Agni Purana· Agni Purāṇa
211
अध्याय 211 / 381

Adhyaya 211

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अध्याय २११

श्लोक 1

नानादानानि अग्निर् उवाच एकाङ्गां दशगुर्दद्याद्दश दद्याच्च गोशती ।शतं सहस्रगुर्दद्यात् सर्वे तुल्यफला हि ते

nānādānāni agnir uvāca ekāṅgāṃ daśagurdadyāddaśa dadyācca gośatī / śataṃ sahasragurdadyāt sarve tulyaphalā hi te

हिन्दी अर्थ

गुड्निर्मित धेनु और वत्सको श्वेत एवं सूक्ष्म वस्त्रसे ढकना चाहिए। उनके कानोंके स्थानमें सीप, चरणस्थानमें ईख, नेत्रस्थानमें पवित्र मौक्तिक, अलकोंके स्थानपर श्वेतसूत्र, गलकम्बलके स्थानपर सफेद कम्बल, पृष्ठभागके स्थानपर ताम्र, रोमस्थानपर

English

One who has ten cows should give one. One having hundred cows should give ten cows. A person having a thousand cows should give hundred. All yield the same benefit.

अध्याय २११

श्लोक 2

प्रासादा यत्र सौवर्णा वसोर्धारा च यत्र सा ।गन्धर्वाप्सरसो यत्र तत्र यान्ति सहस्रदाः

prāsādā yatra sauvarṇā vasordhārā ca yatra sā / gandharvāpsaraso yatra tatra yānti sahasradāḥ

हिन्दी अर्थ

श्वेत चँवर, भौंहोंके स्थानपर विद्रुममणि, स्तनोंके

English

Those who give thousand cows (as gifl) would go to a place where the mansions are golden, there would be flow of wealth and the gandharvas and celestial nymphs (dwell).

अध्याय २११

श्लोक 3

गवां शतप्रदानेन मुच्यते नरकार्णवात् ।दत्त्वा वत्सतरीं चैव स्वर्हलोके महीयते

gavāṃ śatapradānena mucyate narakārṇavāt / dattvā vatsatarīṃ caiva svarhaloke mahīyate

हिन्दी अर्थ

अक्षि-गोलकोंके स्थानपर नीलमणि, शुङ्ग और शृङ्गाभरणोंके स्थानपर सुवर्ण एवं खुरोंकी जगह नासिका-स्थानपर सुगन्धित द्रव्य स्थापित करे साथमें काँसेकी दोहनी भी रखे। द्विजश्रेष्ठ! इस प्रकार धेनुको रचना करके निम्नलिखित मन्त्रंसे उसकी पूजा करे-''जो समस्त भूतप्राणियोंकी

English

By giving hundred cows one becomes free from the ocean of hells. By giving a weaned calf one stays in comfort in the heaven.

अध्याय २११

श्लोक 4

गोदानादायुरारोग्यसौभाग्यस्वर्गमाप्नुयात् ।इन्द्रादिलोकपालानां या राजमहिषी शुभा

godānādāyurārogyasaubhāgyasvargamāpnuyāt / indrādilokapālānāṃ yā rājamahiṣī śubhā

हिन्दी अर्थ

लक्ष्मी हैं, जो देवताओंमें भी स्थित हैं, वे धेनुरूपिणी देवी मुझे शान्ति प्रदान करें। जो अपने शरीरमें स्थित होकर 'रुद्राणी'के नामसे प्रसिद्ध हैं और शंकरकी सदा प्रियतमा पत्नी हैं,

English

One who gives a gift of a cow and a bqU a brahmin

अध्याय २११

श्लोक 5

महिषीदानमाहात्म्यादस्तु मे सर्वकामदा(१) ।धर्मराजस्य साहाय्ये(२) यस्याः पुत्रः प्रतिष्ठितः

mahiṣīdānamāhātmyādastu me sarvakāmadā(1) / dharmarājasya sāhāyye(2) yasyāḥ putraḥ pratiṣṭhitaḥ

हिन्दी अर्थ

वे धेनुरूपधारिणी देवी मेरे पापोंका विनाश करें। जो विष्णुके वक्षःस्थलपर लक्ष्मीके रूपसे सुशोभित होती हैं, जो अग्निको स्वाहा और चन्द्रमा, सूर्य एवं नक्षत्र-देवताओंको शक्तिके रूपमें स्थित हैं, वे धेनुरूपिणी देवी मुझे लक्ष्मी प्रदान करें। जो

English

Just as a drop of oil spreads on the waters so also the fruit of all gifts would follow the mortal in the next birth.

अध्याय २११

श्लोक 6

महिषासुरस्य जननी या सास्तु वरदा मम ।महिषीदानाच्च सौभाग्यं वृषदानाद्दिवं व्रजेत्

mahiṣāsurasya jananī yā sāstu varadā mama / mahiṣīdānācca saubhāgyaṃ vṛṣadānāddivaṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

चतुर्मुख ब्रह्माको सावित्री, धनाध्यक्ष कुबेरकी निधि और लोकपालोंकी लक्ष्मी हैं, वे धेनुदेवी मुझे अभीष्ट वस्तु प्रदान करें। देवि! आप पितरोंको 'स्वधा' एवं यज्ञभोक्ता अग्निकी 'स्वाहा'

English

The benefit (of making a gift) of gold, land and an eight year old girl would follow (the giver) in his seven births. One who gives a girl (in marriage) would elevate twentyone generations of his family and attain the world of Brahma.

अध्याय २११

श्लोक 7

संयुक्तहलपङ्क्त्याख्यं दानं सर्वफलप्रदं ।पङ्क्तिर्दशहला प्रोक्ता दारुजा वृषसंयुता

saṃyuktahalapaṅktyākhyaṃ dānaṃ sarvaphalapradaṃ / paṅktirdaśahalā proktā dārujā vṛṣasaṃyutā

हिन्दी अर्थ

हैं। आप समस्त पापोंका हरण करनेवाली एवं धेनुरूपसे स्थित हैं, इसलिये मुझे शान्ति प्रदान करें।'' इस प्रकार अभिमन्त्रित की हुई धेनु ब्राह्मणको दान दे। अन्य सब धेनुदानोंकी भी साधारणतया यही विधि है। इससे मनुष्य सम्पूर्ण यज्ञोंका फल प्राप्त कर पापरहित हुआ

English

Having given an elephant together with remuneration one becomes free from blemish and would attain heaven. Having given a horse one would get long and healthy life and fortune and ascend heaven.

अध्याय २११

श्लोक 8

सौवर्णपट्टसन्नद्धान्दत्त्वा स्वर्गे महीयते ।१ गवां शतप्रदानेनेत्यादिः, सर्वकामदा इत्य् अन्तः पाठः झ।पुस्तके नास्ति २ धर्मराजस्य माहात्म्ये इति ज॥ :प् २६५ दशानां कपिलानां तु दत्तानां ज्येष्ठपुष्करे

sauvarṇapaṭṭasannaddhāndattvā svarge mahīyate / 1 gavāṃ śatapradānenetyādiḥ, sarvakāmadā ity antaḥ pāṭhaḥ jha.pustake nāsti 2 dharmarājasya māhātmye iti ja.. :p 265 daśānāṃ kapilānāṃ tu dattānāṃ jyeṣṭhapuṣkare

हिन्दी अर्थ

भोग और मोक्ष-दोनोंको सिद्ध कर लेता है

English

One who makes a gift of cloth would get longevity,

अध्याय २११

श्लोक 9

तत् फलञ्चाक्षयं प्रोक्तं(१) वृषभस्य तु मोक्षणे(२) ।धर्मो ऽसित्वञ्चतुष्पादश् चतस्रस्ते प्रिया इमाः

tat phalañcākṣayaṃ proktaṃ(1) vṛṣabhasya tu mokṣaṇe(2) / dharmo 'sitvañcatuṣpādaś catasraste priyā imāḥ

हिन्दी अर्थ

सोनेके सींगोंसे युक्त चाँदीके खुरोंवाली सीधी-सादी दुधारू गौ, काँसेको दोहनी, वस्त्र एवं दक्षिणाके साथ देनी चाहिए। ऐसी गौका दान करनेवाला उस गौके शरीरमें जितने रोएँ होते हैं, उतने वर्षोतक स्वर्गमें निवास करता है। यदि कपिलाका दान किया जाय तो वह सात पीढ़ियोंका उद्धार कर देती है

English

See verse 13 above.

