी ओर खींचने लगा। उस समय रानीने अपने पुत्रसे कहा--“बेटा! आओ, जी भरकर देख लो। तुम्हारी माता अब दासी हो गयी। तुम राजपुत्र हो, मेरा स्पर्श न करो। अब मैं तुम्हारे स्पर्श करनेयोग्य न रही।' फिर सहसा अपनी

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 29

ततः क्रोधसमाविष्टो हली सूतं महाबलः ।निजघान विवृत्ताक्षः क्षोभिताशेषदानवः

tataḥ krodhasamāviṣṭo halī sūtaṃ mahābalaḥ / nijaghāna vivṛttākṣaḥ kṣobhitāśeṣadānavaḥ

हिन्दी अर्थ

माताको खींचकर ले जाये जाते हुए देख बालक रोहिताश्व “मा, मा” कहकर रोता हुआ दौड़ा। उस समय उसके नेत्रोंसे आँसू बह रहे थे। जब बालक पास आया, तब उस ब्राह्मणने क्रोधमें भरकर उसे लातसे मारा तो भी उसने अपनी माको नहीं छोड़ा। केवल “माई, माई” कहकर विलखता रहा।

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 30

अध्यास्याति पदं ब्राह्मं तस्मिन् सूते निपातिते ।निष्क्रान्तास्ते द्विजाः सर्वे वनात् कृष्णाजिनाम्बराः

adhyāsyāti padaṃ brāhmaṃ tasmin sūte nipātite / niṣkrāntāste dvijāḥ sarve vanāt kṛṣṇājināmbarāḥ

हिन्दी अर्थ

तब रानीने ब्राह्णसे कहा--स्वामिन्! आप मुझपर कृपा कीजिये। इस बालकको भी खरीद लीजिये। यद्यपि आपने मुझे खरीद लिया है, तथापि इस बालकके बिना मैं आपके कार्यको अच्छी तरह नहीं कर सकती। मैं बड़ी अभागिनी हूँ। आप मुझपर दया करके प्रसन्न हों और बछड़ेसे गायकी तरह इस

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 31

अवधूतं तथात्मानं मन्यमानो हलायुधः ।चिन्तयामास सुमहन्मया पापमिदं कृतम्

avadhūtaṃ tathātmānaṃ manyamāno halāyudhaḥ / cintayāmāsa sumahanmayā pāpamidaṃ kṛtam

हिन्दी अर्थ

बालकसे मुझे मिलाइये।

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 32

ब्राह्मं स्थानं गतो ह्येष यद् सूतो विनिपातितः ।तथा हीमे द्विजाः सर्वे मामवेक्ष्य विनिर्गताः

brāhmaṃ sthānaṃ gato hyeṣa yad sūto vinipātitaḥ / tathā hīme dvijāḥ sarve māmavekṣya vinirgatāḥ

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मण बोला--राजन्! यह धन लो और इस बालकको भी मेरे हवाले

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 33

शरीरस्य च मे गन्धो लोहस्येवासुखावहः ।आत्मानञ्चावगच्छामि ब्रह्मघ्नमिव कुत्सितम्

śarīrasya ca me gandho lohasyevāsukhāvahaḥ / ātmānañcāvagacchāmi brahmaghnamiva kutsitam

हिन्दी अर्थ

यों कहकर उसने पूर्ववत् राजाके उत्तरीय-खण्डमें वह धन बाँध दिया और बालकको उसकी माताके साथ लेकर चल दिया। इस प्रकार पत्नी और पुत्रको ले जाये जाते देख राजा हरिश्वन्द्र अत्यन्त दुःखसे कातर हो गये और विलाप करने लगे--“हाय! पहले जिसे वायु, सूर्य, चन्द्रमा तथा बाहरी लोग कभी नहीं

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 34

धिगमर्षं तथा मद्यमतिमानमभीरुताम् ।यैराविष्टेन सुमहन्मया पापमिदं कृतम्

dhigamarṣaṃ tathā madyamatimānamabhīrutām / yairāviṣṭena sumahanmayā pāpamidaṃ kṛtam

हिन्दी अर्थ

देख पाते थे, वही मेरी पत्नी आज दासी बन गयी। जिसके हाथोंकी अँगुलियाँ अत्यन्त सुकुमार हैं, वह सूर्यवंशमें उत्पन्न। मेरा बालक आज बेच दिया गया। हा प्रिये! हा पुत्र!! हा वत्स!!! मुझ नीचके अन्यायसे तुम्हें हैवाधीन दशाको प्राप्त होना पड़ा। फिर भी मेरी मृत्यु नहीं होती--मुझे धिक्कार है।'

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 35

तत्क्षयार्थं चरिष्यामि व्रतं द्वादशवार्षिकम् ।स्वकर्मख्यापनं कुर्वंन् प्रयश्चित्तमनुत्तमम्

tatkṣayārthaṃ cariṣyāmi vrataṃ dvādaśavārṣikam / svakarmakhyāpanaṃ kurvaṃn prayaścittamanuttamam

हिन्दी अर्थ

राजा हरिश्रन्द्र इस प्रकार विलाप कर रहे थे, इतनेमें ही वह ब्राह्मण उन दोनोंको साथ ले ऊँचे-ऊँचे वृक्ष और गृह आदिकी ओटमें छिप गया। वह बड़ी शीघ्रतासे चल रहा था। तदनन्तर विश्वामित्रने वहाँ पहुँचकर राजासे धन माँगा। हरिश्वन्द्रने भी वह धन उन्हें समर्पित कर दिया। पत्नी और पुत्रको बेचनेसे प्राप्त

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 36

अथ येयं समारब्धा तीर्थयात्रा मयाधुना ।एतामेव प्रयास्यामि प्रतिलोमां सरस्वतीम्

atha yeyaṃ samārabdhā tīrthayātrā mayādhunā / etāmeva prayāsyāmi pratilomāṃ sarasvatīm

हिन्दी अर्थ

हुए उस धनको थोड़ा देखकर कौशिक मुनिने शोकाकुल राजासे कुपित होकर कहा--'क्षत्रियाधम! क्या तू इसीको मेरे यज्ञके अनुरूप दक्षिणा मानता है? यदि ऐसी बात है तो मेरे महान् बलको देख। अपनी भलीभाँति की हुई तपस्याका, निर्मल ब्राह्मणत्वका, उग्र प्रभावका तथा विशुद्ध स्वाध्यायका बल तुझे दिखाता

English

CANTO VI.

अध्याय ६

श्लोक 37

अतो जगाम रामो ऽसौ प्रतिलोमां सरस्वतीम् ।ततः परं शृणुष्वेमं पाण्डवेयकथाश्रयम्

ato jagāma rāmo 'sau pratilomāṃ sarasvatīm / tataḥ paraṃ śṛṇuṣvemaṃ pāṇḍaveyakathāśrayam

हिन्दी अर्थ

हरिश्वन्द्रने कहा--भगवन्! कुछ काल और प्रतीक्षा कीजिये और भी दक्षिणा दूँगा। इस समय नहीं है। मेरी पत्नी और पुत्र बिक चुके हैं।

English

CANTO VI.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 6
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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