Agni Purana· Agni Purāṇa
266
अध्याय 266 / 381

Adhyaya 267

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अध्याय २६६

श्लोक 1

नीराजनविधिः पुष्कर उवाच कर्म सांवत्सरं राज्ञां जन्मर्क्षे पूजयेच्च तं ।मासि मासि च संक्रान्तौ सूर्यसोमादिदेवताः

nīrājanavidhiḥ puṣkara uvāca karma sāṃvatsaraṃ rājñāṃ janmarkṣe pūjayecca taṃ / māsi māsi ca saṃkrāntau sūryasomādidevatāḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें राजवंशका वर्णन” नामक दो सौ सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ अग्निदेव कहते हैं-- वसिष्ठ ! पूरुसे जनमेजय हुए, जनमेजयसे प्राचीवान् नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। प्राचीवानूसे मनस्यु और मनस्युसे राजा वीतमयका जन्म हुआ। वीतमयसे शुन्धु हुआ,

English

I shall describe the bathing that would be beneficial for those afflicted by (the evil spirit called) Vin&yaka. The spirit Vinayaka was commissioned by (Lords) Kelava (Vinu), la (Siva) and Pitmaha (Brahma) as the leader of the attendants in order to fnistrgite the work of men. One who is possessed by Vinayaka dreams as if he is. bathing in water excessively, sees shaven heads, rides the demons (in a dream) and as he goes thinks that he is being followed by others. The fruitless beginning (of a task) leads to frustation and (the body) emaciates without any reason. A girl does not get a (suitable) bridegroom, a married woman does not get pro¬ geny, a brahmin does not become a preceptor and a pupil does not get instruction. A trader does not get profit and a culti¬ vator, the produce. A king does not get a kingdom. In such cases a (ceremonial) bath has to be done.

अध्याय २६६

श्लोक 2

अगस्त्यस्योदये ऽगस्त्यञ्चातुर्मास्यं हरिं यजेत् ।शयनोत्थापने पञ्चदिनं कुर्यात्समुत्सवम्

agastyasyodaye 'gastyañcāturmāsyaṃ hariṃ yajet / śayanotthāpane pañcadinaṃ kuryātsamutsavam

हिन्दी अर्थ

शुन्धुसे बहुविध नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई । बहुविधसे संयाति और संयातिका पुत्र रहोवादी हुआ। रहोवादीके पुत्रका नाम भद्राश्च था। भद्राश्चके दस पुत्र हुए--ऋचेयु, कृषेयु, संनतेयु, घृतेयु, चितेयु,

English

YDh. 1.280a.

अध्याय २६६

श्लोक 3

प्रोष्ठपादे सिते पक्षे प्रतिपत्प्रभृतिक्रमात् ।शिविरात् पूर्वदिग्भागे शक्रार्थं भवनञ्चरेत्

proṣṭhapāde site pakṣe pratipatprabhṛtikramāt / śivirāt pūrvadigbhāge śakrārthaṃ bhavanañcaret

हिन्दी अर्थ

स्थण्डिलेयु, धर्मेयु, संनतेयु (दूसरा), कृतेयु और मतिनार मतिनारके तंसुरोध, प्रतिरथ और पुरस्त-- ये तीन पुत्र हुए। प्रतिरथसे कण्व और कण्वसे मेधातिथिका जन्म हुआ। तंसुरोधसे चार पुत्र उत्पन्न हुए--दुष्यन्त, प्रवीरक, सुमन्त और वीरवर अनय। दुष्यन्तसे भरतका जन्म हुआ। भरत शकुन्तलाके महाबली पुत्र थे। राजा भरतके नामपर उनके वंशज क्षत्रिय ' भारत” कहलाते हैं। भरतके पुत्र

English

YDh. 1.281a.