अध्याय २११

श्लोक 10

नमो ब्रह्मण्यदेवेश पितृभूतर्षिपोषक ।त्वयि मुक्ते ऽक्षया लोका मम सन्तु निरामयाः

namo brahmaṇyadeveśa pitṛbhūtarṣipoṣaka / tvayi mukte 'kṣayā lokā mama santu nirāmayāḥ

हिन्दी अर्थ

स्वर्णमय भृङ्गोंसे युक्त, रजतमण्डित खुरोंवाली कपिला गौका काँसेके दोहनपात्र और यथाशक्ति दक्षिणाके साथ दान करके मनुष्य भोग और मोक्ष प्राप्त कर लेता है। “उभयतोमुखी' गौका

English

See verse 14 above.

अध्याय २११

श्लोक 11

मा मे ऋणो ऽस्तु दैवत्यो(३) भौतः पैत्रो ऽथ मानुषः ।धर्मस्त्वं त्वत्प्रपन्नस्य या गतिः सास्तु मे ध्रुवा

mā me ṛṇo 'stu daivatyo(3) bhautaḥ paitro 'tha mānuṣaḥ / dharmastvaṃ tvatprapannasya yā gatiḥ sāstu me dhruvā

हिन्दी अर्थ

दान करके दाता बछड़ेसहित गौके शरीरमें जितने रोएँ होते हैं, उतने युगोंतक स्वर्गमें जाकर सुख भोगता है। उभयतोमुखी गौका भी दान पूर्वोक्त विधिसे ही करना चाहिए मरणासन्न मनुष्यको भी पूर्वोक्त विधिसे ही बछड़ेसहित गौका दान करना चाहिए। (और यह संकल्प करना चाहिए) “अत्यन्त भयंकर यमलोकके प्रवेशद्वारपर तप्तजलसे युक्त वैतरणी

English

By giving fire and firewood (for travellers) on the way, one would get radiance etc. and would be served in the (celes- tial)vehicle in heaven by the celestials, gandharvas and women.

अध्याय २११

श्लोक 12

अङ्गयेच्चक्रशूलाभ्यां मन्त्रेणानेन चोत्सृजेत् ।एकादशाहे प्रेतस्य यस्य चोत्सृज्यते वृषः

aṅgayeccakraśūlābhyāṃ mantreṇānena cotsṛjet / ekādaśāhe pretasya yasya cotsṛjyate vṛṣaḥ

हिन्दी अर्थ

नदी प्रवाहित होती है। उसको पार करनेके लिये मैं इस कृष्णवर्णा वैतरणी गौका दान करता हुँ'

English

One would get all things by giving ghee, oil and salt. After having given umbrella, sandal and firewood etc. one would dwell in heaven happily.

अध्याय २११

श्लोक 13

मुच्यते प्रेतलोकात्तु षण्मासे चाव्दिकादिषु ।दशहस्तेन कुण्डेन त्रिंशत्कुण्डान्निवर्तनं

mucyate pretalokāttu ṣaṇmāse cāvdikādiṣu / daśahastena kuṇḍena triṃśatkuṇḍānnivartanaṃ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणे 'महादानोंका वर्णन” नामक दो सौ दसवाँ अध्याय पूरा हुआ “जब प्रसव करती हुई गौकी योनिमें प्रसव होते हुए वत्सके दो पैर और मुख दिखायी देते हैं, उस समय वह ' उभयतोमुखी' कही जाती है; उसका तभीतक दान करना चाहिए, जबतक पूर्ण प्रसव नहीं हो जाता।''

English

Money should be given to the teacher and food etc. for the students. What more can be possibly given by one who does with a motive to acquire virtues and desires.

अध्याय २११

श्लोक 14

तान्येव दशविस्ताराद्गोचर्मे तत्प्रदो ऽघभित्(४) ।गोभूहिरण्यसंयुक्तं कृष्णाजिनन्तु यो ऽर्पयेत्(५)

tānyeva daśavistārādgocarme tatprado 'ghabhit(4) / gobhūhiraṇyasaṃyuktaṃ kṛṣṇājinantu yo 'rpayet(5)

हिन्दी अर्थ

नाना प्रकारके दानोंका वर्णन

English

One who reads a book would be the giver of all gifts at the temples of (lords) Siva, Vi§nu and the Sun-god.

अध्याय २११

श्लोक 15

सर्वदुष्कृतकर्मापि सायुज्यं ब्रह्मणो व्रजेत् ।भाजनन्तिलसम्पूर्णं मधुना पूर्णमेव च

sarvaduṣkṛtakarmāpi sāyujyaṃ brahmaṇo vrajet / bhājanantilasampūrṇaṃ madhunā pūrṇameva ca

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं-- वसिष्ठ! जिसके पास दस गौएँ हों, वह एक गौ; जिसके पास सौ गौएँ हों, वह दस गौएँ; जिसके पास एक हजार गौएँ हों, वह सौ गौओंका दान करे तो उन सबको समान फल प्राप्त होता है। कुबेरको राजधानी अलकापुरी, जहाँ स्वर्णनिर्मित भवन हैं एवं जहाँ गन्धर्व और अप्सराएँ विहार करती हैं, सहस्र गौओंका दान करनेवाले वहीं जाते हैं। मनुष्य सौ

English

All the castes and the four institutions of life separately and all the gods such as Brahma and others are established on the gift of knowledge.

अध्याय २११

श्लोक 16

दद्यात् कृष्णतिलानाञ्च प्रस्थमेकञ्च मागधं ।शय्यां दत्त्वा तु सगुणां(६) भुक्तिमुक्तिमवाप्नुयात्

dadyāt kṛṣṇatilānāñca prasthamekañca māgadhaṃ / śayyāṃ dattvā tu saguṇāṃ(6) bhuktimuktimavāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

गौओंका दान करके नरक-समुद्रसे मुक्त हो जाता है और बछियाका दान करके स्वर्गलोकमें पूजित होता है। गोदानसे दीर्घायु, आरोग्य, सौभाग्य और स्वर्गकी प्राप्ति होती है। “जो इन्द्र

English

One would attain heaven by giving the accessory texts of scriptures. One would rejoice with piety by giving the religious law books.

अध्याय २११

श्लोक 17

हैमीं प्रतिकृतिं कृत्वा दत्त्वा स्वर्गस् तथात्मनः ।विपुलन्तु गृहं कृत्वा दत्त्वा स्याद्भुक्तिमुक्तिभाक्

haimīṃ pratikṛtiṃ kṛtvā dattvā svargas tathātmanaḥ / vipulantu gṛhaṃ kṛtvā dattvā syādbhuktimuktibhāk

हिन्दी अर्थ

आदि लोकपालोंको मङ्गलमयी राजमहिषी हैं, वे देवी इस महिषीदानके माहात्म्यसे मुझे सम्पूर्ण अभीष्ट वस्तुएँ प्रदान करें । जिनका पुत्र धर्मराजको सहायतामें नियुक्त है एवं जो महिषासुरको जननी हैं, वे देवी मुझे वर प्रदान करें।' उपर्युक्त मन्त्र पढ़कर महिषीदान करनेसे सौभाग्यको प्राप्ति होती है। वृषदानसे मनुष्य स्वर्गलोकमें जाता है

English

One would get everything by giving sacred religious texts and Purd. One would get the benefit of Pundarika by imparting (knowledge to) the disciples.

अध्याय २११

श्लोक 18

१ तत्फलं चाक्षयं स्याद्वै इति ट॥ २ वृषभस्य विमोक्षणे इति ख॥ ।वृषभस्य च मोक्षणादिति ज॥ ३ दैवो ऽथेति ख॥ , छ॥ च ४ तत्प्रदो ऽघनुदिति श॥ ।तत्प्रदो ऽघजिदिति घ॥ , ङ॥ च ५ यस्तु कृष्णाजिनं ददेदिति ट॥ ६ दत्त्वोत्तमगुणामिति घ॥ :प् २६६ गृहं मठं सभां स्वर्गी दत्त्वा स्याच्च प्रतिश्रियं ।दत्त्वा कृत्वा गोगृहञ्च निष्पापः स्वर्गमाप्नुयात्

1 tatphalaṃ cākṣayaṃ syādvai iti ṭa.. 2 vṛṣabhasya vimokṣaṇe iti kha.. / vṛṣabhasya ca mokṣaṇāditi ja.. 3 daivo 'theti kha.. , cha.. ca 4 tatprado 'ghanuditi śa.. / tatprado 'ghajiditi gha.. , ṅa.. ca 5 yastu kṛṣṇājinaṃ dadediti ṭa.. 6 dattvottamaguṇāmiti gha.. :p 266 gṛhaṃ maṭhaṃ sabhāṃ svargī dattvā syācca pratiśriyaṃ / dattvā kṛtvā gogṛhañca niṣpāpaḥ svargamāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

“संयुक्त हलपङ्कि' नामक दान समस्त फलोंको प्रदान करता है। काठके बने हुए दस हलोंकी पङ्कि, जो सुवर्णमय पट्टसे परस्पर जुड़ी हो और प्रत्येक हलके साथ आवश्यक संख्यामें बैल भी

English

One would be free from blemishes by washing and clean¬ ing the temple. One who draws the mystic diagrams would become the ruler of a province subsequently.

