Agni Purana· Agni Purāṇa
167
अध्याय 167 / 381

Adhyaya 167

44 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ44 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय १६७

श्लोक 1

अयुतलक्षकोटिहोमाः अग्निर् उवाच श्रीशान्तिविजयाद्यर्थं ग्रहयज्ञं पुनर्वदे ।ग्रहयज्ञो ऽयुतहोमलक्षकोट्यात्मकस्त्रिधा

ayutalakṣakoṭihomāḥ agnir uvāca śrīśāntivijayādyarthaṃ grahayajñaṃ punarvade / grahayajño 'yutahomalakṣakoṭyātmakastridhā

हिन्दी अर्थ

जानेपर तत्काल स्नानका विधान है। मरे हुए ब्राह्मणके शवको शाद्रद्वारा किसी तरह भी न उठवाया जाय। इसी तरह शूद्रके शवको भी ब्राह्मणद्वारा कदापि न उठवाये; क्योंकि वैसा

English

I shall again describe (the mode of performing) the propitiation of the planets for the sake of prosperity, peace and success. The propitiation of planets is of three kinds — oblations ten thousand times, lakh times and crore times.

अध्याय १६७

श्लोक 2

वेदेरैशे ह्य् अग्निकुण्डाद् ग्रहानावाह्य मण्डले ।सौम्ये गुरुर्बुधश् चैशे शुक्रः पूर्वदले शशी

vederaiśe hy agnikuṇḍād grahānāvāhya maṇḍale / saumye gururbudhaś caiśe śukraḥ pūrvadale śaśī

हिन्दी अर्थ

करनेपर दोनोंको ही दोष लगता है। अनाथ ब्राह्मणके शवको ढोकर अन्त्येष्टिकर्मके लिये ले जानेपर मनुष्य स्वर्गलोकका भागी होता है अनाथ प्रेतका दाह करनेके लिये काष्ठ या लकड़ी देनेवाला मानव संग्राममें विजय पाता है। अपने प्रेत-बन्धुको चितापर स्थापित एवं दग्ध कर उस चिताकी अपसव्य परिक्रमा करके समस्त भाई-

English

An imaate of the worid Yama recording the vices and virtues mankind<

अध्याय १६७

श्लोक 3

आग्नेये दक्षिणे भौमो मध्ये स्याद्भास्करस् तथा ।शनिराप्ये ऽथ नैरृत्ये राहुः केतुश् च वायवे

āgneye dakṣiṇe bhaumo madhye syādbhāskaras tathā / śanirāpye 'tha nairṛtye rāhuḥ ketuś ca vāyave

हिन्दी अर्थ

बन्धु वस्त्र स्नान करें और प्रेतके निमित्त तीन-तीन बार जलाझलि दें। घरके दरवाजेपर जाकर पत्थरपर पैर रखकर (हाथ-पैर धो लें), अग्निमें अक्षत छोड़ें तथा नीमकी पत्ती चबाकर घरके भीतर

English

After having filled one, eight and four pitchers, the final oblation (should be made). Then the should4>e offer¬

अध्याय १६७

श्लोक 4

ईशश्चोमा गुहो विष्णुर्ब्रह्मेन्द्रौ यमकालकौ ।चित्रगुप्तश्चाधिदेवा अग्निरापः क्षितिर्हरिः

īśaścomā guho viṣṇurbrahmendrau yamakālakau / citraguptaścādhidevā agnirāpaḥ kṣitirhariḥ

हिन्दी अर्थ

प्रवेश करें। वहाँ उस दिन सबसे अलग पृथ्वीपर चटाई आदि बिछाकर सोवें। जिस घरका शव जलाया गया हो, उस घरके लोग उस दिन खरीदकर मँगाया हुआ या स्वतः प्रा हुआ आहार ग्रहण करें। दस दिनोंतक प्रतिदिन एक- एकके हिसाबसे पिण्डदान करे। दसवें दिन एक पिण्ड देकर बाल बनवाकर मनुष्य शुद्ध होता है। दसवें दिन विद्वान् पुरुष सरसों और तिलका

English

The planets Sun, Moon, Mars, Mercury, Jupiter, Venus, Saturn, Rahu and Ketu, who have been appeased, anoint you.

अध्याय १६७

श्लोक 5

इन्द्र ऐन्द्री देवता च प्रजेशो ऽहिर्विधिः क्रमात् ।एते प्रत्यधिदेवाश् च गणेशो दुर्गयानिलः

indra aindrī devatā ca prajeśo 'hirvidhiḥ kramāt / ete pratyadhidevāś ca gaṇeśo durgayānilaḥ

हिन्दी अर्थ

अनुलेप लगाकर जलाशयमें गोता लगाये और स्नानके पश्चात् दूसरा नूतन वस्त्र-धारण करे। जिस बालकके दाँत न निकले हों, उसके मरनेपर या गर्भस्राव होनेपर उसके लिये न तो

English

O Rohini! The Tawny-coloured! You are to be worshipped by all gods and hence you are made up of all holy spots and gods. Hence you give me tranquillity.

