Agni Purana· Agni Purāṇa
275
अध्याय 275 / 381

Adhyaya 276

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अध्याय २७५

श्लोक 1

राजवंशवर्णनं अग्निर् उवाच तुर्वसोश् च सुतो वर्गो गोभानुस्तस्य चात्मजः(१) ।गोभानोरासीत्(२) त्रैशानिस्त्रैशानेस्तु करन्धमः

rājavaṃśavarṇanaṃ agnir uvāca turvasoś ca suto vargo gobhānustasya cātmajaḥ(1) / gobhānorāsīt(2) traiśānistraiśānestu karandhamaḥ

हिन्दी अर्थ

और अनुवासनके द्वारा सभी प्रकारके विद्रधिरोगोंका विनाश करे हाथीके कटुरोगोंमें मूँगकी दाल या मूँगके साथ मुलहठी मिलावे और नेत्रबाला एवं बेलकी छालका लेप करे। सभी प्रकारके शूलोंका शमन

English

A fabulous anlinal poweriUl than the lion.

अध्याय २७५

श्लोक 2

करन्धमान्मरुत्तोभूद् दुष्मन्तस्तस्य चात्मजः ।दुष्मन्तस्य वरूथो ऽभूद्गाण्डीरस्तु वरूथतः

karandhamānmaruttobhūd duṣmantastasya cātmajaḥ / duṣmantasya varūtho 'bhūdgāṇḍīrastu varūthataḥ

हिन्दी अर्थ

करनेके लिये दिनके पूर्वभागमें इन्द्रयव, हींग, धूपसरल, दोनों हल्दी और दारुहल्दीकी पिंडी दे। हाथियोंके उत्तम भोजनमें साठी चावल, मध्यम भोजनमें जौ और गेहूँ एवं अधम भोजनमें

English

The volcano facing the sun that causes the horripila¬ tion in men should be known to bring ill luck to vehicles and increase the fear.

अध्याय २७५

श्लोक 3

गाण्डीराच्चैव गान्धारः पञ्च जानपदास्ततः ।गान्धाराः केरलाश्चोलाः पाण्ड्याः कोला(३) महाबलाः

gāṇḍīrāccaiva gāndhāraḥ pañca jānapadāstataḥ / gāndhārāḥ keralāścolāḥ pāṇḍyāḥ kolā(3) mahābalāḥ

हिन्दी अर्थ

अन्य भक्ष्य-पदार्थ माने गये हैं। जौ और ईख हाथियोंका बल बढ़ानेवाले हैं तथा सूखा तृण उनके धातुको प्रकुपित करनेवाला है। मदक्षीण हाथीको दुग्ध पिलाना प्रशस्त है तथा दीपनीय द्रव्यांसे पकाया हुआ मांसरस भी लाभप्रद है। गुग्गुल, गठिवन, करकोल्यादिगण और चन्दन इनका मधुके साथ प्रयोग करे । इससे पिण्डोद्रेक- रोगका नाश होता है । कुटकी, मत्स्य, वायविडंग,

English

An army would take possession of a city that is under siege by that way through which many crows enter that city.

अध्याय २७५

श्लोक 4

द्रुह्यस्तु वभ्रुसेतुश् च बभ्रुसेतोः पुरोवसुः ।ततो गान्धारा गान्धारैर् धर्मो धर्माद् घृतो ऽभवत्

druhyastu vabhrusetuś ca babhrusetoḥ purovasuḥ / tato gāndhārā gāndhārair dharmo dharmād ghṛto 'bhavat

हिन्दी अर्थ

लवण, कोशातकी (झिमनी)-का दूध और हल्दी-इनका धूप हाथियोंके लिये विजयप्रद है। पीपल और चावल तथा तेल, माध्वीक (महुआ या अङ्गूरके रससे निर्मित सुरा) तथा

English

It indicates unfordable fear if a crow taking its abode in the place of the army goes about cawing with agitation and fear.

