Agni Purana· Agni Purāṇa
265
अध्याय 265 / 381

Adhyaya 266

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पूर्ण अध्याय पाठ24 श्लोक

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अध्याय २६५

श्लोक 1

माहेश्वरस्नानलक्षकोटिहोमादयः पुष्कर उवाच स्नानं माहेश्वरं वक्ष्ये राजादेर्जयवर्धनम् ।दानवेन्द्राय बलये यज्जगादोशनाः पुरा

māheśvarasnānalakṣakoṭihomādayaḥ puṣkara uvāca snānaṃ māheśvaraṃ vakṣye rājāderjayavardhanam / dānavendrāya balaye yajjagādośanāḥ purā

हिन्दी अर्थ

सत्या-ये भगवानूकी प्रिय रानियाँ थीं। इनमें भी सत्यभामा उनकी आराध्य देवी थीं। इनके सिवा गन्धार-राजकुमारी लक्ष्मणा, मित्रविन्दा, देवी कालिन्दी, जाम्बवती, सुशीला, माद्री, कौसल्या, विजया और जया आदि सोलह हजार देवियाँ

English

A woman who has a miscarriage should be bathed in a lotus tank, and one whose issue dies after birth should bathe in the presence of an aSoka (tree).

अध्याय २६५

श्लोक 2

भास्करे ऽनुदिते पीठे प्रातः संस्नापयेद् घटैः ।ॐ नमो भगवते रुद्राय च बलाय च पाण्डरोचितभस्मानुलिप्तगात्राय ।तद्यथा जय जय सर्वान् शत्रून्मूकस्य कलहविग्रहविवादेषु भञ्जय ।ॐ मथ मथ सर्वपथिकान्योसौ युगान्तकाले दिधक्षति इमां पूजां रौद्रमूर्तिः सहस्रांशुः शुक्रः स ते रक्षतु जीवितं ।सम्बर्तकाग्नितुल्यश् च त्रिपुरान्तकरः शिवः ।सर्वदेवमयः सोपि तव रक्षतु जीवितं लिखि लिखि खिलि स्वाहा ॥ एवं स्नतस्तु मन्त्रेण जुहुयात्तिलतण्डुलम्

bhāskare 'nudite pīṭhe prātaḥ saṃsnāpayed ghaṭaiḥ / oṃ namo bhagavate rudrāya ca balāya ca pāṇḍarocitabhasmānuliptagātrāya / tadyathā jaya jaya sarvān śatrūnmūkasya kalahavigrahavivādeṣu bhañjaya / oṃ matha matha sarvapathikānyosau yugāntakāle didhakṣati imāṃ pūjāṃ raudramūrtiḥ sahasrāṃśuḥ śukraḥ sa te rakṣatu jīvitaṃ / sambartakāgnitulyaś ca tripurāntakaraḥ śivaḥ / sarvadevamayaḥ sopi tava rakṣatu jīvitaṃ likhi likhi khili svāhā || evaṃ snatastu mantreṇa juhuyāttilataṇḍulam

हिन्दी अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णकी पत्नियाँ थीं । रुक्मिणीके गर्भसे प्रद्युम्न आदि पुत्र उत्पन्न हुए थे और सत्यभामाने भीम आदिको जन्म दिया था। जाम्बवतीके गर्भसे साम्ब आदिकी उत्पत्ति हुई थी। ये तथा और भी

English

One who desires to have flowers, one who desires to have progeny and who desires to have a house and other for¬ tunes (should bathe) respectively at a place abounding in flowers, an ocean and in the presence of (the image of Lord) Vi?nu.