अध्याय १६७

श्लोक 6

खमश्विनौ च सम्पूज्य यजेद्वीजैश् च वेदजैः ।अर्कः पलाशः खदिरो ह्य् अपामार्गश् च पिप्पलः

khamaśvinau ca sampūjya yajedvījaiś ca vedajaiḥ / arkaḥ palāśaḥ khadiro hy apāmārgaś ca pippalaḥ

हिन्दी अर्थ

दाह-संस्कार करे और न जलाझलि दे। शवदाहके पश्चात् चौथे दिन अस्थिसंचय करे। अस्थिसंचयके पश्चात् अङ्गस्पर्शका विधान है इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणे 'मरणाशौचका वर्णन” नामक एक सौ सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

O Conch! You are the meritorious among all merits, auspicious among all auspiciousness. You are borne by lord Vinu always. Hence (you) give me tranquillity.

अध्याय १६७

श्लोक 7

उदुम्बरः शमी दुर्वा कुशाश् च समिधः क्रमात् ।मध्वाज्यदधिसंमिश्रा होतव्याश्चाष्टधा शतम्

udumbaraḥ śamī durvā kuśāś ca samidhaḥ kramāt / madhvājyadadhisaṃmiśrā hotavyāścāṣṭadhā śatam

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं- अब मैं मनु आदि महर्षियोंके महीनेपर गर्भस्खलन हो, उतनी ही रात्रियोंके मतके अनुसार गर्भ्राव-जनित अशौचका वर्णन द्वारा अथवा तीन रात्रियोंके द्वारा स्त्रियोंकी शुद्धि करूँगा। चौथे मासके स्राव तथा पाँचबें, छठे होती है। सातवें माससे दस दिनका अशौच मासके गर्भपाततक यह नियम है कि जितने होता है। (प्रथमसे तीसरे मासतकके गर्भस्रावमें

English

O Righteousness! You make the universe rejoice in the form of the bull. You are the location of eight forms.* Hence you give me tranquillity.

अध्याय १६७

श्लोक 8

एकाष्टशतुरः कुम्भान् पूर्य पूर्णाहुतिन्तथा ।वसोर्धारान्ततो दद्याद्दक्षिणाञ्च ततो ददेत्

ekāṣṭaśaturaḥ kumbhān pūrya pūrṇāhutintathā / vasordhārāntato dadyāddakṣiṇāñca tato dadet

हिन्दी अर्थ

मनुस्मृतिमें लिखा है--'रात्रिभिर्मासतुल्याभिर्गर्भसरावे विशुद्धयति।' (५। ६६) इसकी टीकामें कुल्लूकभट्टने कहा है -- तृतीयमासात््रभृति गर्भस्रावे गर्भमासतुल्याहोरात्रैश्वातुर्वर्ण्यस्त्री विशुद्धयति। - अर्थात् तीसरे महीनेसे लेकर गर्भस्राव होनेपर जितने महीनेका गर्भ हो, उतने ब्राह्मणके लिये तीन राततक अशुद्धि रहती है।') क्षत्रियके लिये चार रात्रि, वैश्यके लिये पाँच दिन तथा शूद्रके लिये आठ दिनतक अशौचका समय है। सातवें माससे अधिक होनेपर सबके

English

A profuse oblation of ghee oflered in the fire through a long bamboo 'or plough.

अध्याय १६७

श्लोक 9

यजमानं चतुर्भिस्तैर् अभिषिञ्चेत् समन्त्रकैः ।सुरास्त्वामभिषिञ्चन्तु ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः

yajamānaṃ caturbhistair abhiṣiñcet samantrakaiḥ / surāstvāmabhiṣiñcantu brahmaviṣṇumaheśvarāḥ

हिन्दी अर्थ

लिये बारह दिनोंकी अशुद्धि होती है। यह अशौच केवल स्त्रियोंक लिये कहा गया है। तात्पर्य यह कि माता ही इतने दिनोंतक अशुद्ध रहती है । पिताकी शुद्धि तो स्नानमात्रसे हो जाती

English

Relating to $iva, being the five elements/suq, moofif and die saerificer*

अध्याय १६७

श्लोक 10

वासुदेवो जगन्नाथस् तथा सङ्कर्षणः प्रभुः ।प्रद्युम्नश्चानिरुद्धश् च भवन्तु विजयाय ते

vāsudevo jagannāthas tathā saṅkarṣaṇaḥ prabhuḥ / pradyumnaścāniruddhaś ca bhavantu vijayāya te

हिन्दी अर्थ

जो सपिण्ड पुरुष हैं, उन्हें छः मासतक सद्यः-शौच (तत्काल-शुद्धि) रहता है। उनके लिये स्नान भी आवश्यक नहीं है। किंतु सातवें और आठवें मासके गर्भपातमें सपिण्ड पुरुषोंको भी त्रिरात्र अशौच लगता है। जितने समयमें दाँत निकलते हैं, उतने मासतक यदि बालककी मृत्यु हो जाय तो सपिण्ड पुरुषोंको तत्काल शुद्धि प्राप्त होती है। चूडाकरणके पहले मृत्यु होनेपर

English

O Golden embryo of the Fire god or Sun that is lying imbedded inside the golden egg! You give me appeasement that yields limitless meritorious fruits.

अध्याय १६७

श्लोक 11

आखण्डलो ऽग्निर्भगवान् यमो वै नैरृतस् तथा ।वरुणः पवनश् चैव धनाध्यक्षस् तथा शिवः

ākhaṇḍalo 'gnirbhagavān yamo vai nairṛtas tathā / varuṇaḥ pavanaś caiva dhanādhyakṣas tathā śivaḥ

हिन्दी अर्थ

उन्हें एक रातका अशौच लगता है । यज्ञोपवीतके पूर्व बालकका देहावसान होनेपर सपिण्डोंको तीन राततक अशौच प्राप्त होता है। इसके बाद मृत्यु होनेपर सपिण्ड पुरुषोंको दस रातका

English

You are lord Visnu in the form of Fish from which the nectar has come. You have the moon and the sun as the vehicle always. Hence you get me tranquillity.

