Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 34 / 40

Adhyāya 34

अध्याय 34

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अध्याय ३४

श्लोक 1

यज्जाग्र॑तो दू॒रमु॒दैति॒ दैवं॒ तदु॑ सु॒प्तस्य॒ तथै॒वैति॑ ।दू॒र॒ङ्ग॒मं ज्योति॑षां॒ ज्योति॒रेकं॒ तन्मे॒ मन॑: शि॒वस॑ङ्कल्पमस्तु

yajjāgrato dūramudaiti daivaṃ tadu suptasya tathaivaiti | dūraṅgamaṃ jyotiṣāṃ jyotirekaṃ tanme mana: śivasaṅkalpamastu

हिन्दी अर्थ

मेरा मन सदा शिवसंकल्प करनेवाला हो। येन कमौण्यपसों मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीरांः। हे सर्वान्तर्यामिन् परमेश्वर! येन=जिस मन से अपसः =कर्म करनेवाले, धीराः =धेर्ययुक्त मनीषिणः-मन के विजेता विद्वान् लोग यज्ञेयज्ञ में, श्रेष्ठतम कर्मो में ओर विदथेषु संघर्षो

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-FOURTH. THAT which, divine, mounts far when man is waking, that which returns to him when he is sleeping, The lights’ one light that goeth to a distance, may that, my mind, be moved by right intention.

अध्याय ३४

श्लोक 2

येन॒ कर्मा॑ण्य॒पसो॑ मनी॒षिणो॑ य॒ज्ञे कृ॒ण्वन्ति॑ वि॒दथे॑षु॒ धीरा॑: ।यद॑पू॒र्वं य॒क्षम॒न्तः प्र॒जानां॒ तन्मे॒ मन॑: शि॒वस॑ङ्कल्पमस्तु

yena karmāṇyapaso manīṣiṇo yajñe kṛṇvanti vidatheṣu dhīrā: | yadapūrvaṃ yakṣamantaḥ prajānāṃ tanme mana: śivasaṅkalpamastu

हिन्दी अर्थ

हम मन कौ अद्धुत शक्ति को पहचान ओर उसे वश में करके शिवसंकल्पात्मकः बनाकर कल्याण का साधन करे। यस्मान्नऽऋते किं चन कर्म" क्रियते तन्मे मन॑: शिवसंकल्पमस्तु ॥३॥ ९. वह मेरा मन यत्-जो प्रज्ञानम् प्रकृष्ट ज्ञान का साधक टै। लौकिक ज्ञान मे आंख

English

Whereby the wise and thoughtful in assemblies, active in sacrifice, perform their duties, The peerless spirit stored in living creatures, may that, my mind, be moved by right intention.

अध्याय ३४

श्लोक 3

यत्प्र॒ज्ञान॑मु॒त चेतो॒ धृति॑श्च॒ यज्ज्योति॑र॒न्तर॒मृतं॑ प्र॒जासु॑ ।यस्मा॒न्न ऋ॒ते किं च॒न कर्म॑ क्रि॒यते॒ तन्मे॒ मन॑: शि॒वस॑ङ्कल्पमस्तु

yatprajñānamuta ceto dhṛtiśca yajjyotirantaramṛtaṃ prajāsu | yasmānna ṛte kiṃ cana karma kriyate tanme mana: śivasaṅkalpamastu

हिन्दी अर्थ

हमारा यह मन अमर ज्योति है। इसके महत्व को समञ्जकर हम इसकी शक्ति के विकास के लिए प्रयत्नशील हो। येन॑ यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्ये मन॑: शिवसंद्धल्पमस्तु ॥ ४॥। १. तन्मे मनः=वह मेरा मन शिवसंकल्पम्-शुभ संकल्पोवाला अस्तु-हो, येन अमूतेन=जिस

English

That which is wisdom, intellect, and firmness, immortal light which creatures have within them, That without which men do no single action, may that, my mind, be moved by right intention.

अध्याय ३४

श्लोक 4

येने॒दं भू॒तं भुव॑नं भवि॒ष्यत् परि॑गृहीतम॒मृते॑न॒ सर्व॑म् ।येन॑ य॒ज्ञस्ता॒यते॑ स॒प्तहो॑ता॒ तन्मे॒ मन॑: शि॒वस॑ङ्कल्पमस्तु

yenedaṃ bhūtaṃ bhuvanaṃ bhaviṣyat parigṛhītamamṛtena sarvam | yena yajñastāyate saptahotā tanme mana: śivasaṅkalpamastu

हिन्दी अर्थ

मन ही विज्ञान, उपासना व कर्म का आधार है। आत्मस्मृति का मूल मन ही है। वह एकाग्र रहा तो मनुष्य अपने स्वरूप को देख पाता है। १. इव जैसे सुषारथिः उत्तम सारथि वाजिनः शक्तिशाली अश्वान् पोडों को अभीशुभिः इव जैसे लगामों से नेनीयते =खूब इधर-उधर ले-जाता हे, उसी प्रकार मन मनुष्यो को न

English

Whereby, immortal, all is comprehended, the world which is, and what shall be hereafter, Whereby spreads sacrifice with seven Hotars, may that, my mind, be moved by right intention.

अध्याय ३४

श्लोक 5

यस्मि॒न्नृच॒: साम॒ यजू॑ᳪषि॒ यस्मि॒न् प्रति॑ष्ठिता रथना॒भावि॑वा॒राः ।यस्मिँ॑श्चि॒त्तᳪ सर्व॒मोतं॑ प्र॒जानां॒ तन्मे॒ मन॑: शि॒वस॑ङ्कल्पमस्तु

yasminnṛca: sāma yajūṣi yasmin pratiṣṭhitā rathanābhāvivārāḥ | yasmi~ścitta sarvamotaṃ prajānāṃ tanme mana: śivasaṅkalpamastu

हिन्दी अर्थ

हम अपने इस नितान्त चञ्चल मन को श्रद्धा द्वारा नियन्त्रित करनेवाले चनें। पितुं नु स्तोषं महो धर्माणं तविषीम् । यस्य॑ त्रितो व्योज॑सा वृत्रं विपंर्वमर्दय॑त् ॥७॥ १. गतत छह मन्त्रों में मन को शिवसंकल्प बनाने का वर्णन है। मन की शिवसंकल्पता बहुत कुछ अत्न पर निर्भर हे। सात्विक अन्न से मन भी सात्विक होता ठै। “आहारशुद्धौ

English

Wherein the Richas, Sâmans, Yajur-verses, like spokes within a car's nave, are included, And all the thought of creatures is inwoven, may that, my mind, be moved by right intention.

अध्याय ३४

श्लोक 6

सु॒षा॒र॒थिरश्वा॑निव॒ यन्म॑नु॒ष्या॒न्नेनी॒यते॒ऽभीशु॑भिर्वा॒जिन॑ इव ।हृ॒त्प्रति॑ष्ठं॒ यद॑जि॒रं जवि॑ष्ठं॒ तन्मे॒ मन॑: शि॒वस॑ङ्कल्पमस्तु

suṣārathiraśvāniva yanmanuṣyānnenīyate'bhīśubhirvājina iva | hṛtpratiṣṭhaṃ yadajiraṃ javiṣṭhaṃ tanme mana: śivasaṅkalpamastu

हिन्दी अर्थ

हम सात्त्विक अन्न के सेवन से मन को शिवसंकल्प बना, उसमें से वासनाओं को उखाड़ फैके। ऋषि :--अगस्त्यः। देवता-अनुमतिः। छन्दः-निचृदनुष्टुप्। स्वरः- गान्धारः। सात्विक अन्न के सेवन से मनुष्य के अन्दर सदा “ अनुमति "= अनुकूल मति=उन्नति के

English

Controlling men, as, with the reins that guide them, a skilful charioteer drives fleet-foot horses, Which dwells within the heart, agile, most rapid, may that, my mind, be moved by right intention.

अध्याय ३४

श्लोक 7

पि॒तुं नु स्तो॑षं म॒हो ध॒र्माणं॒ तवि॑षीम् ।यस्य॑ त्रि॒तो व्योज॑सा वृ॒त्रं विप॑र्वम॒र्दय॑त्

pituṃ nu stoṣaṃ maho dharmāṇaṃ taviṣīm | yasya trito vyojasā vṛtraṃ viparvamardayat

हिन्दी अर्थ

यदि हम शुष्क वैर-विवाद से दूर रहकर अनुकूलितमति से चलते है तो हमें “शान्ति, कर्मसंकल्प (कर्मसामर्थ्यं) , उन्नति तथा दीर्घजीवन' प्राप्त होता हे। अनुं नो ऽद्यानुंमतिर्यज्ञं देवेषु मन्यताम् । अग्निश्च॑ हव्यवाहनो भव॑तं दाशुषे मय॑:॥ ९॥

English

Now will I glorify great strength's upholder, Food, By whose invigorating might Trita rent Vritra limb from limb.