अध्याय २६६

श्लोक 4

तत्र शक्रध्वजं स्थाप्य शची शक्रञ्च पूजयेत् ।अष्टम्यां वाद्यघोषेण तान्तु यष्टिं प्रवेशयेत्

tatra śakradhvajaṃ sthāpya śacī śakrañca pūjayet / aṣṭamyāṃ vādyaghoṣeṇa tāntu yaṣṭiṃ praveśayet

हिन्दी अर्थ

अपनी माताओंके क्रोधसे नष्ट हो गये, तब राजाके यज्ञ करनेपर मरुद्गणोंने बृहस्पतिके पुत्र भरद्वाजको ले आकर उन्हें पुत्ररूपसे अर्पण किया। (भरतवंश “वितथ' हो रहा था, ऐसे समयमे भरद्वाज आये,

English

There, having set up Indra's banner, one should worship Shachi and Indra. On the eighth with sound of instruments one should bring that pole in;

अध्याय २६६

श्लोक 5

एकादश्यां सोपवासो द्वादश्यां केतुमुत्थितम् ।यजेद्वस्त्रादिसंवीतं घटस्थं(१) सुरपं शचीं

ekādaśyāṃ sopavāso dvādaśyāṃ ketumutthitam / yajedvastrādisaṃvītaṃ ghaṭasthaṃ(1) surapaṃ śacīṃ

हिन्दी अर्थ

अतः) वे 'वितथ' नामसे प्रसिद्ध हुए। वितथने पाँच पुत्र उत्पन्न किये, जिनके नाम ये हैं- सुहोत्र, सुहोता, गय, गर्भ तथा कपिल। इनके सिवा उनसे महात्मा और सुकेतु—ये दो पुत्र और उत्पन्न हुए। तत्पश्चात् उन्होंने कौशिक और गृत्सपतिको भी जन्म दिया। गृत्सपतिके अनेक पुत्र हुए, उनमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य-सभी थे। काश और दीर्घतमा भी उन्हींके पुत्र थे। दीर्घतमाके

English

on the eleventh fasting; on the twelfth the raised banner — one should worship, wrapped in cloth and the like, the lord of gods and Shachi in a pot:

अध्याय २६६

श्लोक 6

वर्धस्वेन्द्र जितामित्र वृत्रहन् पाकशासन ।देव देव महाभाग त्वं हि भूमिष्ठतां गतः

vardhasvendra jitāmitra vṛtrahan pākaśāsana / deva deva mahābhāga tvaṃ hi bhūmiṣṭhatāṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

धन्वन्तरि हुए और धन्वन्तरिका पुत्र केतुमान् हुआ। केतुमान्से हिमरथका जन्म हुआ, जो

English

"Prosper, Indra, conqueror of enemies, Vritra-slayer, Pakashasana, god of gods, greatly fortunate, you have come to dwell on earth;

अध्याय २६६

श्लोक 7

त्वं प्रभुः शाश्वतश् चैव सर्वभूतहिते रतः ।अनन्ततेजा वै राजो यशोजयविवर्धनः

tvaṃ prabhuḥ śāśvataś caiva sarvabhūtahite rataḥ / anantatejā vai rājo yaśojayavivardhanaḥ

हिन्दी अर्थ

“दिवोदास'के नामसे भी प्रसिद्ध हैं। दिवोदाससे प्रतर्दन तथा प्रतर्दनसे भर्ग और वत्स नामक दो पुत्र हुए। वत्ससे अनर्क और अनर्कसे क्षेमककी उत्पत्ति हुई। क्षेमकके वर्षकेतु और वर्षकेतुके पुत्र विभु बतलाये गये हैं। विभुसे आनर्त और सुकुमार नामक पुत्र उत्पन्न हुए। सुकुमारसे सत्यकेतुका जन्म हुआ। राजा वत्ससे वत्सभूमि नामक पुत्रकी भी उत्पत्ति हुई थी। वितथकुमार सुहोत्रसे बृहत्

English

you are lord and eternal, devoted to the good of all beings, of infinite splendor, king, increaser of fame and victory;

