Agni Purana· Agni Purāṇa
177
अध्याय 177 / 381

Adhyaya 177

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अध्याय १७७

श्लोक 1

द्वितीयाव्रतानि अग्निर् उवाच द्वितीयाव्रतकं वक्ष्ये भुक्तिमुक्तिदायकं ।पुष्पाहारी द्वितीयायामश्विनौ पूजयेत् सुरौ

dvitīyāvratāni agnir uvāca dvitīyāvratakaṃ vakṣye bhuktimuktidāyakaṃ / puṣpāhārī dvitīyāyāmaśvinau pūjayet surau

हिन्दी अर्थ

अग्निदेब कहते हैं- वसिष्ठ! अब मैं स्वयं ब्राह्मणका वध करता है, वह 'ब्रह्मघाती' ब्रह्माके द्वारा वर्णित पापोंका नाश करनेवाले होता है। यदि एक कार्यमें तत्पर बहुत-से प्रायश्चित्त बतलाता हूँ। जिससे प्राणोंका शरीरसे शस्त्रधारी मनुष्योमें कोई एक ब्राह्मणका वध वियोग हो जाय, उस कार्यको 'हनन' कहते हैं । करता है, तो वे सब-के-सब 'घातक' माने जाते

English

(The demonesses and demons) Garaki, Skandavikata Vidari, Putana, Jambha, Papa and Pili-piccha should be wor¬ shipped outside in the directions of north-east etc.

अध्याय १७७

श्लोक 2

अब्दं स्वरूपसौभाग्यं स्वर्गभाग् जायते व्रती ।कार्त्तिके शुक्तिपक्षस्य(१) दितीयायां यमं यजेत्

abdaṃ svarūpasaubhāgyaṃ svargabhāg jāyate vratī / kārttike śuktipakṣasya(1) ditīyāyāṃ yamaṃ yajet

हिन्दी अर्थ

जो राग, द्वेष अथवा प्रमादवश दूसरेके द्वारा या हैं। ब्राह्मण किसीके द्वारा निन्दित होनेपर, मारा १. विष्णवे विष्णवे नित्यं विष्णवे विष्णवे नमः । नमामि विष्णुं चित्तस्थमहंकारगतिं हरिम्॥ चित्तस्थमीशमव्यक्तमनन्तमपराजितम् । विष्णुमीड्यमशेषेण अनादिनिधनं विभुम्॥ विष्णुश्चित्तततो यन्मे विष्णुर्बुद्धितश्च यत् । यच्चाहंकारगो विष्णुर्यद्रिष्णुर्मयि संस्थितः॥ करोति कर्मभूतोऽसौ स्थावरस्य चरस्य च । तत् पापं नाशमायातु तस्मिन्नेव हि चिन्तिते॥

English

There should be eightyone divisions of squares (in the case of a site relating to) a house. The same should be one hund¬ red divisions (if it relates to) a (temple) pavilion. As before, the gods should be worshipped. (Lord) Brahma (should be worshipped) in the sixteen squares (at the centre).

अध्याय १७७

श्लोक 3

अब्दमुपोषितः स्वर्गं गच्छेन्न नरकं व्रती ।अशून्यशयनं वक्ष्ये अवैधव्यादिदायकं

abdamupoṣitaḥ svargaṃ gacchenna narakaṃ vratī / aśūnyaśayanaṃ vakṣye avaidhavyādidāyakaṃ

हिन्दी अर्थ

ध्यातो हरति यत् पापं स्वप्ने दृष्टस्तु भावनात् । तमुपेन्द्रमहं विष्णुं प्रणतार्तिहर हरिम्॥ जगत्यस्मिन्निराधारे मज्जमाने तमस्यधः । हस्तावलम्बनं विष्णुं प्रणमामि परात्परम्॥ सर्वेश्वरेश्वर विभो परमात्मन्नधोक्षज । हृषीकेश हृषीकेश हृषीकेश नमोऽस्तु ते॥ नृसिंहानन्त गोविन्द भूतभावन केशव । दुरुक्तं दुष्कृतं ध्यातं शमयाघं नमोऽस्तु ते॥

English

O Guha (Kumara, son of Lord Siva and Parvati)!