अध्याय ३४

श्लोक 8

अन्विद॑नुमते॒ त्वं मन्या॑सै॒ शं च॑ नस्कृधि ।क्रत्वे॒ दक्षा॑य नो हिनु॒ प्र ण॒ आयू॑ᳪषि तारिषः

anvidanumate tvaṃ manyāsai śaṃ ca naskṛdhi | kratve dakṣāya no hinu pra ṇa āyūṣi tāriṣaḥ

हिन्दी अर्थ

हम सदा अनुमतिवाले हों ओर हमारे जीवन यज्ञमय बन जां। सिनीवालि पृथुष्टुके या देवानामसि स्वसां। जुषस्व हव्यमाहतं प्रजां देवि दिदिद्धि नः॥।९०॥ “गत दो मन्त्रो मेँ वर्णित " अनुमति" को गृहिणी अपने सन्तानो में ' कैसे जन्म देती दे",

English

Do thou, in truth, Anumati, assent and grant us happiness. Urge us to strength and energy: prolong the days we have to live.

अध्याय ३४

श्लोक 9

अनु॑ नो॒ऽद्यानु॑मतिर्य॒ज्ञं दे॒वेषु॑ मन्यताम् ।अ॒ग्निश्च॑ हव्य॒वाह॑नो॒ भव॑तं दा॒शुषे॒ मय॑:

anu no'dyānumatiryajñaṃ deveṣu manyatām | agniśca havyavāhano bhavataṃ dāśuṣe maya:

हिन्दी अर्थ

पत्नी १. सात्विक अन्न के व्यवहार से न्यूनताओं को दूर करनेवाली हो। २. निरन्तर स्तुत्तिमय जीवनवाली हो। ३. स्वयं दिव्य गुणों को धारण करे ४. यज्ञशीला हो। ५. एेसी पत्नी सुसन्तान का निर्माण करती हे। सरस्वती का “पंचधा सरित्' होना

English

Anumati this day approve our sacrifice among the Gods! Oblation-bearing Agni be, and thou, bliss to the worshipper!

अध्याय ३४

श्लोक 10

सिनी॑वालि॒ पृथु॑ष्टुके॒ या दे॒वाना॒मसि॒ स्वसा॑ ।जु॒षस्व॑ ह॒व्यमाहु॑तं प्र॒जां दे॑वि दिदिड्ढि नः

sinīvāli pṛthuṣṭuke yā devānāmasi svasā | juṣasva havyamāhutaṃ prajāṃ devi didiḍḍhi naḥ

हिन्दी अर्थ

माता्णँ सरस्वती हों, बच्चों की सर्वागीण उन्नति की साधिका हों। त्वम॑ग्ने प्रथमोऽअद्धिराऽऋषिर्देवो देवानामभवः शिवः सयखा। सरस्वतीरूप माता से शिक्षित होकर एक युवक बडे संयत जीवनवाला बनता है। यह प्रभु को निम्न शब्दों में आराधित करता है १. है अग्ने=हमारी सब प्रकार कौ उन्नतियों के

English

O broad-tressed Sinîvâlî, thou who art the sister of the Gods, Accept the offered sacrifice, and, Goddess, grant us progeny.

अध्याय ३४

श्लोक 11

पञ्च॑ न॒द्यः सर॑स्वती॒मपि॑ यन्ति॒ सस्रो॑तसः ।सर॑स्वती॒ तु प॑ञ्च॒धा सो दे॒शेऽभ॑वत्स॒रित्

pañca nadyaḥ sarasvatīmapi yanti sasrotasaḥ | sarasvatī tu pañcadhā so deśe'bhavatsarit

हिन्दी अर्थ

वीर्य की ऊर्ध्वगति करनेवाला ' हिरण्यस्तूप ' प्रभु को अग्नि, अङ्धिरा, ऋषि, देव व देवसखारूप ' में देखता है ओर प्रभु- प्राप्ति को जीवन का लक्ष्य बनाकर कवि=ज्ञानपूर्वक कर्म करनेवाला, मरुत व भ्राजदृष्टि' बन जाता हे। त्वं नोऽअग्ने तव॑ देव पायुभिर्मघोनो रक्ष तन्त्रश्च वन्द्य ।

English

Five rivers flowing on their way speed onward to Sarasvatî, But then became Sarasvatî a fivefold river in the land.

अध्याय ३४

श्लोक 12

त्वम॑ग्ने प्रथ॒मो अङ्गि॑रा॒ ऋषि॑र्दे॒वो दे॒वाना॑मभवः शि॒वः सखा॑ ।तव॑ व्र॒ते क॒वयो॑ विद्म॒नाप॒सोऽजा॑यन्त म॒रुतो॒ भ्राज॑दृष्टयः

tvamagne prathamo aṅgirā ṛṣirdevo devānāmabhavaḥ śivaḥ sakhā | tava vrate kavayo vidmanāpaso'jāyanta maruto bhrājadṛṣṭayaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभुरक्षा का पात्र बनने के लिए हम (क) सदां सुपथ से धन कमाण, (ख) धन का विनियोग यसतो में करे, (ग) उन्नत होने का सतत प्रयत्न करे, (घ) दिव्यता को धारण करे, (ङ) प्रभु के प्रति वन्दनशील हो। पिले दोनों मन्त्रों मे "तव ब्रते" ये शब्द आये हे। प्रभु कौ रक्षा करे पात्र वे होते हें

English

O Agni, thou the earliest Angiras, the Seer, hast, God thyself, become the Gods’ auspicious Friend. After thy holy ordinance the Maruts, sage, active through wisdom, with their glittering spears, were born.

अध्याय ३४

श्लोक 13

त्वं नो॑ अग्ने॒ तव॑ देव पा॒युभि॑र्म॒घोनो॑ रक्ष त॒न्व॒श्च वन्द्य ।त्रा॒ता तो॒कस्य॒ तन॑ये॒ गवा॑म॒स्यनि॑मेष॒ᳪ रक्ष॑माण॒स्तव॑ व्र॒ते

tvaṃ no agne tava deva pāyubhirmaghono rakṣa tanvaśca vandya | trātā tokasya tanaye gavāmasyanimeṣa rakṣamāṇastava vrate

हिन्दी अर्थ

वेदवाणी (ज्ञान कौ वाणी) मानव-जीवन को सबल बनाती है। यह उसे अक्रोधी, संयमी, दीप्तशक्तिवाला व स्लाननिष्ठ बना देती है। जात॑वेदो निधींसद्यग्न हव्याय वोटढ॑वे।। ९५॥ पिछले तथा प्रस्तुत मन्त्र के ऋषि " देवश्रवदेववात' ( भारत) है। ये माता-पिता, आचार्य

English

Lay this with care on her who lies extended: straight, when impregned, hath she brought forth the Hero.

अध्याय ३४

श्लोक 14

उ॒त्ता॒नाया॒मव॑ भरा चिकि॒त्वान्त्स॒द्यः प्रवी॑ता॒ वृष॑णं जजान ।अ॒रु॒षस्तू॑पो॒ रुश॑दस्य॒ पाज॒ इडा॑यास्पु॒त्रो व॒युने॑ऽजनिष्ट

uttānāyāmava bharā cikitvāntsadyaḥ pravītā vṛṣaṇaṃ jajāna | aruṣastūpo ruśadasya pāja iḍāyāsputro vayune'janiṣṭa

हिन्दी अर्थ

(क) बलवान् पुरुष वासनाओं कौ शोषण-शक्ति से सम्पन्न हो, (ख) उच्च विज्ञान को प्राप्त करनेवाला प्रभु-स्तोमों को भी प्राप्त करनेवाला ने, (ग) लोगों का आदरणीय वही हौ जिसने पापों का पूर्णं वजर्न करके प्रभु के उपासक के साथ ऊचे विज्ञान के अध्ययन को जोड़ दिया है, (घ) यह लोगों से आदर को प्राप्त "विश्रुत" (५/९-

English

With his bright pillar—radiant is his lustre—in our skilled task is born the Son of Idâ.

अध्याय ३४

श्लोक 15

इडा॑यास्त्वा प॒दे व॒यं नाभा॑ पृथि॒व्या अधि॑ ।जात॑वेदो॒ निधी॑म॒ह्यग्ने॑ ह॒व्याय॒ वोढ॑वे

iḍāyāstvā pade vayaṃ nābhā pṛthivyā adhi | jātavedo nidhīmahyagne havyāya voḍhave

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवन का प्रारम्भ प्रभु-नमन से हो ओर हमारे जीवन का अन्त भी प्रभु-प्राप्ति क्रा अभिलाषी तितिक्षन्तेऽअभिशंस्तिं जनानामिनद्र त्वदा कश्चन हि प्र॑केतः ॥ ९८॥ हे प्रभो! त्वा=आपको इच्छन्ति चाहते है, कौन? जो १. सोम्यासः विनीत, निरभिमान

English

In Idâ's place, the centre of the earth, will we deposit thee, That, Agni Jâtavedas, thou mayst bear our offerings to the Gods.

