Agni Purana· Agni Purāṇa
262
अध्याय 262 / 381

Adhyaya 263

29 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ29 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय २६२

श्लोक 1

देवपूजावैश्वदेवबलिः पुष्कर उवाच देवपूजादिकं कर्म वक्ष्ये चोत्पातमर्दनम् ।आपोहिष्टेति तिसृभिः स्नातो ऽर्घ्यं विओष्णवेर्पयेत्

devapūjāvaiśvadevabaliḥ puṣkara uvāca devapūjādikaṃ karma vakṣye cotpātamardanam / āpohiṣṭeti tisṛbhiḥ snāto 'rghyaṃ vioṣṇaverpayet

हिन्दी अर्थ

वैवस्वत मनुके दस पुत्र हुए, जो उन्हींके समान तेजस्वी थे। उनके नाम इस प्रकार हैं

English

One will get rid of all the diseases by offering oblations to ( the gods of) the remedial class. One will get free from all sins by offering oblations to ( the gods of) the trisaptiya cls. SV. 1. 184a; 2.1190a.

अध्याय २६२

श्लोक 2

हिरण्यवर्णा इति च पाद्यञ्च तिसृभिर्द्विज ।शन्न आपो ह्य् आचमनमिदमापो ऽभिषेचनं

hiraṇyavarṇā iti ca pādyañca tisṛbhirdvija / śanna āpo hy ācamanamidamāpo 'bhiṣecanaṃ

हिन्दी अर्थ

नृग, सत्पुरुषोंमें श्रेष्ठ दिष्ट, करूष और पृषध्र-ये दसौं महाबली राजा अयोध्यामें हुए। मनुकी इला नामवाली एक कन्या भी थी, जिसके गर्भसे बुधके अंशसे पुरूरवाका जन्म हुआ। पुरूरवाको उत्पन्न करके इला पुरुषरूपमें परिणत हो गयी। उस समय उसका नाम सुद्युम्न हुआ । सुद्युम्नसे उत्कल, गय और विनताश्वइन तीन राजाओंका जन्म हुआ उत्कलको उत्कलप्रान्त (उड़ीसा) -का राज्य

English

SV. 1. 51a; 2.867a. SV. 1.256a; 2.923a.

अध्याय २६२

श्लोक 3

रथे अक्षे च तिसृभिर्गन्धं युवेति(१) वस्त्रकं ।पुष्पं पुष्पवतीत्येवं धूपन्धूपोसि चाप्यथ

rathe akṣe ca tisṛbhirgandhaṃ yuveti(1) vastrakaṃ / puṣpaṃ puṣpavatītyevaṃ dhūpandhūposi cāpyatha

हिन्दी अर्थ

मिला, विनताश्वका पश्चिमदिशापर अधिकार हुआ तथा राजाओंमें श्रेष्ठ गय पूर्वदिशाके राजा हुए, जिनको राजधानी गयापुरी थी । राजा सुद्युम्न बसिष्ठ ऋषिके आदेशसे प्रतिष्ठानपुरमें' आ गये और उसीको

English

SV. 1.233a; 2.30a. Could not be traced.

अध्याय २६२

श्लोक 4

तेजोसि शुक्रं दीपं स्यान्मधुपर्कं दधीति च ।हिरण्यगर्भ इत्य् अष्टावृचः प्रोक्ता निवेदने

tejosi śukraṃ dīpaṃ syānmadhuparkaṃ dadhīti ca / hiraṇyagarbha ity aṣṭāvṛcaḥ proktā nivedane

हिन्दी अर्थ

अपनी राजधानी बनाया। उन्होंने वहाँका राज्य पाकर उसे पुरूरवाको दे दिया। नरिष्यन्तके पुत्र “शक' नामसे प्रसिद्ध हुए। नाभागसे परमवैष्णव अम्बरीषका जन्म हुआ। वे प्रजाओंका अच्छी तरह पालन करते थे। राजा धृष्टसे धार्डक-वंशका विस्तार हुआ। सुकन्या और आनर्त-ये दो शर्यातिकी संताने हुई। आनर्तसे 'रेव' नामक नरेशकी उत्पत्ति हुई। आनर्तदेशमें उनका राज्य था और कुशस्थली

English

MS. 4.9.11:132.10. See , note 6.