अध्याय १६७

श्लोक 12

ब्रह्मणा सहितः शेषो दिक्पालाः पान्तु वः सदा ।कीर्तिर्लक्ष्मीर्धृतिर्मेधा पुष्टिः श्रद्धा क्रिया मतिः

brahmaṇā sahitaḥ śeṣo dikpālāḥ pāntu vaḥ sadā / kīrtirlakṣmīrdhṛtirmedhā puṣṭiḥ śraddhā kriyā matiḥ

हिन्दी अर्थ

अशौच लगता है । दाँत निकलनेके पूर्व बालककी मृत्यु होनेपर माता-पिताको तीन रातका अशौच प्राप्त होता है। जिसका चूडाकरण न हुआ हो, उस बालकको मृत्यु होनेपर भी माता-पिताको उतने ही दिनोंका अशौच प्राप्त होता है। तीन

English

O Cow of the colour of (lord) Kesava (Visnu), on account of the fact that you are the entire earth that always removes the sin, you give me tranquillity.

अध्याय १६७

श्लोक 13

बुद्धिर् लज्जा वपुः शान्तिस्तुष्टिः कान्तिश् च मातरः ।एतास्त्वामभिषिञ्चन्तु धर्मपत्न्याः समागताः

buddhir lajjā vapuḥ śāntistuṣṭiḥ kāntiś ca mātaraḥ / etāstvāmabhiṣiñcantu dharmapatnyāḥ samāgatāḥ

हिन्दी अर्थ

वर्षसे कमको आयुमें ब्राह्मण-बालककी मृत्यु हो (और चूडाकरण न हुआ हो) तो सपिण्डोंकी शुद्धि एक रातमें होती हैः ॥ ४--६॥ क्षत्रिय-बालकके मरनेपर उसके सपिण्डोंकी

English

(O Iron) On account of (the fact that) all deeds as well as weapons such as the plough are always subject to your control, you get me tranquillity.

अध्याय १६७

श्लोक 14

आदित्यश् चन्द्रमा भौमो बुधजीवशितार्कजाः ।ग्रहास्त्वामभिषिञ्चन्तु राहुः केतुश् च तर्पिताः

ādityaś candramā bhaumo budhajīvaśitārkajāḥ / grahāstvāmabhiṣiñcantu rāhuḥ ketuś ca tarpitāḥ

हिन्दी अर्थ

शुद्धि दो दिनपर, वैश्य-बालकके मरनेसे उसके सपिण्डोंको तीन दिनपर और शूद्र-बालककी मृत्यु हो तो उसके सपिण्डोंकी पाँच दिनपर शुद्धि होती है। शूद्र बालक यदि विवाहके पहले मृत्युको प्राप्त हो तो उसे बारह दिनका अशौच लगता है। जिस अवस्थामें ब्राह्मणको तीन रातका अशौच देखा जाता है, उसीमें शूद्रके लिये बारह दिनका अशौच लगता है; क्षत्रियके लिये छः

English

On account of (the fact that) you are always the origin of fire and remain as a constituent of all sacrifices, you get me tranquillity.

अध्याय १६७

श्लोक 15

देवदानवगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगाः ।ऋषयो मनवो गावो देवमातर एव च

devadānavagandharvā yakṣarākṣasapannagāḥ / ṛṣayo manavo gāvo devamātara eva ca

हिन्दी अर्थ

दिन और वैश्यके लिये नौ दिनोंका अशौच लगता है। दो वर्षके बालकका अग्निद्वारा दाहसंस्कार नहीं होता। उसकी मृत्यु होनेपर उसे धरतीमें गाड़ देना चाहिए। उसके लिये बान्धवोंको

English

Because the fourteen worlds remain in the limbs of the cow, let me have good in this world as well as in the next.

अध्याय १६७

श्लोक 16

देवपत्न्यो द्रुमा नागा दैत्याश्चाप्सरसाङ्गणाः ।अस्त्राणि सर्वशास्त्राणि राजानो वाहनानि च

devapatnyo drumā nāgā daityāścāpsarasāṅgaṇāḥ / astrāṇi sarvaśāstrāṇi rājāno vāhanāni ca

हिन्दी अर्थ

उदक-क्रिया (जलाझलि-दान) नहीं करनी चाहिए। अथवा जिसका नामकरण हो गया हो या जिसके दिन-रातमें चारों वर्णोंकी स्त्रियाँ शुद्ध होती हैं।' कुल्लूकभट्टने यह नियम छ: महीनेतकके लिये बताया है और इसकी पुष्टिमें आदिपुराणका निम्नाङ्कित श्लोक उद्धृत किया है --' षण्मासाभ्यन्तरं यावद् गर्भस्रावो भवेद् यदि तदा माससमैस्तासां दिवसैः शुद्धिरिष्यते ॥' मिताक्षराकारने स्मृतिवचनका उल्लेख करते हुए यह कहा है कि “चौथे मासतक जो गर्भस्खलन होता है, वह '्राव' है और पाँचवें, छठे मासमें जो स्राव होता है, उसे 'पात' कहते हैं; इसके ऊपर 'प्रसव' कहलाता है। यथा--' आ चतुर्थाद् भवेत्खाव: पातः पञ्चमषष्ठयोः । अत ऊर्ध्व

English

On account of the fact that the beds of Keiava and Siva are not empty let my bed also be not empty in every birth being given (now).

