अध्याय ११
श्लोक 1
यु॒ञ्जा॒नः प्र॑थ॒मं मन॑स्त॒त्त्वाय॑ सवि॒ता धिय॑: ।अ॒ग्नेर्ज्योति॑र्नि॒चाय्य॑ पृथि॒व्या अध्याऽभ॑रत्
yuñjānaḥ prathamaṃ manastattvāya savitā dhiya: | agnerjyotirnicāyya pṛthivyā adhyā'bharat
हिन्दी अर्थ
मोक्षमार्ग का क्रम यह है-१. मन को आत्मतत्त्व में लगाना २. योग द्वारा बुद्धि का तनूकरण, बुद्धि को तीत्र बनाना ३. प्रभु के प्रकाश को देखना ४. विषय-रस युक्तेन मन॑सा वयं देवस्य॑ सवितुः सवे । स्वर्ग्या य॒ शक्त्या ।। २॥ १. पिचछले मन्त्र में मन को विषयों से हटाकर आत्मतत्त्व मेँ लगाने का प्रतिपादन
English
com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], HARNESSING, first of all, the mind, Savitar having stretched the thought With reverent look upon the light of Agni bore them up from earth.