अध्याय २१२
श्लोक 1
मेरुदानानि अग्निर् उवाच काम्यदानानि वक्ष्यामि सर्वकाम प्रदानि ते ।नित्यपूजां मासि मासि कृत्वाथो काम्यपूजनं
merudānāni agnir uvāca kāmyadānāni vakṣyāmi sarvakāma pradāni te / nityapūjāṃ māsi māsi kṛtvātho kāmyapūjanaṃ
हिन्दी अर्थ
एक सहस्र पल सुवर्णके द्वारा महामेरुका निर्माण करावे। वह तीन शिखरोंसे युक्त होना चाहिए और उन शिखरोंपर ब्रह्मा, विष्णु और शिवकी स्थापना करनी चाहिए। मेरुके साथवाला प्रत्येक पर्वत सौ-सौ पल सुवर्णका बनवाये। मेरुको लेकर उसके सहवर्ती पर्वत तेरह माने गये हैं। उत्तरायण अथवा दक्षिणायनकी संक्रान्तिमें या सूर्य-चन्द्रके ग्रहणकालमें विष्णुकी प्रतिमाके सम्मुख
English
I shall describe gifts that confer the desired bene¬ fits. One should do daily worship each month and do the worship for (the accomplishment of one's) desires.