अध्याय १७७

श्लोक 4

कृष्णपक्षे द्वितीयायां श्रावणास्य चरेदिदं ।श्रीवत्सधारिन् श्रिकान्त श्रीधामन् श्रीपते ऽव्यय

kṛṣṇapakṣe dvitīyāyāṃ śrāvaṇāsya caredidaṃ / śrīvatsadhārin śrikānta śrīdhāman śrīpate 'vyaya

हिन्दी अर्थ

यन्मया चिन्तितं दुष्टं स्वचित्तवशवर्तिना । अकार्यं महदत्युग्रं तच्छमं नय केशव॥ ब्रह्मण्यदेव गोविन्द परमार्थपरायण । जगन्नाथ जगद्धातः पापं प्रशमयाच्युत॥ यथापराह्ले सायाहे मध्याहे च तथा निशि। कायेन मनसा वाचा कृतं पापमजानता॥ जानता च हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव। नामत्रयोच्चारणतः पापं यातु मम क्षयम्॥ शरीरं मे हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव। पापं प्रशमयाद्य त्वं वाक्कृतं मम माधव॥ यद् भुञ्जन् यत् स्वपंस्तिष्ठन् गच्छन् जाग्रद् यदास्थितः । कृतवान् पापमद्याहं कायेन मनसा गिरा॥ यत् स्वल्पमपि यत् स्थूलं कुयोनिनरकावहम् । तद् यातु प्रशमं सर्व वासुदेवानुकीर्तनात्॥ परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं च यत्। तस्मिन् प्रकीर्तिते विष्णौ यत् पापं तत् प्रणश्यतु॥

English

The entire circumference would measure twenty- two cubits. The width of the wall would measure nine. Th above measures would hold good in the case of pavilions known as iiv&iraya Sivdkhya rudra-hina and sadobhaya.

अध्याय १७७

श्लोक 5

गार्हस्थ्यं मा प्रणाशं मे यातु धर्मार्थकामदं ।अग्नयी मा प्रणश्यन्तु मा प्रणश्यन्तु देवताः

gārhasthyaṃ mā praṇāśaṃ me yātu dharmārthakāmadaṃ / agnayī mā praṇaśyantu mā praṇaśyantu devatāḥ

हिन्दी अर्थ

(अग्निपुराण १७२। २-१८)

English

(The pavilions of) the Savitra class would measure eighteen cubits in length and fifteen in breadth, and the width of the walls would be made equal to a thirtieth part of the above.

अध्याय १७७

श्लोक 6

पितरो मा प्रणश्यन्तु मत्तो दाम्पत्यभेदतः ।लक्ष्म्या वियुज्यते देवो न कदाशिद्यथा भवान्

pitaro mā praṇaśyantu matto dāmpatyabhedataḥ / lakṣmyā viyujyate devo na kadāśidyathā bhavān

हिन्दी अर्थ

२. पापप्रणाशनं स्तोत्रं यः पठेच्छुणुयादपि । शारीरैर्मानसैर्वाग्जैः कृतैः पापैः प्रमुच्यते॥ सर्वपापग्रहादिभ्यो याति विष्णोः परं पदम् । तस्मात् पापे कृते ज्यं स्तोत्रं सर्वाधमर्दनम्॥ (अग्निपुराण १७२। १९-२१)

English

The height of the walls above the plinth would measure thrice the width thereof. The ground elevation of manifold kinds depending on the passages should be in a same line with the foot of the wall.

अध्याय १७७

श्लोक 7

तथा कलत्रसम्बन्धो देव मा मे विभिद्यतां ।लक्ष्म्या न शून्यं वरद यथा ते शयनं विभो

tathā kalatrasambandho deva mā me vibhidyatāṃ / lakṣmyā na śūnyaṃ varada yathā te śayanaṃ vibho

हिन्दी अर्थ

जानेपर या बन्धनसे पीड़ित होनेपर जिसके उद्देश्यसे प्राणोंका परित्याग कर देता है, उसे 'ब्रह्महत्यारा' माना गया है। औषधोपचार आदि उपकार करनेपर किसीकी मृत्यु हो जाय तो उसे

English

"Likewise may my bond with my wife not be broken, god; as Lakshmi's bed is never empty of her, O boon-giver, Lord,

अध्याय १७७

श्लोक 8

शय्या ममाप्यशून्यास्तु तथैव मधुसूदन ।लक्ष्मीं विष्णुं यजेदव्दं दद्याच्छय्यां फलानि च

śayyā mamāpyaśūnyāstu tathaiva madhusūdana / lakṣmīṃ viṣṇuṃ yajedavdaṃ dadyācchayyāṃ phalāni ca

