Agni Purana· Agni Purāṇa
166
अध्याय 166 / 381

Adhyaya 166

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अध्याय १६६

श्लोक 1

वर्णधर्मादिकथनं पुष्कर उवाच वेदस्मार्तं प्रवक्ष्यामि धर्मं वै पञ्चधा स्मृतं(१) ।वर्णत्वमेकमाश्रित्य यो ऽधिकारः प्रवर्तते

varṇadharmādikathanaṃ puṣkara uvāca vedasmārtaṃ pravakṣyāmi dharmaṃ vai pañcadhā smṛtaṃ(1) / varṇatvamekamāśritya yo 'dhikāraḥ pravartate

हिन्दी अर्थ

बताया गया है। तीन वर्षसे कमका शूद्र-बालक यदि मृत्युको प्राप्त हो तो पाँच दिनोंके बाद उसके अशौचकी निवृत्ति होती है। तीन वर्षके

English

Even for the same kind of things it is said that there would

अध्याय १६६

श्लोक 2

१ धर्मं वै परमामृतमिति ख॥ , छ॥ च :प् १५९ वर्णधर्ंअः स विज्ञ्येयो यथोपनयनन्त्रिषु ।यस्त्वाश्रमं समाश्रित्य पदार्थः संविधीयते

1 dharmaṃ vai paramāmṛtamiti kha.. , cha.. ca :p 159 varṇadharṃaḥ sa vijñyeyo yathopanayanantriṣu / yastvāśramaṃ samāśritya padārthaḥ saṃvidhīyate

हिन्दी अर्थ

बाद मृत्यु होनेपर बारह दिन बाद शुद्धि होती है तथा छः वर्ष व्यतीत होनेके पश्चात् उसके मरणका अशौच एक मासके बाद निवृत्त होता है। कन्याओंमें जिनका मुण्डन नहीं हुआ है, उनके मरणाशौचको शुद्धि एक रातमें होनेवाली मानी गयी है और जिनका मुण्डन हो चुका है, उनकी मृत्यु होनेपर उनके बन्धु-बान्धव तीन दिन बाद शुद्ध होते हैं॥ ४--८॥

English

Followers of Manu (declare) that the code brings forth repetition for the purpose of the work undertaken. Otherwise the repetition is specially for the quality of limitation.

अध्याय १६६

श्लोक 3

उक्त आश्रमधर्मस्तु भिन्नपिण्डादिको यथा ।उभयेन निमित्तेन यो विधिः सम्प्रवर्तते

ukta āśramadharmastu bhinnapiṇḍādiko yathā / ubhayena nimittena yo vidhiḥ sampravartate

हिन्दी अर्थ

जिन कन्याओंका विवाह हो चुका है, उनकी मृत्युका अशौच पितृकुलको नहीं प्राप्त होता। जो स्त्रियाँ पिताके घरमें संतानको जन्म देती हैं, उनके उस जननाशौचकी शुद्धि एक रातमें होती

English

Followers of Manu (state) that this (repetition) is only a special practical code for the result. One would reach the world of Brahma by doing the forty-eight purificatory rites.

अध्याय १६६

श्लोक 4

नैमित्तिकः स विज्ञेयः प्रायश्चित्तविधिर्यथा ।ब्रह्मचारी गृही चापि वानप्रस्थो यतिर् नृप

naimittikaḥ sa vijñeyaḥ prāyaścittavidhiryathā / brahmacārī gṛhī cāpi vānaprastho yatir nṛpa

हिन्दी अर्थ

है। किंतु स्वयं सूतिका दस रातमें ही शुद्ध होती है, इसके पहले नहीं। यदि विवाहित कन्या पिताके घरमें मृत्युको प्राप्त हो जाय तो उसके बन्धु-बान्धव निश्चय ही तीन रातमें शुद्ध हो जाते हैं। समान अशौचको पहले निवृत्त करना चाहिए और असमान अशौचको बादमें। ऐसा ही धर्मराजका वचन है। परदेशमें रहनेवाला पुरुष यदि अपने कुलमें किसीके जन्म या मरण होनेका समाचार

English

If a person not belonging to the same gotra and not related does the cremation of a dead person, he has to complete ten day rites by offering balls of rice and water.