अध्याय २६६

श्लोक 8

तेजस्ते वर्धयन्त्वेते देवाः शक्रः सुवृष्टिकृत् ।ब्रह्मविष्णुमहेशाश् च कार्त्तिकेयो विनायकः

tejaste vardhayantvete devāḥ śakraḥ suvṛṣṭikṛt / brahmaviṣṇumaheśāś ca kārttikeyo vināyakaḥ

हिन्दी अर्थ

नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। बृहत्के तीन पुत्र हुए

English

may these gods increase your splendor, Indra, maker of good rain; Brahma, Vishnu, Maheshvara, Karttikeya, Vinayaka,

अध्याय २६६

श्लोक 9

आदित्या वसवो रुद्राः साध्याश् च भृगवो दिशः ।मरुद्गुणा लोकपाला ग्रहा यक्षाद्रिनिम्नगाः

ādityā vasavo rudrāḥ sādhyāś ca bhṛgavo diśaḥ / marudguṇā lokapālā grahā yakṣādrinimnagāḥ

हिन्दी अर्थ

अजमीढकी केशिनी नामवाली पल्नीके गर्भसे प्रतापी जह्ुका जन्म हुआ। जह्ुसे अजकाश्वको उत्पत्ति हुई और अजकाश्चका पुत्र बलाकाश्च हुआ। बलाकाश्चके पुत्रका नाम कुशिक हुआ। कुशिकसे गाधि उत्पन्न हुए, जिन्होंने इन्द्रत्व प्राप्त किया था। गाधिसे सत्यवती नामकी कन्या और विश्वामित्र नामक पुत्रका जन्म हुआ। देवरात और कतिमुख आदि विश्वामित्रके पुत्र हुए। अजमीढसे शुनःशेप

English

the Adityas, Vasus, Rudras, Sadhyas, Bhrigus, directions, hosts of Maruts, world-guardians, planets, Yakshas, mountains and rivers,

अध्याय २६६

श्लोक 10

समुद्रा श्रीर्मही गौरी चण्डिका च सरस्वती ।प्रवर्तयन्तु ते तेजो जय शक्र शचीपते

samudrā śrīrmahī gaurī caṇḍikā ca sarasvatī / pravartayantu te tejo jaya śakra śacīpate

हिन्दी अर्थ

और अष्टक नामवाले अन्य पुत्रोंको भी उत्पत्ति हुई। उनकी नीलिनी नामवाली पल्नीके गर्भसे एक और पुत्र हुआ, जिसका नाम शान्ति था। शान्तिसे पुरुजाति,पुरुजातिसे बाह्याश्च और बाह्याश्चसे पाँच

English

oceans, Shri, Earth, Gauri, Chandika and Sarasvati — may they increase your splendor. Victory, Indra, lord of Shachi!

अध्याय २६६

श्लोक 11

तव चापि जयान्नित्यं मम सम्पठ्यतां शुभं ।प्रसीद राज्ञां विप्राणां प्रजानामपि सर्वशः

tava cāpi jayānnityaṃ mama sampaṭhyatāṃ śubhaṃ / prasīda rājñāṃ viprāṇāṃ prajānāmapi sarvaśaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा उत्पन्न हुए, जिनके नाम इस प्रकार हैं- मुकुल, सृञ्जय, राजा बृहदिषु, यवीनर और कृमिल।-ये 'पाञ्चाल' नामसे विख्यात हुए। मुकुलके वंशज 'मौकुल्य' कहलाये। वे क्षात्रधर्मसे युक्त ब्राह्मण हुए। मुकुलसे चञ्चाश्वका जन्म हुआ और चञ्चाश्वसे एक पुत्र और एक जुड़वीं संतान पैदा हुई। पुत्रका नाम दिवोदास था और कन्याका अहल्या। अहल्याके गर्भसे शरद्वत (गौतम) -द्वारा

English

By your victory always let good be recited for me; be pleased with kings, Brahmins and the subjects everywhere;