अध्याय १६७

श्लोक 17

औषधानि च रत्नानि कालस्यावयवाश् च ये ।सरितः सागराः शैलास्तीर्थानि जलदा नदाः

auṣadhāni ca ratnāni kālasyāvayavāś ca ye / saritaḥ sāgarāḥ śailāstīrthāni jaladā nadāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रसूतिः स्यात्।' गर्भ्रावे मासतुल्या निशाः ' इत्यादि वचनद्वारा याज्ञवल्क्यजीने भी उपर्युक्त मतको ही व्यक्त किया है । त्रिरात्रका नियम तीन मासतक ही लागू होता है।

English

Just as the celestials are established in all gems so also let the celestials get me tranquillity by my gift of gems.

अध्याय १६७

श्लोक 18

एते त्वामभिषिञ्चन्तु सर्वकामार्थसिद्धये(१) ।अलङ्कृतस्ततो दद्याद्धेमगोन्नभुवादिकं

ete tvāmabhiṣiñcantu sarvakāmārthasiddhaye(1) / alaṅkṛtastato dadyāddhemagonnabhuvādikaṃ

हिन्दी अर्थ

१. अत ऊर्ध्वं तु जात्युक्तमाशौचं तासु विद्यते।' (आदिपुराण) छठे मासके बादसे अर्थात् सातवें माससे स्त्रियोंको पूर्णजननाशौच (दस या बारह दिनका) लगता है। तीन मासके अंदर जो स्राव होता है, उसको ' अचिरस्राव' कहा गया है; उसमें मरीचिका मत इस प्रकार है --' गर्भखुत्यां यथामासमचिरे तूत्तमे त्रयः । राजन्ये तु चतू रात्रं वैश्ये पञ्चाहमेव च । अष्टाहेन तु शूद्रस्य शुद्धिरेषा प्रकीर्तिता।' इन श्लोकोंका भाव मूलके अनुवादमें आ गया है। २. मरीचिके मतमें माताको मास-संख्याके अनुसार और पिता आदिको तीन दिनका अशौच होता है। यह अशौच केवल गर्भपातको लक्ष्य करके कहा गया है । जन्मसम्बन्धी सूतक तो पूरा ही लगता है। इसमें “जातमृते मृतजाते वा सपिण्डानां दशाहम्।' यह “ हारीत-स्मृति' का वचन प्रमाण है।

English

Just as the other gifts are not equal to one-sixteenth (of the merit) of making a gift of land, may I have peace by the gift of the land.

अध्याय १६७

श्लोक 19

कपिले सर्वदेवानां पूजनीयासि रोहिणि ।तीर्थदेवमयी यस्मादतःशान्तिं प्रयच्छ मे

kapile sarvadevānāṃ pūjanīyāsi rohiṇi / tīrthadevamayī yasmādataḥśāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

३. “नृणामकृतचूडानां विशुद्धिनैशिकी स्मृता।' (मनु० ५।६७)

English

See p, 468 fn, 1,

अध्याय १६७

श्लोक 20

पुण्यस्त्वं शङ्ख पुण्यानां मङ्गलानाञ्च मङ्गलं ।विष्णुना विधृतो नित्यमतः शान्तिं प्रयच्छ मे

puṇyastvaṃ śaṅkha puṇyānāṃ maṅgalānāñca maṅgalaṃ / viṣṇunā vidhṛto nityamataḥ śāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

दाँत निकल आये हों; उसका दाह-संस्कार तथा उसके निमित्त जलाञ्जलि-दान करना चाहिए।' उपनयनके पश्चात् बालककी मृत्यु हो तो दस दिनका अशौच लगता है। जो प्रतिदिन अग्निहोत्र तथा तीनों वेदोंका स्वाध्याय करता है, ऐसा ब्राह्मण एक दिनमें ही शुद्ध हो जाता है'। जो उससे हीन और हीनतर है, अर्थात् जो दो अथवा एक वेदका स्वाध्याय करनेवाला है, उसके लिये

English

"You, conch, are holy among the holy, the auspicious of auspicious things; always held by Vishnu; therefore grant me peace."

अध्याय १६७

श्लोक 21

धर्म त्वं वृषरूपेण जगदानन्दकारकः ।अष्टमूर्तेरधिष्टानमतः शान्तिं प्रयच्छ मे

dharma tvaṃ vṛṣarūpeṇa jagadānandakārakaḥ / aṣṭamūrteradhiṣṭānamataḥ śāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

तीन एवं चार दिनमें शुद्ध होनेका विधान है। जो अग्निहोत्रकर्मसे रहित है, वह पाँच दिनमें शुद्ध होता है। जो केवल “ब्राह्मण” नामधारी है (वेदाध्ययन या अग्निहोत्र नहीं करता), वह दस

English

"You, Dharma, in the form of a bull, the maker of the world's joy, the support of the eight-formed; therefore grant me peace."