अध्याय १६६

श्लोक 5

उक्त आश्रमधर्मस्तु धर्मः स्यात् पञ्चधा परः(१) ।षाड्गुण्यस्याभिधाने यो दृष्टार्थः स उदाहृतः

ukta āśramadharmastu dharmaḥ syāt pañcadhā paraḥ(1) / ṣāḍguṇyasyābhidhāne yo dṛṣṭārthaḥ sa udāhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

सुने तो दस रातमें जितना समय शेष हो, उतने ही समयतक उसे अशौच लगता है। यदि दस दिन व्यतीत होनेपर उसे उक्त समाचारका ज्ञान हो, तो वह तीन राततक अशौचयुक्त रहता है

English

Is done before the embryo begins to move.

अध्याय १६६

श्लोक 6

स त्रेधा मन्त्रयागाद्यदृष्टार्थ इति मानवाः ।उभयार्थो व्यवहारस्तु दण्डधारणमेव च

sa tredhā mantrayāgādyadṛṣṭārtha iti mānavāḥ / ubhayārtho vyavahārastu daṇḍadhāraṇameva ca

हिन्दी अर्थ

तथा यदि एक वर्ष व्यतीत होनेके बाद उपर्युक्त बातोंकी जानकारी हो तो केवल स्नानमात्रसे शुद्धि हो जाती है। नाना और आचार्यके मरनेपर भाँति पृथक्-पृथक् पिण्ड-दान करे

English

Is done in the eighth month after pregnancy.

अध्याय १६६

श्लोक 7

तुल्यार्थानां विकल्पः स्याद् यागमूलः प्रकीर्तितः ।वेदे तु विहितो धर्मः स्मृतौ तादृश एव च

tulyārthānāṃ vikalpaḥ syād yāgamūlaḥ prakīrtitaḥ / vede tu vihito dharmaḥ smṛtau tādṛśa eva ca

हिन्दी अर्थ

भी तीन राततक अशौच रहता है

English

Is done in the six months after the birth of a child.

अध्याय १६६

श्लोक 8

अनुवादं स्मृतिः सूते(२) कार्यार्थमिति मानवाः ।गुणार्थः परिसङ्ख्यार्थो वानुवादो विशेषतः(३)

anuvādaṃ smṛtiḥ sūte(2) kāryārthamiti mānavāḥ / guṇārthaḥ parisaṅkhyārtho vānuvādo viśeṣataḥ(3)

हिन्दी अर्थ

परशुरामजी! यदि स्त्रीका गर्भ गिर जाय तो जितने मासका गर्भ गिरा हो, उतनी रातें बीतनेपर उस स्त्रीको शुद्धि होती है। सपिण्ड ब्राह्मण- कुलमें मरणाशौच होनेपर उस कुलके सभी लोग सामान्यरूपसे दस दिनमें शुद्ध हो जाते हैं। क्षत्रिय बारह दिनमें, वैश्य पंद्रह दिनमें और शूद्र एक मासमें शुद्ध होते हैं। (प्रेत या पितरोंके श्राद्धमें उन्हें आसन देनेसे लेकर अर्ध्यदानतकके कर्म

English

Is done in the third y ear of a child.

अध्याय १६६

श्लोक 9

विशेषदृष्ट एवासौ फलार्थ इति मानवाः ।स्यादष्टचत्वारिंशद्भिः संस्कारैर् ब्रह्मलोकगः

viśeṣadṛṣṭa evāsau phalārtha iti mānavāḥ / syādaṣṭacatvāriṃśadbhiḥ saṃskārair brahmalokagaḥ

हिन्दी अर्थ

करके उनके पूजनके पश्चात् जब परिवेषण होता है, तब सपात्रक कर्में वहाँ ब्राह्मण भोजन कराया जाता है। ये ब्राह्मण पितरोंके प्रतिनिधि होते हैं। अपात्रक कर्में ब्राह्मणोंका प्रत्यक्ष भोजन नहीं

English

The five oblations to the (five breaths) (at the com¬ mencement of taking food) should be done with the union of the ring-finger and the thumb.