अध्याय २६६

श्लोक 12

भवत्प्रसादात् पृथिवी नित्यं शस्यवती भवेत् ।शिवं भवतु निर्विघ्नं शाम्यन्तामीतयो भृशं

bhavatprasādāt pṛthivī nityaṃ śasyavatī bhavet / śivaṃ bhavatu nirvighnaṃ śāmyantāmītayo bhṛśaṃ

हिन्दी अर्थ

शतानन्दकी उत्पत्ति हुई । शतानन्दसे सत्यधृक् हुए। सत्यधृक्से भी दो जुड्वीं सन्ताने पैदा हुईं। उनमें पुत्रका नाम कृप और कन्याका नाम कृपी था। दिवोदाससे मैत्रेय और मैत्रेयसे सोमक हुए। सृञ्जयसे

English

by your grace may the earth always be rich in crops; may there be welfare, without obstacle, and may calamities be greatly quieted."

अध्याय २६६

श्लोक 13

१ पटस्थमिति क॥ , ग॥ , छ॥ , ज॥ , ट॥ च :प् ४७५ मन्त्रेणेन्द्रं समभ्यर्च्य जितभूः स्वर्गमाप्नुयात् ।भद्रकालीं पटे लिख्य पूजयेदाश्विने जये

1 paṭasthamiti ka.. , ga.. , cha.. , ja.. , ṭa.. ca :p 475 mantreṇendraṃ samabhyarcya jitabhūḥ svargamāpnuyāt / bhadrakālīṃ paṭe likhya pūjayedāśvine jaye

हिन्दी अर्थ

पञ्चधनुषकी उत्पत्ति हुई। उनके पुत्रका नाम सोमदत्त था। सोमदत्तसे सहदेव, सहदेवसे सोमक और सोमकसे जन्तु हुए। जन्तुके पुत्रका नाम पृषत् हुआ। पृषत्से द्रुपदका जन्म हुआ तथा द्रुपदका पुत्र धृष्टद्युम्न था और धृष्टद्युम्नसे धृष्टकेतुकी उत्पत्ति हुई। महाराज अजमीढकी धूमिनी नामवाली पत्नीसे ऋक्ष नामक पुत्र उत्पन्न हुआ

English

Having worshipped Indra with the mantra, one who has conquered the earth would obtain heaven. Having drawn Bhadrakali on cloth one should worship her in Ashvina for victory,

अध्याय २६६

श्लोक 14

शुक्लपक्षे तथाष्टम्यामायुधं कार्मुकं ध्वजम् ।छत्रञ्च राजलिङ्गानि शस्त्राद्यं कुसुमादिभिः

śuklapakṣe tathāṣṭamyāmāyudhaṃ kārmukaṃ dhvajam / chatrañca rājaliṅgāni śastrādyaṃ kusumādibhiḥ

हिन्दी अर्थ

ऋष्षसे संबरण और संबरणसे कुरुका जन्म हुआ, जिन्होंने प्रयागसे जाकर कुरुक्षेत्र तीर्थको स्थापना की। कुरुसे सुधन्वा, सुधनु, परीक्षित् और रिपुञ्जय-ये चार पुत्र हुए। सुधन्वासे सुहोत्र

English

on the eighth of the bright half likewise: weapon, bow, banner, umbrella, royal insignia, arms and the rest with flowers and the like.

अध्याय २६६

श्लोक 15

जाग्रन्निशि बलिन्दद्याद्द्वितीये ऽह्नि पुनर्यजेत् ।भद्रकालि महाकालि दुर्गे दुर्गार्तिहारिणि

jāgranniśi balindadyāddvitīye 'hni punaryajet / bhadrakāli mahākāli durge durgārtihāriṇi