अध्याय २६५

श्लोक 3

पञ्चामृतैस्तु संस्नाप्य पूजयेच्छूलपाणिनं ।स्नानान्यन्यानि वक्ष्यामि सर्वदा विजयाय ते

pañcāmṛtaistu saṃsnāpya pūjayecchūlapāṇinaṃ / snānānyanyāni vakṣyāmi sarvadā vijayāya te

हिन्दी अर्थ

बहुत-से श्रीकृष्णके पुत्र थे। परम बुद्धिमान् भगवान्के पुत्रोंकी संख्या एक करोड़ अस्सी हजारके थी। समस्त यादव भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा सुरक्षित थे। प्रद्युम्नसे विदर्भराजकुमारी रुक्मवतीके गर्भसे अनिरुद्ध नामक पुत्र हुआ। अनिरुद्धको युद्ध बहुत

English

Bathing in ( the asterisms) Sravatjuii revati and pufya is meritorious for all. One who wishes to do the ceremonial bathing has to observe a purificatory vow for seven days prior to that.

अध्याय २६५

श्लोक 4

स्नानं घृतेन कथितमायुष्यवर्धनं परम् ।गोमयेन च लक्ष्मीः स्याद्गोमूत्रेणाघमर्दनम्

snānaṃ ghṛtena kathitamāyuṣyavardhanaṃ param / gomayena ca lakṣmīḥ syādgomūtreṇāghamardanam

हिन्दी अर्थ

ही प्रिय था। अनिरुद्धके पुत्र वज्र आदि हुए। सभी यादव अत्यन्त बलवान् थे। यादवोंकी संख्या कुल मिलाकर तीन करोड़ थी। उस समय साठ लाख दानव मनुष्य-योनिमें उत्पन्न हुए थे, जो

English

Bathing with ghee is said to be supreme for increasing life; with cow-dung there is prosperity; with cow-urine the crushing of sin;

अध्याय २६५

श्लोक 5

क्षीरेण बलबुद्धिः स्याद्दध्ना लक्ष्मीविवर्धनं ।कुशोदकेन पापान्तः पञ्चगव्येन सर्वभाक्

kṣīreṇa balabuddhiḥ syāddadhnā lakṣmīvivardhanaṃ / kuśodakena pāpāntaḥ pañcagavyena sarvabhāk

हिन्दी अर्थ

लोगोंको कष्ट पहुँचा रहे थे। उन्हींका विनाश करनेके लिये भगवानूका अवतार हुआ था। धर्म- मर्यादाकी रक्षा करनेके लिये ही भगवान् श्रीहरि मनुष्यरूपमें प्रकट होते हैं॥ १--९॥ बारह संग्राम हुए हैं। उनमें पहला ' नारसिंह' और दूसरा ' वामन' नामवाला युद्ध है। तीसरा ' वाराह-

English

with milk strength and intelligence; with curds growth of prosperity; with kusha water the end of sin; with pancha-gavya a sharer of all;

अध्याय २६५

श्लोक 6

शतमूलेन सर्वाप्तिर्गोशृङ्गोदकतो ऽघजित् ।पलाशबिल्वकमलकुशस्नानन्तु सर्वदं

śatamūlena sarvāptirgośṛṅgodakato 'ghajit / palāśabilvakamalakuśasnānantu sarvadaṃ

हिन्दी अर्थ

है। पाँचवाँ ' तारकामय संग्राम' और छठा “आजीवक ' नामक युद्ध हुआ। सातवाँ “त्रैपुर '

English

with shatamula attainment of all; with water from a cow's horn the conqueror of sin; a bath of palasha, bilva, lotus and kusha gives all.

अध्याय २६५

श्लोक 7

वचा हरिद्रे द्वे मुस्तं स्नानं रक्षोहणं परं ।आयुष्यञ्च यशस्यञ्च धर्ममेधाविवर्धनम्

vacā haridre dve mustaṃ snānaṃ rakṣohaṇaṃ paraṃ / āyuṣyañca yaśasyañca dharmamedhāvivardhanam

हिन्दी अर्थ

संग्राम' है । दसवाँ 'जित्', ग्यारहवाँ ' हालाहल' और बारहवाँ “घोर कोलाहल' नामक युद्ध हुआ है प्राचीनकालमें देवपालक भगवान् नरसिंहने हिरण्यकशिपुका हृदय विदीर्ण करके प्रह्लादको हैत्योंका राजा बनाया था। फिर देवासुर-संग्रामके अवसरपर कश्यप और अदितिसे वामनरूपमें

English

Vacha, the two turmerics and mustaka — a bath is supremely demon-destroying; life-giving, fame-giving, increasing dharma and intelligence;

