अध्याय १९४
श्लोक 1
अशोकपूएणिमादिव्रतं अग्निर् उवाच अशोकपूर्णिमां वक्ष्ये भूधरं च भुवं यजेत् ।फाल्गुन्यां सितपक्षायां वर्षं स्याद्भुक्तिमुक्तिभाक्
aśokapūeṇimādivrataṃ agnir uvāca aśokapūrṇimāṃ vakṣye bhūdharaṃ ca bhuvaṃ yajet / phālgunyāṃ sitapakṣāyāṃ varṣaṃ syādbhuktimuktibhāk
हिन्दी अर्थ
कौशिक जब नदीसे नहाकर निकला, तब बैलको वहाँ न पाकर अपनी बहिन विजयाके साथ उसको खोजमें चल पड़ा। उसने एक सरोवरमें देवलोकको स््त्रियोंका समूह देखा और उनसे भोजन माँगा। इसपर उन स्त्रियोंने कहा--' आप आज हमारे अतिथि हुए हैं, इसलिये व्रत करके भोजन कोजिये।' तदनन्तर कौशिकने ' बुधाष्टरमी 'का व्रत करके भोजन किया। उधर धीर वनरक्षकके
English
The gods Visnu and others dwell there. (One who) lives therein reaches lord Visiju. One who bathes in the river Sarasvatl and Sannihata reaches the region of Brahma.