Agni Purana· Agni Purāṇa
263
अध्याय 263 / 381

Adhyaya 264

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पूर्ण अध्याय पाठ18 श्लोक

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अध्याय २६३

श्लोक 1

दिक्पालादिस्नानं अग्निर् उवाच सर्वार्थसाधनं स्नानं वक्ष्ये शान्तिकरं शृणु ।स्नापयेच्च सरित्तीरे ग्रहान् विष्णुं विचक्षणः

dikpālādisnānaṃ agnir uvāca sarvārthasādhanaṃ snānaṃ vakṣye śāntikaraṃ śṛṇu / snāpayecca sarittīre grahān viṣṇuṃ vicakṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

कर दो।' उनको आज्ञासे ताराने उस गर्भका त्याग किया, जिससे बड़ा तेजस्वी कुमार प्रकट हुआ। उसने पैदा होते ही कहा--'मैं चन्द्रमाका पुत्र हूँ।' इस प्रकार सोमसे बुधका जन्म हुआ। उनके पुत्र पुरूरवा हुए; उर्वशी नामकी अप्सराने स्वर्ग छोड़कर पुरूरवाका वरण किया

English

The four hymns rathevaksefu vrabhc? in the Tajur {Veda) (are said to confer) fortune. The Sdma hymns srdoanttyeakP is the irisUkta in the Samaveda.

अध्याय २६३

श्लोक 2

१ सौरभेया इति क॥ , घ॥ , छ॥ , ञ॥ च २ पुष्पराशय इति ज॥ , ट॥ च :प् ४६७ देवालये ज्वरार्त्यादौ विनायकग्रहार्दिते ।विद्यार्थिनो ह्रदे गेहे जयकामस्य तीर्थके

1 saurabheyā iti ka.. , gha.. , cha.. , ña.. ca 2 puṣparāśaya iti ja.. , ṭa.. ca :p 467 devālaye jvarārtyādau vināyakagrahārdite / vidyārthino hrade gehe jayakāmasya tīrthake

हिन्दी अर्थ

महामुने! राजा पुरूरवाने उर्वशीके साथ उनसठ वर्षोतक विहार किया। पूर्वकालमें एक ही अग्नि थे। राजा पुरूरवाने ही उन्हें (गार्हपत्य, आहवनीय और दक्षिणाग्नि-भेदसे) तीन रूपोंमें प्रकट किया।

English

In the same way, (the hymn) Sriyarh dhdtarmayi dhehi in the Atharvaveda is said (to be conferring fortune). One who repeats the irisUkta with devotion and offers pblation gets fortune.

अध्याय २६३

श्लोक 3

पद्मिन्यां स्नापयेन्नारीं गर्भो यस्याः स्रवेत्तथा ।अशोकसन्निधौ स्नायाज्जातो यस्या विनश्यति

padminyāṃ snāpayennārīṃ garbho yasyāḥ sravettathā / aśokasannidhau snāyājjāto yasyā vinaśyati

हिन्दी अर्थ

राजा योगी थे। अन्तमें उन्हें गन्धर्वलोककी प्राप्ति हुई । उर्वशीने राजा पुरूरवासे आयु, दृढ़ायु, अश्वायु, इन आठ पुत्रोंको उत्पन्न किया। आयुके नहुष, वृद्धशर्मा, रजि, दम्भ और विपाप्मा-ये पाँच पुत्र हुए। रजिसे सौ पुत्रोंका जन्म हुआ। वे 'राजेय'के नामसे प्रसिद्ध थे। राजा रजिको भगवान्

English

One will get fortune by oflfering oblations of lotuses, biloa (leaves), clarified butter and sesamum. The puruasUktcfi is the same for each one of the Vedas, It gives everything.

अध्याय २६३

श्लोक 4

पुष्पार्थिनाञ्च पुष्पाढ्ये पुत्रार्थिनाञ्च सागरे ।गृहसौभाग्यकामानां सर्वेषां विष्णुसन्निधौ

puṣpārthināñca puṣpāḍhye putrārthināñca sāgare / gṛhasaubhāgyakāmānāṃ sarveṣāṃ viṣṇusannidhau

हिन्दी अर्थ

विष्णुसे वरदान प्राप्त हुआ था। उन्होंने देवासुर- संग्राममे देवताओंकी प्रार्थनासे हैत्योंका वध किया था। इन्द्र राजा रजिके पुत्रभावको प्राप्त हुए। रजि स्वर्गका राज्य इन्द्रको देकर स्वयं दिव्यलोकवासी

English

The Atharvaa hymns.