अध्याय २६५

श्लोक 8

हैमाद्भिश् चैव माङ्गल्यं रूप्यताम्रोदकैस् तथा ।रत्नोदकैस्तु विजयः सौभाग्यं सर्वगन्धकैः

haimādbhiś caiva māṅgalyaṃ rūpyatāmrodakais tathā / ratnodakaistu vijayaḥ saubhāgyaṃ sarvagandhakaiḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकट होकर भगवानूने बल और प्रतापमें बढ़े- चढ़े हुए राजा बलिको छला और इन्द्रको त्रिलोकीका

English

with golden water, auspiciousness; likewise with silver and copper waters; with jewel waters victory; with all scents good fortune;

अध्याय २६५

श्लोक 9

फलाद्भिश् च तथारोग्यं धात्र्यद्भिः परमां श्रियम् ।तिलसिद्धार्थकैर् लक्ष्मीः सौभाग्यञ्च प्रियङ्गुणा

phalādbhiś ca tathārogyaṃ dhātryadbhiḥ paramāṃ śriyam / tilasiddhārthakair lakṣmīḥ saubhāgyañca priyaṅguṇā

हिन्दी अर्थ

हुआ था, जबकि भगवानूने वाराह अवतार धारण करके हिरण्याक्षको मारा, देवताओंकी रक्षा की और जलमें डूबी हुई पृथ्वीका उद्धार किया। उस समय देवाधिदेवोंने भगवान्की स्तुति की॥ १३--१५॥ एक बार देवता और असुरोंने मिलकर मन्दराचलको मथानी और नागराज वासुकिको नेती (बन्धनकी रस्सी) बना समुद्रको मथकर अमृत निकाला, किंतु भगवानूने वह सारा अमृत

English

with fruit waters likewise health; with amalaka waters supreme prosperity; with sesame and mustard, prosperity; with priyangu, good fortune;

अध्याय २६५

श्लोक 10

पद्मोत्पलकदम्बैश् च श्रीर्बलं बलाद्रुमोदकैः ।विष्णुपादोदकस्नानं सर्वस्नानेभ्य उत्तमम्

padmotpalakadambaiś ca śrīrbalaṃ balādrumodakaiḥ / viṣṇupādodakasnānaṃ sarvasnānebhya uttamam

हिन्दी अर्थ

तारकामय-संग्रामके अवसरपर भगवान् ब्रह्माने इन्द्र, बृहस्पति, देवताओं तथा दानवोंको युद्धसे रोककर देवताओंकी रक्षा की और सोमवंशको स्थापित किया। आजीवक-युद्धमें विश्वामित्र, वसिष्ठ

English

with lotus, water lily and kadamba, prosperity; with bala and tree waters strength. A bath with water from Vishnu's feet is best of all baths.

अध्याय २६५

श्लोक 11

एकाकी एककामायेत्येकोर्कं(१) विधिवच्चरेत् ।अक्रन्दयतिसूक्तेन प्रबध्नीयान्मणिं करे

ekākī ekakāmāyetyekorkaṃ(1) vidhivaccaret / akrandayatisūktena prabadhnīyānmaṇiṃ kare

हिन्दी अर्थ

और अत्रि आदि ऋषियोंने राग-द्वेषादि दानवोंका निवारण करके देवताओंका पालन किया। पृथ्वीरूपी रथमें वेदरूपी घोड़े जोतकर भगवान् शंकर उसपर बैठे (और त्रिपुरका नाश करनेके लिये चले) । उस समय देवताओंके रक्षक और हैत्योंका विनाश करनेवाले भगवान् श्रीहरिने शंकरजीको शरण दी और बाण बनकर स्वयं ही त्रिपुरका दाह किया। गौरीका अपहरण करनेकी इच्छासे अन्धकासुरने

English

"Ekaki, ekakamaya" — one should perform the single Arka by rule; with the hymn "Akrandayati" one should bind a jewel on the hand;