अध्याय १६६

श्लोक 10

गर्भाधानं पुंसवनं सीमन्तोन्नयनः ततः ।जातकर्म नामकृतिरन्नप्राशनचूडकं

garbhādhānaṃ puṃsavanaṃ sīmantonnayanaḥ tataḥ / jātakarma nāmakṛtirannaprāśanacūḍakaṃ

हिन्दी अर्थ

होता तो भी पितर सूक्ष्मरूपसे उस अन्नको ग्रहण करते हैं। उनके भोजनके बाद वह स्थान उच्छिष्ट समझा जाता है;) उस उच्छिष्टके निकट ही वेदी बनाकर, उसका संस्कार करके, उसके ऊपर कुश बिछाकर उन कुशोंपर ही पिण्ड निवेदन करे। उस समय एकाग्रचित्त हो, प्रेत अथवा पितरके नाम-गोत्रका उच्चारण करके ही उनके लिये पिण्ड अर्पित करे

English

Impregnation, the male-engendering rite, then the parting of the hair, birth-rite, naming, first feeding, tonsure,

अध्याय १६६

श्लोक 11

संस्कारश्चोपनयनं वेदव्रतचतुष्टयं ।स्नानं स्वधर्मचारिण्या योगः स्याद्यज्ञपञ्चकं

saṃskāraścopanayanaṃ vedavratacatuṣṭayaṃ / snānaṃ svadharmacāriṇyā yogaḥ syādyajñapañcakaṃ

हिन्दी अर्थ

जब ब्राह्मण लोग भोजन कर लें और धनसे उनका सत्कार या पूजन कर दिया जाय, तब नाम-गोत्रके उच्चारणपूर्वक उनके लिये अक्षत-

English

the sacrament of initiation, the four Vedic vows, the bath, the union with a wife who follows her duty, the five sacrifices:

अध्याय १६६

श्लोक 12

१ धर्म एष सनातन इति ङ॥ २ अर्थवादं स्मृतिः सूत इति ख॥ , छ॥ च ३ वार्थवादो विशेषत इति ख॥ , छ॥ च :प् १६० देवयज्ञः पितृयज्ञो मनुष्यभूतयज्ञकौ ।ब्रह्मयज्ञः सप्तपाकयज्ञसंस्थाः पुरो ऽष्टकाः

1 dharma eṣa sanātana iti ṅa.. 2 arthavādaṃ smṛtiḥ sūta iti kha.. , cha.. ca 3 vārthavādo viśeṣata iti kha.. , cha.. ca :p 160 devayajñaḥ pitṛyajño manuṣyabhūtayajñakau / brahmayajñaḥ saptapākayajñasaṃsthāḥ puro 'ṣṭakāḥ

हिन्दी अर्थ

उतना ही गहरा तथा एक बित्तेका लंबा एक गड्डा खोदा जाय। परशुराम! वहाँ तीन “विकर्षु' (सूखे कंडोंके रखनेके स्थान) बनाये जायँ और उनके समीप तीन जगह अग्नि प्रज्वलित की जाय। उनमें क्रमशः सोमाय स्वाहा ', 'वह्ये स्वाहा' तथा 'यमाय स्वाहा ' मन्त्र बोलकर सोम, अग्नि तथा यमके लिये संक्षेपसे चार-चार या तीन-तीन आहुतियाँ दे। सभी वेदियोंपर सम्यग् विधिसे

English

the sacrifice to gods, to fathers, to men and beings; the Brahma sacrifice; the seven kitchen sacrifices — Ashtakas first;

अध्याय १६६

श्लोक 13

पार्वणश्राद्धं श्रावण्याग्रहायणी च चैत्र्यपि ।आश्वयुजी सप्तहविर्यज्ञसंस्थास्ततः स्मृताः

pārvaṇaśrāddhaṃ śrāvaṇyāgrahāyaṇī ca caitryapi / āśvayujī saptahaviryajñasaṃsthāstataḥ smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

आहुति देनी चाहिए। फिर वहाँ पहलेकी ही

English

Parvana rite, Shravani, Agrahayani, Chaitri, Ashvayuji: the seven oblation sacrifices are then remembered;

अध्याय १६६

श्लोक 14

अग्न्याधेयमग्निहोत्रं(१) दर्शः स्यात् पशुबन्धकः ।चातुर्मास्याग्रहायेष्टिर्निरूढः पशुबन्धकः

agnyādheyamagnihotraṃ(1) darśaḥ syāt paśubandhakaḥ / cāturmāsyāgrahāyeṣṭirnirūḍhaḥ paśubandhakaḥ