अध्याय २११

श्लोक 19

यममाहिषदानात्तु निष्पापः स्वर्गमाप्नुयात् ।ब्रह्मा हरो हरिर्देवैर् मध्ये च यमदूतकः

yamamāhiṣadānāttu niṣpāpaḥ svargamāpnuyāt / brahmā haro harirdevair madhye ca yamadūtakaḥ

हिन्दी अर्थ

हों तो उसका दान ' संयुक्त हलपङ्कि' नामक दान कहा गया है। वह दान करके मनुष्य स्वर्गलोकमें पूजित होता है । ज्येष्ठपुष्कर-तीर्थमें दस कपिला गौओंका दान किया जाय तो उसका फल अक्षय बतलाया गया है। वृषोत्सर्ग करनेसे भी अक्षय फलकी प्राप्ति होती है। साँड़को चक्र और त्रिशूलसे अङ्कित करके यह मन्त्र पढ़कर छोड़े -- ' देवेश्वर! तुम चार चरणोंसे युक्त साक्षात् धर्म हो।

English

A unit of meuuremeat.

अध्याय २११

श्लोक 20

पाशी(१) तस्य शिरश्छित्त्वा तं दद्यात् स्वर्गभाग्भवेत् ।त्रिमुखाख्यमिदं दानं गृहीत्वा तु द्विजो ऽघभाक्

pāśī(1) tasya śiraśchittvā taṃ dadyāt svargabhāgbhavet / trimukhākhyamidaṃ dānaṃ gṛhītvā tu dvijo 'ghabhāk

हिन्दी अर्थ

ये तुम्हारी चार प्रियतमाएँ. हैं। पितरों, मनुष्यों और ऋषियोंका पोषण करनेवाले वेदमूर्ति वृष! तुम्हारे मोचनसे मुझे अमृतमय शाश्वत लोकोंकी प्राप्ति हो। मैं देवऋण, भूतऋण, पितृऋण एवं

English

One would get fortune and wealth and would go to heaven by giving a maid-servant, servant, ornaments, cow, land, horse and elephant and other things for the deity.

अध्याय २११

श्लोक 21

चक्रं रूप्यमयं कृत्वा के धृत्वा तत् प्रदापयेत् ।हेमयुक्तं द्विजायैतत् कालचक्रमिदम्महत्

cakraṃ rūpyamayaṃ kṛtvā ke dhṛtvā tat pradāpayet / hemayuktaṃ dvijāyaitat kālacakramidammahat

हिन्दी अर्थ

मनुष्यऋणसे मुक्त हो जाऊँ। तुम साक्षात् धर्म हो; तुम्हारा आश्रय ग्रहण करनेवालोंको जो गति प्राप्त होती हो, वह नित्य गति मुझे भी प्राप्त हो' जिस मृत व्यक्तिके एकादशाह, षाण्मासिक अथवा वार्षिक श्राद्धमे वृषोत्सर्ग किया जाता है, वह प्रेतलोकसे मुक्त हो जाता है। दस हाथके डंडेसे तीस डंडेके बराबरकी भूमिको “निवर्तन'

English

Having made a silver wheel, one should have it given while holding it on the head, joined with gold, to a Brahmin: this is the great Wheel of Time.

अध्याय २११

श्लोक 22

आत्मतुल्यन्तु यो लौहं ददेन्न नरकं व्रजेत् ।पञ्चाशत्पलसंयुक्तं लौहदण्डं तु यो ऽर्पयेत्

ātmatulyantu yo lauhaṃ dadenna narakaṃ vrajet / pañcāśatpalasaṃyuktaṃ lauhadaṇḍaṃ tu yo 'rpayet

हिन्दी अर्थ

कहते हैं । दस निवर्तन भूमिकी 'गोचर्म' संज्ञा है।

English

One who gives iron equal to oneself does not go to hell. One who offers an iron staff of fifty palas,

अध्याय २११

श्लोक 23

वस्त्रेणाच्छाद्य विप्राय यमदण्डो न विद्यते ।मूलं फलादि वा द्रव्यं संहतं वाथ चैकशः

vastreṇācchādya viprāya yamadaṇḍo na vidyate / mūlaṃ phalādi vā dravyaṃ saṃhataṃ vātha caikaśaḥ

हिन्दी अर्थ

समस्त पापोंका नाश कर देता है। जो गौ, भूमि और सुवर्णयुक्त कृष्णमृगचर्मका दान करता है, वह सम्पूर्ण पापोंके करनेपर भी ब्रह्माका सायुज्य प्रात कर लेता है। तिल एवं मधुसे भरा पात्र मगधदेशीय मानके अनुसार एक प्रस्थ (चौसठ पल) कृष्णतिलका दान करे। इसके साथ उत्तम गुणोंसे युक्त शय्या देनेसे दाताको भोग और मोक्षकी प्राप्ति होती है

English

covered with cloth, to a Brahmin has no Yama's staff. Roots and fruits and the like, or substance, together or singly,

अध्याय २११

श्लोक 24

मृत्युज्जयं समुद्दिश्य दद्यादायुर्विवर्धये ।पुमान् कृष्णतिलैः कार्यो रौप्यदन्तः सुवर्णदृक्

mṛtyujjayaṃ samuddiśya dadyādāyurvivardhaye / pumān kṛṣṇatilaiḥ kāryo raupyadantaḥ suvarṇadṛk

हिन्दी अर्थ

अपनी स्वर्णमयी प्रतिमा बनवाकर दान करनेवाला स्वर्गमें जाता है। विशाल गृहका निर्माण कराके उसका दान देनेवाला भोग एवं मोक्ष-दोनोंको प्राप्त करता है। गृह, मठ,

English

with an intention of conquering death, one should give for increase of life. A man of black sesame should be made, with silver teeth and golden eyes,

अध्याय २११

श्लोक 25

खड्गोद्यतकरो दीर्घो जवाकुसुममण्डलः ।रक्ताम्वरधरः स्रग्वी शङ्कमालाविभूषितः

khaḍgodyatakaro dīrgho javākusumamaṇḍalaḥ / raktāmvaradharaḥ sragvī śaṅkamālāvibhūṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

सभाभवन (धर्मशाला) एवं आवासस्थानका दान करके मनुष्य स्वर्गलोकमें जाकर सुख भोगता है। गोशाला बनवाकर दान करनेवाला पापरहित होकर स्वर्गको प्राप्त होता है। यम-देवता- सम्बन्धी महिषदान करनेसे मनुष्य निष्पाप होकर स्वर्गलोकको जाता है। देवताओंसहित ब्रह्मा,

English

with raised sword in hand, tall, with a disc of hibiscus color, wearing red garments, garlanded, adorned with a conch-garland,

अध्याय २११

श्लोक 26

उपानद्युगयुक्ताङ्घ्रिः कृष्णकम्बलपार्श्वकः ।गृहीतमांसपिण्डश् च वामे वै कालपूरुषः

upānadyugayuktāṅghriḥ kṛṣṇakambalapārśvakaḥ / gṛhītamāṃsapiṇḍaś ca vāme vai kālapūruṣaḥ

हिन्दी अर्थ

शिव और विष्णुके बीचमें पाशधारी यमदूतको (स्वर्णादिमयी) मूर्तियाँ स्थापित करके यमदूतके सिरका छेदन करे; फिर उस मूर्तिमण्डलका ब्राह्मणको दान कर दे। ऐसा करनेसे दाता तो

English

feet with pair of sandals, with a black blanket at the side, holding a lump of flesh at the left: the Time-Person.