हिन्दी अर्थ

पाप नहीं होता। पुत्र, शिष्य अथवा पत्नीको दण्ड देनेपर उनकी मृत्यु हो जाय, उस दशामें भी दोष नहीं होता। जिन पापोंसे मुक्त होनेका उपाय नहीं बतलाया गया है, देश, काल, अवस्था, शक्ति और पापका विचार करके यत्नपूर्वक प्रायश्चित्तकी व्यवस्था देनी चाहिए। गौ अथवा ब्राह्मणके लिये तत्काल अपने प्राणोंका परित्याग कर दे, अथवा अग्निमें अपने शरीरको आहुति दे डाले तो

English

so may my bed too be never empty, Madhusudana." One should worship Lakshmi and Vishnu for a year and give a bed and fruits;

अध्याय १७७

श्लोक 9

प्रतिमासं च सोमाय दद्यादर्घ्यं समन्त्रकं ।१ शुक्तपक्षे तु इति ग॥ :प् २०० गगनाङ्गणसन्दीप दुग्धाब्धिमथनोद्भव

pratimāsaṃ ca somāya dadyādarghyaṃ samantrakaṃ / 1 śuktapakṣe tu iti ga.. :p 200 gaganāṅgaṇasandīpa dugdhābdhimathanodbhava

हिन्दी अर्थ

मनुष्य ब्रह्महत्याके पापसे मुक्त हो जाता है। ब्रह्महत्यारा मृतकके सिरका कपाल और ध्वज लेकर भिक्षान्नका भोजन करता हुआ “मैंने ब्रा्मगका वध किया है'-इस प्रकार अपने

English

every month one should give arghya to Soma with a mantra: "Lamp of the sky's courtyard, born from the churning of the milk-ocean,

अध्याय १७७

श्लोक 10

भाभासितादिगाभोग रामानुज नमो ऽस्तु ते ।ॐ श्रीं श्रीधराय नमः सोमात्मानं हरिं यजेत्

bhābhāsitādigābhoga rāmānuja namo 'stu te / oṃ śrīṃ śrīdharāya namaḥ somātmānaṃ hariṃ yajet

हिन्दी अर्थ

पापकर्मको प्रकाशित करे। वह बारह वर्षतक नियमित भोजन करके शुद्ध होता है। अथवा शुद्धिके लिये प्रयत्न करनेवाला ब्रह्मघाती मनुष्य छः वर्षोमे ही पवित्र हो जाता है। आज्ञानवश पापकर्म करनेवालोंको अपेक्षा जान-बूझकर पाप करनेवालेके लिये दुगुना प्रायश्चित्त विहित है। ब्राह्मणके वधमें प्रवृत्त होनेपर तीन वर्षतक प्रायश्चित्त करे। ब्रह्मघाती क्षत्रियको दुगुना तथा

English

shining over the directions, younger brother of Rama, homage to you." "Om Shrim, homage to Shridhara" — one should worship Hari as the Self of the Moon;

अध्याय १७७

श्लोक 11

घं ढं भं हं श्रियै नमो दशरूपमहात्मने ।घृतेन होमो नक्तञ्च शय्यां दद्याद्द्विजातये(१)

ghaṃ ḍhaṃ bhaṃ haṃ śriyai namo daśarūpamahātmane / ghṛtena homo naktañca śayyāṃ dadyāddvijātaye(1)

हिन्दी अर्थ

वैश्य एवं शूद्रको छःगुना प्रायश्चित्त करना चाहिए। अन्य पापोंका ब्राह्मणको सम्पूर्ण, क्षत्रियको तीन चरण, वैश्यको आधा और शूद्र, वृद्ध, स्त्री, बालक एवं रोगीको एक चरण प्रायश्चित्त करना

English

"Gham Dham Bham Ham, homage to Shri, to the ten-formed great Self." Oblation with ghee, and at night one should give a bed to a twice-born,

अध्याय १७७

श्लोक 12

दीपान्नभाजनैर् युक्तं छत्रोपानहमासनं ।सोदकुम्भञ्च प्रतिमां विप्रायाथ च पात्रकं(२)

dīpānnabhājanair yuktaṃ chatropānahamāsanaṃ / sodakumbhañca pratimāṃ viprāyātha ca pātrakaṃ(2)

हिन्दी अर्थ

क्षत्रियका वध करनेपर ब्रह्महत्याका एकपाद, वैश्यका वध करनेपर अष्टमांश और सदाचारपरायण शूद्रका वध करनेपर षोडशांश प्रायश्चित्त माना गया है। सदाचारिणी स्त्रीकी हत्या करके शूद्रहत्याका प्रायश्चित्त करे। गोहत्यारा संयतचित्त होकर एक

English

joined with lamp, food and vessels, umbrella, shoes and seat, a pot with water, an image and a vessel to a Brahmin.