अध्याय ३४

श्लोक 16

प्र म॑न्महे शवसा॒नाय॑ शू॒षमा॑ङ्गू॒षं गिर्व॑णसे अङ्गिर॒स्वत् ।सु॒वृ॒क्तिभि॑ स्तुव॒त ऋ॑ग्मि॒यायार्चा॑मा॒र्कं नरे॒ विश्रु॑ताय

pra manmahe śavasānāya śūṣamāṅgūṣaṃ girvaṇase aṅgirasvat | suvṛktibhi stuvata ṛgmiyāyārcāmārkaṃ nare viśrutāya

हिन्दी अर्थ

' गोतम '=प्रशस्तेन्द्रिय पुरुष करे जीवन में उपर्युक्त दस बाते अवश्य होती है। सोमो धेनुःसोमोऽअर्वन्तमाशुःसोमो। वीरं कर्मण्यं ददाति । पिछले मन्त्र मे वर्णित उत्कृष्ट जीवनवाले व्यक्तियों का निर्माण घरों मे ही होगा। घरों मँ प्रत्येक गृहस्थ अपने सन्तान को उत्तम बनाए। वस्तुतः “ माता-पिता की प्रवृत्ति प्रभु- प्रवण

English

Like Angiras a gladdening laud we ponder to him who loveth song, exceeding mighty. Let us sing glory to the far-famed Hero who must be praised with fair hymns by the singer.

अध्याय ३४

श्लोक 17

प्र वो॑ म॒हे महि॒ नमो॑ भरध्वमाङ्गू॒ष्य॒ᳪ शवसा॒नाय॒ साम॑ ।येना॑ न॒: पूर्वे॑ पि॒तर॑: पद॒ज्ञा अर्च॑न्तो॒ अङ्गि॑रसो॒ गा अवि॑न्दन्

pra vo mahe mahi namo bharadhvamāṅgūṣya śavasānāya sāma | yenā na: pūrve pitara: padajñā arcanto aṅgiraso gā avindan

हिन्दी अर्थ

गृहस्थ प्रभुभक्त होगे तो उत्तम सन्तान का निर्माण कर 'पार्णेगे। प्रभुभक्त माता-पिता सन्तानो को भी प्रभु-भजन में सम्मिलित करते हं ओर उनसे प्रतिक्षण प्रयुक्त होनेवाले फूल-फल के विषय में पानी व गो आदि पशुओं के विषय में प्रश्न करते है कि “इन्हे बनानेवाला कौन है?" वे धीमे-धीमे उन बालकों का ध्यान प्रभु

English

Unto the Great One bring great adoration, a chant of praise to him the very potent, Through whom our sires, Angirases, singing praises, and knowing well the places, found the cattle.

अध्याय ३४

श्लोक 18

इ॒च्छन्ति॑ त्वा सो॒म्यास॒: सखा॑यः सु॒न्वन्ति॒ सोमं॒ दध॑ति॒ प्रया॑ᳪसि ।तिति॑क्षन्ते अ॒भिश॑स्तिं॒ जना॑ना॒मिन्द्र॒ त्वदा कश्च॒न हि प्र॑के॒तः

icchanti tvā somyāsa: sakhāyaḥ sunvanti somaṃ dadhati prayāsi | titikṣante abhiśastiṃ janānāmindra tvadā kaścana hi praketaḥ

हिन्दी अर्थ

माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपनी सन्तानो मे भी प्रभु-भक्ति की प्रवृत्ति इहत्नोक त परलत्नोक का साधक “उभयः देवेन नो मन॑सा देव सोम रायो भागर्संहसरावन्नभि युंध्य। प्रस्तुत मन्त्र में घर के बड़े व्यक्ति, जो घर के सञ्चालन के लिए धनार्जन के कार्य

English

The friends who offer Soma long to find thee: they pour forth Soma and present their viands. They bear, Unmoved, the cursing of the people, for all our wisdom comes from thee, O Indra.

अध्याय ३४

श्लोक 19

न ते॑ दू॒रे प॑र॒मा चि॒द्रजा॒ᳪस्या तु प्र या॑हि हरिवो॒ हरि॑भ्याम् ।स्थि॒राय॒ वृष्णे॒ सव॑ना कृ॒तेमा यु॒क्ता ग्रावा॑णः समिधा॒ने अग्नौ

na te dūre paramā cidrajāsyā tu pra yāhi harivo haribhyām | sthirāya vṛṣṇe savanā kṛtemā yuktā grāvāṇaḥ samidhāne agnau

हिन्दी अर्थ

हम मन को पवित्र रखते हए सुपथ से धनादि का अर्जन करें ओर प्रभु-स्मरण की भावना कोदढीलान होने दे। हिरण्याक्षः सविता देवऽआगादधद्रतलां दाशुषे वा्यीणि॥। २४॥ १. सविता देवः=सवको कर्म में प्रेरित करनेवाला-देदीप्यमान व प्रकाश देनेवाला सूर्य

English

Not far for thee are mid-air's loftiest regions: start hither, Lord of Bays, with both Bay Horses. Pressed for the Firm and Strong are these libations. The pressing-stones are set, the fire is kindled.

अध्याय ३४

श्लोक 20

अषा॑ढं यु॒त्सु पृत॑नासु॒ पप्रि॑ᳪ स्व॒र्षाम॒प्सां वृ॒जन॑स्य गो॒पाम् ।भ॒रे॒षु॒जाᳪ सु॑क्षि॒तिᳪ सु॒श्रव॑सं॒ जय॑न्तं॒ त्वामनु॑ मदेम सोम

aṣāḍhaṃ yutsu pṛtanāsu papri svarṣāmapsāṃ vṛjanasya gopām | bhareṣujā sukṣiti suśravasaṃ jayantaṃ tvāmanu madema soma

हिन्दी अर्थ

' सूर्योदय के समय अग्निहोत्र करना ओर इस प्रकार स्वास्थ्यादि उत्तम रत्नों को प्राप्त करना" हमारा महान् कर्त्तव्य है। १. हिरण्यपाणिः स्वर्णं है हाथ मे जिसके , एेसा सविता सबका प्रेरक विचर्षणिः -विश्वद्रष्टा ( सर्वप्रकाशक) सूर्य उभे द्यावापृथिवी अन्तः इन दोनों द्युलोक व पृथिवीलोक

English

Invincible in fight, saviour in battles, guard of our camp, winner of light and water, Born amid hymns, well-housed, exceeding famous, victor, in thee may we rejoice, O Soma.

अध्याय ३४

श्लोक 21

सोमो॑ धे॒नुᳪ सोमो॒ अर्व॑न्तमा॒शुᳪ सोमो॑ वी॒रं क॑र्म॒ण्यं॒ ददाति ।सा॒द॒न्यं॒ विद॒थ्य॒ᳪ स॒भेयं॑ पितृ॒श्रव॑णं॒ यो ददा॑शदस्मै

somo dhenu somo arvantamāśu somo vīraṃ karmaṇyaṃ dadāti | sādanyaṃ vidathya sabheyaṃ pitṛśravaṇaṃ yo dadāśadasmai

हिन्दी अर्थ

रोगकृमियों के संहार के लिए प्रातः-सायं सूर्याभिमुख होकर ध्यान करना मार्ग कसे हो? सविता का उपदेशा तेभिंरनोऽअद्य पथिभिः सुगेभी रक्षा च नोऽअधिं च ब्रूहि देव॥ २७॥ हे सवितः=सवको कर्मो में प्रेरित करनेवाले सूर्यदेव! ये=जो ते- तेरे पन्थाः = मार्ग

English

To him who worships Soma gives a milch cow, a fleet steed, and a man of active knowledge, Skilled in home duties, competent in council, meet for the court, the glory of his father.

अध्याय ३४

श्लोक 22

त्वमि॒मा ओष॑धीः सोम॒ विश्वा॒स्त्वम॒पो अ॑जनय॒स्त्वं गाः ।त्वमा त॑तन्थो॒र्वन्तरि॑क्षं॒ त्वं ज्योति॑षा॒ वि तमो॑ ववर्थ

tvamimā oṣadhīḥ soma viśvāstvamapo ajanayastvaṃ gāḥ | tvamā tatanthorvantarikṣaṃ tvaṃ jyotiṣā vi tamo vavartha

हिन्दी अर्थ

सूर्य से हम अपने जीवन के मार्ग का निश्चय करे। नियमित, निष्पक्ष, निर्लेप जीवनवाले हों ओर वीर्य कौ ऊर्ध्वगति का पूर्णं ध्यान करे। १. पिले चार मन्त्रों मे सविता की आराधना थी। सविता कौ अराधना का अभिप्राय इतना ही है कि इस समय मुख्यरूप से प्राणसाधना होनी चाहिए। उस प्राणसाधना का ही

English

These herbs, these milch-kine, and these running waters, all these, O Soma, thou hast generated. The spacious firmament hast thou expanded, and with the light thou hast dispelled the darkness.