अध्याय २११

श्लोक 27

सम्पूज्य तञ्च गन्धाद्यैः(२) ब्राह्मणायोपपादयेत् ।मरणव्याधिहीनः स्याद्राजराजेश्वरो भवेत्

sampūjya tañca gandhādyaiḥ(2) brāhmaṇāyopapādayet / maraṇavyādhihīnaḥ syādrājarājeśvaro bhavet

हिन्दी अर्थ

स्वर्गलोकका भागी होता है, किंतु इस 'त्रिमुख' नामक दानको ग्रहण करके द्विज पापका भागी होता है। चाँदीका चक्र बनवाकर, उसे जलमें रखकर उसके निमित्तसे होम करे। पश्चात् वह चक्र ब्राह्मणको दान कर दे। यह महान् 'कालचक्रदान' माना गया है॥ १७--२१॥

English

Having worshipped him with scents and the like, one should present him to a Brahmin; he is free of death and disease and becomes lord of kings.

अध्याय २११

श्लोक 28

गोवृषौ तु द्विजे दत्त्वा भुक्तिमुक्तिमवाप्नुयात् ।१ पापो इति ख॥ , छ॥ , ज॥ च २ सम्पूज्य वस्त्रगन्धाद्यैर् इति ङ॥ :प् २६७ रेवन्ताधिष्ठितञ्चाश्वं हैमं दत्त्वा न मृत्य्भाक्

govṛṣau tu dvije dattvā bhuktimuktimavāpnuyāt / 1 pāpo iti kha.. , cha.. , ja.. ca 2 sampūjya vastragandhādyair iti ṅa.. :p 267 revantādhiṣṭhitañcāśvaṃ haimaṃ dattvā na mṛtybhāk

हिन्दी अर्थ

जो अपने वजनके बराबर लोहेका दान करता है, वह नरकमें नहीं गिरता। जो पचास पलका लौहदण्ड वस्त्रसे ढककर ब्राह्मणको दान करता है, उसे यमदण्डसे भय नहीं होता।

English

Having given a cow and bull to a Brahmin one obtains enjoyment and liberation. Having given a golden horse under Revanta one is not subject to death.

अध्याय २११

श्लोक 29

घण्टादिपूर्णमप्येकं दत्त्वा स्याद्भुक्तिमुक्तिभाक् ।सर्वान् कामानवाप्नोति यः प्रयच्छति काञ्चनं

ghaṇṭādipūrṇamapyekaṃ dattvā syādbhuktimuktibhāk / sarvān kāmānavāpnoti yaḥ prayacchati kāñcanaṃ

हिन्दी अर्थ

दीर्घायुकी इच्छा रखनेवाला मृत्युञ्जयके उद्देश्यसे फल, मूल एवं द्रव्यको एक साथ अथवा पृथक्- पृथक् दान करे। कृष्णतिलका पुरुष निर्मित करे। उसके चाँदीके दाँत और सोनेकी आँखें हों। वह मालाधारी दीर्घाकार पुरुष दाहिने हाथमें खड्ग उठाये हुए हो। लाल रंगके वस्त्र धारण किये जपापुष्पोंसे अलंकृत एवं शङ्को मालासे विभूषित हो। उसके दोनों चरणोंमें पादुकाएँ हों और

English

Even a single one filled with bells and the like, having given, one shares enjoyment and liberation. One who gives gold obtains all desires.

अध्याय २११

श्लोक 30

सुवर्णे दीयमाने तु रजतं दक्षिणेष्यते ।अन्येषामपि दानानां सुवर्णं(१) दक्षिणा स्मृता

suvarṇe dīyamāne tu rajataṃ dakṣiṇeṣyate / anyeṣāmapi dānānāṃ suvarṇaṃ(1) dakṣiṇā smṛtā

हिन्दी अर्थ

पार्श्वभागमें काला कम्बल हो। वह कालपुरुष बायें हाथमें मांस-पिण्ड लिये हो। इस प्रकार कालपुरुषका निर्माण कर गन्धादि द्रव्योंसे उसको पूजा करके ब्राह्मणको दान करे। इससे दाता मानव मृत्यु

English

When gold is given, silver is the fee; for other gifts too gold is remembered as the fee.

अध्याय २११

श्लोक 31

सुवर्णं रजतं ताम्रं तण्डुलं धान्यमेव च ।नित्यश्राद्धं देवपूजा सर्वमेतददक्षिणं

suvarṇaṃ rajataṃ tāmraṃ taṇḍulaṃ dhānyameva ca / nityaśrāddhaṃ devapūjā sarvametadadakṣiṇaṃ

हिन्दी अर्थ

और व्याधिसे रहित होकर राजराजेश्वर होता है। ब्राह्मणको दो बैलोंका दान देकर मनुष्य भोग और मोक्षको प्राप्त कर लेता है जो मनुष्य सुवर्णदान करता है, वह सम्पूर्ण अभीष्ट वस्तुओंको प्राप्त कर लेता है। सुवर्णके दानमें उसकी प्रतिष्ठाके लिये चाँदीकी दक्षिणा विहित है । अन्य दानोंकी प्रतिष्ठाके लिये सुवर्णको

English

Gold, silver, copper, rice and grain, daily ancestral rite, worship of gods — all this lacks a fee.

अध्याय २११

श्लोक 32

रजतं दक्षिणा पित्रे धर्मकामार्थसाधनं ।सुवर्णं रजतं ताम्रं मणिमुक्तावसूनि च

rajataṃ dakṣiṇā pitre dharmakāmārthasādhanaṃ / suvarṇaṃ rajataṃ tāmraṃ maṇimuktāvasūni ca

हिन्दी अर्थ

त्रिःसप्तकुलमुद्धृत्य कन्यादो ब्रह्मलोकभाक् ॥( २११ । ३७)

English

Silver as fee for the father is the accomplisher of dharma, desire and wealth. Gold, silver, copper, gems, pearls and riches —

अध्याय २११

श्लोक 33

सर्वमेतन्महाप्राज्ञो ददाति वसुधान्ददत् ।पितॄंश् च पितृलोकस्थान् देवस्थाने च देवताः

sarvametanmahāprājño dadāti vasudhāndadat / pitṝṃś ca pitṛlokasthān devasthāne ca devatāḥ

हिन्दी अर्थ

दक्षिणा प्रशस्त मानी गयी है। सुवर्णके सिवा, रजत, ताम्र, तण्डुल और धान्य भी दक्षिणाके लिये विहित हैं। नित्य श्राद्ध और नित्य देवपूजन - इन सबमें दक्षिणाकी आवश्यकता नहीं है। पितृकार्यमें रजतकी दक्षिणा धर्म, काम और

English

all this the great-minded gives who gives the earth. Ancestors who dwell in the ancestor-world and gods in the gods' place

अध्याय २११

श्लोक 34

सन्तर्पयति शान्तात्मा यो ददाति वसुन्धराम् ।खर्वटं खेटकं वापि ग्रामं वा शस्यशालिनं

santarpayati śāntātmā yo dadāti vasundharām / kharvaṭaṃ kheṭakaṃ vāpi grāmaṃ vā śasyaśālinaṃ

हिन्दी अर्थ

मणि और मुक्ता -इन सबका दान कर लेता है, अर्थात् इन सभी दानोंका पुण्यफल पा लेता है। जो पृथ्वीदान करता है, वह शान्त अन्तःकरणवाला पुरुष पितृलोकमें स्थित पितरोंको और देवलोकमें

English

are satisfied by the peaceful-souled one who gives the earth: a market-town, a village or a grain-rich village,

अध्याय २११

श्लोक 35

निवर्तनशतं वापि तदर्धं वा गृहादिकं ।अपि गोचर्ममात्राम्बा दत्त्वोर्वीं सर्वभाग् भवेत्

nivartanaśataṃ vāpi tadardhaṃ vā gṛhādikaṃ / api gocarmamātrāmbā dattvorvīṃ sarvabhāg bhavet

हिन्दी अर्थ

निवास करनेवाले देवताओंको पूर्णरूपसे तृप्त कर देता है। शस्यशाली खर्वट, ग्राम और खेटक (छोटा गाँव), सौ निवर्तनसे अधिक या उसके आधे विस्तारमें बने हुए गृह आदि अथवा गोचर्म मनुष्य सब कुछ पा लेता है। जिस प्रकार तैल- बिन्दु जल या भूमिपर गिरकर फैल जाता है, उसी प्रकार सभी दानोंका फल एक जन्मतक रहता है। स्वर्ण, भूमि और गौरी कन्याके दानका

English

or a hundred nivartanas, or half that, or a house and the like — even a cow-hide measure of land given, he shares in all.