अध्याय १७७

श्लोक 13

पत्न्या य एवं कुरुते भुक्तिमुक्तिमवाप्नुयात् ।कान्तिव्रतं प्रवक्ष्यामि कार्त्तिकस्य सिते चरेत्

patnyā ya evaṃ kurute bhuktimuktimavāpnuyāt / kāntivrataṃ pravakṣyāmi kārttikasya site caret

हिन्दी अर्थ

मासतक गोशालामें शयन करे, गौओंका अनुगमन करे और पञ्चगव्य पीकर रहे। फिर गोदान करनेसे वह शुद्ध हो जाता है। 'कृच्छु” अथवा 'अतिकृच्छु' कोई भी व्रत हो, क्षत्रियोंको उसके

English

The man who so does with his wife obtains enjoyment and liberation. I shall tell the Kanti vow: one should perform it in the bright half of Kartika;

अध्याय १७७

श्लोक 14

नक्तभोजी द्वितीयायां पूजयेद् बलकेशवौ ।वर्षं प्राप्नोति वै कान्तिमायुरारोग्यकादिकं

naktabhojī dvitīyāyāṃ pūjayed balakeśavau / varṣaṃ prāpnoti vai kāntimāyurārogyakādikaṃ

हिन्दी अर्थ

तीन चरणोंका अनुष्ठान करना चाहिए। अत्यन्त रोगिणी स्त्रीको हत्या करके द्विज पूर्वोक्त विधिके अनुसार ब्रह्महत्याका आधा प्रायश्चित्त करे। फिर ब्राह्मणोंको भोजन कराये और यथाशक्ति तिल एवं सुवर्णका दान करे। मुक्के या थप्पड़के

English

eating at night on the second, one should worship Bala and Keshava; in a year one obtains radiance, life, health and the like.

अध्याय १७७

श्लोक 15

अथ शिष्णुव्रतं वक्ष्ये मनोवाञ्छितदायकं ।पौषशुक्लद्वितीयादि कृत्वा दिनचतुष्टयं

atha śiṣṇuvrataṃ vakṣye manovāñchitadāyakaṃ / pauṣaśukladvitīyādi kṛtvā dinacatuṣṭayaṃ

हिन्दी अर्थ

प्रहारसे, सींग तोड्नेसे और लाठी आदिसे मारनेपर यदि गौ मर जाय तो उसे 'गोवध' कहा जाता है। मारने, बाँधने, गाड़ी आदिमें जोतने, रोकने अथवा रस्सीका फंदा लगानेसे गौकी मृत्यु हो

English

Now I shall tell the Shishnu vow, giver of mental wishes: beginning with the bright second of Pausha, for four days,

अध्याय १७७

श्लोक 16

पूर्वं सिद्धार्थकैः स्नानं ततः कृष्णतिलैः(३)स्मृतं ।वचया च तृतीये ऽह्नि सर्वौषध्या चतुर्थके

pūrvaṃ siddhārthakaiḥ snānaṃ tataḥ kṛṣṇatilaiḥ(3)smṛtaṃ / vacayā ca tṛtīye 'hni sarvauṣadhyā caturthake

हिन्दी अर्थ

जाय तो तीन चरण प्रायश्चित्त करे। काठसे गोवध करनेवाला 'सांतपनव्रत', ढेलेसे मारनेवाला “प्राजापत्य', पत्थरसे हत्या करनेवाला ' तपकृच्छ्' और शस्त्रसे वध करनेवाला 'अतिकृच्छु' करे। बिल्ली, गोह, नेवला, मेढक, कुत्ता अथवा पक्षीकी हत्या करके तीन दिन दूध पीकर रहे; अथवा “प्राजापत्य' या “चान्द्रायण' व्रत करे

English

first a bath with mustard, then with black sesame; on the third day with vacha; on the fourth with all herbs;

अध्याय १७७

श्लोक 17

मुरामांषी वचा कुष्ठं शैलेयं रजनीद्वर्य(४) ।सटी चम्पकमुस्तञ्च सर्वौषधिगणः स्मृतः

murāmāṃṣī vacā kuṣṭhaṃ śaileyaṃ rajanīdvarya(4) / saṭī campakamustañca sarvauṣadhigaṇaḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

गुप्त पाप होनेपर गुप्त और प्रकट पाप होनेपर प्रकट प्रायश्चित्त करे। समस्त पापोंके विनाशके लिये सौ प्राणायाम करे। कटहल, द्राक्षा, महुआ, खजूर, ताड, ईख और मुनक्केका रस तथा

English

mura, mamsi, vacha, kushtha, shaileya, two turmerics, shati, champaka, musta — the group of all herbs is remembered.