अध्याय २६२

श्लोक 5

अन्नस्य मनुजश्रेष्ठ पानस्य च सुगन्धिनः ।चामरव्यजनोपानच्छत्रं यानासने तथा

annasya manujaśreṣṭha pānasya ca sugandhinaḥ / cāmaravyajanopānacchatraṃ yānāsane tathā

हिन्दी अर्थ

उनको राजधानी थी। रेवके पुत्र रैवत हुए, जो “ककुद्मी ' नामसे प्रसिद्ध और धर्मात्मा थे। वे

English

Tait. Sam.2.3.10.2. One will never get fear by offering oblations to ( the gods of) the protection class. O Rama! one will never be born by offering oblations to (the gods of) the apardjita (unconquered) class.

अध्याय २६२

श्लोक 6

१ गन्धं स्वधेति क॥ , ग॥ ,घ॥ , ज॥ च :प् ४६४ यत् किञ्चिदेवमादि स्यात्सावित्रेण निवेदयेत् ।पौरुषन्तु जपेत् सूक्तं तदेव जुहुयात्तथा

1 gandhaṃ svadheti ka.. , ga.. ,gha.. , ja.. ca :p 464 yat kiñcidevamādi syātsāvitreṇa nivedayet / pauruṣantu japet sūktaṃ tadeva juhuyāttathā

हिन्दी अर्थ

अपने पिताके सौ पुत्रॉंमें सबसे बड़े थे, अतः कुशस्थलीका राज्य उन्हींको मिला एक समयको बात है-वे अपनी कन्या रेवतीको साथ लेकर ब्रह्माजीके पास गये और वहाँ संगीत सुनने लगे। वहाँ ब्रह्माजीके समयसे दो ही घड़ी बीती, किंतु इतनेहीमें मर्त्यलोके

English

One will ward off untimely death by offering oblations to ( the gods of) the life-giving class. One will get welfare everywhere by offering oblations to (the gods of) the welfare class. One will get united with good fortune (by propitiating the gods of) happiness and armour group. One will remove the defects of a building by offering oblations to the class of deities presiding over the foundations of a house.

अध्याय २६२

श्लोक 7

अर्चाभवे तथा वेद्याञ्जले पूर्णघते तथा ।नदीतीरे ऽथ कमले शान्तिः स्याद्विष्णुपूजनात्

arcābhave tathā vedyāñjale pūrṇaghate tathā / nadītīre 'tha kamale śāntiḥ syādviṣṇupūjanāt

हिन्दी अर्थ

अंदर अनेक युग समाप्त हो गये। संगीत सुनकर वे बड़े वेगसे अपनी पुरीको लौटे, परंतु अब उसपर यदुवंशियोंका अधिकार हो गया था। उन्होंने कुशस्थलीको जगह द्वारका नामकी पुरी बसायी

English

In the same way one will remove all the defects by ofiering oblations to ( the gods of) the Raudra class. Oblations (arc to be offered to) these ten classes in eighteen propitiatory (rites). One will never be afflicted by serpents by offering oblations with (the hymn) supamastviP! (The hymn) indrena daitmfp confers all the pleasures.

अध्याय २६२

श्लोक 8

ततो होमः प्रकर्तव्यो दीप्यमाने विभावसौ ।परिसम्मृज्य पर्युक्ष्य परिस्तीर्य परिस्तरैः

tato homaḥ prakartavyo dīpyamāne vibhāvasau / parisammṛjya paryukṣya paristīrya paristaraiḥ

हिन्दी अर्थ

थी, जो बड़ी मनोरम और अनेक द्वारोंसे सुशोभित थी। भोज, वृष्णि और अन्धकवंशके वासुदेव आदि वीर उसकी रक्षा करते थे। वहाँ जाकर रैवतने अपनी कन्या रेवतीका बलदेवजीसे विवाह कर दिया और संसारकी अनित्यता जानकर सुमेरु पर्वतके शिखरपर जाकर तपस्या करने लगे। अन्तमें उन्हें विष्णुधामकी प्राप्ति हुई

English

(Thchymn) devd manttaP confers all the pleasures. (The hymn) yamaa lohdi" is excellent for removing (the effects of) bad dreams. AV. 3.11.8c.