अध्याय २११

श्लोक 36

तैलविन्दुर्यथा चाप्सु प्रसर्पेद् भूगतं तथा ।सर्वेषामेवदानानमेकजन्मानुगं फलं

tailavinduryathā cāpsu prasarped bhūgataṃ tathā / sarveṣāmevadānānamekajanmānugaṃ phalaṃ

हिन्दी अर्थ

फल सात जन्मोंतक स्थिर रहता है। कन्यादान करनेवाला अपनी इक्कीस पीढ़ियोंका नरकसे उद्धार करके ब्रह्मलोकको प्राप्त होता है। दक्षिणासहित हाथीका दान करनेवाला निष्पाप

English

As a drop of oil spreads in water, so the gift on earth spreads; the fruit of all other gifts follows one birth;

अध्याय २११

श्लोक 37

हाटकक्षितिगौरीणां सप्तजन्मानुगं फलं ।त्रिसप्तकुलमुद्धृत्य कन्यादो ब्रह्मलोकभाक्

hāṭakakṣitigaurīṇāṃ saptajanmānugaṃ phalaṃ / trisaptakulamuddhṛtya kanyādo brahmalokabhāk

हिन्दी अर्थ

होकर स्वर्गलोकमें जाता है। अश्वका दान देकर मनुष्य दीर्घ आयु, आरोग्य, सौभाग्य और स्वर्गको प्राप्त कर लेता है। श्रेष्ठ ब्राह्मणको दासीदान करनेवाला अप्सराओंके लोकमें जाकर सुखोपभोग करता है। जो पाँच सौ पल ताँबेकी थाली या ढाई सौ पल, सवा सौ पल अथवा उसके भी आधे (६२३) पलोंकी बनी थाली देता है, वह भोग तथा मोक्षका भागी होता है

English

of gold, land and cows, the fruit follows seven births. Having lifted twenty-one families, the giver of a maiden shares the Brahma world.

अध्याय २११

श्लोक 38

गजं सदक्षिणं दत्त्वा निर्मलः स्वर्गभाग् भवेत् ।अश्वं दत्त्वायुरारोग्यसौभाग्यस्वर्गमाप्नुयात्

gajaṃ sadakṣiṇaṃ dattvā nirmalaḥ svargabhāg bhavet / aśvaṃ dattvāyurārogyasaubhāgyasvargamāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

बैलोंसे युक्त शकटदान करनेसे मनुष्य विमानद्वारा

English

Having given an elephant with fee one becomes stainless and shares heaven. Having given a horse one obtains life, health, good fortune and heaven.

अध्याय २११

श्लोक 39

१ हिरण्यमिति ट॥ :प् २६८ दासीं दत्त्वा द्विजेन्द्राय अप्सरोलोकमाप्नुयात् ।दत्त्वा ताम्रमयीं स्थालीं पलानां पञ्चभिः शतैः

1 hiraṇyamiti ṭa.. :p 268 dāsīṃ dattvā dvijendrāya apsarolokamāpnuyāt / dattvā tāmramayīṃ sthālīṃ palānāṃ pañcabhiḥ śataiḥ

हिन्दी अर्थ

स्वर्गलोकको जाता है। वस्त्रदानसे आयु, आरोग्य और अक्षय स्वर्गकी प्राप्ति होती है। धान, गेहूँ, अगहनीका चावल और जौ आदिका दान करनेवाला स्वर्गलोकको प्राप्त होता है। आसन, विविध दिव्य पदार्थांका दान देकर मनुष्य भोग और मोक्ष भी प्राप्त करता है। तिल और तिलपात्रका दान देकर मनुष्य स्वर्ग-सुखका भागी होता है। अन्नदानसे बढ़कर कोई दान न

English

Having given a maidservant to a best of Brahmins one reaches the world of Apsaras. Having given a copper dish of five hundred palas,

अध्याय २११

श्लोक 40

अर्धैस्तदर्धैर् अर्धैर् वा भुक्तिमुक्तिमवाप्नुयात्(१) ।शकटं वृषसंयुक्तं दत्त्वा यानेन नाकभाक्

ardhaistadardhair ardhair vā bhuktimuktimavāpnuyāt(1) / śakaṭaṃ vṛṣasaṃyuktaṃ dattvā yānena nākabhāk

हिन्दी अर्थ

तो है, न था और न होगा ही। हाथी, अश्व, रथ, दास-दासी और गृहादिके दान--ये सब अन्नदानकी सोलहवीं कलाके समान भी नहीं हैं। जो पहले बड़ा-से-बड़ा पाप करके फिर अन्नदान कर देता

English

or half, or half of that, one obtains enjoyment and liberation. Having given a cart with oxen, one shares heaven with a vehicle.

अध्याय २११

श्लोक 41

वस्त्रदानाल्लभेदायुरारोग्यं स्वर्गमक्षयं ।धान्यगोधूमकलमयवादीन् स्वर्गभाग् ददत्

vastradānāllabhedāyurārogyaṃ svargamakṣayaṃ / dhānyagodhūmakalamayavādīn svargabhāg dadat

हिन्दी अर्थ

है, वह सम्पूर्ण पापोंसे छूटकर अक्षय लोकोंको पा लेता है। जल और प्याऊका दान देकर मनुष्य भोग और मोक्ष-दोनोंको सिद्ध कर लेता है। (शीतकालमें) मार्ग आदिमें अग्नि और काष्ठका दान करनेसे मनुष्य तेजोयुक्त होता है और स्वर्गलोकमें देवताओं, गन्धर्वा तथा अप्सराओंद्वारा विमानमें सेवित होता है॥ ४०--४७॥

English

By giving clothes one obtains life, health, and imperishable heaven; the giver of grains, wheat, rice, barley and the like shares heaven.

अध्याय २११

श्लोक 42

आसनं तैजसं पात्रं लवणं गन्धचन्दनं ।धूपं दीपञ्च ताम्वूलं लोहं रूप्यञ्च रत्नकं(२)

āsanaṃ taijasaṃ pātraṃ lavaṇaṃ gandhacandanaṃ / dhūpaṃ dīpañca tāmvūlaṃ lohaṃ rūpyañca ratnakaṃ(2)

हिन्दी अर्थ

घृत, तैल और लवणका दान देनेसे सब कुछ मिल जाता है। छत्र, पादुका और काष्ठ आदिका दान करके स्वर्गमें सुखपूर्वक निवास करता है। प्रतिपदा आदि पुण्यमयी तिथियोंमें, विष्कुम्भ

English

Seat, metal vessel, salt, scent and sandal, incense, lamp and betel, iron, silver and jewels,

अध्याय २११

श्लोक 43

दिव्यानि नानाद्रव्याणि दत्त्वा स्याद् भुक्तिमुक्तिभाक् ।तिलांश् च तिलपात्रञ्च दत्त्वा स्वर्गमवाप्नुयात्

divyāni nānādravyāṇi dattvā syād bhuktimuktibhāk / tilāṃś ca tilapātrañca dattvā svargamavāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

आदि योगोंमें, चैत्र आदि मासोंमें, संवत्सरारम्भमें और अश्विनी आदि नक्षत्रोंमें विष्णु, शिव, ब्रह्मा तथा लोकपाल आदिको अर्चना करके दिया गया दान महान् फलप्रद है। वृक्ष, उद्यान, भोजन, वाहन आदि तथा पैरोंमें मालिशके लिये तेल आदि देकर मनुष्य भोग और मोक्षको प्राप्त कर लेता है ॥ ४८--५० ॥

English

divine various substances — having given, one shares enjoyment and liberation; having given sesame and a sesame vessel one obtains heaven.

