Agni Purana· Agni Purāṇa
318
अध्याय 318 / 381

Adhyaya 319

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अध्याय ३१८

श्लोक 1

मण्डलानि ईश्वर उवाच सर्वतो भद्रकान्यष्टमण्डलानि वदे गुह ।शक्तिमासाधयेत् प्राचीमिष्टायां विषुवे सुधीः

maṇḍalāni īśvara uvāca sarvato bhadrakānyaṣṭamaṇḍalāni vade guha / śaktimāsādhayet prācīmiṣṭāyāṃ viṣuve sudhīḥ

हिन्दी अर्थ

६. पद्मकं तु कोमले करे विभाति प्रशस्तमत्स्यलाञ्छनं च पदे यस्याः । सा यवान्विता भवेद्धनाधिका च समस्तबन्धुपूजिता प्रिया च पत्युः॥

English

(The hymn) ketwh kjrnsan will confer victory in battle. (The hymn) indro' gnirdharma ensures fair play in battle.

अध्याय ३१८

श्लोक 2

चित्रास्वात्यन्तरेणाथ दृष्टसूत्रेण वा पुनः ।पूर्वापरायतं सूत्रमास्फाल्य मध्यतो ऽङ्कयेत्

citrāsvātyantareṇātha dṛṣṭasūtreṇa vā punaḥ / pūrvāparāyataṃ sūtramāsphālya madhyato 'ṅkayet

हिन्दी अर्थ

८. 'शिखा' छन्दके ही समान ' खञ्जा'का भी उदाहरण होगा। उसका सम इसका विषम होगा और उसका विषम इसका सम होगा। तगण और यगण हों, उसका नाम ' तनुमध्या " है। यह गायत्री छन्दका वृत्त है। जिसके प्रत्येक चरणमें जगण, सगण और एक गुरु हो, उसे 'कुमारललिता ” कहते हैं। यह उष्णिक् छन्दका

English

The hynm dhiratha should be used for the consecration of arrows. Bahvindrh pitd is said to be the hymn for consecrating quiver.

अध्याय ३१८

श्लोक 3

१ द्विपर्णकमिति ख॥ :प् १६२ कोटिद्वयन्तु तन्मध्यादङ्कयेद्दक्षिणोत्तरम् ।मध्ये द्वयं प्रकर्तव्य स्फालयेद्दक्षिनोत्तरम्

1 dviparṇakamiti kha.. :p 162 koṭidvayantu tanmadhyādaṅkayeddakṣiṇottaram / madhye dvayaṃ prakartavya sphālayeddakṣinottaram

हिन्दी अर्थ

वृत्त है। इसमें तीन, चार अक्षरोंपर विराम होता है। दो भगण और दो गुरुसे जिसके चरण बनते हों, वह 'चित्रपदा है। यह अनुष्टुप् छन्दका वृत्त है, इसमें पादान्तमें ही यति होती है। जिसके

English

TS. 1.3. 14.7a.

अध्याय ३१८

श्लोक 4

शतक्षेत्रार्धमानेन कोणसम्पातमादिशेत् ।एवं सूत्रचतुष्कस्य स्फालनाच्चतुरस्रकम्

śatakṣetrārdhamānena koṇasampātamādiśet / evaṃ sūtracatuṣkasya sphālanāccaturasrakam

हिन्दी अर्थ

प्रत्येक पादमें दो मगण और दो गुरु हों, उसका नाम ' विद्युन्माला" है । इसमें चार-चार अक्षरोंपर विराम होता है। यह भी अनुष्ठुपूका ही वृत्त है। जिसके प्रत्येक चरणमें भगण, तगण, एक लघु और एक गुरु हो, उसको माणवकाक्रीडितक " कहते हैं। इसमें भी चार-चार अक्षरोंपर विराम होता है। जिसके प्रति चरणमें रगण, नगण और सगण हो, वह 'हलमुखी नामक छन्द है।

English

Cf. apSm phenenaVay Sam. 19.71a.

अध्याय ३१८

श्लोक 5

जायते तत्र कर्तव्यं भद्रस्वेदकरं शुभम् ।वसुभक्तेन्दु द्विपदे क्षेत्रे वीथी च भागिका

jāyate tatra kartavyaṃ bhadrasvedakaraṃ śubham / vasubhaktendu dvipade kṣetre vīthī ca bhāgikā

हिन्दी अर्थ

इसमें तीन, पाँच, छः अक्षरोंपर विराम होता है, यह बृहती छन्दका वृत्त है।

English

Cf. RV. 8.19.19b.

अध्याय ३१८

श्लोक 6

द्वारं द्विपदिकं पद्ममानाद्धै सकपोलकम् ।कीणबन्धविचित्रन्तु द्विपदं तत्र वर्तयेत्

dvāraṃ dvipadikaṃ padmamānāddhai sakapolakam / kīṇabandhavicitrantu dvipadaṃ tatra vartayet

हिन्दी अर्थ

जिसके प्रत्येक चरणमें दो नगण और एक मगण हो, वह ' भुजङ्गशिशुभृता " नामक छन्द है। इसमें सात और दो अक्षरोंपर विराम है। यह भी बृहतीमें ही है। मगण, नगण और दो गुरुसे युक्त पादवाले छन्दको ' हंसरुत कहते हैं। जिसके प्रत्येक चरणमें मगण, सगण, जगण और एक गुरु हों, वह 'शुद्धविराट् नामक छन्द कहा गया है। यहाँसे इन्द्रवज्राके पहलेतकके छन्द पङ्कि छन्दके

English

Vaj. Sam. 26.1.