अध्याय २६५

श्लोक 12

कुष्ठपाठा वाचा शुण्ठी शङ्खलोहादिको मणिः ।सर्वेषामेवकामानामीश्वरो भगवान् हरिः

kuṣṭhapāṭhā vācā śuṇṭhī śaṅkhalohādiko maṇiḥ / sarveṣāmevakāmānāmīśvaro bhagavān hariḥ

हिन्दी अर्थ

रुद्रदेवको बहुत कष्ट पहुँचाया-यह जानकर रेवतीमें अनुराग रखनेवाले श्रीहरिने उस असुरका विनाश किया (यही आठवाँ संग्राम है) । देवताओं और असुरोंके युद्धमें वृत्रका नाश करनेके लिये

English

kushtha, patha, vacha, shunthi, conch, iron and the like jewel. Lord of all desires is the Lord Hari;

अध्याय २६५

श्लोक 13

तस्य संपूजनादेव सर्वान्कामान्समश्नुते ।स्नापयित्वा घृतक्षीरैः पूजयित्वा च पित्तहा

tasya saṃpūjanādeva sarvānkāmānsamaśnute / snāpayitvā ghṛtakṣīraiḥ pūjayitvā ca pittahā

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णु जलके फेन होकर इन्द्रके बञ्रमें लग गये। इस प्रकार उन्होंने देवराज इन्द्र और देवधर्मका पालन करनेवाले देवताओंको संकटसे बचाया। (जित्' नामक दसवाँ संग्राम वह है, जब कि) भगवान् श्रीहरिने परशुराम अवतार धारण कर शाल्व आदि दानवोंपर विजय पायी और दुष्ट क्षत्रियोंका विनाश करके देवता आदिकी रक्षा की। (ग्यारहवें संग्रामके समय) मधुसूदनने

English

by worship of him alone one obtains all desires. Having bathed him with ghee and milk and worshipped, he is a destroyer of bile disorder;

अध्याय २६५

श्लोक 14

पञ्चमुद्गबलिन्दत्वा अतिसारात् प्रमुच्यते ।पञ्चगव्येन संस्नाप्य वातव्याधिं विनाशयेत्

pañcamudgabalindatvā atisārāt pramucyate / pañcagavyena saṃsnāpya vātavyādhiṃ vināśayet

हिन्दी अर्थ

हालाहल विषके रूपमें प्रकट हुए हैत्यका शंकरजीके द्वारा नाश कराकर देवताओंका भय दूर किया। देवासुर-संग्राममें जो 'कोलाहल' नामका हैत्य

English

having given an offering of five mudgas one is freed from dysentery; having bathed with pancha-gavya one destroys wind disease;

अध्याय २६५

श्लोक 15

द्विस्नेहस्नपनात् श्लेष्मरोगहा चातिपूजया ।घृतं तैलं तथा क्षौद्रं स्नानन्तु त्रिरसं परं

dvisnehasnapanāt śleṣmarogahā cātipūjayā / ghṛtaṃ tailaṃ tathā kṣaudraṃ snānantu trirasaṃ paraṃ

हिन्दी अर्थ

५५८ अग्निपुराण था, उसको परास्त करके भगवान् विष्णुने स्वरूप हैँ । मैंने यहाँ जिनको बतलाया और जिनका धर्मपालनपूर्वक सम्पूर्ण देवताओंकी रक्षा की। नाम नहीं लिया, वे सभी श्रीहरिके ही अवतार राजा, राजकुमार, मुनि और देवता--सभी भगवान्के हैं॥ १६--२५॥ इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'द्वादश-संग्रामोंका वर्णन” नामक दो सौ छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

by bathing with the two oils and by great worship, a destroyer of phlegm disease; ghee, oil and honey: bath of three juices is supreme.