अध्याय २११

श्लोक 44

अन्नदानात् परं नास्ति न भूतं न भविष्यति ।हस्त्यश्वरथदानानि दासीदासगृहाणि च

annadānāt paraṃ nāsti na bhūtaṃ na bhaviṣyati / hastyaśvarathadānāni dāsīdāsagṛhāṇi ca

हिन्दी अर्थ

इस लोकमें गौ, पृथ्वी और विद्याका दान ये तीनों समान फल देनेवाले हैं। वेद-विद्याका दान देकर मनुष्य पापरहित हो ब्रह्मलोकमें प्रवेश करता है। जो (योग्य शिष्यको) ब्रह्मज्ञान प्रदान

English

There is nothing greater than the gift of food, nor was nor will be; gifts of elephants, horses and chariots, maids, servants and houses

अध्याय २११

श्लोक 45

अन्नदानस्य सर्वाणि कलां नार्हन्ति षोडशीं ।कृत्वापि सुमहत्पापं यः पश्चादन्नदो भवेत्

annadānasya sarvāṇi kalāṃ nārhanti ṣoḍaśīṃ / kṛtvāpi sumahatpāpaṃ yaḥ paścādannado bhavet

हिन्दी अर्थ

करता है, उसने तो मानो सप्तद्वीपवती पृथ्वीका दान कर दिया। जो समस्त प्राणियोंको अभयदान देता है, वह मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर लेता है। पुराण, महाभारत अथवा रामायणका लेखन करके उस पुस्तकका दान करनेसे मनुष्य भोग और मोक्षकी प्राप्ति कर लेता है। जो वेद आदि शास्त्र और नृत्य-गीतका अध्यापन करता है, वह स्वर्गगामी होता है। जो उपाध्यायको वृत्ति और

English

do not deserve a sixteenth part of food-gift. Even having done very great sin, whoever afterward becomes a giver of food

अध्याय २११

श्लोक 46

सर्वपापविनिर्मुक्तो लोकानाप्नोति चाक्षयान् ।पानीयञ्च प्रपान्दत्त्वा भुक्तिमुक्तिमवाप्नुयात्

sarvapāpavinirmukto lokānāpnoti cākṣayān / pānīyañca prapāndattvā bhuktimuktimavāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

छात्रांको भोजन आदि देता है, उस धर्म एवं कामादि पुरुषार्थोके रहस्यदर्शी मनुष्यने क्या नहीं

English

is freed from all sins and obtains imperishable worlds. Having given drinking water and a water-shed one obtains enjoyment and liberation.

अध्याय २११

श्लोक 47

अग्निं काष्ठञ्च मार्गादौ दत्त्वा दीप्त्यादिमाप्नुयात्(३) ।देवगन्धर्वनारीभिर्विमाने सेव्यते दिवि

agniṃ kāṣṭhañca mārgādau dattvā dīptyādimāpnuyāt(3) / devagandharvanārībhirvimāne sevyate divi

हिन्दी अर्थ

सहस्र वाजपेय यज्ञोंमें विधिपूर्वक दान देनेसे जो फल होता है, विद्यादानसे मनुष्य वह सम्पूर्ण फल प्राप्त कर लेता है, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। जो शिवालय, विष्णुमन्दिर तथा सूर्यमन्दिरमें ग्रन्थवाचन करता है, वह सभी दानोंका फल प्राप्त करता है। त्रैलोक्यमें जो ब्राह्मणादि चार वर्ण और ब्रह्मचर्यादि चार आश्रम हैं, वे तथा ब्रह्मा आदि समस्त देवगण विद्यादानमें प्रतिष्ठित हैं।

English

Having given fire and wood on the road and the like, one obtains radiance and the rest; he is attended in heaven in an aerial car by gods' and Gandharvas' women.

अध्याय २११

श्लोक 48

घृतं तैकञ्च लवणं दत्त्वा सर्वमवाप्नुयात् ।१ ततोर्ध्वतस्तदर्धार्धैर् युक्तां भुक्तिमवाप्नुयात् इति छ॥ २ धूपदीपञ्च नैवेद्यं ताम्वूलं लोहरत्नकमिति ख॥ ३ दीप्ताग्निमाप्नुयादिति ङ॥ :प् २६९ छत्रोपानहकाष्ठादि दत्त्वा स्वर्गे सुखी वसेत्(१)

ghṛtaṃ taikañca lavaṇaṃ dattvā sarvamavāpnuyāt / 1 tatordhvatastadardhārdhair yuktāṃ bhuktimavāpnuyāt iti cha.. 2 dhūpadīpañca naivedyaṃ tāmvūlaṃ loharatnakamiti kha.. 3 dīptāgnimāpnuyāditi ṅa.. :p 269 chatropānahakāṣṭhādi dattvā svarge sukhī vaset(1)

हिन्दी अर्थ

विद्या कामधेनु है और विद्या उत्तम नेत्र है। गान्धर्व आदि उपवेदोंका दान करनेसे मनुष्य गन्धर्वोके साथ प्रमुदित होता है, वेदाङ्गोंके दानसे स्वर्गलोकको प्राप्त करता है और धर्मशास्त्रके

English

Having given ghee, oil and salt one obtains everything; having given umbrella, sandals, wood and the like one lives happily in heaven.

अध्याय २११

श्लोक 49

प्रतिपत्तिथिमुख्येषु विष्कुम्भादिकयोगके ।चैत्रादौ वत्सरादौ च अश्विन्यादौ हरिं हरं

pratipattithimukhyeṣu viṣkumbhādikayogake / caitrādau vatsarādau ca aśvinyādau hariṃ haraṃ

हिन्दी अर्थ

दानसे धर्मके सांनिध्यको प्राप्त होकर दाता प्रमुदित होता है। सिद्धान्तोंके दानसे मनुष्य निस्संदेह मोक्ष प्राप्त करता है। पुस्तक-प्रदानसे विद्यादानके फलकी प्रापि होती है। इसलिये शास्त्रों और पुराणोंका दान करनेवाला सब

English

On pratipada and chief tithis, in yogas like Vishkambha, at the beginning of Chaitra, of the year, at Ashvini and the rest,

अध्याय २११

श्लोक 50

ब्रह्माणं लोकपालादीन् प्रार्च्य दानं महाफलं ।वृक्षारामान् भोजनादीन् मार्गसंवाहनादिकान्

brahmāṇaṃ lokapālādīn prārcya dānaṃ mahāphalaṃ / vṛkṣārāmān bhojanādīn mārgasaṃvāhanādikān

हिन्दी अर्थ

भवेत्तेन धर्मकामादिदर्शिना॥ (२११।५५)

English

having worshipped Hari, Hara, Brahma and world-guardians, the gift is of great fruit. Planting groves of trees, feeding and the like, road-service and the like,

अध्याय २११

श्लोक 51

पादाभ्यङ्गादिकं दत्त्वा भुक्तिमुक्तिमवाप्नुयात् ।त्रीणि तुल्यफलानीह गावः पृथ्वी सरस्वती

pādābhyaṅgādikaṃ dattvā bhuktimuktimavāpnuyāt / trīṇi tulyaphalānīha gāvaḥ pṛthvī sarasvatī

हिन्दी अर्थ

२. शिवालये विष्णुगृहे सूर्यस्य भवने तथा। सर्वदानप्रदः स स्यात् पुस्तकं वाचयेत्तु यः॥ (२११।५७) कुछ प्राप्त कर लेता है। जो शिष्योंको शिक्षादान करता है, वह पुण्डरीकयागका फल प्राप्त करता है

English

foot-anointing and the like — having given, one obtains enjoyment and liberation. Three are of equal fruit here: cows, earth and Sarasvati (learning).

अध्याय २११

श्लोक 52

व्राह्मीं सरस्वतीन्दत्त्वा निर्मलो ब्रह्मलोकभाक् ।सप्तद्वीपमहीदः स ब्रह्मज्ञानं ददाति यः

vrāhmīṃ sarasvatīndattvā nirmalo brahmalokabhāk / saptadvīpamahīdaḥ sa brahmajñānaṃ dadāti yaḥ

हिन्दी अर्थ

जीविका-दानके तो फलका अन्त ही नहीं है। जो अपने पितरोंको अक्षय लोकोंकी प्राप्ति कराना चाहें, उन्हें इस लोकके सर्वश्रेष्ठ एवं अपनेको प्रिय लगनेवाले समस्त पदार्थोका पितरोंके

English

Having given Brahmi Sarasvati, one becomes stainless and shares Brahma's world. He who gives knowledge of Brahman is the giver of the earth of seven continents;

अध्याय २११

श्लोक 53

अभयं सर्वभूतेभ्यो यो दद्यात् सर्वभाङ् नरः ।पुराणं भारतं वापि रामायणमथापि वा

abhayaṃ sarvabhūtebhyo yo dadyāt sarvabhāṅ naraḥ / purāṇaṃ bhārataṃ vāpi rāmāyaṇamathāpi vā

हिन्दी अर्थ

उद्देश्यसे दान करना चाहिए। जो विष्णु, शिव, ब्रह्मा, देवी और गणेश आदि देवताओंकी पूजा करके पूजा-द्रव्यका ब्राह्मणको दान करता है, वह सब कुछ प्राप्त करता है। देवमन्दिर एवं देवप्रतिमाका निर्माण करानेवाला समस्त अभिलषित वस्तुओंको प्राप्त करता है । मन्दिरमें झाड़-बुहारी और प्रक्षालन करनेवाला पुरुष पापरहित हो जाता है । देवप्रतिमाके सम्मुख विविध मण्डलोंका

English

a man who gives fearlessness to all beings shares in all. A Purana, the Mahabharata or the Ramayana,

अध्याय २११

श्लोक 54

लिखित्वा पुस्तकं दत्त्वा भुक्तिमुक्तिमवाप्नुयात् ।वेदशास्त्रं नृत्यगीतं यो ऽध्यापयति नाकभाक्

likhitvā pustakaṃ dattvā bhuktimuktimavāpnuyāt / vedaśāstraṃ nṛtyagītaṃ yo 'dhyāpayati nākabhāk

हिन्दी अर्थ

निर्माण करनेवाला मण्डलाधिपति होता है । देवताको

English

having written and given the book, one obtains enjoyment and liberation. He who teaches Veda, scripture, dance and song shares heaven.