हिन्दी अर्थ

अन्न, दही, मधु तथा उड्दसे पिण्डकी पूर्ति करनी चाहिए। यदि वर्षके भीतर अधिक मास हो जाय तो उसके लिये एक पिण्ड अधिक देना चाहिए। अथवा बारहों मासके सारे मासिक श्राद्ध द्वादशाहके दिन ही पूरे कर दिये जायँ। यदि वर्षके भीतर अधिक मासकी सम्भावना हो तो द्वादशाह श्राद्धके दिन ही उस अधिमासके निमित्त

English

the fire-installation, Agnihotra, New-moon sacrifice, the animal sacrifice, Chaturmasya, Agrayana, Nirudha-pashubandha;

अध्याय १६६

श्लोक 15

सौत्रामणिसप्तसोमसंस्थाग्निष्टोम आदितः ।अत्यग्निष्टोम उक्थश् च षोडशी वाजपेयकः

sautrāmaṇisaptasomasaṃsthāgniṣṭoma āditaḥ / atyagniṣṭoma ukthaś ca ṣoḍaśī vājapeyakaḥ

हिन्दी अर्थ

हो जानेपर श्राद्धको सामान्य श्राद्धकी ही भाँति सम्पादित करे

English

Sautramani; the seven Soma sacrifices: first Agnishtoma, Atyagnishtoma and Ukthya, Shodashi, Vajapeya,

अध्याय १६६

श्लोक 16

अतिरात्रास् तथा स्तोम अष्टौ चात्मगुणास्ततः ।दया क्षमानसूया च अनायासो ऽथ मङ्गलं

atirātrās tathā stoma aṣṭau cātmaguṇāstataḥ / dayā kṣamānasūyā ca anāyāso 'tha maṅgalaṃ

हिन्दी अर्थ

सपिण्डीकरण श्राद्धमें प्रेतको अलग पिण्ड देकर बादमें उसीकी तीन पीढ़ियोंके पितरोंको तीन पिण्ड प्रदान करने चाहिए। इस तरह इन चारों पिण्डोंको बड़ी एकाग्रताके साथ अर्पित करना चाहिए। भृगुनन्दन! पिण्डोंका पूजन और दान करके ' पृथिवी ते पात्रम्० ', “ये समानाः०' इत्यादि मन्त्रोंके पाठपूर्वक यथोचित कार्य सम्पादन करते हुए प्रेत-पिण्डके तीन टुकड़ोंको क्रमशः

English

Atiratra and Aptoryama; and eight qualities of the Self: compassion, forbearance, non-envy, freedom from effort, auspiciousness,

अध्याय १६६

श्लोक 17

अकार्पण्यास्पृहाशौचं यस्यैते स परं व्रजेत् ।प्रचारे मैथुने चैव प्रस्रावे दन्तधावने

akārpaṇyāspṛhāśaucaṃ yasyaite sa paraṃ vrajet / pracāre maithune caiva prasrāve dantadhāvane

हिन्दी अर्थ

पिता, पितामह और प्रपितामहके पिण्डोंमें जोड़ दे। इससे पहले इसी तरह प्रेतके अर्घ्यपात्रका पिता आदिके अर्घ्यपात्रोमें मेलन करना चाहिए। पिण्डमेलन और पात्रमेलनका यह कर्म पृथक्-

English

non-meanness, desirelessness, purity — one who has these goes to the supreme. In walking, in intercourse, in urinating, in cleaning teeth,

अध्याय १६६

श्लोक 18

स्नानभोजनकाले च पट्सु मौनं समाचरेत् ।पुनर्दानं पृथक्पानमाज्येन यपसा निशि

snānabhojanakāle ca paṭsu maunaṃ samācaret / punardānaṃ pṛthakpānamājyena yapasā niśi

हिन्दी अर्थ

पृथक् करना उचित है। शूद्रका यह श्राद्धकर्म सपिण्डीकरण श्राद्ध भी उस समय इसी प्रकार (पूर्वोक्त रीतिसे) करना चाहिए