अध्याय २६५

श्लोक 16

स्नानं घृताम्बु द्विस्नेहं समलं घृततैलकम् ।क्षौद्रमिक्षुरसं क्षीरं स्नानं त्रिमधुरं स्मृतम्

snānaṃ ghṛtāmbu dvisnehaṃ samalaṃ ghṛtatailakam / kṣaudramikṣurasaṃ kṣīraṃ snānaṃ trimadhuraṃ smṛtam

हिन्दी अर्थ

तुर्वसु आदि राजाओंके वंशका तथा अङ्गवंशका वर्णन

English

A bath with ghee and water; with two oils; with sesame and ghee oil; honey, sugarcane juice and milk: the bath is remembered as three-sweet;

अध्याय २६५

श्लोक 17

घृतमिशुरसं तैलं क्षौद्रञ्च त्रिरसं श्रिये ।अनुलेपस्त्रिशुक्रस्तु कर्पूरोशीरचन्दनैः

ghṛtamiśurasaṃ tailaṃ kṣaudrañca trirasaṃ śriye / anulepastriśukrastu karpūrośīracandanaiḥ

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं-- वसिष्ठ! तुर्वसुके पुत्र वर्ग और वर्गके पुत्र गोभानु हुए। गोभानुसे त्रैशानि, त्रैशानिसे करंधम और करंधमसे मरुत्तका जन्म हुआ। उनके पुत्र दुष्यन्त हुए। दुष्यन्तसे वरूथ और वरूथसे गाण्डीरकी उत्पत्ति हुई। गाण्डीरसे गान्धार हुए। गान्धारके पाँच पुत्र हुए, जिनके नामपर गन्धार, केरल, चोल, पाण्ड्य और कोल-- इन पाँच देशोंकी प्रसिद्धि हुई। ये सभी महान्

English

ghee, sugarcane juice, oil and honey are the three juices for prosperity; an anointing is three-white, with camphor, ushira and sandal;

अध्याय २६५

श्लोक 18

चन्दनागुरुकर्पूरमृगदर्पैः सकुङ्कुमैः ।पञ्चानुलेपनं विष्णोः सर्वकामफलप्रदं

candanāgurukarpūramṛgadarpaiḥ sakuṅkumaiḥ / pañcānulepanaṃ viṣṇoḥ sarvakāmaphalapradaṃ

हिन्दी अर्थ

बलवान् थे। ढुद्युसे बभ्रुसेतु और बभ्रुसेतुसे पुरोवसुका जन्म हुआ। उनसे गान्धार नामक पुत्रोंको उत्पत्ति हुई। गान्धारोंने धर्मको जन्म दिया और धर्मसे घृत उत्पन्न हुए। घृतसे विदुष और विदुषसे

English

sandal, agaru, camphor, musk with saffron — Vishnu's fivefold anointing gives the fruit of all desires;

अध्याय २६५

श्लोक 19

त्रिसुगन्धञ्च कर्पूरं तथा चन्दनकुङ्कुमैः ।मृगदर्पं सकर्पूरं मलयं सर्वकामदम्

trisugandhañca karpūraṃ tathā candanakuṅkumaiḥ / mṛgadarpaṃ sakarpūraṃ malayaṃ sarvakāmadam

हिन्दी अर्थ

प्रचेता हुए। प्रचेताके सौ पुत्र हुए, जिनमें अनडु, सुभानु, चाक्षुष और परमेषु-ये प्रधान थे। सुभानुसे कालानल और कालानलसे सृञ्जय उत्पन्न हुए। सृञ्जयके पुरञ्जय और पुरञ्जयके पुत्र जनमेजय थे। जनमेजयके पुत्र महाशाल और उनके पुत्र महामना हुए। ब्रह्मन्! महामनासे उशीनरका जन्म हुआ और महामनाकी 'नृगा' नामवाली पल्रीके गर्भसे राजा नृगका जन्म हुआ। नृगको 'नरा'

English

the three fragrances, camphor, likewise sandal and saffron; musk with camphor, malaya (sandal) gives all desires.