अध्याय ३४

श्लोक 23

दे॒वेन॑ नो॒ मन॑सा देव सोम रा॒यो भा॒गᳪ स॑हसावन्न॒भि यु॑ध्य ।मा त्वा त॑न॒दीशि॑षे वी॒र्य॒स्यो॒भये॑भ्य॒: प्रचि॑कित्सा॒ गवि॑ष्टौ

devena no manasā deva soma rāyo bhāga sahasāvannabhi yudhya | mā tvā tanadīśiṣe vīryasyobhayebhya: pracikitsā gaviṣṭau

हिन्दी अर्थ

प्राणसाधना से शरीर मे वीर्य की रक्षा होकर सब कार्य पवित्र होते है। अद्यूत्ये ऽव॑से निह्छये वां वृधे च नो भवतं वाज॑सातौ।। २९॥ प्राणसाधना के मुख्य लाभ का गतमन्त्र मेँ वर्णन हुआ था। जीवन मे होनेवाले अगले परिणामों को प्रस्तुत मन्त्र मे दिखलाते ह १. ये प्राणापान अश्विना-( अश् व्याप्तौ) कर्मों

English

Do thou, God Soma, with thy God-like spirit, victorious, win for us a share of riches. Let none prevent thee: thou art Lord of valour. Provide for these and those in fight for cattle.

अध्याय ३४

श्लोक 24

अष्टौ॒ व्य॑ख्यत् क॒कुभ॑: पृथि॒व्यास्त्री धन्व॒ योज॑ना स॒प्त सिन्धू॑न् ।हि॒र॒ण्या॒क्षः स॑वि॒ता दे॒व आगा॒द्दध॒द्रत्ना॑ दा॒शुषे॒ वार्या॑णि

aṣṭau vyakhyat kakubha: pṛthivyāstrī dhanva yojanā sapta sindhūn | hiraṇyākṣaḥ savitā deva āgāddadhadratnā dāśuṣe vāryāṇi

हिन्दी अर्थ

प्राणसाधक १. वाग्वीर न होकर कर्मवीर होता है, २. इसका मन बुद्धि के अनुशासन मं चलता है, ३. यह श्रम से ही धनार्जन करता है, ४. वासना-संग्राम मे सदा १. है अश्विनाप्राणापानो! द्युथिः =दिनों मे अक्तुभिः=रात्रियों में, अर्थात् दिन-रात अस्मान् ह मारी परिपातम्-रक्षा कौजिए्। दिन मे हम आलस्यशून्य होकर विवेकपूर्वक शुभ

English

The earth's eight points his brightness hath illumined, three desert regions, and the Seven Rivers. God Savitar the gold-eyed hath come hither, giving choice treasures to the man who worships.

अध्याय ३४

श्लोक 25

हिर॑ण्यपाणिः सवि॒ता विच॑र्षणिरु॒भे द्यावा॑पृथि॒वी अ॒न्तरी॑यते ।अपामी॑वां॒ बाध॑ते॒ वेति॒ सूर्य॑म॒भि कृ॒ष्णेन॒ रज॑सा॒ द्यामृ॑णोति

hiraṇyapāṇiḥ savitā vicarṣaṇirubhe dyāvāpṛthivī antarīyate | apāmīvāṃ bādhate veti sūryamabhi kṛṣṇena rajasā dyāmṛṇoti

हिन्दी अर्थ

प्राणसाधना से हममें मित्रादि देवों का निवास होता हे। हम ' स्नेहमय, निष, 1 , विशाल हदय व दीप्तमस्तिष्क' बनते है! एवं, ये छह देव हमारा आदर सूर्यं का पालकत्व 1.०० अलि 03, पाल उण हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुव॑नानि पश्य॑न्॥ ३९॥

English

Savitar, golden-handed, swiftly moving, goes on his way between the earth and heaven, Drives away sickness, bids the Sun approach us, and spreads the bright sky through the darksome region.

अध्याय ३४

श्लोक 26

हिर॑ण्यहस्तो॒ असु॑रः सुनी॒थः सु॑मृडी॒कः स्ववाँ॑ यात्व॒र्वाङ् ।अ॒प॒सेध॑न् र॒क्षसो॑ यातु॒धाना॒नस्था॑द्दे॒वः प्र॑तिदो॒षं गृ॑णा॒नः

hiraṇyahasto asuraḥ sunīthaḥ sumṛḍīkaḥ svavā~ yātvarvāṅ | apasedhan rakṣaso yātudhānānasthāddevaḥ pratidoṣaṃ gṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

दिनभर सूर्यं के प्रकाश से तेजस्विता को धारण करके खूब क्रियाशील रहकर हम रात में सुषुप्ति का अनुभव करे ओर ब्रह्म के प्रकाश को देख पाँ। हे वाजिनीवति अन्नादि एेश्वर्ययुक्त उषः प्रातःकाल कौ सौन्दर्यमयी वेला चित्रम्-तू आश्चर्यरूप धारण करनेवाली है। प्रातःवेला मे पक्षी चहचाहने लगते हे, शीतल, सुगन्ध

English

May, he, gold-handed Asura, kind leader, come hitherward to us with help and favour. Driving off Râkshasas and Yâtudhânas, the God is present, praised in hymns at evening.

अध्याय ३४

श्लोक 27

ये ते॒ पन्था॑: सवितः पू॒र्व्यासो॑ऽरे॒णव॒: सुकृ॑ता अ॒न्तरि॑क्षे ।तेभि॑र्नो अ॒द्य प॒थिभि॑: सु॒गेभी॒ रक्षा॑ च नो॒ अधि॑ च ब्रूहि देव

ye te panthā: savitaḥ pūrvyāso'reṇava: sukṛtā antarikṣe | tebhirno adya pathibhi: sugebhī rakṣā ca no adhi ca brūhi deva

हिन्दी अर्थ

प्रभातसमय मे हम पुत्र ओर पौत्रों के साथ आनन्द प्राप्त करे। उजग्नि आदि देवो क्रा आह्वान प्रातः=प्रभातवेला में अग्निम्=प्रकाश ओर गर्मी देकर आगे ले-जानेवाले सच्चे अग्नि अगरेणी- नेता, भगवान् को, जीवन मे आगे बद़ने कौ भावना को प्रातः चप्रातःकाल के समय

English

O Savitar, thine ancient dustless pathways are well established in the air's mid-region. O God, come by those paths so fair to travel: preserve thou us from harm this day and bless us.

अध्याय ३४

श्लोक 28

उ॒भा पि॑बतमश्विनो॒भा न॒: शर्म॑ यच्छतम् ।अ॒वि॒द्रि॒याभि॑रू॒तिभि॑:

ubhā pibatamaśvinobhā na: śarma yacchatam | avidriyābhirūtibhi:

हिन्दी अर्थ

हम प्रातः उन्नति, जितेन्द्रियता, स्नेह, निर्देषता, प्राणसाधन, पोषण के लिए पर्याप्त धन, ज्ञान (स्वाध्याय) , सौम्यता व उचित रुद्रता (गम्भीरता) को अपने में धारण संसार यात्रा धन के विना चलनी सम्भव नहीं, परन्तु अन्याय से कमाया धन मनुष्य के पतन का कारण हो जाता है। वसिष्ठ प्रभु से कहता है कि ९. हम प्रातः=उत्तम

English

Drink our libations, Asvins twain, grant us protection, both of you, With aids which none may interrupt.

अध्याय ३४

श्लोक 29

अप्न॑स्वतीमश्विना॒ वाच॑म॒स्मे कृ॒तं नो॑ दस्रा॒ वृषणा मनी॒षाम् ।अ॒द्यू॒त्येऽव॑से॒ नि ह्व॑ये वां वृ॒धे च॑ नो भवतं॒ वाज॑सातौ

apnasvatīmaśvinā vācamasme kṛtaṃ no dasrā vṛṣaṇā manīṣām | adyūtye'vase ni hvaye vāṃ vṛdhe ca no bhavataṃ vājasātau

हिन्दी अर्थ

घन पुरुषार्थ से कमाया जाए, वह हमें उदात्त बनानेवाला हो, हमारी पवित्रता व वासनाओं से रक्षा का कारण हो, हमें स्वस्थ व अदीन तथा दिव्य गुणौवाला बनाये। हमारे धन में दीनो, मान्य समाज-सेवियों तथा राजा को अवश्य अपना-अपना भाग सिले। जीवनयात्रा में धन च्छा महत्त्व

English

Make ye our speech effectual, O Asvins, and this our hymn, ye mighty Wonder-workers. In luckless game I call on you for succour: strengthen us also on the field of battle.

अध्याय ३४

श्लोक 30

द्युभि॑र॒क्तुभि॒: परि॑ पातम॒स्मानरि॑ष्टेभिरश्विना॒ सौभ॑गेभिः ।तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑ति॒: सिन्धु॑: पृथि॒वी उ॒त द्यौ:

dyubhiraktubhi: pari pātamasmānariṣṭebhiraśvinā saubhagebhiḥ | tanno mitro varuṇo māmahantāmaditi: sindhu: pṛthivī uta dyau:

हिन्दी अर्थ

धन नेतृत्व करता है, सत्य को सिद्ध करता ठै, बुद्धि को स्थिर रखता है, हमारी शक्ति व ज्ञान के विकास का कारण बनता है ओर हमारे घर को उत्तम पुरुषोँवाला प्रारम्भ, मध्य व अन्त में उतोदिता मघवन्त्सूर्यस्य वयं देवाना सुमतौ स्यांम।। ३७॥

English

With undiminished blessings, O ye Asvins, through days and nights on every side protect us. This prayer of ours may Varuna grant, and Mitra, and Aditi and Sindhu, Earth and Heaven.