अध्याय १६७

श्लोक 22

हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमवीजं विभावसोः ।अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे

hiraṇyagarbhagarbhasthaṃ hemavījaṃ vibhāvasoḥ / anantapuṇyaphaladamataḥ śāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

दिनमें शुद्ध होता है॥ ७--११॥ गुणवान् ब्राह्मण सात दिनपर शुद्ध होता है, गुणवान् क्षत्रिय नौ दिनमें, गुणवान् वैश्य दस दिनमें और गुणवान् शूद्र बीस दिनमें शुद्ध होता है। साधारण ब्राह्मण दस दिनमें, साधारण क्षत्रिय

English

"Gold seed in the womb of Hiranyagarbha, of fire, giving endless fruit of merit; therefore grant me peace."

अध्याय १६७

श्लोक 23

पीतवस्त्रयुगं यस्माद्वासुदेवस्य वल्लभं ।प्रदानात्तस्य वै विष्णुरतः शान्तिं प्रयच्छ मे

pītavastrayugaṃ yasmādvāsudevasya vallabhaṃ / pradānāttasya vai viṣṇurataḥ śāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

बारह दिनमें, साधारण वैश्य पंद्रह दिनमें और साधारण शूद्र एक मासमें शुद्ध होता है। गुणोंकी अधिकता होनेपर, यदि दस दिनका अशौच प्राप्त हो तो वह तीन ही दिनतक रहता है, तीन

English

"The pair of yellow garments, beloved of Vasudeva — by giving it, Vishnu; therefore grant me peace."

अध्याय १६७

श्लोक 24

विष्णुस्त्वं मत्स्यरूपेण यस्मादमृतसम्भवः ।चन्द्रार्कवाहनो नित्यमतः शान्तिं प्रयच्छ मे

viṣṇustvaṃ matsyarūpeṇa yasmādamṛtasambhavaḥ / candrārkavāhano nityamataḥ śāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

दिनोंतकका अशौच प्राप्त हो तो वह एक ही दिन रहता है तथा एक दिनका अशौच प्राप्त हो तो उसमें तत्काल ही शुद्धिका विधान है। इसी प्रकार सर्वत्र ऊहा कर लेनी चाहिए। दास, छात्र, गुरुके साथ रहते हों तो गुरु अथवा स्वामीको मृत्यु होनेपर इन सबको स्वामी एवं गुरुके कुटुम्बी-जनोंके समान ही पृथक्-पृथक् अशौच

English

"You are Vishnu in the form of a fish, from whom nectar arose, with moon and sun as vehicle always; therefore grant me peace."

अध्याय १६७

श्लोक 25

यस्मात्त्वं पृथिवी सर्वा धेनुः केशवसन्निभा ।सर्वपापहरा नित्यमतः शान्तिं प्रयच्छ मे

yasmāttvaṃ pṛthivī sarvā dhenuḥ keśavasannibhā / sarvapāpaharā nityamataḥ śāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

लगता है। जिसका अग्निसे संयोग न हो अर्थात् जो अग्निहोत्र न करता हो, उसे सपिण्ड पुरुषोंको मृत्यु होनेके बाद ही तुरंत अशौच लगता है; परंतु जिसके द्वारा नित्य अग्निहोत्रका अनुष्ठान होता

English

"Since you, the whole earth, are the cow like Keshava, destroyer of all sin always; therefore grant me peace."

अध्याय १६७

श्लोक 26

यस्मादायसकर्माणि तवाधीनानि सर्वदा ।लाङ्गलाद्यायुधादीनि अतः शान्तिं प्रयच्छ मे

yasmādāyasakarmāṇi tavādhīnāni sarvadā / lāṅgalādyāyudhādīni ataḥ śāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

हो, उस पुरुषको किसी कुटुम्बी या जाति- बन्धुको मृत्यु होनेपर जब उसका दाह-संस्कार सम्पन्न हो जाता है, उसके बाद अशौच प्राप्त होता है सभी वर्णके लोगोंको अशौचका एक तिहाई समय बीत जानेपर शारीरिक स्पर्शका अधिकार प्रा हो जाता है। इस नियमके अनुसार ब्राह्मण आदि वर्ण क्रमश: तीन, चार, पाँच तथा दस दिनके

English

"Since iron work is always under you — plows and weapons and the rest; therefore grant me peace."

अध्याय १६७

श्लोक 27

यस्मात्त्वं स्सर्वयज्ञानामङ्गत्वेन व्यवस्थितः ।योनिर्विभावसोर्नित्यमतः शान्तिं प्रयच्छ मे

yasmāttvaṃ ssarvayajñānāmaṅgatvena vyavasthitaḥ / yonirvibhāvasornityamataḥ śāntiṃ prayaccha me

हिन्दी अर्थ

अनन्तर स्पर्श करनेके योग्य हो जाते हैं। ब्राह्मण आदि वर्णोका अस्थिसंचय क्रमश: चार, पाँच, सात तथा नौ दिनोंपर करना चाहिए

English

"Since you stand as a limb of all sacrifices, the source of fire always; therefore grant me peace."

अध्याय १६७

श्लोक 28

गवामङ्गेषु तिष्ठन्ति भुवनानि चतुर्दश ।यस्मात्तस्माच्छिवं मे स्यादिह लोके परत्र च

gavāmaṅgeṣu tiṣṭhanti bhuvanāni caturdaśa / yasmāttasmācchivaṃ me syādiha loke paratra ca

हिन्दी अर्थ

जिस कन्याका वाग्दान नहीं किया गया है (और चूडाकरण हो गया है), उसको यदि वाग्दानसे पूर्व मृत्यु हो जाय तो बन्धु-बान्धवोंको एक दिनका अशौच लगता है। जिसका वाग्दान तो हो गया है, किंतु विवाह-संस्कार नहीं हुआ है, उस कन्याके मरनेपर तीन दिनका अशौच लगता है। यदि व्याही हुई बहिन या पुत्री आदिकी मृत्यु हो तो दो दिन एक रातका

English

"In the limbs of cows stand the fourteen worlds; since so, may welfare be mine here and hereafter."