अध्याय ३१८

श्लोक 7

शुक्लं पद्मं कर्णिका तु पीता चित्रन्तु केशरम् ।रक्ता वीथी तत्र कल्प्या द्वारं लोकेशरूपकं

śuklaṃ padmaṃ karṇikā tu pītā citrantu keśaram / raktā vīthī tatra kalpyā dvāraṃ lokeśarūpakaṃ

हिन्दी अर्थ

अन्तर्गत हैं; इसमें पादान्तमें विराम होता है। जिसके प्रत्येक पादमें मगण, नगण, यगण और एक गुरु हों, वह “पणव” नामक छन्द है। इसमें पाँच-पाँचपर विराम होता है। रगण,

English

Tail. Sam. 1.7.8. 1.

अध्याय ३१८

श्लोक 8

रक्तकोणं विधौ नित्ये नैमित्तिकाब्जकं शृणु ।असंसक्तन्तु संसक्तं द्विधाब्जं भुक्तिमुक्तिकृत्

raktakoṇaṃ vidhau nitye naimittikābjakaṃ śṛṇu / asaṃsaktantu saṃsaktaṃ dvidhābjaṃ bhuktimuktikṛt

हिन्दी अर्थ

जगण, रगण और एक गुरुयुक्त चरणवाले छन्दका नाम “मयूरसारिणी ” है। इसमें पादान्तमें विराम होता है। मगण, भगण, सगण और एक गुरुयुक्त चरणवाला छन्द 'मत्ता९ कहलाता है। इसमें चार-छःपर विराम होता है। जिसके प्रत्येक पादमें तगण, दो जगण और एक गुरु हो, उसका नाम “उपस्थिता "२ है। इसमें दो-आठपर विराम होता है। भगण, मगण, सगण और एक गुरुसे

English

Cf. brahma r&jany&bhydm Vaj. Sam. 26.2c.

अध्याय ३१८

श्लोक 9

असंसक्तं मुमुक्षूणां संसक्तं तत्त्रिधा पृथक् ।बालो युवा च वृद्धश् च नामतः फलसिद्धिदाः

asaṃsaktaṃ mumukṣūṇāṃ saṃsaktaṃ tattridhā pṛthak / bālo yuvā ca vṛddhaś ca nāmataḥ phalasiddhidāḥ

हिन्दी अर्थ

युक्त पादवाला छन्द ' रुक्मवती "४ कहलाता है। इसमें पादान्तमें विराम होता है। जिसके प्रत्येक चरणमें दो तगण, एक जगण और दो गुरु हों उसका नाम 'इन्द्रवज्रा' है। इसमें पादान्तमें

English

Vaj. Sam. 27.45 or TB. 3. 11. 1.1 4.

अध्याय ३१८

श्लोक 10

पद्मक्षेत्रे तु सूत्राणि दिग्विदिक्षु विनिक्षिपेत् ।वृत्तानि पञ्चकल्पानि पद्मक्षेत्रसमानि तु

padmakṣetre tu sūtrāṇi digvidikṣu vinikṣipet / vṛttāni pañcakalpāni padmakṣetrasamāni tu

हिन्दी अर्थ

विराम होता है। यहाँसे ' वंशस्थ'के पहलेतकके - उदाहरण--यदीह पतिसेवारता भवति योषा। कुमारललितासौ सहैव नमनीया॥

English

Tait. Sam. 7.4.20.1a.

अध्याय ३१८

श्लोक 11

प्रथमे कर्णिका तत्र पुष्करैर् नवभिर्युता ।केशराणि चतुर्विंशद्वितीये ऽथ तृतीयके

prathame karṇikā tatra puṣkarair navabhiryutā / keśarāṇi caturviṃśadvitīye 'tha tṛtīyake

हिन्दी अर्थ

- उदाहरण-विद्युन्मालालोलान् भोगान् मुक्त्वा मुक्तौ यत्नं कुर्यात्। ध्यानोत्पन्नं निस्सामान्यं सौख्यं भोक्तुं यद्याकाङ्क्षेत्॥ : उदाहरण-माणवकाक्रीडितकं यः कुरुते वृद्धवयाः हास्यमसौ याति जने भिक्षुरिव स्त्रीचपलः ॥

English

Could not be traced.

अध्याय ३१८

श्लोक 12

दलसन्धिर्गजकुम्भ निभान्तर्यद्दलाग्रकम् ।पञ्चमे व्योमरूपन्तु संसक्तं कमलं स्मृतं

dalasandhirgajakumbha nibhāntaryaddalāgrakam / pañcame vyomarūpantu saṃsaktaṃ kamalaṃ smṛtaṃ

हिन्दी अर्थ

- विश्वं तिष्ठति कुक्षिकोटरे वक्त्रे यस्य सरस्वती सदा। अस्मद्वंशपितामहो गुरुब्रह्मा शुद्धविराट् पुनातु नः ॥ - उदाहरण-या वनान्तराण्युपैति कृष्णं द्रृष्ठमुत्सुका शिखण्डमौलिम्। बर्हिणं विलोक्य राधिका मे सा मयूरसारिणी प्रणम्या॥ . उदाहरण-स्वैरालापैः श्रुतिपुटपेयैर्गीति: शौरेश्चरित विशेषैः । श्यामप्रेम्णा व्रजवनितानां मध्ये मत्ता विलसति कापि॥

English

Tait. Sam. 4.6.6.1a.