अध्याय २७५

श्लोक 5

घृतात्तु विदुषस्तस्मात् प्रचेतास्तस्य वै शतम् ।आनद्रश् च सभानरश्चाक्षुषः परमेषुकः

ghṛtāttu viduṣastasmāt pracetāstasya vai śatam / ānadraś ca sabhānaraścākṣuṣaḥ parameṣukaḥ

हिन्दी अर्थ

मधु-इनका नेत्रोंमें परिषेक दीपनीय माना गया है। गौरैया चिड़िया और कबूतरकी बीट, गूलर, सूखा गोबर एवं मदिरा-इनका मञ्जन हाथियोंको अत्यन्त प्रिय है। हाथीके नेत्रोंको इससे अञ्जित करनेपर वह संग्रामभूमिमें शत्रुओंको मसल डालता है। नीलकमल, नागरमोथा और तगर-इनको चावलके जलमें पीस ले। यह हाथियोंके नेत्रोंको परम शान्ति प्रदान करता है। नख बढ़नेपर उनके

English

If (the crow) pecks at the shadow, body, vehicle, shoes, umbrella and clothes and other things (of a person, it indicates) death (for that person). If it honours (the person, he) will be honoured. If it gives something that it is fond of, (it augurs) good.

अध्याय २७५

श्लोक 6

सभानरात् कालानलः कालानलजस्रृञ्जयः ।पुरञ्जयः सृञ्जयस्य तत्पुत्रो जनमेजयः

sabhānarāt kālānalaḥ kālānalajasrṛñjayaḥ / purañjayaḥ sṛñjayasya tatputro janamejayaḥ

हिन्दी अर्थ

नख काटने चाहिए और प्रतिमास तैलका सेक करना चाहिए। हाथियोंका शयन-स्थान सूखे गोबर और धूलसे युक्त होना चाहिए। शरद् और ग्रीष्म-ऋतुमें इनके लिये घृतका सेक उपयुक्त

English

From Sabhanara Kalanala; from Kalanala Srinjaya; Purunjaya from Srinjaya; his son Janamejaya;

अध्याय २७५

श्लोक 7

तत्पुत्रस्तु महाशालस्तत्पुत्रो ऽभुन्महामनाः ।तस्मादुशीनरो ब्रह्मन्नृगायान्तु नृगस्ततः

tatputrastu mahāśālastatputro 'bhunmahāmanāḥ / tasmāduśīnaro brahmannṛgāyāntu nṛgastataḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापृराणमें 'गज-चिकित्साका कथन” नामक दो सौ सचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ भगवान् धन्वन्तरि कहते हैं-- सुश्रुत! अब मैं अश्ववाहनका रहस्य और अश्वोंकी चिकित्साका वर्णन करूँगा। धर्म, कर्म और अर्थकी सिद्धिके लिये अश्वोंका संग्रह करना चाहिए। घोड़ेके

English

his son Mahashala; his son was Mahamanas; from him Ushinara, Brahmin, and Nriga on Nriga's wife; then Nriga;

अध्याय २७५

श्लोक 8

नरायान्तु नरश्चासीत् कृमिस्तु कृमितः सुतः ।१ शोभानुस्तस्य चात्मज इति ख ॥ २ शोभानोरासीदिति ख ॥ ३ कर्णा इति ज॥ , ट॥ च ॥ :प् २२ दशायां सुब्रतो जज्ञे दृशद्वत्यां शिविस् तथा

narāyāntu naraścāsīt kṛmistu kṛmitaḥ sutaḥ / 1 śobhānustasya cātmaja iti kha .. 2 śobhānorāsīditi kha .. 3 karṇā iti ja.. , ṭa.. ca .. :p 22 daśāyāṃ subrato jajñe dṛśadvatyāṃ śivis tathā

हिन्दी अर्थ

ऊपर प्रथम बार सवारी करनेके लिये अश्विनी, श्रवण, हस्त, उत्तराषाढ़, उत्तरभाद्रपद और उत्तरफाल्गुनी नक्षत्र प्रशस्त माने गये हैं। घोड़ोंपर चढ्नेके लिये हेमन्त, शिशिर और वसन्त ऋतु

