Shiva Swarodaya· Śiva Svarodaya
2
अध्याय 2 / 4

Tattva Viveka — Detecting the Active Element in the Breath

तत्त्व विवेक

2 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय २

श्लोक 1

पृथिव्यां स्थिरकार्याणि जले सर्वे शुभा क्रियाः ।वह्नौ च क्रूरकर्माणि वायौ खेचरणं तथा ।व्योम्नि नैव शुभं कार्यं सर्वसिद्धिस्तु शून्यके

pṛthivyāṃ sthirakāryāṇi jale sarve śubhā kriyāḥ | vahnau ca krūrakarmāṇi vāyau khecaraṇaṃ tathā | vyomni naiva śubhaṃ kāryaṃ sarvasiddhistu śūnyake

हिन्दी अर्थ

पृथ्वी में: स्थिर और टिकाऊ कार्य। जल में: सभी शुभ कार्य। अग्नि में: कठोर और बलपूर्वक कार्य। वायु में: गति और यात्रा। आकाश में: कोई सांसारिक कार्य न करें — पर समस्त सिद्धि शून्य में है।

English

In earth: stable, enduring works. In water: all auspicious actions. In fire: fierce, forceful actions. In air: movement and travel. In ether: no ordinary task should be started — but all siddhi is in the void.

अध्याय २

श्लोक 35

यदा स्यात् सुषुम्नायां वहति मारुतः ।तदा न शुभकार्याणि न च मोक्षस्य साधनम् ॥ सुषुम्नायां भवेद्ध्यानं सर्वसिद्धिप्रदायकम्

yadā syāt suṣumnāyāṃ vahati mārutaḥ | tadā na śubhakāryāṇi na ca mokṣasya sādhanam || suṣumnāyāṃ bhavedhyānaṃ sarvasiddhipradāyakam

हिन्दी अर्थ

जब श्वास सुषुम्ना में बहती है — न शुभ सांसारिक कार्य के लिए, न साधारण मोक्ष-साधन के लिए। सुषुम्ना में ध्यान सर्वसिद्धि देने वाला हो जाता है।

English

When the breath flows in Sushumna — neither for worldly auspicious tasks, nor even for ordinary moksha practice. In Sushumna, meditation becomes the giver of all siddhi.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Shiva Swarodaya — Chapter 2
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.