अध्याय २६५

श्लोक 20

जातीफलं सकर्पूरं चन्दनञ्च त्रिशीतकम् ।पीतानि शुक्लवर्णानि तथा शुक्लानि भार्गव

jātīphalaṃ sakarpūraṃ candanañca triśītakam / pītāni śuklavarṇāni tathā śuklāni bhārgava

हिन्दी अर्थ

नामक पत्नीसे नरकी उत्पत्ति हुई और कृमि नामवाली स्त्रीके गर्भसे कुमिका जन्म हुआ। इसी प्रकार

English

Nutmeg with camphor and sandal — the three cooling ones; yellow, white-colored, and likewise white, Bhargava,

अध्याय २६५

श्लोक 21

कृष्णानि चैव रक्तानि पञ्चवर्णानि निर्दिशेत् ।उत्पलं पद्मजाती च त्रिशीतं हरिपूजने

kṛṣṇāni caiva raktāni pañcavarṇāni nirdiśet / utpalaṃ padmajātī ca triśītaṃ haripūjane

हिन्दी अर्थ

नृगके दशा नामकी पत्नीसे सुव्रत और दषद्वतीसे शिवि उत्पन्न हुए। शिविके चार पुत्र हुए-- पृथुदर्भ, वीरक, कैकेय और भद्रक-इन चारोंके नामसे श्रेष्ठ जनपदोंकी प्रसिद्धि हुई। उशीनरके पुत्र तितिक्षु हुए, तितिक्षुसे रुषद्रथ, रुषद्रथसे पैल और पैलसे सुतपा नामक पुत्रोंकी उत्पत्ति हुई। सुतपासे महायोगी बलिका जन्म हुआ। बलिसे

English

black and red — one should declare the five colors. Water lily and lotus kinds are the three cool ones in worship of Hari;

अध्याय २६५

श्लोक 22

कुङ्कुमं रक्तपद्मानि त्रिरक्तमुत्पलं ।धूपदीपादिभिः प्रार्च्य विष्णुं शान्तिर्भवेन्नृणां

kuṅkumaṃ raktapadmāni triraktamutpalaṃ / dhūpadīpādibhiḥ prārcya viṣṇuṃ śāntirbhavennṛṇāṃ

हिन्दी अर्थ

पुत्र उत्पन्न हुए। ये सभी 'बालेय' कहलाये। बलि योगी और बलवान् थे। अङ्गसे दधिवाहन, दधिवाहनसे राजा दिविरथ और दिविरथसे धर्मरथ उत्पन्न हुए। धर्मरथके पुत्रका नाम चित्ररथ हुआ।

English

saffron, red lotuses, and the red water lily — the three reds. Having worshipped Vishnu with incense, lamps and the rest, there is peace for men.

अध्याय २६५

श्लोक 23

चतुरस्रकरे कुण्डे ब्राह्मणाश्चाष्ट शोडश ।लक्षहोमङ्कोटिहोमन्तिलाज्ययवधान्यकैः

caturasrakare kuṇḍe brāhmaṇāścāṣṭa śoḍaśa / lakṣahomaṅkoṭihomantilājyayavadhānyakaiḥ

हिन्दी अर्थ

चित्ररथके सत्यरथ और उनके पुत्र लोमपाद हुए। लोमपादका पुत्र चतुरङ्ग और चतुरङ्गका पुत्र पृथुलाक्ष हुआ। पृथुलाक्षसे चम्प, चम्पसे हर्यङ्ग और हर्यङ्गसे भद्ररथ हुआ। भद्ररथके पुत्रका नाम बृहत्कर्मा था। बृहत्कर्मासे बृहद्भानु, बृहद्भानुसे बृहात्मवान्, उनसे जयद्रथ और जयद्रथसे बृहद्रथकी उत्पत्ति हुई। बृहद्र्थसे विश्वजित् और विश्वजितूका पुत्र कर्ण हुआ। कर्णका वृषसेन और वृषसेनका पुत्र

English

In a square pit of a cubit, eight or sixteen Brahmins; a lakh oblation or crore oblation with sesame, ghee, barley and grains;

अध्याय २६५

श्लोक 24

ग्रहानभ्यर्च्य गायत्र्या सर्वशान्तिः क्रमाद्भवेत्

grahānabhyarcya gāyatryā sarvaśāntiḥ kramādbhavet

हिन्दी अर्थ

पृथुसेन था। ये अङ्गवंशमें उत्पन्न राजा बतलाये गये। अब मुझसे पूरुवंशका वर्णन सुनो

English

having worshipped the planets with the Gayatri, all peace follows in order.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 265
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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