Agni Purana· Agni Purāṇa
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अध्याय 226 / 381

Adhyaya 227

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पूर्ण अध्याय पाठ9 श्लोक

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अध्याय २२६

श्लोक 1

युद्धयात्रा पुष्कर उवाच यदा मन्येत नृपतिराक्रन्देन बलीयसा ।पार्ष्णिग्राहो ऽभिभूतो मे तदा यात्रां प्रयोजयेत्

yuddhayātrā puṣkara uvāca yadā manyeta nṛpatirākrandena balīyasā / pārṣṇigrāho 'bhibhūto me tadā yātrāṃ prayojayet

हिन्दी अर्थ

राजाके ही कर्मचारी हैं। इसके बाद विधिपूर्वक आय और व्ययका हिसाब सुने। फिर शौच आदिसे निवृत्त होकर राजा स्नानगृहमें प्रवेश करे। वहाँ नरेशको पहले दन्तधावन (दाँतुन) करके फिर स्नान करना चाहिए। तत्पश्चात् संध्योपासना

English

Kerh hrirh vausaf be (the mantra) for the tuft. Kferft hurk would be for the armour. Hr Urn vausaf (be) for the three eyes ending with hrim and phaf.

अध्याय २२६

श्लोक 2

पुष्ता योधा भृटा भृत्याः प्रभूतञ्च बलं मम ।मूलरक्षासमर्थो ऽस्मि तैर् गत्वा(२) शिविरे व्रजेत्

puṣtā yodhā bhṛṭā bhṛtyāḥ prabhūtañca balaṃ mama / mūlarakṣāsamartho 'smi tair gatvā(2) śivire vrajet

हिन्दी अर्थ

करके भगवान् वासुदेवका पूजन करना उचित है। तदनन्तर राजा पवित्रतापूर्वक अग्निमें आहुति दे; फिर जल लेकर पितरोंका तर्पण करे। इसके बाद ब्राह्मणोंका आशीर्वाद सुनते हुए उन्हें सुवर्णसहित

English

(The names of) the nine (goddesses of) energy (are) Hriihkari, Khecari, Canda, Chedani, Ksobhani, Kriya, Ksema- kari, Hriihkari and Phatkari.

अध्याय २२६

श्लोक 3

शत्रोर्वा व्यसने यायात् दैवाद्यैः पीडितं परं ।भूकम्पो यान्दिशं याति याञ्च केतुर्व्यदूषयत्

śatrorvā vyasane yāyāt daivādyaiḥ pīḍitaṃ paraṃ / bhūkampo yāndiśaṃ yāti yāñca keturvyadūṣayat

हिन्दी अर्थ

इन सब कार्यासे अवकाश पाकर चन्दन और आभूषण धारण करे तथा दर्पणमें अपना मुँह देखे। साथ ही सुवर्णयुक्त घृतमें भी मुँह देखे। फिर हैनिक-कथा आदिका श्रवण करे। तदनन्तर वैद्यकी बतायी हुई दवाका सेवन करके माङ्गलिक वस्तुओंका स्पर्श करे। फिर गुरुके पास जाकर उनका दर्शन करे और उनका आशीर्वाद लेकर राजसभामें प्रवेश करे

English

A homa (oblation) performed after having practised the

अध्याय २२६

श्लोक 4

विद्विष्टनाशकं सैन्यं सम्भूतान्तःप्रकोपनं(३) ।शरीरस्फुरणे धन्ये तथा सुस्वप्रदर्शने

vidviṣṭanāśakaṃ sainyaṃ sambhūtāntaḥprakopanaṃ(3) / śarīrasphuraṇe dhanye tathā susvapradarśane

हिन्दी अर्थ

महाभाग! सभामें विराजमान होकर राजा ब्राह्मणों, अमात्यों तथा मन्त्रियाँसे मिले। साथ ही द्वारपालने जिनके आनेकी सूचना दी हो, उन प्रजाओंको भी बुलाकर उन्हें दर्शन दे; उनसे

English

An army destroying enemies, arisen with internal anger, on twitching of the body, on auspicious and good dreams seen,