अध्याय १६७

श्लोक 29

१ धर्मकामार्थसिद्धये इति ख॥ :प् १६४ यस्मादशून्यं शयनं केशवस्य शिवस्य च ।शय्या ममाप्यशून्यास्तु दत्ता जन्मनि जन्मनि(१)

1 dharmakāmārthasiddhaye iti kha.. :p 164 yasmādaśūnyaṃ śayanaṃ keśavasya śivasya ca / śayyā mamāpyaśūnyāstu dattā janmani janmani(1)

हिन्दी अर्थ

अशौच लगता है। कुमारी कन्याओंका वही गोत्र है, जो पिताका है। जिनका विवाह हो गया है, उन कन्याओंका गोत्र वह है, जो उनके पतिका है। विवाह हो जानेपर कन्याकी मृत्यु हो तो

English

"Since the bed of Keshava and Shiva is never empty, may my bed too be never empty, given birth after birth."

अध्याय १६७

श्लोक 30

यथा रत्नेषु सर्वेषु सर्वे देवाः प्रतिष्ठिताः ।तथा शान्तिं प्रयच्छन्तु रत्नदानेन मे सुराः

yathā ratneṣu sarveṣu sarve devāḥ pratiṣṭhitāḥ / tathā śāntiṃ prayacchantu ratnadānena me surāḥ

हिन्दी अर्थ

उसके लिये जलाञ्जलि-दानका कर्तव्य पितापर भी लागू होता है; पतिपर तो है ही। तात्पर्य यह १. यहाँ दो वर्षकी आयुवाले बालकके दाहसंस्कार तथा उसके निमित्त जलाञ्जलि-दानका निषेध भी मिलता है और विधान भी। अतः यह समझना चाहिए कि किया जाय तो उससे मृत जीवका उपकार होता है और न किया जाय तो भी बान्धवोंको कोई दोष नहीं

English

"As all gods are established in all jewels, so may the gods grant me peace by the gift of jewels."

अध्याय १६७

श्लोक 31

यथा भूमिप्रदानस्य कलां नार्हन्ति षोडशीं ।दानान्यन्यानि मे शान्तिर्भूमिदानाद्भवत्विह

yathā bhūmipradānasya kalāṃ nārhanti ṣoḍaśīṃ / dānānyanyāni me śāntirbhūmidānādbhavatviha

हिन्दी अर्थ

लगता। (मनु० ५। ७० को 'मन्वर्थ-मुक्तावली' टीका देखें ।)

English

"As other gifts do not deserve a sixteenth part of the gift of land, may peace be mine here from the gift of land."

अध्याय १६७

श्लोक 32

ग्रहयज्ञो ऽयुतहोमो दक्षिणाभी रणे जितिः ।विवाहोत्सवयज्ञेषु प्रतिष्ठादिषु कर्मषु

grahayajño 'yutahomo dakṣiṇābhī raṇe jitiḥ / vivāhotsavayajñeṣu pratiṣṭhādiṣu karmaṣu

हिन्दी अर्थ

२. मनुकी प्राचीन पोथियोंमें इसी आशयका श्लोक था, जिसका उल्लेख प्रायश्चित्ताध्यायके आशौच-प्रकरणमें २८-२९ श्लोकोंकी मिताक्षरामें किया गया है । यह विधान केवल स्वाध्याय और अग्निहोत्रकी सिद्धिके लिये है। संध्यावन्दन और अन्न-भोजन आदिके योग्य शुद्धि तो दस दिनके बाद ही होती है। जैसा कि यम आदिका वचन है-' उभयत्र दशाहानि कुलस्यान्नं न भुज्यते।' इत्यादि। कुलोंमें जलदानकी क्रिया प्रात होती है। यदि दस दिनोंके बाद और चूडाकरणके पहले कन्याकी मृत्यु हो तो माता-पिताको तीन दिनका अशौच लगता है और सपिण्ड पुरुषोंकी तत्काल ही

English

The planet sacrifice, the ten-thousand oblation, victory in battle by fees; in marriage festivals and sacrifices and in works like installation,

अध्याय १६७

श्लोक 33

सर्वकामाप्तये लक्षकोटिहोमद्वयं मतं ।गृहदेशे मण्डपे ऽथ(२) अयुते हस्तमात्रकं

sarvakāmāptaye lakṣakoṭihomadvayaṃ mataṃ / gṛhadeśe maṇḍape 'tha(2) ayute hastamātrakaṃ

हिन्दी अर्थ

शुद्धि होती है। चूडाकरणके बाद वाग्दानके पहलेतक उसकी मृत्यु होनेपर बन्धु-बान्धवोंको एक दिनका अशौच लगता है। वाग्दानके बाद विवाहके पहलेतक उन्हें तीन दिनका अशौच

English

for obtaining all desires, two oblations — a hundred thousand and a crore — are held. In the house region, in a pavilion, for ten thousand, a cubit-sized