हिन्दी अर्थ

और सुहोत्रसे च्यवन उत्पन्न हुए। च्यवनको पत्नी महारानी गिरिकाके वसुश्रेष्ठ उपरिचरके अंशसे सात पुत्र उत्पन्न हुए। उनके नाम इस प्रकार हैं- मत्स्यकाली । राजा बुहद्रथसे कुशाग्रका जन्म हुआ। कुशाग्रसे वृषभकी उत्पत्ति हुई और वृषभके पुत्रका नाम सत्यहित हुआ। सत्यहितसे सुधन्वा, सुधन्वासे ऊर्ज, ऊर्जसे सम्भव और सम्भवसे जरासंध उत्पन्न

English

Awake at night one should give an offering; on the second day one should worship again: "Bhadrakali, Mahakali, Durga, remover of difficulties,

अध्याय २६६

श्लोक 16

त्रैलोक्यविजये चण्डि मम शान्तौ जये भव ।नीराजनविधिं वक्ष्ये ऐशान्यान्मन्दिरं चरेत्

trailokyavijaye caṇḍi mama śāntau jaye bhava / nīrājanavidhiṃ vakṣye aiśānyānmandiraṃ caret

हिन्दी अर्थ

हुआ। जरासंधके पुत्रका नाम सहदेव था। सहदेवसे उदापि और उदापिसे श्रुतकर्माकी उत्पत्ति हुई। कुरुनन्दन परीक्षित्के पुत्र जनमेजय हुए। वे बड़े धार्मिक थे। जनमेजयसे त्रसद्दस्युका जन्म हुआ।

English

Chandi, victor of the three worlds, be for my peace and victory." I shall tell the rule of the lustration (nirajana): one should proceed to the temple in the northeast;

अध्याय २६६

श्लोक 17

तोरणत्रितयं तत्र गृहे देवान्यजेत् सदा ।चित्रान्त्यक्त्वा यदा स्वातिं सविता प्रतिपद्यते

toraṇatritayaṃ tatra gṛhe devānyajet sadā / citrāntyaktvā yadā svātiṃ savitā pratipadyate

हिन्दी अर्थ

राजा अजमीढके जो जह्लु नामवाले पुत्र थे, उनके सुरथ, श्रुतसेन, उग्रसेन और भीमसेन-ये चार पुत्र उत्पन्न हुए। परीक्षित्कुमार जनमेजयके दो पुत्र और हुए--सुरथ तथा महिमान्। सुरथसे विदूरथ और विदूरथसे ऋक्ष हुए। इस वंशमें ये ऋक्ष नामसे प्रसिद्ध द्वितीय राजा थे। इनके पुत्रका नाम भीमसेन हुआ। भीमसेनके पुत्र प्रतीप और प्रतीपके

English

there, having three arches, one should always worship the gods in the house. When the sun, leaving Chitra, reaches Svati,

अध्याय २६६

श्लोक 18

ततः प्रभृति कर्तव्यं यावत् स्वातौ रविः स्थितः ।ब्रह्मा विष्णुश् च शम्भुश् च शक्रश् चैवानलानिलौ

tataḥ prabhṛti kartavyaṃ yāvat svātau raviḥ sthitaḥ / brahmā viṣṇuś ca śambhuś ca śakraś caivānalānilau

हिन्दी अर्थ

शंतनु हुए। शंतनुके देवापि, बाहिक और सोमदत्त ये तीन पुत्र थे। बाहिकसे सोमदत्त और सोमदत्तसे भूरि, भूरिश्रवा तथा शलका जन्म हुआ। शंतनुसे गङ्गाजीके गर्भसे भीष्म उत्पन्न हुए तथा उनको

English

from then on it should be done as long as the sun stays in Svati. Brahma, Vishnu, Shambhu, Indra, Fire and Wind,

अध्याय २६६

श्लोक 19

विनायकः कुमारश् च वरुणो धनदो यमः ।विश्वेदेवा वैश्रवसो गजाश्चाष्टौ च तान्यजेत्

vināyakaḥ kumāraś ca varuṇo dhanado yamaḥ / viśvedevā vaiśravaso gajāścāṣṭau ca tānyajet