अध्याय २६२

श्लोक 9

सर्वान्नाग्रं समुद्धृत्य जुहुयात् प्रयतस्ततः ।वासुदेवाय देवाय प्रभवे चाव्ययाय च

sarvānnāgraṃ samuddhṛtya juhuyāt prayatastataḥ / vāsudevāya devāya prabhave cāvyayāya ca

हिन्दी अर्थ

नाभागके दो पुत्र हुए, जो वैश्याके गर्भसे उत्पन्न हुए थे। वे (अपनी विशेष तपस्याके कारण) ब्राह्मणत्वको प्राप्त हुए। करूषके पुत्र “कारूष' नामसे प्रसिद्ध क्षत्रिय हुए, जो युद्धमें

English

AV. 4.6.4a

अध्याय २६२

श्लोक 10

अग्नये चैव सोमाय मित्राय वरुणाय च ।इन्द्राय च महाभाग इन्द्राग्निभ्यां तथैव च

agnaye caiva somāya mitrāya varuṇāya ca / indrāya ca mahābhāga indrāgnibhyāṃ tathaiva ca

हिन्दी अर्थ

मतवाले हो उठते थे। पृषध्रने भूलसे अपने गुरुको गायको हिंसा कर डाली थी, अतः वे शापवश शूद्र हो गये। मनृपुत्र इक्ष्वाकुके पुत्र विकुक्षि हुए, जो (कुछ कालके लिये) देवताओंके राज्यपर आसीन हुए थे। विकुक्षिके पुत्र ककुत्स्थ हुए। ककुत्स्थका पुत्र सुयोधन नामसे प्रसिद्ध हुआ। उसके पुत्रका नाम 'पृथु' था। पृथुसे विश्वगश्वका' जन्म हुआ। उसका पुत्र आयु और

English

Tail. Sam. 2.3.10.2b. ' See note 3 above.

अध्याय २६२

श्लोक 11

विश्वेभ्यश् चैव देवेभ्यः प्रजानां पतये नमः ।अनुमत्यै तथा राम धन्वन्तरय एव च

viśvebhyaś caiva devebhyaḥ prajānāṃ pataye namaḥ / anumatyai tathā rāma dhanvantaraya eva ca

हिन्दी अर्थ

आयुका पुत्र युवनाश्व हुआ। युवनाश्वसे श्रावन्तकी उत्पत्ति हुई, जिन्होंने पूर्वदिशामें श्रावन्तिकी नामकी

English

Could hot be traced.

अध्याय २६२

श्लोक 12

वास्तोष्पत्यै ततो देव्यै ततः स्विष्टिकृते ऽग्नये ।सचतुर्थ्यन्तनाम्ना(१) तु हुत्वैतेभ्यो बलिं हरेत्

vāstoṣpatyai tato devyai tataḥ sviṣṭikṛte 'gnaye / sacaturthyantanāmnā(1) tu hutvaitebhyo baliṃ haret

हिन्दी अर्थ

१. गङ्गा-यमुनाके संगमके समीप बसा हुआ वर्तमान झूसी ग्राम ही पहलेका 'प्रतिष्ठानपुर' है । २. विष्णुपुराणमें “विष्वगश्च' नाम मिलता है और श्रीमद्भागवतमें ' विश्वरन्धि'। ३-४. विष्णुपुराणमें 'शावस्त' तथा 'शावस्ती' नाम मिलते हैं।

English

Could not be traced AV. 19.56.1a.

अध्याय २६२

श्लोक 13

तक्षोपतक्षमभितः पूर्वेणाग्निमतः परम् ।अश्वानामपि धर्मज्ञ ऊर्णानामानि चाप्यथ

takṣopatakṣamabhitaḥ pūrveṇāgnimataḥ param / aśvānāmapi dharmajña ūrṇānāmāni cāpyatha

हिन्दी अर्थ

पुरी बसायी। श्रावन्तसे बृहदश्व और बृहदश्वसे कुवलाश्व नामक राजाका जन्म हुआ। इन्होंने पूर्वकालमें धुन्धु नामसे प्रसिद्ध हैत्यका वध किया था, अतः उसीके नामपर ये ' धुन्धुमार' कहलाये।

English

(The hymn) indraca paHeaaaijd is excellent for profit in trade. Oblations offered with (the hymn) kdmo me odji* in¬ crease the fortune of women.