अध्याय २६३

श्लोक 5

वैष्णवे रेवतीपुष्ये सर्वेषां स्नानमुत्तमं ।स्नानकामस्य सप्ताहम्पूर्वमुत्सादनं स्मृतं

vaiṣṇave revatīpuṣye sarveṣāṃ snānamuttamaṃ / snānakāmasya saptāhampūrvamutsādanaṃ smṛtaṃ

हिन्दी अर्थ

हो गये। कुछ कालके बाद रजिके पुत्रोंने इन्द्रका राज्य छीन लिया। इससे वे मन-ही-मन बहुत दुखी हुए। तदनन्तर देवगुरु बृहस्पतिने ग्रह-शान्ति आदिको विधिसे रजिके पुत्रोंको मोहित करके राज्य लेकर इन्द्रको दे दिया। उस समय रजिके पुत्र अपने धर्मसे भ्रष्ट हो गये थे। राजा नहुषके सात

English

RV. Kh. 5.87.1a.

अध्याय २६३

श्लोक 6

पुनर् नवां रोचनाञ्च शताङ्गं गुरुणी त्वचं ।मधूकं रजनी द्वे च तगरन्नागकेशरम्

punar navāṃ rocanāñca śatāṅgaṃ guruṇī tvacaṃ / madhūkaṃ rajanī dve ca tagarannāgakeśaram

हिन्दी अर्थ

पुत्र हुए। उनके नाम थे-यति, ययाति, उत्तम,

English

Vidh. 65.7.

अध्याय २६३

श्लोक 7

अम्बरीञ्चैव मञ्जिष्ठां मांसीयासकमर्दनैः ।प्रियङ्गुसर्षपं कुष्ठम्बलाम्ब्राह्मीञ्च कुङ्कुमं

ambarīñcaiva mañjiṣṭhāṃ māṃsīyāsakamardanaiḥ / priyaṅgusarṣapaṃ kuṣṭhambalāmbrāhmīñca kuṅkumaṃ

हिन्दी अर्थ

कुमारावस्थामें होनेपर भी भगवान् विष्णुका ध्यान करके उनके स्वरूपको प्राप्त हो गये। उस समय शुक्राचार्यको कन्या देवयानी तथा वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठा-ये दो राजा ययातिकी पत्नियाँ हुई। राजाके इन दोनों स्त्रियोंसे पाँच पुत्र उत्पन्न हुए। देवयानीने यदु और तुर्वसुको जन्म दिया और वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठाने द्रु, अनु और पूरुये तीन पुत्र उत्पन्न किये। इनमेंसे यदु

English

Gf. Srdvanta u«a, Vaj. Sam. 33.41a.

अध्याय २६३

श्लोक 8

पञ्चगव्यं शक्तुमिश्रं उद्वर्त्य स्नानमाचरेत् ।मण्डले कर्णिकायाञ्च विष्णुं ब्राह्मणमर्चयेत्

pañcagavyaṃ śaktumiśraṃ udvartya snānamācaret / maṇḍale karṇikāyāñca viṣṇuṃ brāhmaṇamarcayet

हिन्दी अर्थ

और पूरुये दो ही सोमवंशका विस्तार करनेवाले हुए

English

Ap. Sr. 6.20.2.

अध्याय २६३

श्लोक 9

दक्षे वामे हरं पूर्वं पत्रे पूर्वादिके क्रमात् ।लिखेदिन्द्रादिकान्देवान् सायुधान् सहबान्धवान्(१)

dakṣe vāme haraṃ pūrvaṃ patre pūrvādike kramāt / likhedindrādikāndevān sāyudhān sahabāndhavān(1)

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'सोमवंशका वर्णन” नामक दो सौ चोहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ अग्निदेव कहते हैं-- वसिष्ठ! यदुके पाँच पुत्र

English

RV. 10.90.1a.

अध्याय २६३

श्लोक 10

स्नानमण्डलकान् दिक्षु कुर्याच्चैव विदिक्षु च ।विष्णुब्रह्मेशशक्रादींस्तदस्त्राण्यर्च्य होमयेत्

snānamaṇḍalakān dikṣu kuryāccaiva vidikṣu ca / viṣṇubrahmeśaśakrādīṃstadastrāṇyarcya homayet

हिन्दी अर्थ

सहसत्रजित्। इनमें सहस्रजित् सबसे ज्येष्ठ थे। शतजित्के हैहय, रेणुहय और हय--ये तीन पुत्र हुए। हैहयके धर्मनेत्र और धर्मनेत्रके पुत्र संहत हुए। संहतके पुत्र महिमा तथा महिमाके भद्रसेन

English

One would get all the pleasures by giving away a fruit with each one ( of the hymns) after bathing. By the re¬ petition of the PurufasBkta major and minor sins are destroyed.

