Agni Purana· Agni Purāṇa
187
अध्याय 187 / 381

Adhyaya 187

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अध्याय १८७

श्लोक 1

एकादशीव्रतं अग्निर् उवाच एकादशीव्रतं वक्ष्ये भुक्तिमुक्तिप्रदायाकं ।दशम्यान्नियताहारो मांसमैथुनवर्जितः(१)

ekādaśīvrataṃ agnir uvāca ekādaśīvrataṃ vakṣye bhuktimuktipradāyākaṃ / daśamyānniyatāhāro māṃsamaithunavarjitaḥ(1)

हिन्दी अर्थ

और “जयायै नमः' (जयाको नमस्कार)-यों कहकर गौरी देवीकी अर्चना करे। त्रिपुरघ्नाय रुद्राय नमः ' (त्रिपुरविनाशक रुद्रदेवको नमस्कार) तथा ' भवान्यै नमः' (भवानीको नमस्कार) यह कहकर क्रमशः शिव-पार्वतीको दोनों जङ्घाओंका और 'रुद्रायेश्वराय नमः ' (सबके ईश्वर रुद्रदेवको नमस्कार है) एवं “विजयायै नमः ' (विजयाको नमस्कार)--यह कहकर क्रमशः शंकर और

English

These continents are surrounded by seven oceans namely, Lavana (salt), Iksu (sugarcane juice), Sura (ntar), Sarpis (clarified butter), Dadhi (curd), Dugdha (milk) and Jala (water) of even proportions.

अध्याय १८७

श्लोक 2

एकदश्यां न भुञ्जीत पक्षयोरुभयोरपि ।द्वादश्येकादशी यत्र तत्र सन्निहितो हरिः

ekadaśyāṃ na bhuñjīta pakṣayorubhayorapi / dvādaśyekādaśī yatra tatra sannihito hariḥ

हिन्दी अर्थ

पार्वतीके घुटनोंका पूजन करे। “ईशायै नमः' (सर्वेश्वरीको नमस्कार)--यह कहकर देवीके और “शंकराय नमः' ऐसा कहकर शंकरके कटिभागकी पूजा करे। 'कोटव्यै नमः'

English

The mountain rises to thirty two thousand (jojanas) above (the earth) and spreads to sixteen thousand (jojanas) under the earth. Its peaks are in the shape of a pericarp of a lotus.

अध्याय १८७

श्लोक 3

तत्र(२) क्रतुशतं पुण्यं त्रयोदश्यां तु पारणे ।एकादशी कला यत्र परतो द्वादशो गता(३)

tatra(2) kratuśataṃ puṇyaṃ trayodaśyāṃ tu pāraṇe / ekādaśī kalā yatra parato dvādaśo gatā(3)

हिन्दी अर्थ

(कोटवीदेवीको नमस्कार) और 'शूलपाणये नमः' (त्रिशूलधारीको नमस्कार)--याँ कहकर क्रमशः गौरीशंकरके कुक्षिदेशका पूजन करे। “मङ्गलायै नमः ' (मङ्गलादेवीको नमस्कार) कहकर भवानीके और 'तुभ्यं नमः ' (आपको नमस्कार)-- यह कहकर शंकरके उदरका पूजन करे। ' सर्वात्मने

English

Himavan, Hemakuta and Nisadha are in the southern part. Nila, 6vcta and Sfhgi are the varmparvatas (boundary mountains) in the northern part.

अध्याय १८७

श्लोक 4

तत्र क्रतुशतं पुण्यन्त्रयोदश्यान्तु पारणे ।दशम्येकादशीमिश्रा नोपोष्या नरकप्रदा

tatra kratuśataṃ puṇyantrayodaśyāntu pāraṇe / daśamyekādaśīmiśrā nopoṣyā narakapradā

हिन्दी अर्थ

नमः (सम्पूर्ण प्राणियोंके आत्मभूत शिवको नमस्कार)-यों कहकर रुद्रके और 'ईशान्यै नमः (ईशानीको नमस्कार) कहकर पार्वतीके स्तनयुगलका पूजन करे। 'देवात्मने नमः'

English

There a hundred sacrifices' merit at the breaking of the fast on the thirteenth. A tenth mixed with an eleventh is not to be fasted; it gives hell.