अध्याय ३४

श्लोक 31

आ कृ॒ष्णेन॒ रज॑सा॒ वर्त॑मानो निवे॒शय॑न्न॒मृतं॒ मर्त्यं॑ च ।हि॒र॒ण्यये॑न सवि॒ता रथे॒ना दे॒वो या॑ति॒ भुव॑नानि॒ पश्य॑न्

ā kṛṣṇena rajasā vartamāno niveśayannamṛtaṃ martyaṃ ca | hiraṇyayena savitā rathenā devo yāti bhuvanāni paśyan

हिन्दी अर्थ

हमारा जीवन भग कौ उत्तरोत्तर वृद्धि करते हए भगवान् के समीप पचने प्रभु ही हमारा एश्वर्य हो भग॑ऽएव भग॑वाँ २।ऽअस्तु देवास्तेन वयं भग॑वन्तः स्याम। १. है देवाः देवो! आप एेसी कृपा करो कि भगवान् एव-प्रभु ही भगः अस्तु-हमारे

English

Throughout the dusky firmament, etc., as in XXXIII. 43.

अध्याय ३४

श्लोक 32

आ रा॑त्रि॒ पार्थिव॒ᳪ रज॑: पि॒तुर॑प्रायि॒ धाम॑भिः ।दि॒वः सदा॑ᳪसि बृह॒ती वि ति॑ष्ठस॒ आ त्वे॒षं व॑र्तते॒ तम॑:

ā rātri pārthiva raja: pituraprāyi dhāmabhiḥ | divaḥ sadāsi bṛhatī vi tiṣṭhasa ā tveṣaṃ vartate tama:

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु को ही अपना सच्चा धन माने। ९. उषसः =उषाःकाल अध्वराय अध्वर के लिए संनमन्त= सन्नत हों। हम प्रातःकाल ही विनीत बनकर अध्वर मार्ग पर चलने का निश्चय करे। “न ध्वरति कुटिलौ भवति, अध्वानं सत्पथं राति इति वा '= विनीत बनकर कुरटिलतारहित खन्मार्ग पर चलें । विनीतता का

English

Night! the terrestrial realm hath been filled with the Father's power and might. Thou spreadest thee on high unto the seats of heaven: terrific darkness cometh nigh.

अध्याय ३४

श्लोक 33

उष॒स्तच्चि॒त्रमा भ॑रा॒स्मभ्यं॑ वाजिनीवति ।येन॑ तो॒कं च॒ तन॑यं च॒ धाम॑हे

uṣastaccitramā bharāsmabhyaṃ vājinīvati | yena tokaṃ ca tanayaṃ ca dhāmahe

हिन्दी अर्थ

प्रभु-प्राप्ति का मार्गं यह है कि (क) हम विनीतता को अपनाकर अहिंसा व अकुटिलता के मार्ग पर चलें, (ख) अपने को शक्तिशाली बनाते हए पवित्र मार्ग का आक्रमण करे तथा धारणात्मक कर्मो मेलगे हए प्रभु की प्रार्थना करे, (ग) प्रभु को एेष्वर्य का पुञ्ज, सब वस्तुओं को प्राप्त करानेवाला जानते हुए अपनी इन्द्रियों को निरुद्ध कर उसी

English

O Dawn enriched with ample wealth, bestow on us that wondrous gift Wherewith we may support children and children's sons.

अध्याय ३४

श्लोक 34

प्रा॒तर॒ग्निं प्रा॒तरिन्द्र॑ᳪ हवामहे प्रा॒तर्मि॒त्रावरु॑णा प्रा॒तर॒श्विना॑ ।प्रा॒तर्भगं॑ पू॒षणं॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिं॑ प्रा॒तः सोम॑मु॒त रु॒द्रᳪ हु॑वेम

prātaragniṃ prātarindra havāmahe prātarmitrāvaruṇā prātaraśvinā | prātarbhagaṃ pūṣaṇaṃ brahmaṇaspatiṃ prātaḥ somamuta rudra huvema

हिन्दी अर्थ

हमारा प्रत्येक उषःकाल उत्तमकर्म, उत्तमन्ञान, शक्ति, भद्रता, नैर्मल्य व " सुहोत्र ' ऋषि का यह मन्त्र हे। (हु=आदान) यह सु=उत्तम वस्तुओं का होत्र आदान करता हआ अपना त्राण करता हे। यह कहता है कि है पूषन्-सबका पोषण करनेवाले सूर्यदेव! वयम्-हम तव त्रते=तेरे व्रत में चलते हए कदाचन=कभी भी न रिष्येम=हिंसित

English

Agni at dawn, and Indra we invoke at dawn, and Varuna and Mitra and the Asvins twain, Bhaga at dawn, Pûshan and Brahmanaspati, Soma at dawn, Rudra may we invoke at dawn.

अध्याय ३४

श्लोक 35

प्रा॒त॒र्जितं॒ भग॑मु॒ग्रᳪ हु॑वेम व॒यं पु॒त्रमदि॑ते॒र्यो वि॑ध॒र्ता ।आ॒ध्रश्चि॒द्यं मन्य॑मानस्तु॒रश्चि॒द्राजा॑ चि॒द्यं भगं॑ भ॒क्षीत्याह॑

prātarjitaṃ bhagamugra huvema vayaṃ putramaditeryo vidhartā | ādhraścidyaṃ manyamānasturaścidrājā cidyaṃ bhagaṃ bhakṣītyāha

हिन्दी अर्थ

हम सूर्य से शिक्षा ग्रहण करके अपने जीवन में (क) धारणात्मक कर्मद्ी करे, (ख) सब जगह से अच्छाई को लेनेवाले हों, (ग) क्रियाशील रहं , (घ) स्तुति- निन्दा हमें कर््तव्यपथ से विचलित न कर सक। पथस्प॑थः परिपतिं वचस्या कामेन कृतोऽअभ्यानडर््कम्।

English

May we invoke strong early-conquering Bhaga, the Son of Aditi, the great Arranger, Thinking of whom the poor, yea, even the mighty, even the King says, Let me share in Bhaga.

अध्याय ३४

श्लोक 36

भग॒ प्रणे॑त॒र्भग॒ सत्य॑राधो॒ भगे॒मां धिय॒मुद॑वा॒ दद॑न्नः ।भग॒ प्र नो॑ जनय॒ गोभि॒रश्वै॒र्भग॒ प्र नृभि॑र्नृ॒वन्त॑: स्याम

bhaga praṇetarbhaga satyarādho bhagemāṃ dhiyamudavā dadannaḥ | bhaga pra no janaya gobhiraśvairbhaga pra nṛbhirnṛvanta: syāma

हिन्दी अर्थ

व्यापक उन्नति करनेवाला जीव भी विष्णु है, परन्तु सदा से पूर्णोत्रत प्रभु ही वस्तुतः विष्णु हैं, उस विष्णु की उपासना जीव विष्णु बनकर ही करता है ' विष्णुर्भूत्वा भजेद् विष्णुम् '। उस महान् विष्णोः =विष्णु का यत्-जो परमम् पदम्=उत्कृष्ट स्थान है तत्=उसे समिन्धते-अपने अन्दर दीप्त करते है। कौन? ९. विप्रासः (विप्रा) अपना विशेषरूप से

English

Bhaga our guide, Bhaga whose gifts are faithful, favour this prayer and give us wealth, O Bhaga. Bhaga, increase our store of kine and horses: Bhaga, may we be rich in men and heroes.

अध्याय ३४

श्लोक 37

उ॒तेदानीं॒ भग॑वन्तः स्यामो॒त प्र॑पि॒त्व उ॒त मध्ये॒ अह्ना॑म् ।उ॒तोदि॑ता मघव॒न्त्सूर्य॑स्य व॒यं दे॒वाना॑ᳪ सुम॒तौ स्या॑म

utedānīṃ bhagavantaḥ syāmota prapitva uta madhye ahnām | utoditā maghavantsūryasya vayaṃ devānā sumatau syāma

हिन्दी अर्थ

' विप्र, विपन्यु व जागृवान्' बनकर हम विष्णु के परमपद को प्राप्त करे। द्यावापृथिवी वरूणस्य धर्म॑णा विष्क॑भितेऽअजरे भूरिरेतसा ॥४५॥ आधिहैविक जगत् में ' द्यावापृथिवी" का अभिप्राय द्युलोक व पृथिवीलोक हे। यही अध्यात्म मे मस्तिष्क व शरीर है। वस्तुतः यह पिण्ड (शरीर) क्या है? यह एक छोटा

English

So may felicity be ours at present, and when the day approaches, and at noontide; And may we still, O Bounteous One, at sunset be happy in the Deities’ loving-kindness.