हिन्दी अर्थ

काल्या (सत्यवती) नामवाली पत्नीसे विचित्रवीर्यकी उत्पत्ति हुई। विचित्रवीर्यकी पत्नीके गर्भसे श्रीकृष्णद्वैपायनने धृतराष्ट्र, पाण्डु और विदुरको जन्म दिया । पाण्डुकी रानी कुन्तीके गर्भसे युधिष्टिर, भीम और अर्जुन-ये तीन पुत्र उत्पन्न हुए तथा उनकी माद्री नामवाली पल्नीसे नकुल और सहदेवका जन्म हुआ। पाण्डुके ये पाँच पुत्र देवताओंके अंशसे प्रकट हुए थे। अर्जुनके पुत्रका नाम अभिमन्यु

English

Vinayaka, Kumara, Varuna, Kubera, Yama, Vishvedevas, Vaishravasa and the eight elephants — one should worship them:

अध्याय २६६

श्लोक 20

कुमुदैरावणौ पद्मः पुष्पदन्तश् च वामनः ।सुप्रतीको ऽञ्जनो नीलः पूजा कार्या गृहादिके

kumudairāvaṇau padmaḥ puṣpadantaś ca vāmanaḥ / supratīko 'ñjano nīlaḥ pūjā kāryā gṛhādike

हिन्दी अर्थ

था। वे सुभद्राके गर्भसे उत्पन्न हुए थे। अभिमन्युसे राजा परीक्षितृका जन्म हुआ। द्रौपदी पाँचों पाण्डवोंकी पत्नी थी। उसके गर्भसे युधिष्ठिरसे प्रतिविन्ध्य, भीमसेनसे सुतसोम, अर्जुनसे श्रुतकीति,

English

Kumuda, Airavata, Padma, Pushpadanta, Vamana, Supratika, Anjana, Nila — worship should be made in the house and the rest.

अध्याय २६६

श्लोक 21

पुरोधा जुहुयादाज्यं समित्सिद्धार्थकं तिलाः ।कुम्भा अष्टौ पूजिताश् च तैः स्नाप्याश्वगजोत्तमाः

purodhā juhuyādājyaṃ samitsiddhārthakaṃ tilāḥ / kumbhā aṣṭau pūjitāś ca taiḥ snāpyāśvagajottamāḥ

हिन्दी अर्थ

सहदेवसे श्रुतशर्मा और नकुलसे शतानीककी उत्पत्ति हुई। भीमसेनका एक दूसरा पुत्र भी था, जो हिडिम्बाके गर्भसे उत्पन्न हुआ था। उसका नाम था घटोत्कच। ये भूतकालके राजा हैं। भविष्यमें भी बहुत-से राजा होंगे, जिनकी कोई गणना नहीं हो सकती। सभी समयानुसार कालके गालमें चले जाते हैं। विप्रवर! काल भगवान् विष्णुका ही स्वरूप है, अतः उन्हींका पूजन करना चाहिए।

English

The priest should offer ghee, fuel sticks, mustard seed and sesame; the eight pots, worshipped, with them the best horses and elephants should be bathed;

अध्याय २६६

श्लोक 22

अश्वाः स्नाप्या ददेत् पिण्डान् ततो हि प्रथमं गजान् ।निष्क्रामयेत्तोरणैस्तु गोपुरादि(१) न लङ्घयेत्

aśvāḥ snāpyā dadet piṇḍān tato hi prathamaṃ gajān / niṣkrāmayettoraṇaistu gopurādi(1) na laṅghayet

हिन्दी अर्थ

उन्हींके उद्देश्यसे अग्निमें हवन करो; क्योंकि वे भगवान् ही सब कुछ देनेवाले हैं

English

horses should be bathed and given pindas; but elephants first. One should lead them out through the arches, not crossing the city-gate and the like.