अध्याय १८७

श्लोक 5

एकादश्यान्निराहारो भुक्त्वा चैवापरे ऽहनि ।भोक्ष्ये ऽहं पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत

ekādaśyānnirāhāro bhuktvā caivāpare 'hani / bhokṣye 'haṃ puṇḍarīkākṣa śaraṇaṃ me bhavācyuta

हिन्दी अर्थ

(देवताओंके आत्मभूत शंकरको नमस्कार) कहकर शिवके और उसी प्रकार ' ह्लादिन्यै नमः' (सबको आह्लाद प्रदान करनेवाली गौरीको नमस्कार) कहकर पार्वतीके कण्ठप्रदेशकी अर्चना करे। ‘महादेवाय नमः ' (महादेवको नमस्कार) और ' अनन्तायै नमः' (अनन्ताको नमस्कार) कहकर क्रमशः शिव-पार्वतीके दोनों हाथोंका पूजन करे। “त्रिलोचनाय नमः' (त्रिलोचनको

English

"Fasting on the eleventh and eating on the next day, I shall eat, Pundarikaksha; be my refuge, Achyuta."

अध्याय १८७

श्लोक 6

एकादश्यां सिते पक्षे पुष्यर्क्षन्तु यदा भवेत् ।सोपोष्पाक्षय्यफलदा प्रोक्ता सा पापनाशिनी

ekādaśyāṃ site pakṣe puṣyarkṣantu yadā bhavet / sopoṣpākṣayyaphaladā proktā sā pāpanāśinī

हिन्दी अर्थ

नमस्कार) और 'कालानलप्रियायै नमः' (कालाग्निस्वरूप शिवको प्रियतमाको नमस्कार) कहकर भुजाओंका तथा 'महेशाय नमः ' (महेश्वरको

English

When on the bright eleventh the star is Pushya, that is to be fasted; it gives imperishable fruit and is called sin-destroying.

अध्याय १८७

श्लोक 7

एकादशी द्वादशी या श्रवणेन च संयुता ।विजया सा तिथिः प्रोक्ता भक्तानां विजयप्रदा

ekādaśī dvādaśī yā śravaṇena ca saṃyutā / vijayā sā tithiḥ proktā bhaktānāṃ vijayapradā

हिन्दी अर्थ

नमस्कार) एवं 'सौभाग्यायै नमः’ (सौभाग्यवतीको नमस्कार) कहकर शिव-पार्वतीके आभूषणोंको पूजा करे। तदनन्तर ' अशोकमधुवासिन्यै नमः ' (अशोक-पुष्पके मधुसे सुवासित पार्वतीको नमस्कार) और “ईश्वराय नमः' (ईश्वरको नमस्कार) कहकर दोनोंके ओष्ठभागका तथा ' चतुर्मुखप्रियायै नमः ' ( चतुर्मुख

English

An eleventh or twelfth joined with Shravana is called Vijaya, giving victory to devotees.

अध्याय १८७

श्लोक 8

एषैव फाल्गुने मासि पुष्यर्क्षेण च संयुता ।१ मधुमांसैर् विवर्जित इति ग॥ २ अत्रेति ख॥ , छ॥ , ज॥ च ३ द्वादशी मतेति घ॥ , ञ॥ च ।द्वादशी भवेदिति ङ॥ , झ॥ च :प् २१६ विजया प्रोच्यते सद्भिः कोटिकोटिगुणोत्तरा(१)

eṣaiva phālgune māsi puṣyarkṣeṇa ca saṃyutā / 1 madhumāṃsair vivarjita iti ga.. 2 atreti kha.. , cha.. , ja.. ca 3 dvādaśī mateti gha.. , ña.. ca / dvādaśī bhavediti ṅa.. , jha.. ca :p 216 vijayā procyate sadbhiḥ koṭikoṭiguṇottarā(1)

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माको प्रिय पुत्रवधूको नमस्कार) और "हराय स्थाणवे नमः' (पापहारी स्थाणुस्वरूप शिवको नमस्कार) कहकर क्रमशः गौरीशंकरके मुखका पूजन करे। ' अर्धनारीशाय नमः ' ( अर्धनारीश्वरको

English

This same in the month of Phalguna joined with Pushya is called Vijaya by the good, crores upon crores better.

अध्याय १८७

श्लोक 9

एकादश्यां विष्णुपूजा(२) कार्या सर्वोपकारिणी(३) ।धनवान् पुत्रवान् लोके विष्णुलोके महीयते

ekādaśyāṃ viṣṇupūjā(2) kāryā sarvopakāriṇī(3) / dhanavān putravān loke viṣṇuloke mahīyate

हिन्दी अर्थ

नमस्कार) कहकर शिवकी और 'अमिताङ्कायै नमः' (अपरिमित अङ्गोंवाली देवीको नमस्कार) कहकर पार्वतीकी नासिकाका पूजन करे । ' उग्राय नमः' (उग्रस्वरूप शिवको नमस्कार) कहकर लोकेश्वर शिवका और ललितायै नमः' (ललिताको नमस्कार) कहकर पार्वतीकी भौंहोंका

English

On the eleventh worship of Vishnu is to be done, benefiting all; he becomes rich and has sons, and is honored in Vishnu's world.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 187
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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