English

on Nara's wife Nara; and Krimi; Krimi's son. On Dasha Suvrata was born; on Drishadvati Shibi likewise;

अध्याय २७५

श्लोक 9

शिवे पुत्रास्तु चत्वारः पृथुदर्भश् च वीरकः ।कैकेयो भद्रकस्तेषां नाम्रा जनपदाः शुभाः

śive putrāstu catvāraḥ pṛthudarbhaś ca vīrakaḥ / kaikeyo bhadrakasteṣāṃ nāmrā janapadāḥ śubhāḥ

हिन्दी अर्थ

उत्तम हैं। ग्रीष्म, शरद् एवं वर्षा ऋतुमें घुड़सवारी निषिद्ध है। घोड़ोंको तीखे और लचीले डंडोंसे न मारे। उनके मुखपर प्रहार न करे। जो मनुष्य घोड़ेके मनको नहीं समझता तथा उपायोंको जाने बिना ही उसपर सवारी करता है तथा घोड़ेको कीलों और अस्थियोंसे भरे हुए दुर्गम, कण्टकयुक्त, बालू और कीचड्से आच्छन्न पथपर, गड्ढों या उन्नत भूमियोंसे दूषित मार्गपर ले जाता है एवं

English

Shibi's four sons: Prithudarbha, Viraka, Kaikeya, Bhadraka; by their names the auspicious countries.

अध्याय २७५

श्लोक 10

तितिक्षुरुशीनरजस्तितिक्षोश् च रुषद्रथः ।रुषद्रथादभूत्पैलः पैलाच्च सुतपाः सुतः

titikṣuruśīnarajastitikṣoś ca ruṣadrathaḥ / ruṣadrathādabhūtpailaḥ pailācca sutapāḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

पीठपर काठीके बिना ही बैठ जाता है, वह मूर्ख अश्वका ही वाहन बनता है, अर्थात् बह अश्वके अधीन होकर विपत्तिमें फँस जाता है। कोई बुद्धिमानोंमें श्रेष्ठ सुकृती अश्ववाहक अश्वशास्त्रको

English

Titikshu born of Ushinara, and of Titikshu Rushadratha; from Rushadratha Paila; from Paila Sutapas the son;

अध्याय २७५

श्लोक 11

महायोगि बलिस्तस्मादङ्गो वङ्गश् च मुख्यकः ।पुण्ड्रः कलिङ्गो बालेयो बलिर्योगी बलान्वितः

mahāyogi balistasmādaṅgo vaṅgaś ca mukhyakaḥ / puṇḍraḥ kaliṅgo bāleyo baliryogī balānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

पढ़े बिना भी केवल अभ्यास और अध्यवसायसे ही अश्वको अपना अभिप्राय समझा देता है। अथवा घोड़ेके अभिप्रायको समझकर दूसरोंको उसका ज्ञान करा देता है। अश्वको नहलाकर पूर्वाभिमुख खड़ा करे। फिर उसके शरीरमें आदिमें ३' और अन्तमें 'नमः' शब्द जोड़कर अपने बीजाक्षरसे युक्त

English

from him Mahayogi Bali; Anga, Vanga and Mukhya; Pundra, Kalinga, Baleya; Bali the yogi, endowed with strength.

अध्याय २७५

श्लोक 12

अङ्गाद्दधिवाहनो ऽभूत्(१) तस्माद्दिविरथो नृपः ।दिविरथाद्धर्मरथस्तस्य चित्ररथः सुतः

aṅgāddadhivāhano 'bhūt(1) tasmāddiviratho nṛpaḥ / divirathāddharmarathastasya citrarathaḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

या भावना) करे। अश्वके चित्तमें ब्रह्मा, बलमें विष्णु, पराक्रममें गरुड, पार्श्वभागमें रुद्रगण, बुद्धिमें

English

From Anga Dadhivahana; from him king Divaratha; from Divaratha Dharmaratha; his son Chitraratha;

अध्याय २७५

श्लोक 13

चित्ररथात्सत्यरथो लोमपदश् च तत्सुतः ।लोमपादाच्चतुरङ्गः पृथुलाक्षश् च तत्सुतः

citrarathātsatyaratho lomapadaś ca tatsutaḥ / lomapādāccaturaṅgaḥ pṛthulākṣaś ca tatsutaḥ