अध्याय १७७

श्लोक 18

नाम्ना कृष्णाच्युतानन्त हृषीकेशेति पूजयेत् ।पादे नाभ्यां चक्षुषि च क्रमाच्छिरसि पुष्पकैः

nāmnā kṛṣṇācyutānanta hṛṣīkeśeti pūjayet / pāde nābhyāṃ cakṣuṣi ca kramācchirasi puṣpakaiḥ

हिन्दी अर्थ

टंकमाध्वीक, मैरेय और नारियलका रस--ये मादक होते हुए भी मद्य नहीं हैं। पैटी ही मुख्य सुरा मानी गयी है। ये सब मदिराएँ द्विजोंके लिये निषिद्ध हैं। सुरापान करनेवाला खौलता हुआ जल पीकर शुद्ध होता है। अथवा सुरापानके पापसे मुक्त होनेके लिये एक वर्षतक जटा एवं ध्वजा धारण किये हुए वनमें निवास करे। नित्य रात्रिके समय एक बार चावलके कण या

English

One should worship with the names Krishna, Achyuta, Ananta, Hrishikesha; at the foot, navel, eye and in order on the head with flowers;

अध्याय १७७

श्लोक 19

शशिचन्द्रशशाङ्केन्दुसञ्ज्ञाभिश्चार्घ्यं इन्दवे ।नक्तं भुञ्जीत च नरो यावत्तिष्ठति चन्द्रमाः

śaśicandraśaśāṅkendusañjñābhiścārghyaṃ indave / naktaṃ bhuñjīta ca naro yāvattiṣṭhati candramāḥ

हिन्दी अर्थ

तिलकी खलीका भोजन करे। अज्ञानबश मल-

English

and give arghya to the moon with the names Shashi, Chandra, Shashanka, Indu. A man should eat at night as long as the moon stays;

अध्याय १७७

श्लोक 20

१ शय्यां दद्याद्द्वितीयके इति ख॥ , ग॥ , घ॥ , ङ॥ , छ॥ , ज॥ , ञ॥ , ट॥ च २ विप्रायाथ च पानकमिति घ॥ , ञ॥ च ३ शुक्ततिलैर् इति ग॥ ४ पूर्वं सिद्धार्थकैर् इत्यादिः, रजनीद्वयमित्यन्तः पाठः झ॥ पुस्तके नास्ति :प् २०१ षण्मासं पावनं चाब्दं प्राप्नुयात् सकलं व्रती ।एतद् व्रतं नृपैः स्त्रीभिः कृतं पूर्वं सुरादिभिः

1 śayyāṃ dadyāddvitīyake iti kha.. , ga.. , gha.. , ṅa.. , cha.. , ja.. , ña.. , ṭa.. ca 2 viprāyātha ca pānakamiti gha.. , ña.. ca 3 śuktatilair iti ga.. 4 pūrvaṃ siddhārthakair ityādiḥ, rajanīdvayamityantaḥ pāṭhaḥ jha.. pustake nāsti :p 201 ṣaṇmāsaṃ pāvanaṃ cābdaṃ prāpnuyāt sakalaṃ vratī / etad vrataṃ nṛpaiḥ strībhiḥ kṛtaṃ pūrvaṃ surādibhiḥ

हिन्दी अर्थ

श्रीगङ्गाजी अग्नि० अ० ५० श्रीयमुनाजी अग्नि० अ० ५० मूत्र अथवा मदिरासे छूये हुए पदार्थका भक्षण करके ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य-तीनों वर्णोके लोग पुनः संस्कारके योग्य हो जाते हैं। सुरापात्रमें रखा हुआ जल पीकर सात दिन व्रत करे।

English

for six months, a year, the vower obtains all purity. This vow was done by kings and women and gods earlier.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 177
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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