अध्याय २६२

श्लोक 14

निरुन्धी धूम्रिणीका च अस्वपन्ती(२) तथैव च ।मेघपत्नी(३) च नामानि सर्वेषामेव भार्गव

nirundhī dhūmriṇīkā ca asvapantī(2) tathaiva ca / meghapatnī(3) ca nāmāni sarveṣāmeva bhārgava

हिन्दी अर्थ

धुन्धुमारसे तीन पुत्र हुए। वे तीनों ही राजा थे। उनके नाम थे-दूढाश्च, दण्ड और कपिल । दूढाश्वसे हर्यश्च और प्रमोदकने जन्म ग्रहण किया। हर्यश्वसे निकुम्भ और निकुम्भसे संहताश्वकी उत्पत्ति हुई। संहताश्वके दो पुत्र हुए अकुशाश्च तथा रणाश्व। रणाश्वके पुत्र युवनाश्व और युवनाश्वके पुत्र राजा मांधाता हुए। मांधाताके भी दो पुत्र हुए, जिनमें एकका नाम पुरुकुत्स था और दूसरेका नाम

English

Oblation offered a lakh times with (the repetition of the hymn) tubhyamevajarimarP and with (the hymn) agne gobhir na*' will promote the intellect. Offering oblation with (the hymn) dkruoarh dhruveifa will ensure the acquisition of land. The repetition of ( the hymn) alaktakajivcfl will ensure prosperous agriculture.

अध्याय २६२

श्लोक 15

आग्नेयाद्याः क्रमेणाथ ततः शक्तिषु निक्षिपेत् ।नन्दिन्यै च सुभाग्यै च सुमङ्गल्यै च भार्गव

āgneyādyāḥ krameṇātha tataḥ śaktiṣu nikṣipet / nandinyai ca subhāgyai ca sumaṅgalyai ca bhārgava

हिन्दी अर्थ

पुरुकुत्ससे त्रसद्दस्युका जन्म हुआ। वे नर्मदाके गर्भसे उत्पन्न हुए थे। उनका दूसरा नाम 'सम्भूत' भी था। सम्भूतके सुधन्वा और सुधन्वाके पुत्र त्रिधन्वा हुए। त्रिधन्वाके तरुण और तरुणके पुत्र

English

(The hynm) aharfi te bhagna' increases fortune. (The

अध्याय २६२

श्लोक 16

१ स चतुर्थीकनाम्नेति पाठः साधुः २ अश्वपर्णीति ज॥ ३ मेघपर्णीति ज॥ :प् ४६५ भद्रकाल्यै ततो दत्वा स्थूणायाञ्च तथा श्रिये ।हिरण्यकेश्यै च तथा वनस्पतय एव च

1 sa caturthīkanāmneti pāṭhaḥ sādhuḥ 2 aśvaparṇīti ja.. 3 meghaparṇīti ja.. :p 465 bhadrakālyai tato datvā sthūṇāyāñca tathā śriye / hiraṇyakeśyai ca tathā vanaspataya eva ca

हिन्दी अर्थ

सत्यव्रत थे। सत्यत्रतसे सत्यरथ हुए, जिनके पुत्र हरिश्चन्द्र थे। हरिश्चन्द्रसे रोहिताश्वका जन्म हुआ, रोहिताश्वसे वृक हुए, वूकसे बाहु और बाहुसे सगरकी उत्पत्ति हुई। सगरको प्यारी पत्नी प्रभा थी, जो प्रसन्न हुए और्व मुनिको कुपासे साठ हजार पुत्रोंकी जननी हुई तथा उनकी दूसरी पल्ली भानुमतीने राजासे एक ही पुत्रको उत्पन्न किया, जिसका नाम असमञ्जस था। सगरके साठ हजार

English

Oblation offered with the repetition of (the hymn) Sapatvaharfi destroys enemies. (The hymn)lmm»Wawam'® is capa¬ ble of increasing fame and intellect. (The hymn) yathd rnTgamati increases the good fortune of women. (The hymn) yena cehadiiarh is advantageous for conception.

अध्याय २६२

श्लोक 17

धर्माधर्ममयौ द्वारे गृहमध्ये ध्रुवाय च ।मृत्यवे च वहिर्दद्याद्वरुणायोदकाशये

dharmādharmamayau dvāre gṛhamadhye dhruvāya ca / mṛtyave ca vahirdadyādvaruṇāyodakāśaye

हिन्दी अर्थ

पुत्र पृथ्वी खोदते समय भगवान् कपिलके क्रोधसे भस्म हो गये। असमञ्जसके पुत्र अंशुमान् और अंशुमानूके दिलीप हुए। दिलीपसे भगीरथका जन्म

English

(The hymn) ayarh teyonih is favourable for progeny. (The hymn) iivah Siv&bhi increases good fortune.