अध्याय २६३

श्लोक 11

एकैकस्य त्वष्टशतं समिधस्तु तिलान् धृतं ।भद्रः सुभद्रः सिद्धार्थः कलसाः पुष्टिवर्धनाः

ekaikasya tvaṣṭaśataṃ samidhastu tilān dhṛtaṃ / bhadraḥ subhadraḥ siddhārthaḥ kalasāḥ puṣṭivardhanāḥ

हिन्दी अर्थ

थे। भद्रसेनके दुर्गम और दुर्गमसे कनकका जन्म हुआ। कनकसे कृतवीर्य, कृताग्नि, करवीरक और चौथे कृतौजा नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। कृतवीर्यसे अर्जुन हुए। अर्जुनने तपस्या की, इससे प्रसन्न होकर भगवान् दत्तात्रेयने उन्हें सातों द्वीपोंकी पृथ्वीका आधिपत्य, एक हजार भुजाएँ और संग्राममे अजेयताका वरदान दिया। साथ ही यह भी कहा-- ' अधर्ममें प्रवृत्त होनेपर भगवान् विष्णुके (अवतार

English

One gets everything by repeating the krcckra (hymns) and offering oblations (with them) after becoming clean by bathing. Three other appeasing (hymns) besides the eighteen appeasing (hymns) are excellent.

अध्याय २६३

श्लोक 12

अमोघश्चित्रभानुश् च पर्जन्यो ऽथ सुदर्शनः ।स्थापयेत्तु वटानेनान् साश्विरुद्रमरुद्गणान्

amoghaścitrabhānuś ca parjanyo 'tha sudarśanaḥ / sthāpayettu vaṭānenān sāśvirudramarudgaṇān

हिन्दी अर्थ

श्रीपरशुरामजीके) हाथसे तुम्हारी मृत्यु निश्चित है।' राजा अर्जुनने दस हजार यज्ञोंका अनुष्ठान किया। उनके स्मरणमात्रसे राष्ट्रमें किसीके धनका नाश नहीं होता था। यज्ञ, दान, तपस्या, पराक्रम

English

The portent will not bear any fruit if it rains within seven days. A portent without any appeasement within three years is very dangerous.

अध्याय २६३

श्लोक 13

१ सहवाहनानिति घ॥ , ज॥ च :प् ४६८ विश्वे देवस् तथा दैत्या वसवो मुनयस् तथा ।आवेशयन्तु सुप्रीतास् तथान्या अपि देवताः

1 sahavāhanāniti gha.. , ja.. ca :p 468 viśve devas tathā daityā vasavo munayas tathā / āveśayantu suprītās tathānyā api devatāḥ

हिन्दी अर्थ

और शास्त्रज्ञानके द्वारा कोई भी राजा कृतवीर्यकुमार अर्जुनकी गतिको नहीं पा सकता। कार्तवीर्य अर्जुनके सौ पुत्र थे, उनमें पाँच प्रधान थे। उनके नाम हैं -शूरसेन, शूर, धृष्टोक्त, कृष्ण और जयध्वज। जयध्वज अवन्ती-देशके महाराज थे। जयध्वजसे तालजङ्घका जन्म हुआ और तालजङ्घसे अनेक पुत्र उत्पन्न हुए, जो तालजङ्घके ही नामसे प्रसिद्ध थे। हैहयवंशी क्षत्रियोंके पाँच कुल हैं-भोज,

English

When the trees bear fruit out of season, ooze out milk and blood, one should do the appeasing rite for the portents after worshipping ( Lord) Siva.

अध्याय २६३

श्लोक 14

ओषधीर् निक्षिपेत् कुम्भे जयन्तीं विजयां जयां ।शतावरीं शतपुष्पां विष्णुक्रान्तापराजिताम्

oṣadhīr nikṣipet kumbhe jayantīṃ vijayāṃ jayāṃ / śatāvarīṃ śatapuṣpāṃ viṣṇukrāntāparājitām

हिन्दी अर्थ

अवन्ति, वीतिहोत्र, स्वयंजात और शौण्डिकेय। वीतिहोत्रसे अनन्तकी उत्पत्ति हुई और अनन्तसे दुर्जय नामक राजाका जन्म हुआ

English

Both excessive rains and draught are considered to give rise to famine. Rain occurring consecutively for three days out of season is known (to be a portent) of danger. The change in (the pattern of) rain is nullified by the worship of Parjanya (Rain god). Moon and Sun.