हिन्दी अर्थ

बृहस्पति, मर्मस्थानमें विश्वेदेव, नेत्रावर्त और ेत्रमें चन्द्रमा-सूर्य, कानोंमें अश्विनीकुमार, जठराग्निमें स्वधा, जिह्लामें सरस्वती, वेगमें पवन, पृष्ठभागमें स्वर्गपृष्ठ, खुराग्रमें समस्त पर्वत, रोमकूपोंमें नक्षत्रगण, हृदयमें चन्द्रकला, तेजमें अग्नि, श्रोणिदेशमें रति, ललाटमें जगत्पति, हेषित (हिनहिनाहट)- में नवग्रह एवं वक्षःस्थलमें वासुकिका न्यास करे। अश्वारोही उपवासपूर्वक अश्वकी अर्चना

English

from Chitraratha Satyaratha and his son Lomapada; from Lomapada Chaturanga; his son Prithulaksha;

अध्याय २७५

श्लोक 14

पृथुलाक्षाच्च चम्पो ऽभूच्चम्पाद्धर्यङ्गको ऽभवत् ।हर्यङ्गाच्च भद्ररथो बृहत्कर्मा च तत्सुतः

pṛthulākṣācca campo 'bhūccampāddharyaṅgako 'bhavat / haryaṅgācca bhadraratho bṛhatkarmā ca tatsutaḥ

हिन्दी अर्थ

करे एवं उसके दक्षिण कर्णमें निम्नलिखित मन्त्रका जप करे-

English

from Prithulaksha Champa; from Champa Haryanga; from Haryanga Bhadraratha and his son Brihatkarman;

अध्याय २७५

श्लोक 15

तस्मादभूद्वॄहद्भानुर्वृहद्भानोर्बृहात्मवान् ।तस्माज्जयद्रथो ह्य् आसीज्जयद्रथाद्वृहद्रथः

tasmādabhūdvṝhadbhānurvṛhadbhānorbṛhātmavān / tasmājjayadratho hy āsījjayadrathādvṛhadrathaḥ

हिन्दी अर्थ

'“तुरंगम! तुम गन्धर्वराज हो। मेरे वचनको सुनो। तुम गन्धर्वकुलमें उत्पन्न हुए हो। अपने कुलको दूषित न करना। अश्व! ब्राह्मणोंके सत्यवचन, सोम, गरुड, रुद्र, वरुण और पवनके बल एवं अग्निके तेजसे युक्त अपनी जातिका स्मरण करो। याद करो कि “तुम राजेनद्रपुत्र हो।' सत्यवाक्यका स्मरण करो। वरुणकन्या वारुणी और कौस्तुभमणिको याद करो। जब हैत्यों और

English

from him Brihadbhanu; from Brihadbhanu Brihadatmavan; from him Jayadratha; from Jayadratha Brihadratha;

अध्याय २७५

श्लोक 16

वृहद्रथाद्विश्वजिच्च कर्णो विश्वजितो ऽभवत् ।कर्णस्य वृषसेनस्तु पृथुसेनस्तदात्मजः ।एतो ऽङ्गवंशजा भूपाः पूरोर्वंशं विबोध मे

vṛhadrathādviśvajicca karṇo viśvajito 'bhavat / karṇasya vṛṣasenastu pṛthusenastadātmajaḥ / eto 'ṅgavaṃśajā bhūpāḥ pūrorvaṃśaṃ vibodha me

हिन्दी अर्थ

उस समय तुम देवकुलमें प्रादुर्भूत हुए थे। अपने वाक्यका पालन करो। तुम अश्ववंशमें उत्पन्न हुए हो। सदाके लिये मेरे मित्र बनो। मित्र! तुम यह

English

from Brihadratha Vishvajit; Karna from Vishvajit; Karna's Vrishasena; Prithusena his son. These are kings born of the Anga line; learn from me the line of Puru.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 275
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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