अध्याय २६२

श्लोक 18

भूतेभ्यश् च बहिर्दद्याच्छरणे धनदाय च ।इन्द्रायेन्द्रपुरुषेभ्यो दद्यात् पूर्वेण मानवः

bhūtebhyaś ca bahirdadyāccharaṇe dhanadāya ca / indrāyendrapuruṣebhyo dadyāt pūrveṇa mānavaḥ

हिन्दी अर्थ

हुआ, जिन्होंने गङ्गाको पुथ्वीपर उतारा था। भगीरथसे नाभाग और नाभागसे अम्बरीष हुए। अम्बरीषके सिन्धुद्वीप और सिन्धुद्वीपके पुत्र श्रुतायु हुए ।श्रुतायुके ऋतुपर्ण और ऋतुपर्णके पुत्र कल्माषपाद थे। कल्माषपादसे सर्वकर्मा और सर्वकर्मासे अनरण्य हुए। अनरण्यके निघ्न और निघ्नके पुत्र दिलीप हुए। राजा दिलीपके रघु और रघुके पुत्र अज थे। अजसे दशरथका जन्म हुआ। दशरथके चार पुत्र

English

(The repetition of the hymn) brhospatima paripdtu secures safety on the journey. ( The hymn) munedmi tvd* is said to ward off untimely death. Could not be traced.

अध्याय २६२

श्लोक 19

यमाय तत्पुरुषेभ्यो दद्याद्दक्षिणतस् तथा ।वरुणाय तत्पुरुषेभ्यो दद्यात्पश्चिमतस् तथा

yamāya tatpuruṣebhyo dadyāddakṣiṇatas tathā / varuṇāya tatpuruṣebhyo dadyātpaścimatas tathā

हिन्दी अर्थ

हुए--वे सभी भगवान् नारायणके स्वरूप थे। उन सबमें ज्येष्ठ श्रीरामचन्द्रजी थे। उन्होंने रावणका वध किया था। रघुनाथजी अयोध्याके सर्वश्रेष्ठ राजा हुए। महर्षि वाल्मीकिने नारदजीके मुँहसे

English

Gould not be traced.

अध्याय २६२

श्लोक 20

सोमाय सोमपुरुषेभ्य उदग्दद्यादनन्तरं ।ब्रह्मणे ब्रह्मपुरुषेभ्यो मध्ये दद्यात्तथैव च

somāya somapuruṣebhya udagdadyādanantaraṃ / brahmaṇe brahmapuruṣebhyo madhye dadyāttathaiva ca

हिन्दी अर्थ

उनका प्रभाव सुनकर (रामायणके नामसे) उनके चरित्रका वर्णन किया था। श्रीरामचन्द्रजीके दो पुत्र हुए, जो कुलकी कीर्ति बढ़ानेवाले थे। वे सीताजीके गर्भसे उत्पन्न होकर कुश और लवके नामसे प्रसिद्ध हुए। कुशसे अतिथिका जन्म हुआ। अतिथिके पुत्र निषध हुए। निषधसे नलकी उत्पत्ति हुई (ये सुप्रसिद्ध राजा दमयन्तीपति नलसे भिन्न हैं); नलसे नभ हुए। नभसे पुण्डरीक और

English

AV. 2.28.1a. Tait. Sam. 2.4.5.1a.

अध्याय २६२

श्लोक 21

आकाशे च तथा चोर्ध्वे स्थण्डिलाय क्षितौ तथा ।दिवा दिवाचरेभ्यश् च रात्रौ रात्रिचरेषु च

ākāśe ca tathā cordhve sthaṇḍilāya kṣitau tathā / divā divācarebhyaś ca rātrau rātricareṣu ca

हिन्दी अर्थ

पुण्डरीकसे सुधन्वा उत्पन्न हुए। सुधन्वाके पुत्र देवानीक और देवानीकके अहीनाश्व हुए। अहीनाश्वसे सहस्राश्व और सहस्राश्वसे चन्द्रालोक हुए। चन्द्रालोकसे तारापीड, तारापीङसे चन्द्रगिरि और

English

AV. 6.87.3b; 7.94.1a.