अध्याय २६६

श्लोक 23

विक्रमेयुस्ततः सर्वे राजलिङ्गं गृहे यजेत् ।१ शेखरादीति क॥ :प् ४७६ वारुणे वरुणं प्रार्च्य रात्रौ भूतबलिं ददेत्

vikrameyustataḥ sarve rājaliṅgaṃ gṛhe yajet / 1 śekharādīti ka.. :p 476 vāruṇe varuṇaṃ prārcya rātrau bhūtabaliṃ dadet

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें “कुरुवंशका वर्णन” नामक दो सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ सिद्ध ओषधियोंका वर्णन

English

Then all should march; one should worship the royal insignia in the house; having worshipped Varuna in the west, at night one should give the offering to beings.

अध्याय २६६

श्लोक 24

विशाखायां(१) गते सूर्ये आश्रमे निवसेन्नृपः ।अलङ्कुर्याद्दिने तस्मिन् वाहनन्तु विशेषतः

viśākhāyāṃ(1) gate sūrye āśrame nivasennṛpaḥ / alaṅkuryāddine tasmin vāhanantu viśeṣataḥ

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं-- वसिष्ठ! अब मैं आयुर्वेदका वर्णन करूँगा, जिसे भगवान् धन्वन्तरिने सुश्रुतसे कहा था। यह आयुर्वेदका सार है और अपने प्रयोगोंद्रारा मृतकको भी जीवन प्रदान करनेवाला

English

When the sun has gone to Vishakha the king should dwell in the hermitage; on that day he should adorn the vehicle especially;

अध्याय २६६

श्लोक 25

पूजिता राजलिङ्गाश् च कर्तव्या नरहस्तगाः ।हस्तिनन्तुरगं छत्रं खड्गं चापञ्च दुन्दुभिम्

pūjitā rājaliṅgāś ca kartavyā narahastagāḥ / hastinanturagaṃ chatraṃ khaḍgaṃ cāpañca dundubhim

हिन्दी अर्थ

सुश्रुतने कहा--भगवन्! मुझे मनुष्य, घोड़े और हाथीके रोगोंका नाश करनेवाले आयुर्वेद- शास्त्रका उपदेश कीजिये। साथ ही सिद्ध योगों, सिद्ध मन्त्रों और मृतसंजीवनकारक औषधोंका व्यक्तिके बलकी रक्षा करते हुए, अर्थात् उसके बलपर ध्यान रखते हुए लङ्घन (उपवास) करावे। तदनन्तर उसे सोंठसे युक्त लाल मण्ड (धानके लावेका माँड) तथा नागरमोथा, पित्तपापडा,

English

worshipped royal insignia should be carried by men: elephant, horse, umbrella, sword, bow, drum,

अध्याय २६६

श्लोक 26

ध्वजं पताकां धर्मज्ञ कालज्ञस्त्वभिमन्त्रयेत् ।अभिमन्त्र्य ततः सर्वान् कुर्यात् कुञ्जरधूर्गतान्

dhvajaṃ patākāṃ dharmajña kālajñastvabhimantrayet / abhimantrya tataḥ sarvān kuryāt kuñjaradhūrgatān

हिन्दी अर्थ

खस, लालचन्दन, सुगन्धबाला और सोंठके साथ श्रत (अर्धपक्व) जलको प्यास और ज्वरको शान्तिके लिये दे। छः' दिन बीत जानेके बाद चिरायता-जैसे द्रव्योंका काढ़ा अवश्य दे

English

banner and flag — the knower of dharma, knowing the time, should consecrate. Having consecrated them, he should then have all placed on elephant-backs;

अध्याय २६६

श्लोक 27

कुञ्जरोपरिगौ स्यातां सांवत्सरपुरोहितौ ।मन्त्रितांश् च समारुह्य तोरणेन विनिर्गमेत्

kuñjaroparigau syātāṃ sāṃvatsarapurohitau / mantritāṃś ca samāruhya toraṇena vinirgamet