अध्याय ३१८

श्लोक 13

असंसक्ते दलाग्रे तु दिग्भागैर् विस्तराद्भजेत् ।भागद्वयपरित्यागाद्वस्वंशैर् वर्तयेद्दलम्

asaṃsakte dalāgre tu digbhāgair vistarādbhajet / bhāgadvayaparityāgādvasvaṃśair vartayeddalam

हिन्दी अर्थ

- उदाहरण-एषा जगदेकमनोहरा कन्या कनकोज्चलदीधितिः। लक्ष्मीरिव दानवसूदनं पुण्यैर्नरनाथमुपस्थिता॥

English

Could not be traced.

अध्याय ३१८

श्लोक 14

सन्धिविस्तरसूत्रेण तन्मूलादञ्जयेद्दलम् ।सव्यासव्यक्रमेणैव वृद्धमेतद्भवेत्तथा

sandhivistarasūtreṇa tanmūlādañjayeddalam / savyāsavyakrameṇaiva vṛddhametadbhavettathā

हिन्दी अर्थ

- उदाहरण--ये दुष्टहैत्या इह भूमिलोके द्वेषं व्यधुगोंद्विजदेवसंघे। तानिन्द्रवज्रादपि दारुणाङ्गानजीघतद् यः सततं नमस्ते ॥ ६८८ अग्निपुराण

English

Tait. Sam. 4.6.6.2a.

अध्याय ३१८

श्लोक 15

अथ वा सन्धिमध्यात्तु भ्रामयेदर्धचन्द्रवत् ।सन्धिद्वयाग्रसूत्रं वा बालपद्मन्तथा भवेत्

atha vā sandhimadhyāttu bhrāmayedardhacandravat / sandhidvayāgrasūtraṃ vā bālapadmantathā bhavet

हिन्दी अर्थ

और दो गुरुसे युक्त पादोंवाला छन्द ' उपेन्द्रवज्रा " कहलाता है। इसमें भी पादान्तमें विराम होता है। जब एक ही छन्दमें इन्द्रवज्रा और उपेन्द्रवज्रा-- दोनोंके चरण लक्षित हों, तब उस छन्दका नाम

English

Cf. Tuhjanti bradhnam Tait. Sam. 7.4.20.1a. 15* Tait, Sam. 4.6.4.1a.

अध्याय ३१८

श्लोक 16

सन्धिसूत्रार्धमानेन पृष्ठतः परिवर्तयेत् ।तीक्ष्णाग्रन्तु सुवातेन कमलं भुक्तिमुक्तिदम्

sandhisūtrārdhamānena pṛṣṭhataḥ parivartayet / tīkṣṇāgrantu suvātena kamalaṃ bhuktimuktidam

हिन्दी अर्थ

“उपजाति? होता है। इन दोनोंके मेलसे जो उपजाति बनती है, उसके प्रस्तारसे चौदह भेद होते हैं। इसी प्रकार ' वंशस्थ' और 'इन्द्रवज्रा' तथा 'शालिनी' और 'वातोमी'के मेलसे भी उपजाति छन्द होता है।

English

One should turn it back by half the joint-thread; the sharp-pointed lotus with good wind gives enjoyment and liberation.

अध्याय ३१८

श्लोक 17

भुक्तिवृद्धौ च वश्यादौ बालं पद्मं समानकं ।नवनाभं नवहस्तं भागैर् मन्त्रात्मकैश् च तत्

bhuktivṛddhau ca vaśyādau bālaṃ padmaṃ samānakaṃ / navanābhaṃ navahastaṃ bhāgair mantrātmakaiś ca tat

हिन्दी अर्थ

तीन भगण और दो गुरुसे युक्त पादवाले वृत्तका नाम 'दोधक है। इसमें पादान्तमें विराम होता है। जिसके प्रत्येक चरणमें भगण, तगण, तगण और दो गुरु हों, उसका नाम

English

In increase of enjoyment and in subjugation, a "bala" lotus equal; nine-navel, nine-cubit, by mantra-formed parts;

अध्याय ३१८

श्लोक 18

मध्ये ऽब्जं पट्टिकावीजं द्वारेणाब्जस्य मानतः ।कण्ठोपकण्ठमुक्तानि तद्वाह्ये वीथिका मता

madhye 'bjaṃ paṭṭikāvījaṃ dvāreṇābjasya mānataḥ / kaṇṭhopakaṇṭhamuktāni tadvāhye vīthikā matā

हिन्दी अर्थ

'शालिनी” है। इसमें चार और सात अक्षरोंपर विराम होता है। जिसके प्रत्येक पादमें मगण, भगण, तगण एवं दो गुरु हों, उसे “वातोर्मी " विराम होता है। प्रत्येक चरणमें मगण, भगण, तगण, नगण, एक लघु और एक गुरु होनेसे

English

in the middle a lotus, the seed of the border; by the door by the lotus measure; with neck and near-neck omitted; outside it a path is held;