अध्याय २६२

श्लोक 22

बलिं वहिस् तथा दद्यात्सायं प्रातस्तु प्रत्यहं ।पिण्डनिर्वपणं कुर्यात् प्रातः सायन्न कारयेत्

baliṃ vahis tathā dadyātsāyaṃ prātastu pratyahaṃ / piṇḍanirvapaṇaṃ kuryāt prātaḥ sāyanna kārayet

हिन्दी अर्थ

चन्द्रगिरिसे भानुरथका जन्म हुआ। भानुरथका पुत्र श्रुतायु नामसे प्रसिद्ध हुआ। ये इक्ष्वाकुवंशमें उत्पन्न राजा सूर्यवंशका विस्तार करनेवाले माने गये हैं इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'सूर्यवंशका वर्णन” नामक दो सौ तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

Gould not be traced. Gould not be traced.

अध्याय २६२

श्लोक 23

पित्रे तु प्रथमं दद्यात्तत्पित्रे तदनन्तरम् ।प्रपितामहाय तन्मात्रे पितृमात्रे ततो ऽर्पयेत्

pitre tu prathamaṃ dadyāttatpitre tadanantaram / prapitāmahāya tanmātre pitṛmātre tato 'rpayet

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं- वसिष्ठ! अब मैं वर्णन करूँगा, इसका पाठ करनेसे पापका नाश होता है। विष्णुके नाभिकमलसे ब्रह्मा उत्पन्न हुए। ब्रह्माके पुत्र महर्षि अत्रि हुए। अत्रिसे सोमकी

English

Gould not be traced.

अध्याय २६२

श्लोक 24

तन्मात्रे दक्षिणाग्रेषु कुशेष्वेवं यजेत् पितॄन् ।इन्द्रवारुणवायव्या याम्या वा नैरृताय ये

tanmātre dakṣiṇāgreṣu kuśeṣvevaṃ yajet pitṝn / indravāruṇavāyavyā yāmyā vā nairṛtāya ye

हिन्दी अर्थ

उत्पत्ति हुई । सोमने राजसूय-यज्ञ किया और उसमें तीनों लोकोंके राज्यका उन्होंने दक्षिणारूपसे दान कर दिया। जब यज्ञके अन्तमें अवभृथस्त्रान समाप्त हुआ तो उनका रूप देखनेकी इच्छासे नौ देवियाँ चन्द्रमाके पास आयीं और कामबाणसे संतप्त होकर उनकी सेवा करने लगीं। लक्ष्मी (कान्ति) नारायणको छोड़कर चली आयीं। सिनीवाली कर्दमको, द्युति अग्निको और पुष्टि अपने अविनाशी

English

Gould not be traced. Gould not be traced.

अध्याय २६२

श्लोक 25

ते काकाः पितृगृहन्तु इमं पिण्डं मयोद्वृतम् ।काकपिण्डन्तु मन्त्रेण शुनः पिण्डं प्रदापयेत्

te kākāḥ pitṛgṛhantu imaṃ piṇḍaṃ mayodvṛtam / kākapiṇḍantu mantreṇa śunaḥ piṇḍaṃ pradāpayet

हिन्दी अर्थ

पति धाताको त्यागकर आ गयीं। प्रभा प्रभाकरको और कुहू हविष्मान्को छोड़कर स्वयं सोमके पास चली आयीं। कोतिने अपने स्वामी जयन्तको छोड़ा और वसुने मरीचिनन्दन कश्यपको तथा

English

Gould not be traced.

अध्याय २६२

श्लोक 26

विवस्वतः कुले जातौ द्वौ श्यावशबलौ(१) शुनौ ।तेषां पिण्डं प्रदास्यामि पथि रक्षन्तु मे सदा

vivasvataḥ kule jātau dvau śyāvaśabalau(1) śunau / teṣāṃ piṇḍaṃ pradāsyāmi pathi rakṣantu me sadā

हिन्दी अर्थ

धृति भी उस समय अपने पति नन्दिको त्यागकर सोमको ही सेवामें संलग्न हो गयीं॥ १--५॥ चन्द्रमाने भी उस समय उन देवियोंको अपनी ही पत्नीकी भाँति सकामभावसे अपनाया। सोमके इस प्रकार अत्याचार करनेपर भी उस समय उन देवियोंके पति शाप तथा शस्त्र आदिके द्वारा

English

AV. 3.20.1a. RV. 1.187.3b.