अध्याय ३४

श्लोक 38

भग॑ ए॒व भग॑वाँ२ अस्तु देवा॒स्तेन॑ व॒यं भग॑वन्तः स्याम ।तं त्वा॑ भग॒ सर्व॒ इज्जो॑हवीति॒ स नो॑ भग पुर ए॒ता भ॑वे॒ह

bhaga eva bhagavā~2 astu devāstena vayaṃ bhagavantaḥ syāma | taṃ tvā bhaga sarva ijjohavīti sa no bhaga pura etā bhaveha

हिन्दी अर्थ

विहव्य की प्रार्थना तीन भागों मे वटी हई है। १. हमारे सपत्न दूर हो, २. ज्ान व शक्ति से हम सब सपत्नो को दूर रखने में समर्थ हों, ३. देवों की कृपा से हम उत्कर्षं कौ ओर चलनेवाले, उदात्त, आत्मस्मृतिमान्- चेतन, व अधिराट्-इन्द्रियो के अधिष्ठाता नोट - वसवः" वै देवता है जो हमारे निवास में साक्षात् कारणभूत है । "रुद्राः" वे देव

English

May Bhaga verily he Bliss-bestower, and through him, Gods! may happiness attend us. As such, O Bhaga, all with might invoke thee: as such be thou our Champion here, O Bhaga.

अध्याय ३४

श्लोक 39

सम॑ध्व॒रायो॒षसो॑ नमन्त दधि॒क्रावे॑व॒ शुच॑ये प॒दाय॑ ।अ॒र्वा॒ची॒नं व॑सु॒विदं॒ भगं॑ नो॒ रथ॑मि॒वाश्वा॑ वा॒जिन॒ आ व॑हन्तु

samadhvarāyoṣaso namanta dadhikrāveva śucaye padāya | arvācīnaṃ vasuvidaṃ bhagaṃ no rathamivāśvā vājina ā vahantu

हिन्दी अर्थ

प्राणसाधना ही प्रभु-स्तवन हे। वेदाध्येता सदा प्रसन्न, क्रियाशील, देवपूजकः व दक्ष बनता है। वेदवाणी हमारी शक्तियों का विस्तार करती है। हम वेदव्राणी की प्रेरणा को प्राप्त करके पापों से ऊपर उठे ओर जीवन को सुन्दर बनार्पँ। पितरचपूर्वजों का दर्णा जीवन

English

To this our worship may the Dawns incline them, and come to the pure place like Dadhikrâvan. As strong steeds draw a chariot shay they bring us hitherward Bhaga who discovers treasure.

अध्याय ३४

श्लोक 40

अश्वा॑वती॒र्गोम॑तीर्न उ॒षासो॑ वी॒रव॑ती॒: सद॑मुच्छन्तु भ॒द्राः ।घृ॒तं दुहा॑ना वि॒श्वत॒: प्रपी॑ता यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभि॒: सदा॑ नः

aśvāvatīrgomatīrna uṣāso vīravatī: sadamucchantu bhadrāḥ | ghṛtaṃ duhānā viśvata: prapītā yūyaṃ pāta svastibhi: sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवनो को स्तुतिमय, ज्लानप्रधान, नियमित आवर्तनवाला, मपी-तुली क्रियाओंवाला, गतिमय, दिव्य व महाजनानुगामी बनाने का प्रयत्न करे। इस शरीररूप रथ पर आरूढ होकर बागडोर को अपने काबू मे रक्खें। गतमन्त्र के सुन्दर जीवन के निर्माण का रहस्य “हिरण्य '=तेज=“वीर्य' कौ रक्षा मेंहे।

English

May friendly Mornings dawn on us for ever, with wealth of kine, of horses, and of heroes, Streaming with all abundance, pouring fatness. Preserve us evermore, ye Gods, with blessings.

अध्याय ३४

श्लोक 41

पूष॒न् तव॑ व्र॒ते व॒यं न रि॑ष्येम॒ कदा॑ च॒न ।स्तो॒तार॑स्त इ॒ह स्म॑सि

pūṣan tava vrate vayaṃ na riṣyema kadā cana | stotārasta iha smasi

हिन्दी अर्थ

हम दाक्षायण हिरण्य को धारण करके दीर्घजीवी, दिव्य व दीप्त ज्ञानवाले बने। यदाबंध्नन्दाक्षायणा हिरण्यः शतानीकाय सुमनस्यमानाः। पिछले मन्त्र मे दीक्षायण हिरण्य के धारण की महिमा का सुन्दर वर्णन हुआ है। प्रस्तुत मन्त्र में उस "दाक्षायण हिरण्य" के बोधने का निश्चय करता हआ "दक्ष' कहता हे

English

Secure in thy protecting care, O Pûshan, never may we fail: We here are singers of thy praise.

अध्याय ३४

श्लोक 42

प॒थस्प॑थ॒: परि॑पतिं वच॒स्या कामे॑न कृ॒तो अ॒भ्या॒नड॒र्कम् ।स नो॑ रासच्छु॒रुध॑श्च॒न्द्राग्रा॒ धियं॑ – धियᳪ सीषधाति॒ प्र पू॒षा

pathaspatha: paripatiṃ vacasyā kāmena kṛto abhyānaḍarkam | sa no rāsacchurudhaścandrāgrā dhiyaṃ – dhiya sīṣadhāti pra pūṣā

हिन्दी अर्थ

हम हिरण्य का अपने में प्रवेश, धारण व॒ बन्धन करके दीर्घं व उत्तम जीवनवाले बनेँं। यह हिरण्य सचमुच हमारा सुनहला आभूषण बन जाए। विश्वेदेवाऽ ऋतावृधो वाना स्तुता म्रा: कविश्शस्ताऽअ॑वन्तु ॥५३॥ गतमन्त्र में हिरण्य के बन्धन से ' आयुष्मान्"=उत्तम जीवनवाला होने का उल्लेख धा।

English

I praise with eloquence hire who guards all pathways. He, when his love impelled him, went to Arka. May he vouchsafe us gear with gold to grace it: may Pûshan make each prayer of ours effective.

अध्याय ३४

श्लोक 43

त्रीणि॑ प॒दा वि च॑क्रमे॒ विष्णु॑र्गो॒पा अदा॑भ्यः ।अतो॒ धर्मा॑णि धा॒रय॑न्

trīṇi padā vi cakrame viṣṇurgopā adābhyaḥ | ato dharmāṇi dhārayan

हिन्दी अर्थ

हम ज्लानावाणियों को सुने। स्नेह, दान, सेवनीय धन, दवेषनिवारण व दक्षता को धारण करें ओर प्रभुका ही छोटा रूप बनने का प्रयत्न करे। ऋषि का आश्रम, सात ऋषि, अस्वप्नज देव खप्तापः स्वप॑तो लोकमींयुस्तत्र जागृतोऽअस्व॑प्नजौ सत्रसदौ च देवौ।।५५॥

English

Vishnu the undeceivable Protector strode three steps, thenceforth Establishing his high decrees.

अध्याय ३४

श्लोक 44

तद्विप्रा॑सो विप॒न्यवो॑ जागृ॒वाᳪस॒: समि॑न्धते ।विष्णो॒र्यत्प॑र॒मं प॒दम्

tadviprāso vipanyavo jāgṛvāsa: samindhate | viṣṇoryatparamaṃ padam

हिन्दी अर्थ

हम इस शरीर को ऋषि-आश्रम के रूप में देखें । इसके दिन-रात चलनेवाले ज्ञानयज्ञ का ध्यान करे ओर यज्ञ के रक्षक प्राणापानों कौ साधना को महत्त्व दे। ब्रह्मणस्पति का उत्थान उत्तिष्ठ ब्रह्मणस्पते देवयन्त॑स्त्वेमहे।

English

This, Vishnu's station most sublime, the singers ever vigilant. Lovers of holy song, light up.

अध्याय ३४

श्लोक 45

घृ॒तव॑ती॒ भुव॑नानामभि॒श्रियो॒र्वी पृ॒थ्वी म॑धु॒दुघे॑ सु॒पेश॑सा ।द्यावा॑पृथि॒वी वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा॒ विष्क॑भिते अ॒जरे॒ भूरि॑रेतसा

ghṛtavatī bhuvanānāmabhiśriyorvī pṛthvī madhudughe supeśasā | dyāvāpṛthivī varuṇasya dharmaṇā viṣkabhite ajare bhūriretasā

हिन्दी अर्थ

मेधावी पुरुष प्रभुभावना को हदय में सदा जागरित करता है, जिससे कि हदय देवों का निवासस्थान बने। प्रभु-प्राप्ति के उपाय इस प्रकार है १. प्राणसाधना करना, जितेन्द्रिय बनने का प्रयत्न करना (इन्द्र) ४. सदा उत्तम कर्मो में लगे रहना (प्राशुः) ५. मिलकर चलना (सचा) “सं गच्छध्वम्", इस उपदेश को क्रियान्वित करना।

English

Filled full of fatness, compassing all things that be, wide, spacious, dropping meath, beautiful in their form, The Heaven and the Earth by Varuna's decree, unwasting, rich in seed, stand parted each from each.

