Vinaya Patrika· Vinaya Patrikā
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अध्याय 3 / 4

Rama Petitions — The Core Vinaya

राम-विनय

3 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय ३

श्लोक 1

नाथ अब मोहि पति होहु ।जेहि बिधि जन राखहु तेहि बिधि ।मोहि मेटि रहन दोहू

nātha aba mohi pati hohu | jehi bidhi jana rākahu tehi bidhi | mohi meṭi rahana dohu

हिन्दी अर्थ

हे नाथ! अब मेरे पालक बन जाओ। जिस प्रकार तुम अपने सेवकों की रक्षा करते हो — उसी प्रकार मेरी भी करो, मेरे दोषों को मिटाकर सदा रहो।

English

O Lord, now become my protector. In whatever way You protect Your servants — protect me too, erasing my faults, remaining with me always.

अध्याय ३

श्लोक 2

श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन ।हरण भव भय दारुणम् ।नवकंज लोचन कंज मुख कर ।कंज पद कंजारुणम्

śrī rāmacaṃdra kṛpālu bhaju mana | haraṇa bhava bhaya dāruṇam | navakañja locana kañja mukha kara | kañja pada kañjāruṇam

हिन्दी अर्थ

हे मन! श्री रामचंद्र कृपालु का भजन कर — जो भव-भय के दारुण (भयानक) त्रास को हरने वाले हैं। नव-कमल नेत्र, कमल-मुख, कमल-हाथ, कमल-जैसे रक्त-चरण वाले।

English

O mind, worship Shri Ramachandra the compassionate — destroyer of the terrible fear of worldly existence. Lotus-eyed, lotus-faced, lotus-handed, with lotus feet red as the lotus.

अध्याय ३

श्लोक 3

हौं तो आयो शरण तुम्हारी ।मोरे अवगुण चितवहु नाहीं ।कृपासिंधु खरारी

hauṃ to āyo śaraṇa tumhārī | more avaguṇa citavahu nāhīṃ | kṛpāsiṃdhu kharārī

हिन्दी अर्थ

मैं तो तुम्हारी शरण में आया हूँ। मेरे अवगुणों पर दृष्टि न करो। हे कृपा-सागर, खरारी (खर के शत्रु, राम)!

English

I have come to your refuge. Do not look at my faults. O ocean of compassion, slayer of Khara.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Vinaya Patrika — Chapter 3
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.