अध्याय २६३

श्लोक 15

ज्योतिष्मतीमतिबलाञ्चन्दनोशीरकेशरं ।कस्तूरिकाञ्च कर्पूरं बालकं पत्रकं त्वचं

jyotiṣmatīmatibalāñcandanośīrakeśaraṃ / kastūrikāñca karpūraṃ bālakaṃ patrakaṃ tvacaṃ

हिन्दी अर्थ

अब क्रोष्टुके वंशका वर्णन करूँगा, जहाँ साक्षात् भगवान् विष्णुने अवतार धारण किया था। क्रोष्टसे वृजिनीवान् और वृजिनीवानूसे स्वाहाका जन्म हुआ। स्वाहाके पुत्र रुषद्गु और उनके पुत्र चित्ररथ थे। चित्ररथसे शशबिन्दु उत्पन्न हुए, जो चक्रवर्ती राजा थे। वे सदा भगवान् विष्णुके भजनमें ही लगे रहते थे। शशबिन्दुके दस हजार पुत्र थे। वे सब-के-सब बुद्धिमान्, सुन्दर, अधिक

English

The women may deliver prematurely or may not deliver at the appropriate time. They may deliver children with deformities or deliver twins etc. One should worship the women and brahmins in the case of such deviations in the delivery (as above).

अध्याय २६३

श्लोक 16

जातीफलं लवङ्गञ्च मृत्तिकां पञ्चगव्यकं ।भद्रपीठे स्थितं साध्यं स्नापयेयुर्द्विजा बलात्

jātīphalaṃ lavaṅgañca mṛttikāṃ pañcagavyakaṃ / bhadrapīṭhe sthitaṃ sādhyaṃ snāpayeyurdvijā balāt

हिन्दी अर्थ

धनवान् और अत्यन्त तेजस्वी थे; उनमें पृथुश्रवा ज्येष्ठ थे। उनके पुत्रका नाम सुयज्ञ था। सुयज्ञके पुत्र उशना और उशनाके तितिक्षु हुए। तितिक्षुसे मरुत्त और मरुत्तसे कम्बलबर्हिष (जिनका दूसरा

English

Where the fire does not glow, the waterpots ooze, there is the fear of death and witchcraft as the result of the portents. The portent is appeased by the worship of brahmins and gods, recitation of hymns and offer of oblations.

अध्याय २६३

श्लोक 17

राजाभिषेकमन्त्रोक्तदेवानां होमकाः पृथक् ।पूर्णाहुतिन्ततो दत्वा गुरवे दक्षिणां ददेत्

rājābhiṣekamantroktadevānāṃ homakāḥ pṛthak / pūrṇāhutintato datvā gurave dakṣiṇāṃ dadet

हिन्दी अर्थ

नाम रुक्मकवच था) हुए। रुक्मकवचसे रुक्मेषु, पृथुरुक्मक, हवि, ज्यामघ और पापघ्न आदि पचास पुत्र उत्पन्न हुए। इनमें ज्यामघ अपनी स्त्रीके वशीभूत रहिनेवाला था। उससे उसकी पत्नी शैव्याके गर्भसे विदर्भकी उत्पत्ति हुई। विदर्भके कौशिक, लोमपाद और क्रथ नामक पुत्र हुए। इनमें लोमपाद ज्येष्ठ थे। उनसे कृतिका जन्म

English

Where the fire does not glow, the waterpots ooze, there is the fear of death and witchcraft as the result of the portents. The portent is appeased by the worship of brahmins and gods, recitation of hymns and offer of oblations.

अध्याय २६३

श्लोक 18

इन्द्रो ऽभिषिक्तो गुरुणा पुरा दैत्यान् जघान ह ।दिक्पालस्नानङ्कथितं संग्रामादौ जयादिकं

indro 'bhiṣikto guruṇā purā daityān jaghāna ha / dikpālasnānaṅkathitaṃ saṃgrāmādau jayādikaṃ

हिन्दी अर्थ

हुआ। कौशिकके पुत्रका नाम चिदि हुआ। चिदिके वंशज राजा ' चैद्य'के नामसे प्रसिद्ध हुए। विदर्भपुत्र क्रथसे कुन्ति और कुन्तिसे धृष्टकका जन्म हुआ। धृष्टकके पुत्र धृति और धृतिके विदूरथ

English

Where the fire does not glow, the waterpots ooze, there is the fear of death and witchcraft as the result of the portents. The portent is appeased by the worship of brahmins and gods, recitation of hymns and offer of oblations.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 263
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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