English

and at bathing and eating times one should observe silence in six. Giving again, drinking separately, with ghee and fat at night,

अध्याय १६६

श्लोक 19

दन्तच्छेदनमुष्णं च सप्त शक्तुषु वर्जयेत् ।स्नात्वा पुष्पं न गृह्णीयाद् देवायोग्यन्तदीरितं

dantacchedanamuṣṇaṃ ca sapta śaktuṣu varjayet / snātvā puṣpaṃ na gṛhṇīyād devāyogyantadīritaṃ

हिन्दी अर्थ

पितरोंका श्राद्ध प्रतिवर्ष करना चाहिए; किंतु प्रेतके लिये सान्नोदक कुम्भदान एक वर्षतक करे। वर्षाकालमें गङ्गाजीकी सिकताधाराकी सम्भव है गणना हो जाय, किंतु अतीत पितरोंकी गणना

English

cutting teeth and heat one should avoid, seven in barley meal. Having bathed one should not take flowers declared unfit for gods.

अध्याय १६६

श्लोक 20

अन्यगोत्रोप्यसम्बद्धः(२) प्रेतस्याग्निन्ददाति यः ।पिण्डञ्चोदकदानञ्च स दशाहं समापयेत्

anyagotropyasambaddhaḥ(2) pretasyāgnindadāti yaḥ / piṇḍañcodakadānañca sa daśāhaṃ samāpayet

हिन्दी अर्थ

कदापि सम्भव नहीं है। काल निरन्तर गतिशील है, उसमें कभी स्थिरता नहीं आती; इसलिये कर्म अवश्य करे। प्रेत पुरुष देवत्वको प्राप्त हुआ हो या यातनास्थान (नरक)-में पड़ा हो, वह किये गये श्राद्धको वहाँ अवश्य पाता है। इसलिये मनुष्य प्रेतके लिये अथवा अपने लिये शोक न करते हुए ही उपकार (श्राद्धादि कर्म) करे॥ २९--३१॥

English

One of another gotra, unconnected, who gives the fire to a dead man, and pinda and water, should complete the ten days.

अध्याय १६६

श्लोक 21

उदकञ्च तृणं भस्म द्वारम्पन्थास्तथैव च ।१ अग्न्याधानमग्निहोत्रमिति ख॥ , छ॥ च २ अन्यगोत्रो ऽन्यसम्बन्ध इति ख॥ , घ॥ , ञ॥ च :प् १६१ एभिरन्तरितं कृत्वा पङ्क्तिदोषो न विद्यते

udakañca tṛṇaṃ bhasma dvārampanthāstathaiva ca / 1 agnyādhānamagnihotramiti kha.. , cha.. ca 2 anyagotro 'nyasambandha iti kha.. , gha.. , ña.. ca :p 161 ebhirantaritaṃ kṛtvā paṅktidoṣo na vidyate

हिन्दी अर्थ

जो लोग पर्वतसे कूदकर, आगमें जलकर, गलेमें फाँसी लगाकर या पानीमें डूबकर मरते हैं, ऐसे आत्मघाती और पतित मनुष्योंके मरनेका अशौच नहीं लगता है। जो बिजली गिरनेसे या

English

Water, grass, ash, a door and a path — having made a separation by these, there is no fault of the row.

अध्याय १६६

श्लोक 22

पञ्च प्राणाहुतीर्दद्यादनामाङ्गुष्ठयोगतः

pañca prāṇāhutīrdadyādanāmāṅguṣṭhayogataḥ //

हिन्दी अर्थ

युद्धमें अस्त्रोंके आघातसे मरते हैं, उनके लिये भी यही बात है। यति (संन्यासी), व्रती, ब्रह्मचारी, राजा, कारीगर और यज्ञदीक्षित पुरुष तथा जो राजाकी आज्ञाका पालन करनेवाले हैं; ऐसे लोगोंको भी अशौच नहीं प्राप्त होता है। ये यदि प्रेतकी शवयात्रामें गये हों तो भी स्नानमात्र कर लें। इतनेसे ही उनकी शुद्धि हो जाती है। मैथुन करनेपर और जलते हुए शवका धुआँ लग

English

One should give the five breath-oblations with the ring finger and thumb joined.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 166
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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