अध्याय ३१८

श्लोक 19

पञ्चभागान्विता(१) सा तु समन्ताद्दशभागिका ।दिग्विदिक्ष्वष्ट पद्मानि द्वारपद्मं सवीथिकम्

pañcabhāgānvitā(1) sā tu samantāddaśabhāgikā / digvidikṣvaṣṭa padmāni dvārapadmaṃ savīthikam

हिन्दी अर्थ

ही विराम होता है। जिसके प्रति पादमें रगण, नगण, रगण, एक लघु और गुरु हों, उसे ' रथोद्धता कहते हैं । इसमें भी पूर्ववत् चार और सात अक्षरोंपर विराम होता है। रगण, नगण,

English

it is five-parted, and ten-parted all around; in the directions and corners eight lotuses, a door-lotus with path;

अध्याय ३१८

श्लोक 20

तद्वाह्ये पञ्च पदिका वीथिका यत्र भूषिता ।पद्मवद्द्वारकण्ठन्तु पदिकञ्चौष्ठकण्ठकं

tadvāhye pañca padikā vīthikā yatra bhūṣitā / padmavaddvārakaṇṭhantu padikañcauṣṭhakaṇṭhakaṃ

हिन्दी अर्थ

भगण और दो गुरुसे युक्त पादवाले छन्दको 'स्वागता“ कहते हैं। इसमें पादान्तमें विराम होता है। जिसके प्रत्येक पादमें दो नगण, सगण और दो गुरु हों, उसे 'वृत्ता“ (या 'वृन्ता') कहते हैं । इसमें चार-सातपर विराम होता है । जिसके चरण रगण, जगण, रगण, एक लघु और एक गुरुसे युक्त हों, उसे ' श्येनी "० नामक छन्द कहा गया है। इसमें पादान्तमें विराम होता है।

English

outside it, five borders where the path is adorned; the door-neck like a lotus, with border, lip-neck;

अध्याय ३१८

श्लोक 21

कपोलं पदिकं कार्यं दिक्षु द्वारत्रयं स्पुटम् ।कोणबन्धं त्रिपत्तन्तु द्विपट्टं वज्रवद्भवेत्

kapolaṃ padikaṃ kāryaṃ dikṣu dvāratrayaṃ spuṭam / koṇabandhaṃ tripattantu dvipaṭṭaṃ vajravadbhavet

हिन्दी अर्थ

जगण, रगण, जगण एवं दो गुरुसे युक्त चरणवाले

English

the cheek-border should be made; three doors clear in the directions; corner-bond three-leaved, double-banded like a thunderbolt.

अध्याय ३१८

श्लोक 22

मध्यन्तु कमलं शुक्लं पीतं रक्तञ्च नीलकम् ।पीतशुक्लञ्च धूम्रञ्च रक्तं पीतञ्च मुक्तिदम्

madhyantu kamalaṃ śuklaṃ pītaṃ raktañca nīlakam / pītaśuklañca dhūmrañca raktaṃ pītañca muktidam

हिन्दी अर्थ

उपेन्द्रवञ्राधिककर्कशत्वं कथं गतास्ते रिपुदारणायाम्॥ २. उदाहरण--तत्रोपजातिर्विविधा विदग्धैः संयोज्यते तु व्यवहारकाले। मध्ये क्षामा पीवरोरुस्तनी या श्लाघ्या भर्तुः शालिनी कामिनी सा॥ ५. यात्युत्सेकं सपदि प्राप्य किंचित् स्याद् वा यस्याश्चपला चित्तवृत्तिः ।

English

The middle lotus white, yellow, red and blue; yellow-white and smoky, red and yellow — giving liberation.

अध्याय ३१८

श्लोक 23

पूर्वादौ कमलान्यष्ट शिवविष्ण्वादिकं जपेत् ।प्रासादमध्यतो ऽभ्यर्च्य शक्रादीनब्जकादिषु

pūrvādau kamalānyaṣṭa śivaviṣṇvādikaṃ japet / prāsādamadhyato 'bhyarcya śakrādīnabjakādiṣu

हिन्दी अर्थ

इत्येवं मे जनयति मनसि भ्रान्तिं कान्ते परिसर सरसि॥ ७.या करोति विविधैर्नरैः समं संगतिं परगृहे रता च या।

English

Eight lotuses in the east and so on; one should recite Shiva, Vishnu and the rest. Having worshipped in the middle of the temple, Indra and the rest on the lotuses and so on;

अध्याय ३१८

श्लोक 24

अस्त्राणि वाह्यवीथ्यान्तु विष्ण्वादीनश्वमेघभाक् ।पवित्रारोहणादौ च महामण्डलमालिखेत्

astrāṇi vāhyavīthyāntu viṣṇvādīnaśvameghabhāk / pavitrārohaṇādau ca mahāmaṇḍalamālikhet

हिन्दी अर्थ

९. द्विजगुरुपरिभवकारी यो नरपतिरतिधनलुब्धात्मा । श्रुवमिह निपतति पापोऽसौ फलमिव पवनहतं वृन्तात् ॥ १०, क्रूरदृष्टिरायताग्रनासिका चञ्चला कठोरतीक्ष्णनादिनी। युद्धकाङ्क्षिणी सदामिषप्रिया श्येनिकेव सा विगर्हिताङ्गना॥ पादान्तमें ही विराम होता है। ॥ ६--८॥ यहाँसे 'जगती' छन्दका अधिकार आरम्भ होता है और 'प्रहर्षिणी'के पहलेतक रहता है । जिसके प्रत्येक चरणमें जगण, तगण, जगण

English

the weapons on the outer path; one who worships Vishnu and the rest obtains the Ashvamedha. At the mounting of the purifier (pavitra) and the rest one should draw the great mandala.