अध्याय २११

श्लोक 55

वित्तं दद्यादुपाध्याये छात्राणां भोजनादिकं ।किमदत्तं भवेत्तेन धर्मकामादिदर्शिना

vittaṃ dadyādupādhyāye chātrāṇāṃ bhojanādikaṃ / kimadattaṃ bhavettena dharmakāmādidarśinā

हिन्दी अर्थ

ध्वजा, चँदोवा और वस्त्र आदि समर्पित करनेसे एवं उनके दर्शन और उनके सम्मुख गाने-बजानेसे मनुष्य भोग और मोक्ष-दोनोंको प्राप्त करता है। भगवान्को कस्तूरी, सिंहलदेशीय चन्दन, अगुरु, विजयगुग्गुल समर्पित करे और संक्रान्ति आदिके दिन एक प्रस्थ घृतसे स्नान कराके मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर लेता है। 'स्नान' सौ पलका और पच्चीस पलका ' अभ्यङ्ग’ मानना चाहिए । ' महास्रान' हजार

English

One should give wealth to the teacher and food and the like to the students; what remains ungiven by that seer of dharma, desire and the rest?

अध्याय २११

श्लोक 56

वाजपेयसहस्रस्य सम्यग्दत्तस्य यत् फलं ।तत्फलं सर्वमाप्नोति विद्यादानन्न संशयः

vājapeyasahasrasya samyagdattasya yat phalaṃ / tatphalaṃ sarvamāpnoti vidyādānanna saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

पलका कहा गया है । भगवानको जलख्ान करानेसे दस अपराध, दुग्ध्ान करानेसे सौ अपराध, दुग्ध एवं दधि दोनोंसे स्नान करानेसे सहस्र अपराध और घृतस्रान करानेसे दस हजार अपराध

English

The fruit of a thousand Vajapeyas well performed — all that fruit is obtained by the gift of knowledge, without doubt.

अध्याय २११

श्लोक 57

शिवालये विष्णुगृहे सूर्यस्य भवने तथा ।सर्वदानप्रदः स स्यात् पुस्तकं वाचयेत्तु यः

śivālaye viṣṇugṛhe sūryasya bhavane tathā / sarvadānapradaḥ sa syāt pustakaṃ vācayettu yaḥ

हिन्दी अर्थ

विनष्ट हो जाते हैं। देवताके उद्देश्यसे दास-दासी, अलंकार, गौ, भूमि, हाथी-घोड़े और सौभाग्य- द्रव्य देकर मनुष्य धन और दीर्घायुसे युक्त होकर स्वर्गलोकको प्राप्त होता है॥ ६३ --७२॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें “नाना प्रकारके दानोंकी महिमाका वर्णन” नामक दो सौ ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

In a Shiva temple, Vishnu's house or the Sun's temple, he who reads a book aloud would be a giver of all gifts.

अध्याय २११

श्लोक 58

त्रैलोक्ये चतुरो वर्णाश् चत्वारश्चाश्रमाः पृथक् ।ब्रह्माद्या देवताः सर्वा विद्यादाने प्रतिष्ठताः

trailokye caturo varṇāś catvāraścāśramāḥ pṛthak / brahmādyā devatāḥ sarvā vidyādāne pratiṣṭhatāḥ

हिन्दी अर्थ

विविध काम्य-दान एवं मेरुदानोंका वर्णन

English

In the three worlds the four castes, the four stages separately, and all deities from Brahma are established in the gift of knowledge.

अध्याय २११

श्लोक 59

१ स्वर्गे महीयते इति ग॥ ।स्वर्गे सुखी भवेदेति घ॥ , ङ॥ च :प् २७० विद्या कामदुघा धेनुर्विद्या चक्षुरनुत्तमं ।उपवेदप्रदानेन गन्धर्वैः सह मोदते

1 svarge mahīyate iti ga.. / svarge sukhī bhavedeti gha.. , ṅa.. ca :p 270 vidyā kāmadughā dhenurvidyā cakṣuranuttamaṃ / upavedapradānena gandharvaiḥ saha modate

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं- वसिष्ठ! अब मैं आपके सम्मुख काम्य-दानोंका वर्णन करता हूँ, जो समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाले हैं। प्रत्येक मासमें प्रतिदिन पूजन करते हुए एक दिन विशेषरूपसे पूजन किया जाता है। इसे 'काम्य- पूजन' कहते हैं। वर्षके समाप्त होनेपर गुरुपूजन एवं महापूजनके साथ व्रतका विसर्जन किया जाता है

English

Knowledge is the wish-granting cow; knowledge is the supreme eye; by giving Upavedas he rejoices with Gandharvas;

अध्याय २११

श्लोक 60

वेदाङ्गानाञ्च दानेन स्वर्गलोकमवाप्नुयात् ।धर्मशास्त्रप्रदानेन धर्मेण सह मोदते

vedāṅgānāñca dānena svargalokamavāpnuyāt / dharmaśāstrapradānena dharmeṇa saha modate

हिन्दी अर्थ

जो मार्गशीर्षमासमें शिवका पूजन करके पिष्ट (आटा) निर्मित अश्व एवं कमलका दान करता है, वह चिरकालतक सूर्यलोकमें निवास करता है। पौषमासमें पिष्टमय हाथीका दान देकर

English

by gift of Vedangas one obtains heaven; by gift of dharma-shastra he rejoices with dharma;

अध्याय २११

श्लोक 61

सिद्धान्तानां प्रदानेन मोक्षमाप्नोत्यसंशयं ।विद्यादानमवाप्नोति प्रदानात् पुस्तकस्य तु

siddhāntānāṃ pradānena mokṣamāpnotyasaṃśayaṃ / vidyādānamavāpnoti pradānāt pustakasya tu

हिन्दी अर्थ

मनुष्य अपनी इक्कीस पीढ़ियोंका उद्धार कर देता है। माघमें पिष्टमय अश्वयुक्त रथका दान देनेवाला नरकमें नहीं जाता। फाल्गुनमें पिष्टनिर्मित बैलका दान देकर मनुष्य स्वर्गको प्राप्त होता है तथा दूसरे जन्ममें राज्य प्राप्त करता है। चैत्रमासमें दास- दासियोंसे युक्त एवं ईख (गुड़) -से भरा हुआ घर देकर मनुष्य चिरकालतक स्वर्गलोकमें निवास करता है और उसके बाद राजा होता है।

English

by gift of siddhantas he surely obtains liberation; by giving a book he obtains the gift of knowledge.

अध्याय २११

श्लोक 62

शास्त्राणि च पुराणानि दत्त्वा सर्वमवाप्नुयात् ।शिष्यांश् च शिक्षयेद्यस्तु पुण्डलीकफलं लभेत्

śāstrāṇi ca purāṇāni dattvā sarvamavāpnuyāt / śiṣyāṃś ca śikṣayedyastu puṇḍalīkaphalaṃ labhet

हिन्दी अर्थ

वैशाखमें सप्तधान्यका दान देकर मनुष्य शिवके सायुज्यको प्राप्त कर लेता है। ज्येष्ठ तथा आषाढ्में अन्नकी बलि देनेवाला शिवस्वरूप हो जाता है। श्रावणमें पुष्परथका दान देकर मनुष्य स्वर्गके

English

Having given scriptures and Puranas one obtains everything; one who teaches disciples obtains the fruit of the lotus;

अध्याय २११

श्लोक 63

येन जीवति तद्दत्त्वा फलस्यान्तो न विद्यते ।लोके स्रेष्ठतमं सर्वमात्मनश्चापि यत् प्रियं

yena jīvati taddattvā phalasyānto na vidyate / loke sreṣṭhatamaṃ sarvamātmanaścāpi yat priyaṃ