अध्याय ३४

श्लोक 46

ये न॑: स॒पत्ना॒ अप॒ ते भ॑वन्त्विन्द्रा॒ग्निभ्या॒मव॑ बाधामहे॒ तान् ।वस॑वो रु॒द्रा आ॑दि॒त्या उ॑परि॒स्पृशं॑ मो॒ग्रं चेत्ता॑रमधिरा॒जम॑क्रन्

ye na: sapatnā apa te bhavantvindrāgnibhyāmava bādhāmahe tān | vasavo rudrā ādityā uparispṛśaṃ mograṃ cettāramadhirājamakran

हिन्दी अर्थ

हम हृदयस्थ ब्रह्मणस्पति प्रभु के उच्चरित मन्त्रों को सुनें. ज्ञानयज्ञो में प्रवृत्त हों, जिससे हमारा जीवन दिव्य गुणों कौ सम्पत्ति से परिपूर्णं हो, हम "हैवी सम्पद्" को विश्वं तद्धद्रं यदव॑न्ति देवा बृहद्वदेम विदथ सुवीरां: ॥५८॥ पिछले मन्त्र में कण्व ऋषि ब्रह्मणस्पति के मन्त्रोच्चारण को सुनकर अपने जीवन को

English

Let those who are our foemen stand afar from us: with Indra and with Agni we will drive them off. Vasus, Âdityas, Rudras have exalted me, made me preminent, mighty, thinker, sovran lord.

अध्याय ३४

श्लोक 47

आ ना॑सत्या त्रि॒भिरे॑काद॒शैरि॒ह दे॒वेभि॑र्यातं मधु॒पेय॑मश्विना ।प्रायु॒स्तारि॑ष्टं॒ नी रपा॑ᳪसि मृक्षत॒ᳪ सेध॑तं॒ द्वेषो॒ भव॑तᳪ सचा॒भुवा॑

ā nāsatyā tribhirekādaśairiha devebhiryātaṃ madhupeyamaśvinā | prāyustāriṣṭaṃ nī rapāsi mṛkṣata sedhataṃ dveṣo bhavata sacābhuvā

हिन्दी अर्थ

प्रभु मुडो ज्ञान दे। मै धन के संग्रह मे न फंस जाऊं प्रत्युत प्रभु का स्तवन करता हुआ आनन्दमय जीवन विताऊ।

English

Come, O Nâsatyas, with the thrice eleven Gods: come, O ye Asvins, to the drinking of the meath. Prolong our days of life, and wipe out all our sins: ward off our enemies; be with us evermore.

अध्याय ३४

श्लोक 48

ए॒ष व॒ स्तोमो॑ मरुत इ॒यं गीर्मा॑न्दा॒र्यस्य॑ मा॒न्यस्य॑ का॒रोः ।एषा या॑सीष्ट त॒न्वे॒ व॒यां वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम्

eṣa va stomo maruta iyaṃ gīrmāndāryasya mānyasya kāroḥ | eṣā yāsīṣṭa tanve vayāṃ vidyāmeṣaṃ vṛjanaṃ jīradānum

हिन्दी अर्थ

-यदि हम शुष्क वैर-विवाद से दूर रहकर अनुकूलितमति से चलते है तो हमें “शान्ति, कर्मसंकल्प (कर्मसामर्थ्यं) , उन्नति तथा दीर्घजीवन' प्राप्त होता हे। अनुं नो ऽद्यानुंमतिर्यज्ञं देवेषु मन्यताम् । अग्निश्च॑ हव्यवाहनो भव॑तं दाशुषे मय॑:॥ ९॥

English

May this your praise, may this your song, O Maruts, sung by the poet, Mâna's son, Mândârya, Bring offspring for ourselves with food to feed us. May we find strengthening food in full abundance.

अध्याय ३४

श्लोक 49

स॒हस्तो॑माः स॒हच्छ॑न्दस आ॒वृत॑: स॒हप्र॑मा॒ ऋष॑यः स॒प्त दै॑व्याः ।पूर्वे॑षां॒ पन्था॑मनु॒दृश्य॒ धीरा॑ अ॒न्वाले॑भिरे र॒थ्यो न र॒श्मीन्

sahastomāḥ sahacchandasa āvṛta: sahapramā ṛṣayaḥ sapta daivyāḥ | pūrveṣāṃ panthāmanudṛśya dhīrā anvālebhire rathyo na raśmīn

हिन्दी अर्थ

- प्रभुरक्षा का पात्र बनने के लिए हम (क) सदां सुपथ से धन कमाण, (ख) धन का विनियोग यसतो में करे, (ग) उन्नत होने का सतत प्रयत्न करे, (घ) दिव्यता को धारण करे, (ङ) प्रभु के प्रति वन्दनशील हो। पिले दोनों मन्त्रों मे "तव ब्रते" ये शब्द आये हे। प्रभु कौ रक्षा करे पात्र वे होते हें

English

They who were versed in ritual and metre, in hymns and rules, were the Seven godlike Rishis. Viewing the path of those of old, the sages have taken up the reins like chariot-drivers.

अध्याय ३४

श्लोक 50

आ॒यु॒ष्यं॒ वर्च॒स्य॒ᳪ रा॒यस्पोष॒मौद्भि॑दम् ।इ॒दᳪ हिर॑ण्यं॒ वर्च॑स्व॒ज्जैत्रा॒यावि॑शतादु॒ माम्

āyuṣyaṃ varcasya rāyaspoṣamaudbhidam | ida hiraṇyaṃ varcasvajjaitrāyāviśatādu mām

हिन्दी अर्थ

यह ' देवश्रवदेववात" यज्ञमय जीवनवाला होता है। मन्त्रोच्चारपूर्वक जातवेद अग्नि में हव्य पदार्थो को डालता है। प्र म॑न्महे शवसानाय॑ शूषमङःगुषं गिर्व'णसेऽअद्धिरस्वत्। १. शवसानाय =( अभिबलायमानाय) सब ओर बल के पुञ्ज की भाँति आचरण

English

Bestowing splendour, length of life, increase of wealth, and conquering power, This brightly shining gold shall be attached to me for victory.

अध्याय ३४

श्लोक 51

न तद्रक्षा॑ᳪसि॒ न पि॑शा॒चास्त॑रन्ति दे॒वाना॒मोज॑: प्रथम॒जᳪ ह्ये॒तत् ।यो बि॒भर्ति॑ दाक्षाय॒णᳪ हिर॑ण्य॒ᳪ स दे॒वेषु॑ कृणुते दी॒र्घमायु॒: स म॑नु॒ष्ये॒षु कृणुते दी॒र्घमायु॑:

na tadrakṣāsi na piśācāstaranti devānāmoja: prathamaja hyetat | yo bibharti dākṣāyaṇa hiraṇya sa deveṣu kṛṇute dīrghamāyu: sa manuṣyeṣu kṛṇute dīrghamāyu:

हिन्दी अर्थ

हम सौम्य, स्ेहवाले, सोम (शक्ति) का पान करनेवाले, सात्विक कर्मो का सेवन करनेवाले, सहनशील बनकर प्रभु प्राप्ति के अभिलाषी लने प्रस्तुत मन्त्र में प्रभु "देवश्रव' से कहते हैँ १. टे देवश्रव! वे उत्कृष्ट लोक, जिन्हें तूने प्राप्त करना है, ते दूरे नतुज्षसे दूर नहीं है। सौम्य, सखा, सोमपायी , सत्त्वस्थ व सहनशील 'देवश्रव' का जीवन “यज्ञ, भक्ति व ज्ञान' का समन्वय करके चलता हे। १. युत्सु अषाढम्तयुद्धों मे पराभूत न -होनेवाले मनुष्य कौ हदयस्थली पर देवी व आसुरी वृत्तियों का सतत युद्ध चलता है। इस निरन्तर चल रहे देवासुर संग्राम मे न पराजित होनेवाले पुरुष को ही हम अनुमदेम अनुमोदित करते है, अर्थात् “ आदमी" तो हम इसे ही

English

This gold no demons injure, no Pisâchas; for this is might of Gods, their primal offspring. Whoever wears the gold of Daksha's children lives a long life among the Gods, lives a long life among mankind.

अध्याय ३४

श्लोक 52

यदाब॑ध्नन् दाक्षाय॒णा हिर॑ण्यᳪ श॒तानी॑काय सुमन॒स्यमा॑नाः ।तन्म॒ आ ब॑ध्नामि श॒तशा॑रदा॒यायु॑ष्माञ्ज॒रद॑ष्टि॒र्यथास॑म्

yadābadhnan dākṣāyaṇā hiraṇya śatānīkāya sumanasyamānāḥ | tanma ā badhnāmi śataśāradāyāyuṣmāñjaradaṣṭiryathāsam

हिन्दी अर्थ

-' सूर्योदय के समय अग्निहोत्र करना ओर इस प्रकार स्वास्थ्यादि उत्तम रत्नों को प्राप्त करना" हमारा महान् कर्त्तव्य है। १. हिरण्यपाणिः स्वर्णं है हाथ मे जिसके , एेसा सविता सबका प्रेरक विचर्षणिः -विश्वद्रष्टा ( सर्वप्रकाशक) सूर्य उभे द्यावापृथिवी अन्तः इन दोनों द्युलोक व पृथिवीलोक

English

This ornament of gold which Daksha's children bound, with benevolent thoughts, on Satânîka, I bind on me for life through hundred autumns, that I may live till ripe old age o’ertakes me.