अध्याय ३१८

श्लोक 25

अष्टहस्तं पुरा क्षेत्रं रसपक्षैर् विवर्तयेत् ।१ पञ्चभागमितेति ख॥ , छ॥ च :प् १६४ द्विपदं कमलं मध्ये वीथिका पदिका ततः

aṣṭahastaṃ purā kṣetraṃ rasapakṣair vivartayet / 1 pañcabhāgamiteti kha.. , cha.. ca :p 164 dvipadaṃ kamalaṃ madhye vīthikā padikā tataḥ

हिन्दी अर्थ

और रगण हों, उस छन्दका नाम 'बंशस्था है। यहाँ पादान्तमें विराम होता है। दो तगण, जगण तथा रगणसे युक्त चरणोंवाले छन्दको 'इन्द्रवंशी'' कहते हैं। यहाँ भी पादान्तमें ही

English

An eight-cubit field first, one should turn it with the sixfold sides; a two-square lotus in the middle, then path and border;

अध्याय ३१८

श्लोक 26

दिग्विदिक्षु ततो ऽष्टौ च नीलाब्जानि विवर्तयेत् ।मध्यपद्मप्रमाणेन त्रिंशत्पद्मानि तानि तु

digvidikṣu tato 'ṣṭau ca nīlābjāni vivartayet / madhyapadmapramāṇena triṃśatpadmāni tāni tu

हिन्दी अर्थ

विराम होता है। जिसके प्रत्येक पादमें चार सगण हों, उसका नाम “तोटक ' बताया गया है। जिसके प्रत्येक पादमें नगण, भगण, भगण और रगण हों, उसका नाम 'द्रुतविलम्बित' है। तोटक' और 'द्रुतविलम्बित' दोनोंमें पादान्त- विराम ही माना गया है। जिसके सभी चरणोंमें

English

then in directions and corners eight blue lotuses one should draw; by the measure of the middle lotus thirty lotuses;

अध्याय ३१८

श्लोक 27

दलसन्धिविहीनानि नीलेन्दीवरकानि च ।तत्पृष्ठे पदिका वीथी स्वस्तिकानि तदूर्ध्वतः

dalasandhivihīnāni nīlendīvarakāni ca / tatpṛṣṭhe padikā vīthī svastikāni tadūrdhvataḥ

हिन्दी अर्थ

यगण हों, उस छन्दका नाम 'श्रीपुट है। इसमें आठ और चार अक्षरोंपर विराम होता है। जगण, सगण, जगण, सगणसे युक्त पादोंवाले छन्दको “जलोद्धतगति ” कहते है। इसमें छ:-छः अक्षरोंपर

English

without petal-joints, blue water-lilies; at its back the border, path, swastikas above it;

अध्याय ३१८

श्लोक 28

द्विपदानि तथा चाष्टौ कृतिभागकृतानि तु ।वर्तयेत् स्वस्तिकांस्तत्र वीथिका पूर्ववद्वहिः

dvipadāni tathā cāṣṭau kṛtibhāgakṛtāni tu / vartayet svastikāṃstatra vīthikā pūrvavadvahiḥ

हिन्दी अर्थ

विराम होता है। दो नगण, एक मगण तथा एक रगणसे युक्त चरणवाले छन्दका नाम ' तत” है। नगण, यगण, नगण, यगणसे युक्त पादवाला छन्द 'कुसुमविचित्रा® कहलाता है। इसमें भी छः- छः: अक्षरोंपर विराम होता है। जिसके प्रत्येक चरणमें दो नगण और दो रगण हों, उसका नाम 'चञ्चलाक्षिका?° है। इसके भीतर सात-पाँचपर विराम होता है। प्रत्येक पादमें चार यगण

English

two-square and eight, made in square portions; one should draw swastikas there, the path outside as before;

अध्याय ३१८

श्लोक 29

द्वाराणि कमलं यद्वदुपकण्ठ्युतानि(१) तु ।रक्तं कोणं पीतवीथी नीलं पद्मञ्चमण्डले

dvārāṇi kamalaṃ yadvadupakaṇṭhyutāni(1) tu / raktaṃ koṇaṃ pītavīthī nīlaṃ padmañcamaṇḍale

हिन्दी अर्थ

होनेसे ' भुजंगप्रयात"१ और चार रगण होनेसे “स्रग्विणी नामक छन्द होता है। इन दोनोंमें

English

doors as the lotus with near-neck; the corner red, the path yellow, the lotus in the mandala blue;

अध्याय ३१८

श्लोक 30

स्वस्तिकादि विचित्रञ्च सर्वकामप्रदं गुह ।पञ्चाब्जं पञ्चहस्तं स्यात् समन्ताद्दशभाजितम्

svastikādi vicitrañca sarvakāmapradaṃ guha / pañcābjaṃ pañcahastaṃ syāt samantāddaśabhājitam