हिन्दी अर्थ

सुखोंका उपभोग करनेके पश्चात् दूसरे जन्ममें राज्यलाभ करता है और दो सौ फलोंका दान देनेवाला अपने सम्पूर्ण कुलका उद्धार करके राजपदको प्राप्त होता है। भाद्रपदमें धूपदान करनेवाला स्वर्गको प्राप्त होकर दूसरे जन्ममें राज्यका उपभोग करता है। आश्चिनमें दुग्ध और घृतसे परिपूर्ण पात्रका दान स्वर्गकी प्रापि करानेवाला है। कार्तिकमें गुड़, शक्कर और घृतका दान देकर

English

having given that by which he lives, there is no end to the fruit. What is best in the world and also dear to oneself,

अध्याय २११

श्लोक 64

सर्वं पितॄणां दातव्यं तेषामेवाक्षयार्थिना ।विष्णुं रुद्रं पद्मयोनिं देवीविघ्नेश्वरादिकान्

sarvaṃ pitṝṇāṃ dātavyaṃ teṣāmevākṣayārthinā / viṣṇuṃ rudraṃ padmayoniṃ devīvighneśvarādikān

हिन्दी अर्थ

मनुष्य स्वर्गलोकमें निवास करता है और दूसरे जन्ममें राजा होता है

English

all that should be given to ancestors by one desiring imperishability for them. Vishnu, Rudra, the lotus-born, the Goddess, Vighneshvara and the like,

अध्याय २११

श्लोक 65

पूजयित्वा प्रदद्याद्यः पूजाद्रव्यं स सर्वभाक् ।देवालयं च प्रतिमां कारयत् सर्वमाप्नुयात्

pūjayitvā pradadyādyaḥ pūjādravyaṃ sa sarvabhāk / devālayaṃ ca pratimāṃ kārayat sarvamāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

अब मैं बारह प्रकारके मेरुदानोंके विषयमें कहूँगा, जो भोग और मोक्षकी प्राप्ति करानेवाले हैं। कार्तिकी पूर्णिमाको मेरुब्रत करके ब्राह्मणको 'रत्नमेरु'का दान करना चाहिए। अब क्रमश: सब मेरुओंका प्रमाण सुनिये। हीरे, माणिक्य,

English

one who worships and gives substance for worship shares in all. One who has a temple and image made obtains everything;

अध्याय २११

श्लोक 66

सम्मार्जनं चोपलेपं कुर्वन् स्यान्निर्मलः पुमान् ।नानामण्डलकार्यग्रे मण्डलाधिपतिर्भवेत्(१)

sammārjanaṃ copalepaṃ kurvan syānnirmalaḥ pumān / nānāmaṇḍalakāryagre maṇḍalādhipatirbhavet(1)

हिन्दी अर्थ

मरकतमणि और मोती-इनका एक प्रस्थका मेरु उत्तम माना गया है। इससे आधे परिमाणका मेरु मध्यम और मध्यमसे आधा निकृष्ट होता है। रत्नमेरुका दान करनेवाला धनकी कंजूसीका

English

the one who sweeps and smears becomes stainless; in the work of many mandalas, he becomes the lord of a mandala.

अध्याय २११

श्लोक 67

गन्धं पुष्पं धूपदीपं नैवेद्यञ्च प्रदक्षिणं ।घण्टाध्वजवितानञ्च प्रेक्षणं वाद्यगौतकं

gandhaṃ puṣpaṃ dhūpadīpaṃ naivedyañca pradakṣiṇaṃ / ghaṇṭādhvajavitānañca prekṣaṇaṃ vādyagautakaṃ

हिन्दी अर्थ

परित्याग कर दे। द्वादशदल कमलका निर्माण करके उसकी कर्णिकापर मेरुकी स्थापना करे। इसके ब्रह्मा, विष्णु और शिव देवता हैं। मेरुसे पूर्व दिशामें तीन दल हैं, उनमें क्रमशः माल्यवान्, भद्राश्व तथा ऋक्ष पर्वतोंका पूजन करे। मेरुसे दक्षिणवाले दलोंमें निषध, हेमकूट और हिमवानूकी पूजा करे। मेरुसे उत्तरवाले तीन दलोंमें क्रमशः नील, श्वेत और शृङ्गीका पूजन करे तथा

English

Scent, flower, incense, lamp, food offering, circumambulation, bell, banner, canopy, spectacle, music and song,

अध्याय २११

श्लोक 68

वस्त्रादिदत्त्वादेवाय भुक्तिमुक्तिमवाप्नुयात् ।कस्तूरिकां शिह्लकञ्च श्रीखण्डमगुरून्तथा

vastrādidattvādevāya bhuktimuktimavāpnuyāt / kastūrikāṃ śihlakañca śrīkhaṇḍamagurūntathā

हिन्दी अर्थ

पश्चिमवाले दलोंमें गन्धमादन, वैकङ्क एवं केतुमालकी पूजा करे। इस प्रकार बारह पर्वतोंसे युक्त मेरु पर्वतका पूजन करना चाहिए

English

having given cloth and the like to the god one obtains enjoyment and liberation. Musk, shilhaka, sandal and agaru likewise,

अध्याय २११

श्लोक 69

कर्पूरञ्च तथामुस्तं गुग्गुलुं विजयं ददेत् ।१ सम्मार्जनमित्यादिः मण्डलाधिपतिर्भवेदित्यन्तः पाठः ज॥ पुस्तके नास्ति :प् २७१ घृतप्रस्थेन संस्थाप्य सङ्क्रान्त्यादौ स सर्वभाक्

karpūrañca tathāmustaṃ gugguluṃ vijayaṃ dadet / 1 sammārjanamityādiḥ maṇḍalādhipatirbhavedityantaḥ pāṭhaḥ ja.. pustake nāsti :p 271 ghṛtaprasthena saṃsthāpya saṅkrāntyādau sa sarvabhāk

हिन्दी अर्थ

उपवासपूर्वक रहकर स्नानके पश्चात् भगवान् विष्णु अथवा शिवका पूजन करे। भगवान्के सम्मुख मेरुका पूजन करके मन्त्रोच्चारणपूर्वक उसका ब्राह्मणको दान कर दे

English

camphor, mustaka, guggulu and vijaya one should give. Having established it with a prastha of ghee at Sankranti and the like, he shares in all.

अध्याय २११

श्लोक 70

स्नानं पलशतं ज्ञेयमभ्यङ्गं पञ्चविंशतिः ।पलानान्तु सहस्रेण महास्नानं प्रकीर्तितं

snānaṃ palaśataṃ jñeyamabhyaṅgaṃ pañcaviṃśatiḥ / palānāntu sahasreṇa mahāsnānaṃ prakīrtitaṃ

हिन्दी अर्थ

दानका संकल्प करते समय देश-कालके उच्चारणके पश्चात् कहे-'मैं इस द्रव्यनिर्मित उत्तम मेरु पर्वतका, जिसके देवता भगवान् विष्णु हैं, अमुक गोत्रवाले ब्राह्मणको दान करता हूँ।

English

A bath is known as a hundred palas; anointing as twenty-five; with a thousand palas the great bath is declared.

अध्याय २११

श्लोक 71

दशापराधास्तोयेन क्षीरेण स्नापनाच्छतं ।सहस्रं पयसा दध्ना घृतेनायुतमिष्यते

daśāparādhāstoyena kṣīreṇa snāpanācchataṃ / sahasraṃ payasā dadhnā ghṛtenāyutamiṣyate

हिन्दी अर्थ

इस दानसे मेरा अन्तःकरण शुद्ध हो जाय और मुझे उत्तम भोग एवं मोक्षकी प्राप्ति हो' इस प्रकार दान करनेवाला मनुष्य अपने समस्त कुलका उद्धार करके देवताओंद्वारा सम्मानित हो विमानपर बैठकर इन्द्रलोक, ब्रह्मलोक, शिवलोक तथा श्रीवैकुण्ठधाममें क्रीडा करता है। संक्रान्ति

English

Ten offences are removed by bathing with water; a hundred with milk; a thousand with milk and curds; ten thousand with ghee is desired.

अध्याय २११

श्लोक 72

दासीदासमलङ्कारं गोभूम्यश्वगजादिकं ।देवाय दत्त्वा सौभाग्यं धनायुष्मान् व्रजेद्दिवं

dāsīdāsamalaṅkāraṃ gobhūmyaśvagajādikaṃ / devāya dattvā saubhāgyaṃ dhanāyuṣmān vrajeddivaṃ

हिन्दी अर्थ

आदि अन्य पुण्यकालोंमें मेरुका दान करना- कराना चाहिए

English

Having given to the god maidservants, servants, ornaments, cows, land, horses, elephants and the like, one attains good fortune and goes to heaven with wealth and life.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 211
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.