अध्याय ६०
श्लोक 1
॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे पुष्करिण्याम् आदित्यतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नामैकोनषष्टितमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय ६० श्रीमार्कण्डेय उवाच: भूयोऽप्यहं प्रवक्ष्यामि आदित्येश्वरमुत्तमम् ।सर्वदुःखहरं पार्थ सर्वविघ्नविनाशनम्
|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe puṣkariṇyām ādityatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāmaikonaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 60 śrīmārkaṇḍeya uvāca: bhūyo'pyahaṃ pravakṣyāmi ādityeśvaramuttamam / sarvaduḥkhaharaṃ pārtha sarvavighnavināśanam
हिन्दी अर्थ
द्वीपों का वर्णन हमने संक्षेप से कर दिया ।६६-७१२। इन द्वीपों की स्वाभाविक अवस्था का ऋणमिक वर्णन और प्रजाजन की उत्पत्ति या संहार का विस्तार के साथ सांगोपाँग वर्णन सौ वर्षों में भी नहीं किया जा सकता है। इसके अनन्तर अब हम शाकद्वीप का वर्णन करते हैं । सम्पूर्ण शाकद्वीप के विषय में जो यथार्थ रूप से कहते हैं आप सब सूुनें। क्रौंचद्रीप से शाकद्वीप दूता बड़ा है। द्िमण्डोदक समुद्र को यह घरे
English
On hearing his words the sages said to Suta of wide knowledge—"O intelligent Sir, how were the Vedas classified before? Please tell us that."