हिन्दी अर्थ

विपत्तिमग्रस्थ करावलम्बनं करोति यः प्राणपरिक्रयेण सः॥ ३. कुवीत यो देवगुरुद्विजन्मनामुर्वीपतिः पालनमर्थलिप्सया। ४. अमुना यमुनाजलकेलिकृता सहसा तरसा परिरभ्य धृता।

English

swastika and the rest variegated, giving all desires, Guha. A five-lotus of five cubits, divided tenfold all around;

अध्याय ३१८

श्लोक 31

द्विपदं कमलं वीथी पट्टिका दिक्षु पङ्कजम् ।चतुष्कं पृष्ठतो वीथी पदिका द्विपदान्यथा

dvipadaṃ kamalaṃ vīthī paṭṭikā dikṣu paṅkajam / catuṣkaṃ pṛṣṭhato vīthī padikā dvipadānyathā

हिन्दी अर्थ

अमृतपुट इवासौ पुण्यकर्मा भवति जगति सेव्यः सर्वलोकैः ॥

English

a two-square lotus, path, border, lotus in the directions; a four at the back, path, border, two-square otherwise;

अध्याय ३१८

श्लोक 32

कण्ठोपकण्ठयुक्तानि द्वारान्यब्जन्तु मध्यतः ।पञ्चाब्जमण्डले ह्य् अस्मिन् सितं पीतञ्च पूर्वकम्

kaṇṭhopakaṇṭhayuktāni dvārānyabjantu madhyataḥ / pañcābjamaṇḍale hy asmin sitaṃ pītañca pūrvakam

हिन्दी अर्थ

जलोद्धतगतिर्यथैव मकरस्तरङ्गनिकरं करेण परितः ॥ कुरु करुणमियं गाढोत्कण्ठिका यदुतनय चकोरी कामाधिका। ९. धृतनवहारं विगतविकारं सदयमुदारं विमलविचारम्।

English

with neck and near-neck the doors, the lotus in the middle. In this five-lotus mandala white and yellow earlier,

अध्याय ३१८

श्लोक 33

वैदूर्याभं दक्षिणाब्जं कुन्दाभं वारुणं कजम् ।उत्तराब्जन्तु शङ्खाभमन्यत् सर्वं विचित्रकम्

vaidūryābhaṃ dakṣiṇābjaṃ kundābhaṃ vāruṇaṃ kajam / uttarābjantu śaṅkhābhamanyat sarvaṃ vicitrakam

हिन्दी अर्थ

. पुरः साधुवद्भाति मिथ्या विनीतः परोक्षे करोत्यर्थनाशं हताशः ।

English

the south lotus beryl-bright, the west lotus jasmine-bright; the north lotus conch-bright; the rest all variegated.

अध्याय ३१८

श्लोक 34

सर्वकामप्रदं वक्ष्ये दशहस्तन्तु मण्डलम् ।विकारभक्तन्तुर्याश्रं द्वारन्तु द्विपदं भवेत्

sarvakāmapradaṃ vakṣye daśahastantu maṇḍalam / vikārabhaktanturyāśraṃ dvārantu dvipadaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

तं नरं वीरलक्ष्मीर्यशःस्रम्विणी नूनमभ्येति सत्कोर्तिशुक्लांशुका॥ पादान्तविराम माना गया है। जिसके प्रत्येक चरणमें सगण, जगण तथा दो सगण हों, उसकी "प्रमिताक्षरा" संज्ञा होती है। इसमें भी पादान्तविराम ही अभीष्ट है। भगण, मगण, सगण, मगणसे

English

I shall tell the mandala giving all desires, of ten cubits; divided by changes, four-cornered, the door two-square;

अध्याय ३१८

श्लोक 35

मध्ये पद्मं पूर्ववच्च विघ्नध्वंसं वदाम्यथ ।चतुर्हस्तं पुरं कृत्वा वृत्रञ्चैव करद्वयम्

madhye padmaṃ pūrvavacca vighnadhvaṃsaṃ vadāmyatha / caturhastaṃ puraṃ kṛtvā vṛtrañcaiva karadvayam

हिन्दी अर्थ

युक्त चरणोंवाले छन्दको “कान्तोत्पीडा” कहते हैं। इसमें भी पादान्त-विराम माना गया है। दो मगण और दो यगणयुक्त चरणवाले छन्दको “वैश्वदेवी नाम दिया गया है। इसमें पाँच-सात

English

in the middle a lotus as before; now I tell the destroyer of obstacles: having made a four-cubit city and a circle of two cubits,

अध्याय ३१८

श्लोक 36

वीथीका हस्तमात्रन्तु स्वस्तिकैर् वहुभिर्वृता ।१ तद्वदुपकण्ठयुतानीति ख॥ , ञ॥ च :प् १६५ हस्तमात्राणि द्वाराणि विक्षु वृत्तं सपद्मकम्

vīthīkā hastamātrantu svastikair vahubhirvṛtā / 1 tadvadupakaṇṭhayutānīti kha.. , ña.. ca :p 165 hastamātrāṇi dvārāṇi vikṣu vṛttaṃ sapadmakam

हिन्दी अर्थ

अक्षरोंपर विराम होता है। यदि प्रत्येक पादमें “जगती' छन्दका अधिकार है

English

a path of one cubit surrounded by many swastikas; doors of a cubit in the corners, a circle with lotus;