अध्याय १६७

श्लोक 34

मेखलायोनिसंयुक्तं कुण्डञ्चत्वार ऋत्विजः ।स्वयमेको ऽपि वा लक्षे सर्वं दशगुणं हि तत्

mekhalāyonisaṃyuktaṃ kuṇḍañcatvāra ṛtvijaḥ / svayameko 'pi vā lakṣe sarvaṃ daśaguṇaṃ hi tat

हिन्दी अर्थ

प्राप्त होता है। तत्पश्चात् उस कन्याके भतीजोंको दो दिन एक रातका अशौच लगता है; किंतु अन्य सपिण्ड पुरुषोंकी तत्काल शुद्धि हो जाती है। ब्राह्मण सजातीय पुरुषोंके यहाँ जन्म-मरणमें सम्मिलित हो तो दस दिनमें शुद्ध होता है और क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्रके यहाँ जन्म-मृत्युमें

English

pit with girdle and yoni, four priests; or one himself; for a hundred thousand all tenfold;

अध्याय १६७

श्लोक 35

चतुर्हस्तं द्विहस्तं वा तार्क्षञ्चात्राधिकं यजेत् ।सामध्वनिशीरस्त्वं वाहनं पमेष्ठिनः

caturhastaṃ dvihastaṃ vā tārkṣañcātrādhikaṃ yajet / sāmadhvaniśīrastvaṃ vāhanaṃ pameṣṭhinaḥ

हिन्दी अर्थ

दिनमें शुद्ध होता है

English

four cubits or two cubits; one should worship Tarkshya more here. "Sama-sound-headed, you the vehicle of the Supreme,

अध्याय १६७

श्लोक 36

विषयापहरो नित्यमतः शान्तिं प्रयच्छ मे ।पूर्ववत् कुण्डमामन्त्र्य लक्षहोमं समाचरेत्

viṣayāpaharo nityamataḥ śāntiṃ prayaccha me / pūrvavat kuṇḍamāmantrya lakṣahomaṃ samācaret

हिन्दी अर्थ

यह जो अशौच-सम्बन्धी नियम निश्चित किया गया है, वह सपिण्ड पुरुषासे ही सम्बन्ध रखता है, ऐसा जानना चाहिए। अब जो औरस नहीं हैं, ऐसे पुत्र आदिके विषयमें बताऊँगा। औरस-िन्न क्षेत्रज, दत्तक आदि पुत्रोंके मरनेपर तथा जिसने अपनेको छोड़कर दूसरे पुरुषसे सम्बन्ध जोड़ लिया हो अथवा जो दूसरे पतिको छोड़कर आयी हो और अपनी भार्या बनकर

English

always remover of objects; therefore grant me peace." Having invited the pit as before one should perform the hundred-thousand oblation;

अध्याय १६७

श्लोक 37

वसोर्धारां ततो दद्याच्छय्याभूषादिकं ददेत् ।तत्रापि दश चाष्टौ च लक्षहोमे तथर्त्विजः

vasordhārāṃ tato dadyācchayyābhūṣādikaṃ dadet / tatrāpi daśa cāṣṭau ca lakṣahome tathartvijaḥ

हिन्दी अर्थ

रहती रही हो, ऐसी स्त्रीक मरनेपर तीन रातमें अशौचको निवृत्ति होती है। स्वधर्मका त्याग करनेके कारण जिनका जन्म व्यर्थ हो गया हो, जो वर्णसंकर संतान हो अर्थात् नीचवर्णके पुरुष

English

then one should give the Vasu-stream, give a bed, ornaments and the rest. There too ten and eight priests for the hundred-thousand oblation;

अध्याय १६७

श्लोक 38

पुत्रान्नराज्यविजयभुक्तिमुक्त्यादि(३) चाप्नुयात् ।दक्षिणाभिः फलेनास्माच्छत्रुघ्नः कोटिहोमकः

putrānnarājyavijayabhuktimuktyādi(3) cāpnuyāt / dakṣiṇābhiḥ phalenāsmācchatrughnaḥ koṭihomakaḥ

हिन्दी अर्थ

और उच्चवर्णकी स्त्रीसे जिसका जन्म हुआ हो, जो संन्यासी बनकर इधर-उधर घूमते-फिरते रहे हों और जो आशास्त्रीय विधिसे विष-बन्धन आदिके द्वारा प्राणत्याग कर चुके हों, ऐसे लोगोंके निमित्त बान्धवोंको जलाझलि-दान नहीं

English

one obtains sons, food, kingdom, victory, enjoyment, liberation and the rest; by fees and fruit therefore the crore-oblator is the destroyer of enemies.

अध्याय १६७

श्लोक 39

१ तथा जन्मनि जन्मनीति ङ॥ २ गृहादौ मण्डपे वाथेति ख॥ ।गृहादौ मण्डपे चैवमिति ञ॥ ३ पुत्रार्थराज्यविजयभुक्तिमुक्त्यादीति ख॥ , ङ॥ च :प् १६५ चतुर्हस्तं चाष्टहस्तं कुण्डन्द्वादश च द्विजाः ।पञ्चविंशं षोडशं वा पटे द्वारे चतुष्टयं

1 tathā janmani janmanīti ṅa.. 2 gṛhādau maṇḍape vātheti kha.. / gṛhādau maṇḍape caivamiti ña.. 3 putrārtharājyavijayabhuktimuktyādīti kha.. , ṅa.. ca :p 165 caturhastaṃ cāṣṭahastaṃ kuṇḍandvādaśa ca dvijāḥ / pañcaviṃśaṃ ṣoḍaśaṃ vā paṭe dvāre catuṣṭayaṃ