हिन्दी अर्थ

ज्वर निकालनेके लिये (आवश्यकता हो तो) स्नेहन (पसीना) करावे। रोगीके दोष (वातादि) जब शान्त हो जायँ, तब विरेचन-द्रव्य देकर विरेचन कराना चाहिए। साठी, तिन्नी, लाल अगहनी और प्रमोदक (धान्यविशेष)-के तथा ऐसे ही अन्य धान्योंके भी पुराने चावल ज्वरमें (ज्वरकालमें मण्ड आदिके लिये) हितकर होते हैं। यवके बने (बिना भूसीके) पदार्थ भी

English

the astrologer and the priest should be on the elephant; having mounted the consecrated ones he should go out by the arch;

अध्याय २६६

श्लोक 28

निष्क्रम्य नागमारुह्य तोरणेनाथ निर्गमेत् ।बलिं विभज्य विधिवद्राजा कुञ्जरधूर्गतः

niṣkramya nāgamāruhya toraṇenātha nirgamet / baliṃ vibhajya vidhivadrājā kuñjaradhūrgataḥ

हिन्दी अर्थ

लाभदायक हैं। मूँग, मसूर, चना, कुलथी, मोंठ, अरहर, खेखशा, कायफर, उत्तम फलके सहित परवल, नीमकी छाल, पित्तपापड़ा एवं अनार भी ज्वरमें हितकारक होते हैं

English

having gone out, having mounted the elephant, he should then go out by the arch; having divided the offering by rule, the king on the elephant's back,

अध्याय २६६

श्लोक 29

उन्मूकानान्तु निचयमादीपितदिगन्तरं ।राजा प्रदक्षिणं कुर्यात्त्रीन् वारान् सुसमाहितः

unmūkānāntu nicayamādīpitadigantaraṃ / rājā pradakṣiṇaṃ kuryāttrīn vārān susamāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

रक्तपित्त नामक रोग यदि अधोग (नीचेकी गतिवाला) हो तो वमन हितकर होता है तथा ऊर्ध्वग (ऊपरकी ओर गतिवाला) हो तो विरेचन लाभदायक होता है। इसमें बिना सोंठके षडङ्ग (मुस्तपर्पटकोशीरचन्दनोदीच्य-नागरमोथा, पित्तपापडा, खस, चन्दन एवं सुगन्धबाला)-से बना क्काथ देना चाहिए। इस रोगमें (जौका) सत्तू, गेहुँका आटा, धानका लावा, जौके बने

English

the heap of torches lighting the quarters, the king should circle three times, well composed;

अध्याय २६६

श्लोक 30

चतुरङ्गबलोपेतः सर्वसैन्येन नादयन् ।एवं कृत्वा गृहं गच्छेद्विसर्जितजलाञ्जलिः

caturaṅgabalopetaḥ sarvasainyena nādayan / evaṃ kṛtvā gṛhaṃ gacchedvisarjitajalāñjaliḥ

हिन्दी अर्थ

विभिन्न पदार्थ, अगहनी धानका चावल, मसूर, मोंठ, चना और मूँग खानेयोग्य हैं । घी एवं दूधसे तैयार किये गये गेहूँके पदार्थ-दलिया, हलुवा आदि भी लाभकारी होते हैं। बलवर्धक रस तथा

English

with fourfold force, sounding with the whole army. Having done thus he should go home, having released the water-handful;

अध्याय २६६

श्लोक 31

शान्तिर् नीराजनाख्येयं वृद्धये रिपुमर्दनी

śāntir nīrājanākhyeyaṃ vṛddhaye ripumardanī

हिन्दी अर्थ

छोटी मक्खियोंका मधु भी हितकर होता है। अतिसारमें पुराना अगहनीका चावल लाभदायक होता है गुल्मरोगमें जो अन्न कफकारक न हो तथा पठानी लोधकी छालके क्वाथसे सिद्ध किया गया हो, वही देना चाहिए। उस रोगमें वायुकारक अन्नको त्याग दे एवं वायुसे रोगीको बचाये।

English

this peace called Nirajana is for growth and crushes enemies.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 266
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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