अध्याय ३१८

श्लोक 37

पद्मानि पञ्च शुक्लानि मध्ये पूज्यश् च निष्कलः ।हृदयादीनि पूर्वादौ विदिक्ष्वस्त्राणि वै यजेत्

padmāni pañca śuklāni madhye pūjyaś ca niṣkalaḥ / hṛdayādīni pūrvādau vidikṣvastrāṇi vai yajet

हिन्दी अर्थ

अब ' अतिजगती' छन्दके अवान्तर भेद बतलाते हैं-- जिसके प्रत्येक चरणमें मगण, नगण, जगण, रगण तथा एक गुरु हों, उसकी "प्रहर्षिणी" संज्ञा है। इसमें तीन और दस

English

five white lotuses; in the middle the partless is to be worshipped; the heart and the rest in the east and so on; in the corners one should worship the weapons;

अध्याय ३१८

श्लोक 38

प्राग्वच्च पञ्च ब्रह्माणि बुद्ध्याधारमतो वदे ।शतभागे तिथिभागे पद्मं लिङ्गाष्टकं दिशि

prāgvacca pañca brahmāṇi buddhyādhāramato vade / śatabhāge tithibhāge padmaṃ liṅgāṣṭakaṃ diśi

हिन्दी अर्थ

अक्षरोंपर विराम होता है। जगण, भगण, सगण, जगण तथा एक गुरुसे युक्त चरणवाले छन्दका नाम 'रुचिरा” है। इसमें चार तथा नौ अक्षरोंपर विराम माना गया है। मगण, तगण, यगण, सगण और एक गुरुयुक्त पादवाले छन्दको ' मत्तमयूर ”

English

as before the five Brahmas; then I tell the basis of intelligence: in a hundred parts or fifteen parts a lotus, eight lingas in a direction;

अध्याय ३१८

श्लोक 39

मेखलाभागसंयुक्तं कण्ठं द्विपदिकं भवेत् ।आचार्यो बुद्धिमाश्रित्य कल्पयेच्च लतादिकम्

mekhalābhāgasaṃyuktaṃ kaṇṭhaṃ dvipadikaṃ bhavet / ācāryo buddhimāśritya kalpayecca latādikam

हिन्दी अर्थ

कहते हैं। इसमें चार और नौ अक्षरोंपर विराम होता है। तीन नगण, एक सगण और एक गुरुसे युक्त पादवाले छन्दको “गौरी संज्ञा है।

English

joined with a girdle part, the neck two-square. The teacher should arrange creepers and the rest by his intellect;

अध्याय ३१८

श्लोक 40

चतुःषट्पञ्चमाष्टादि खाछिखाद्यादि मण्डलम् ।खाक्षीन्दुसूर्यगं सर्वं खाक्षि चैवेन्दुवर्णनात्

catuḥṣaṭpañcamāṣṭādi khāchikhādyādi maṇḍalam / khākṣīndusūryagaṃ sarvaṃ khākṣi caivenduvarṇanāt

हिन्दी अर्थ

अब शक्करीके अन्तर्गत विविध छन्दोंका वर्णन किया जाता है- जिसके प्रत्येक पादमें पाँच एवं नौ अक्षरोंपर विराम होता हो, उसका नाम 'असम्बाधा” है। जिसके प्रतिपादमें दो

English

four, six, five, eight and so on, the mandala of "kha-chikha" and so on; all going to "kha-akshi, moon, sun," by the description of the moon;

अध्याय ३१८

श्लोक 41

चत्वारिंशदधिकानि चतुर्दशशतानि हि ।मण्डलानि हरेः शम्भोर्देव्याः सूर्यस्य सन्ति च

catvāriṃśadadhikāni caturdaśaśatāni hi / maṇḍalāni hareḥ śambhordevyāḥ sūryasya santi ca

हिन्दी अर्थ

हों तथा सात-सात अक्षरोंपर विराम होता हो, वह अपराजिता" नामक छन्द है। दो नगण, भगण, नगण, एक लघु और एक गुरुसे युक्त पादवाले छन्दको "प्रहरणकलिता" कहते हैं।

English

fourteen hundred and forty are the mandalas of Hari, Shambhu, the Goddess and the Sun.

अध्याय ३१८

श्लोक 42

दशसप्तविभक्ते तु लतालिङ्गोद्भवं शृणु ।दिक्षु पञ्चत्रयञ्चैकं त्रयं पञ्च च लोमयेत्(१)

daśasaptavibhakte tu latāliṅgodbhavaṃ śṛṇu / dikṣu pañcatrayañcaikaṃ trayaṃ pañca ca lomayet(1)

हिन्दी अर्थ

. कान्तकरैराप्ता यदि कान्तोत्पीडां सा मनुते क्रीडां मुदित स्वान्ता स्यात्। स्नेहवती मान्या गृहिणी सम्राज्ञी गेहगता देवी सदृशी सा नित्यम्॥ . धन्यः पुण्यात्मा जायते कोऽपि वंशे तादृक् पुत्रोऽसौ येन गोत्रं पवित्रम् । गोविप्रज्ञातिस्वामिकार्ये प्रवृत्तः शुद्धं श्राद्धादौ वैश्वदेवी भवेद् यः॥ दृढगुणबद्धकीर्तिकुसुमौधै स्तव नवमालिनीव नृपलक्ष्मीः॥ ५. श्रीवृन्दावननवकुञ्जकेलिसद्मा पद्माक्षी मुररिपुसङ्गशालिनी च।