अध्याय २२६

श्लोक 5

निमित्ते शकुने धन्ये जाते शत्रुपुरं व्रजेत् ।१ पुनर्जित्वेति ग॥ , घ॥ , ज॥ च २ तैर् वृत्वा इति साधुः ३ सम्भूतान्तःकोपदमिति ख॥ , छ॥ च :प् ३२९ पदातिनागबहुलां सेनां प्रावृषि योजयेत्

nimitte śakune dhanye jāte śatrupuraṃ vrajet / 1 punarjitveti ga.. , gha.. , ja.. ca 2 tair vṛtvā iti sādhuḥ 3 sambhūtāntaḥkopadamiti kha.. , cha.. ca :p 329 padātināgabahulāṃ senāṃ prāvṛṣi yojayet

हिन्दी अर्थ

मिले। फिर इतिहासका श्रवण करके राज्यका कार्य देखे। नाना प्रकारके कार्योमें जो कार्य अत्यन्त आवश्यक हो, उसका निश्चय करे । तत्पश्चात् प्रजाके मामले-मुकद्दमोंको देखे और मन्त्रियोंके साथ गुप्त परामर्श करे। मन्त्रणा न तो एकके साथ करे, न अधिक मनुष्योंके साथ; न मूर्खोके साथ और न अविश्वसनीय पुरुषोंके साथ ही करे। उसे सदा गुप्तरूपसे ही करे; दूसरोंपर प्रकट न होने

English

on omens and auspicious signs occurring, one should march to the enemy's city. In the rains an army with many infantry and elephants should be employed;

अध्याय २२६

श्लोक 6

हेमन्ते शिशिरे चैव रथवाजिसमाकुलां ।चतुरङ्गबलोपेतां वसन्ते वा शरन्म्मुखे(१)

hemante śiśire caiva rathavājisamākulāṃ / caturaṅgabalopetāṃ vasante vā śaranmmukhe(1)

हिन्दी अर्थ

दे। मन्त्रणाको अच्छी तरह छिपाकर रखे, जिससे राज्यमें कोई बाधा न पहुँचे। यदि राजा अपनी आकृतिको परिवर्तित न होने दे-सदा एक रूपमें रहे तो यह गुप्त मन्त्रणाकी रक्षाका सबसे बड़ा

English

in winter and in cool season, one full of chariots and horses; in spring or at autumn's start one with fourfold force;

अध्याय २२६

श्लोक 7

सेना पदातिबहुला शत्रून् जयति सर्वदा ।अङ्गसक्षिणभागे तु शस्तं प्रस्फुरणं भवेत्

senā padātibahulā śatrūn jayati sarvadā / aṅgasakṣiṇabhāge tu śastaṃ prasphuraṇaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

उपाय माना गया है; क्योंकि बुद्धिमान् विद्वान् पुरुष आकार और चेष्टाएँ देखकर ही गुप्तमन्त्रणाका पता लगा लेते हैं। राजाको उचित है कि वह ज्यौतिषियों, वैद्यों और मन्त्रियोंकी बात माने। इससे वह ऐश्वर्यको प्राप्त करता है; क्योंकि ये

English

an army with many infantry always conquers enemies. Twitching on the right part of the body is praised;

अध्याय २२६

श्लोक 8

न शस्तन्तु तथा वामे पृष्ठस्य हृदयस्य च ।लाञ्छनं पिटकञ्चैव विज्ञेयं स्फुरणं तथा

na śastantu tathā vāme pṛṣṭhasya hṛdayasya ca / lāñchanaṃ piṭakañcaiva vijñeyaṃ sphuraṇaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

लोग राजाको अनुचित कार्याँसे रोकते और हितकर कामोंमें लगाते हैं ॥ ८-१२ ३ ॥

English

on the left, back and heart it is not so; a mark, boil and twitching should be known likewise;

अध्याय २२६

श्लोक 9

विपर्ययेणाभिहितं सव्ये स्त्रीणां शुभं भवेत्

viparyayeṇābhihitaṃ savye strīṇāṃ śubhaṃ bhavet /

हिन्दी अर्थ

वाहनोंके हाँकने और शस्त्र चलानेका अभ्यास करते हुए कुछ कालतक व्यायाम करना चाहिए। युद्ध आदिके अवसरोंपर वह स्नान करके भलीभाँति पूजित हुए भगवान् विष्णुका, हवनके पश्चात् प्रज्वलित हुए अग्निदेवका तथा दान-मान आदिसे सत्कृत ब्राह्मणोंका दर्शन करे। दान आदिके पश्चात् वस्त्राभूषणोंसे विभूषित होकर राजा भलीभाँति जाँचे-बूझे हुए अन्नका भोजन करे। भोजनके

English

by reversal for women the left is auspicious.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 226
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.