अध्याय ३४

श्लोक 53

उ॒त नोऽहि॑र्बु॒ध्न्य॒: शृणोत्व॒ज एक॑पात्पृथि॒वी स॑मु॒द्रः ।विश्वे॑ दे॒वा ऋ॑ता॒वृधो॑ हुवा॒ना स्तु॒ता मन्त्रा॑: कविश॒स्ता अ॑वन्तु

uta no'hirbudhnya: śṛṇotvaja ekapātpṛthivī samudraḥ | viśve devā ṛtāvṛdho huvānā stutā mantrā: kaviśastā avantu

हिन्दी अर्थ

सूर्य कौ किरणें स्वर्णमय है, उनके सेवन से सव रोग दूर होते हें। ज्योति व वर्चस् कौ उत्पत्ति के लिए सूर्यकिरणों के सम्पर्क मे रहना आवश्यक हे। दिर॑ण्यहस्तोऽअसुरः सुनीथः सुंमृडीकः स्वव -यात्वर्वाडः। अपसेधन्रक्षसो यातुधानानस्थदिवः प्र॑तिदोषं गणानः।। २६॥ - प्राणसाधना से हममें मित्रादि देवों का निवास होता हे। हम ' स्नेहमय, निष, 1 , विशाल हदय व दीप्तमस्तिष्क' बनते है! एवं, ये छह देव हमारा आदर सूर्यं का पालकत्व 1.०० अलि 03, पाल उण हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुव॑नानि पश्य॑न्॥ ३९॥

English

Let Ahibudhnya also hear our calling, and Aja-Ekapâd and Earth and Ocean. All Gods Law-strengtheners, invoked and lauded, and Texts recited by the sages, help us!

अध्याय ३४

श्लोक 54

इ॒मा गिर॑ आदि॒त्येभ्यो॑ घृ॒तस्नू॑: स॒नाद्राज॑भ्यो जु॒ह्वा॒ जुहोमि ।शृ॒णोतु॑ मि॒त्रो अ॑र्य॒मा भगो॑ नस्तुविजा॒तो वरु॑णो॒ दक्षो॒ अᳪश॑:

imā gira ādityebhyo ghṛtasnū: sanādrājabhyo juhvā juhomi | śṛṇotu mitro aryamā bhago nastuvijāto varuṇo dakṣo aśa:

हिन्दी अर्थ

हिरण्ययरथवाले सूर्य का सेवन करनेवाला “ हिरण्यस्तूप ' ऋषि हिरण्य का धारणं करके “शरीर व मन" दोनों के दृष्टिकोण से स्वस्थ बनता च रात्रि का दीप्त-तम ( अन्धकार ) सूर्य के प्रकाश करे बाद रात्रि आती है, रात्रि कौ समाप्ति पर उषाकाल आता है। ठीक

English

These hymns that drop down fatness, with the ladle I ever offer to the Kings Âdityas. May Mitra, Aryaman, and Bhaga hear us, the mighty Varuna, Daksha, and Amsa.

अध्याय ३४

श्लोक 55

स॒प्त ऋष॑य॒: प्रति॑हिता॒: शरी॑रे स॒प्त र॑क्षन्ति॒ सद॒मप्र॑मादम् ।स॒प्ताप॒: स्वप॑तो लो॒कमी॑यु॒स्तत्र॑ जागृतो॒ अस्व॑प्नजौ सत्र॒सदौ॑ च दे॒वौ

sapta ṛṣaya: pratihitā: śarīre sapta rakṣanti sadamapramādam | saptāpa: svapato lokamīyustatra jāgṛto asvapnajau satrasadau ca devau

हिन्दी अर्थ

- धन नेतृत्व करता है, सत्य को सिद्ध करता ठै, बुद्धि को स्थिर रखता है, हमारी शक्ति व ज्ञान के विकास का कारण बनता है ओर हमारे घर को उत्तम पुरुषोँवाला प्रारम्भ, मध्य व अन्त में उतोदिता मघवन्त्सूर्यस्य वयं देवाना सुमतौ स्यांम।। ३७॥ हम वेदवाणी के अध्ययन से अपने जीवन को संस्कृत बना बडी इच्छा व उत्साह के साथ मार्गो के भी मार्ग के पति सूर्यं के उपासक बनें, उसी के व्रत में चले। आनन्दप्रद, दुःखद्राविणी सम्पत्तियों को प्राप्त करने का व कर्मसाफल्य का यही मार्ग हे। त्रीणि पदा विच॑क्रमे विष्णर्गोपाऽअद।भ्यः । अतो धर्मणि धारय॑न्।) ४३॥

English

Seven Rishis are established in the body: seven guard it evermore with care unceasing. Seven waters seek the world of him who lies asleep: two sleepless Gods are feast-fellows of him who wakes.

अध्याय ३४

श्लोक 56

उत्ति॑ष्ठ ब्रह्मणस्पते देव॒यन्त॑स्त्वेमहे ।उप॒ प्र य॑न्तु म॒रुत॑: सु॒दान॑व॒ इन्द्र॑ प्रा॒शूर्भ॑वा॒ सचा॑

uttiṣṭha brahmaṇaspate devayantastvemahe | upa pra yantu maruta: sudānava indra prāśūrbhavā sacā

हिन्दी अर्थ

भरद्राज वरुण “द्वेष को दूर करनेवाला" बनकर अपने मस्तिष्क व शरीर को -विहव्य की विशिष्ट प्रार्थना प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि “विहव्य' हे- विशिष्ट प्रार्थनावाला। इसकी प्रार्थना इस प्रकार है १. ये=जो नः = हमारे सपत्नाः=' शत्रु" है ते=वे अपभवन्तु=दूर हों। शरीर का पति

English

O Brahmanaspati, arise. God-fearing men, we pray to thee. May they who give good gifts, the Maruts, come to us. Indra, be thou most swift with them.

अध्याय ३४

श्लोक 57

प्र नू॒नं ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्मन्त्रं॑ वदत्यु॒क्थ्य॒म् ।यस्मि॒न्निन्द्रो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा दे॒वा ओका॑ᳪसि चक्रि॒रे

pra nūnaṃ brahmaṇaspatirmantraṃ vadatyukthyam | yasminnindro varuṇo mitro aryamā devā okāsi cakrire

हिन्दी अर्थ

हम प्राणसाधना करं, जिससे १. देवों के निवासस्थान बने २. वीर्य कौ ऊर्ध्वगति कर पां। ३. दीर्घ जीवन प्राप्त करं ४. दोषों को दूर करे। ५. दषे से ऊपर उवे ६. मिलकर चलने के स्वभाववाले हों। एष व स्तोमो मरुतऽ इयं गीर्मान्दार्यस्य मान्यस्य॑ कारोः। मै हिरण्य के महत्त्व को सम्य ओर उसके अन्तःप्रवेश के लिए पूर्ण न तद्रक्षाश्सि न पिंशाचास्त॑रन्ति देवानामोजः प्रथमज द्येत् यो बिभर्ति दाक्षायणः हिरण्यः स देवेषु कृणुते दीर्घमायुः स म॑नुष्येषु कृणुते दीर्घमायु: ॥५९॥ गतमन्त्र के "हिरण्य" का ही परिचय इन शब्दों में देते है कि १. तत्-इस हिरण्य

English

Now Brahmanaspati speaks forth aloud the solemn hymn of praise. Wherein Indra and Varuna, Mitra, Aryaman, the Gods have made their dwelling-place.

अध्याय ३४

श्लोक 58

ब्रह्म॑णस्पते॒ त्वम॒स्य य॒न्ता सू॒क्तस्य॑ बोधि॒ तन॑यं च जिन्व ।विश्वं॒ तद्भ॒द्रं यदव॑न्ति दे॒वा बृ॒हद्व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीरा॑: ।।य इ॒मा विश्वा॑ वि॒श्वक॑र्मा॒ यो न॑: पि॒ता ऽन्न॑प॒तेऽन्न॑स्य नो देहि

brahmaṇaspate tvamasya yantā sūktasya bodhi tanayaṃ ca jinva | viśvaṃ tadbhadraṃ yadavanti devā bṛhadvadema vidathe suvīrā: || ya imā viśvā viśvakarmā yo na: pitā 'nnapate'nnasya no dehi

हिन्दी अर्थ

उत्तम जीवन वह है जो (क) सरलता, गतिशीलता व शक्तिवर्धनवाला हे (ऋजिश्वा)। (ख) अग्नि के समान मलों का दाहक , सूर्य करे समान तेजस्वी, पृथिवी के समान क्षमाशील व समुद्र के समान गम्भीर है। (ग) जिसमें सव दिव्य गुणों ने ऋत व सत्य का वर्धन किया है। (घ) जो विद्वानों से ज्ञानवाणियों को सुनने में व्यतीत होता हे।

English

O Brahmanaspati, be thou controller of this our hymn, and prosper thou our children. All that the Gods regard with love is blessd. Loud may we speak, with brave sons, in assembly. He who sate down. Mighty in mind. Father who made us. A share of good, O Lord of Food.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 34
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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