English

When divided by ten and seven, hear the creeper-linga born: five, three and one in directions, three and five one should omit;

अध्याय ३१८

श्लोक 43

ऊर्ध्वगे द्विपदे लिङ्गमन्दिरं पार्श्वकोष्ठयोः ।मध्येन द्बिपदं पद्ममथ चैकञ्च पङ्कजं

ūrdhvage dvipade liṅgamandiraṃ pārśvakoṣṭhayoḥ / madhyena dbipadaṃ padmamatha caikañca paṅkajaṃ

हिन्दी अर्थ

भड्कत्वा दुर्गाणि द्रुमवनमखिलं छित्त्वा हत्वा तत्सैन्यं करितुरगबलं हित्वा ।

English

in the upward two-square, the linga temple at side compartments; in the middle a two-square lotus, and one lotus;

अध्याय ३१८

श्लोक 44

लिङ्गस्य पार्श्वयोर्भद्रे पदद्वारमलोपनात् ।तत्पार्श्वशोभाः षड्लोप्य लताः शेषास् तथा हरेः

liṅgasya pārśvayorbhadre padadvāramalopanāt / tatpārśvaśobhāḥ ṣaḍlopya latāḥ śeṣās tathā hareḥ

हिन्दी अर्थ

. सुरमुनिमनुजैरुपचितचरणां रिपुभयचकितत्रिभुवनशरणम् । इसमें सात-सातपर विराम होता है। तगण, भगण, दो जगण और दो गुरुसे युक्त पादवाले

English

on both sides of the linga, in the Bhadra, by non-omission of the foot-door; six side-shows omitted, creepers the rest and of Hari;

अध्याय ३१८

श्लोक 45

ऊर्ध्वं द्विपदिकं लोप्य हरेर्भद्राष्टकं स्मृतम् ।रश्मिमानसमायुक्तवेदलोपाच्च शोभिकम्

ūrdhvaṃ dvipadikaṃ lopya harerbhadrāṣṭakaṃ smṛtam / raśmimānasamāyuktavedalopācca śobhikam

हिन्दी अर्थ

विराम होता है। किसी-किसी मुनिके मतमें इसका नाम 'सिंहोन्नता' और 'उद्धर्षिणी' भी

English

having omitted the upward two-square, Hari's eight Bhadras are remembered; adorned with omission of the Veda joined with ray-measure;

अध्याय ३१८

श्लोक 46

पञ्चविंशतिकं पद्मं ततः पीठमपीठकम् ।द्वयं द्वयं रक्षयित्वा उपशोभास् तथाष्ट च

pañcaviṃśatikaṃ padmaṃ tataḥ pīṭhamapīṭhakam / dvayaṃ dvayaṃ rakṣayitvā upaśobhās tathāṣṭa ca

हिन्दी अर्थ

इसके आगे ' अतिशक्वरी 'का अधिकार है। जिसके प्रत्येक पादमें चार नगण और एक सगण हों, उसका नाम “चन्द्रावती है। इसमें सात- आठपर विराम होता है। इसीमें जब छः और नौ अक्षरोंपर विराम हो तो इसका नाम ' माला र होता है। आठ और सातपर विराम होनेसे यह

English

a twenty-five lotus, then a seat without seat; guarding two and two, and eight sub-ornaments;

अध्याय ३१८

श्लोक 47

देव्यादिख्यापकं भद्रं वृहन्मध्ये परं लघु ।१ लोपयेदिति ञ॥ ।लोपयेदिति ट :प् १६६ मध्ये नवपदं पद्मं कोणे भद्रचतुष्टयम्

devyādikhyāpakaṃ bhadraṃ vṛhanmadhye paraṃ laghu / 1 lopayediti ña.. / lopayediti ṭa :p 166 madhye navapadaṃ padmaṃ koṇe bhadracatuṣṭayam

हिन्दी अर्थ

मगण और दो यगणसे युक्त चरणोंवाले छन्दको “मालिनी " कहते हैं। इसमें भी आठ और सात अक्षरोंपर ही विराम होता है। भगण, रगण, तीन नगण और एक गुरुसे युक्त चरणवाले छन्दको

English

the Bhadra that announces the Goddess and the rest, large in the middle, small beyond; in the middle a nine-square lotus, at the corner four Bhadras;

अध्याय ३१८

श्लोक 48

त्रयोदशपदं शेषं बुद्ध्याधारन्तु मण्डलं ।शतपत्रं षष्ट्यधिकं बुद्ध्याधारं हरादिषु

trayodaśapadaṃ śeṣaṃ buddhyādhārantu maṇḍalaṃ / śatapatraṃ ṣaṣṭyadhikaṃ buddhyādhāraṃ harādiṣu

हिन्दी अर्थ

“ऋषभगजविलसित नाम दिया गया है। इसमें सात-नौ अक्षरोंपर विराम होता है। यह 'अष्टि'

English

the remainder thirteen-square, the mandala of intelligence-basis; hundred-petalled, over sixty, the intelligence-basis in Hara and the rest.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 318
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.