अध्याय २६२

श्लोक 27

१ श्यामशबलाविति ज॥ , ञ॥ , ट॥ च :प् ४६६ सौरभेय्यः(१) सर्वहिताः पवित्राः पापनाशनाः(२) ।प्रतिगृह्णन्तु मे ग्रासं गावस्त्रैलोक्यमातरः

1 śyāmaśabalāviti ja.. , ña.. , ṭa.. ca :p 466 saurabheyyaḥ(1) sarvahitāḥ pavitrāḥ pāpanāśanāḥ(2) / pratigṛhṇantu me grāsaṃ gāvastrailokyamātaraḥ

हिन्दी अर्थ

उनका अनिष्ट करनेमें समर्थ न हो सके; अपितु सोम ही अपनी तपस्याके प्रभावसे “भू? आदि सातौं लोकोंके एकमात्र स्वामी हुए। इस अनीतिसे ग्रस्त होकर चन्द्रमाकी बुद्धि विनयसे भ्रष्ट होकर

English

AV. 7.51.1a.

अध्याय २६२

श्लोक 28

ग्रोग्रासञ्च स्वस्त्ययनं कृत्वा भिक्षां प्रदापयेत् ।अतिथीन्दीनान् पूजयित्वा गृही भुञ्जीत च स्वयं

grogrāsañca svastyayanaṃ kṛtvā bhikṣāṃ pradāpayet / atithīndīnān pūjayitvā gṛhī bhuñjīta ca svayaṃ

हिन्दी अर्थ

भ्रान्त हो गयी और उन्होंने अङ्गिरानन्दन बृहस्पतिजीका अपमान करके उनको यशस्विनी पत्नी ताराका बलपूर्वक अपहरण कर लिया। इसके कारण महान् युद्ध हुआ, जो 'तारकामय संग्राम ' के नामसे

English

AV. 3.11.1a. One who masters the atharvaHrjas becomes free from all sins. I have described to you some procedures relating to some important hymns.

अध्याय २६२

श्लोक 29

ॐ भूः स्वाहा ॐ भूवः स्वाहा ॐ स्वः स्वाहा ॐ भूर्भुवः स्वः स्वाहा ॐ देवकृतस्यैनसो ऽवयजनमसि स्वाहा ॐ पितृकृतस्यैनसो ऽवयजनमसि स्वाहा ॐ आत्मकृतस्यैनसो ऽवयजनमसि स्वाहा ॐ मनुष्यकृतस्यैनसो ऽवयजनमसि स्वाहा ॐ एनस एनसो ऽवयजनमसि स्वाहा ।यच्चाहमेनो विद्वांश् चकार यच्चविद्वांस्तस्य सर्वस्यैनसो ऽवयजनमसि स्वाहा अग्नये स्विष्टिकृते स्वाहा ॐ प्रजापतये स्वाहा ॥ विष्णुपूजावैश्वदेवबलिस्ते कीर्तितो मया

oṃ bhūḥ svāhā oṃ bhūvaḥ svāhā oṃ svaḥ svāhā oṃ bhūrbhuvaḥ svaḥ svāhā oṃ devakṛtasyainaso 'vayajanamasi svāhā oṃ pitṛkṛtasyainaso 'vayajanamasi svāhā oṃ ātmakṛtasyainaso 'vayajanamasi svāhā oṃ manuṣyakṛtasyainaso 'vayajanamasi svāhā oṃ enasa enaso 'vayajanamasi svāhā / yaccāhameno vidvāṃś cakāra yaccavidvāṃstasya sarvasyainaso 'vayajanamasi svāhā agnaye sviṣṭikṛte svāhā oṃ prajāpataye svāhā || viṣṇupūjāvaiśvadevabaliste kīrtito mayā //

हिन्दी अर्थ

विख्यात है । अन्तमें ब्रह्माजीने (चन्द्रमाकी ओरसे युद्धमें सहायता पहुँचानेवाले) शुक्राचार्यको रोककर तारा बृहस्पतिजीको दिला दी। देवगुरु बृहस्पतिने ताराको गर्भिणी देखकर कहा-- इस गर्भका त्याग

English

The first material for oblations is the twigs of trees suitable for such rites. O Bhargava! Clarified butter, rice, white mustard, unbroken rice, sesamum, curd, milk, darbha (grass), durvd (grass), bilva (leaves) and lotuses are always said to be the materials that promote peace and prosperity.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 262
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.