हिन्दी अर्थ

करना चाहिए; उनके लिये उदक-क्रिया निवृत्त हो जाती है। एक ही माताद्वारा दो पिताओंसे उत्पन्न जो दो भाई हों, उनके जन्ममें सपिण्ड पुरुषोंको एक दिनका अशौच लगता है और

English

A pit of four or eight cubits, twelve Brahmins; twenty-five or sixteen; on the cloth four at the door;

अध्याय १६७

श्लोक 40

कोटिहोमी सर्वकामी विष्णुलोकं स गच्छति ।होमस्तु ग्रहमन्त्रैर् वा गायत्र्या वैष्णवैर् अपि

koṭihomī sarvakāmī viṣṇulokaṃ sa gacchati / homastu grahamantrair vā gāyatryā vaiṣṇavair api

हिन्दी अर्थ

मरनेपर दो दिनका। यहाँतक सपिण्डोंका अशौच बताया गया। अब 'समानोदक'का बता रहा दाँत निकलनेसे पहले बालककी मृत्यु हो जाय, कोई सपिण्ड पुरुष देशान्तरमें रहकर मरा हो और उसका समाचार सुना जाय तथा किसी असपिण्ड पुरुषको मृत्यु हो जाय--तो इन सब

English

the crore-oblator gets all desires and goes to Vishnu's world. The oblation with planet-mantras or the Gayatri or Vaishnava,

अध्याय १६७

श्लोक 41

जातवेदोमुखैः शैवैः(१) वैदिकैः प्रथितैर् अपि ।तिलैर् यवैर् घृतैर् अश्वमेधफलादिभाक्

jātavedomukhaiḥ śaivaiḥ(1) vaidikaiḥ prathitair api / tilair yavair ghṛtair aśvamedhaphalādibhāk

हिन्दी अर्थ

अवस्थाओंमें (नियत अशौचका काल बिताकर) वस्त्रसहित जलमें डुबकी लगानेपर तत्काल ही शुद्धि हो जाती है। मृत्यु तथा जन्मके अवसरपर सपिण्ड पुरुष दस दिनोंमें शुद्ध होते हैं, एक

English

with those beginning with Jatavedas, Shaiva, Vedic and famed ones; with sesame, barley, ghee one obtains the fruit of the Ashvamedha and the rest.

अध्याय १६७

श्लोक 42

विद्वेषणाभिचारेषु त्रिकोणं कुण्डमिष्यते ।समिधो वामहस्तेन श्येनास्थ्यनलसंयुताः

vidveṣaṇābhicāreṣu trikoṇaṃ kuṇḍamiṣyate / samidho vāmahastena śyenāsthyanalasaṃyutāḥ

हिन्दी अर्थ

कुलके असपिण्ड पुरुष तीन रातमें शुद्ध होते हैं और एक गोत्रवाले पुरुष स्नान करनेमात्रसे शुद्ध हो जाते हैं। सातवीं पीढ़ीमें सपिण्डभावकी निवृत्ति हो जाती है और चौदहवीं पीढ़ीतक समानोदक सम्बन्ध भी समाप्त हो जाता है। किसीके मतमें जन्म और नामका स्मरण न रहनेपर अर्थात् हमारे कुलमें अमुक पुरुष हुए थे, इस प्रकार जन्म और नाम दोनोंका ज्ञान न

English

For hatred and malevolent rites a triangular pit is prescribed; fuel sticks with the left hand joined with hawk-bone and fire,

अध्याय १६७

श्लोक 43

रक्तभूषैर् मुक्तकेशैर् ध्यायद्भिरशिवं रिपोः ।दुर्मित्रियास्तस्मै सन्तु यो द्वेष्टि हुं फडिति च

raktabhūṣair muktakeśair dhyāyadbhiraśivaṃ ripoḥ / durmitriyāstasmai santu yo dveṣṭi huṃ phaḍiti ca

हिन्दी अर्थ

रहनेपर-समानोदकभाव निवृत्त हो जाता है। इसके बाद केवल गोत्रका सम्बन्ध रह जाता है। जो दशाह बीतनेके पहले परदेशमें रहनेवाले किसी जाति-बन्धुको मृत्युका समाचार सुन लेता

English

with red ornaments, loose hair, meditating the enemy's ill: "May the evil-minded be his who hates; hum phat."

अध्याय १६७

श्लोक 44

छिन्द्यात् क्षुरेण प्रतिमां पिष्टरूपं रिपुं हनेत्(२) ।यजेदेकं पीडकं वा यः स कृत्वा दिवं व्रजेत्

chindyāt kṣureṇa pratimāṃ piṣṭarūpaṃ ripuṃ hanet(2) / yajedekaṃ pīḍakaṃ vā yaḥ sa kṛtvā divaṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

है, उसे दशाहमें जितने दिन शेष रहते हैं, उतने ही दिनका अशौच लगता है। दशाह बीत जानेपर उक्त समाचार सुने तो तीन रातका अशौच प्राप्त होता है जलका स्पर्श करके ही मनुष्य शुद्ध हो जाता है। मामा, शिष्य, ऋत्विक् तथा बान्धवजनोंके मरनेपर

English

One should cut the image with a razor; one should kill the enemy of flour form. Whoever worships one afflicter, having done so goes to heaven.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 167
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.