अध्याय १७७
श्लोक 1
द्वितीयाव्रतानि अग्निर् उवाच द्वितीयाव्रतकं वक्ष्ये भुक्तिमुक्तिदायकं ।पुष्पाहारी द्वितीयायामश्विनौ पूजयेत् सुरौ
dvitīyāvratāni agnir uvāca dvitīyāvratakaṃ vakṣye bhuktimuktidāyakaṃ / puṣpāhārī dvitīyāyāmaśvinau pūjayet surau
हिन्दी अर्थ
अग्निदेब कहते हैं- वसिष्ठ! अब मैं स्वयं ब्राह्मणका वध करता है, वह 'ब्रह्मघाती' ब्रह्माके द्वारा वर्णित पापोंका नाश करनेवाले होता है। यदि एक कार्यमें तत्पर बहुत-से प्रायश्चित्त बतलाता हूँ। जिससे प्राणोंका शरीरसे शस्त्रधारी मनुष्योमें कोई एक ब्राह्मणका वध वियोग हो जाय, उस कार्यको 'हनन' कहते हैं । करता है, तो वे सब-के-सब 'घातक' माने जाते
English
(The demonesses and demons) Garaki, Skandavikata Vidari, Putana, Jambha, Papa and Pili-piccha should be wor¬ shipped outside in the directions of north-east etc.