अध्याय ९०
श्लोक 1
अभिषेकादिकथनं ईश्वर उवाच शिवमभ्यर्च्याभिषेकं कुर्याच्छिष्यादिके श्रिये ।कुम्भानीशादिकाष्ठासु क्रमशो नव विन्यसेत्
abhiṣekādikathanaṃ īśvara uvāca śivamabhyarcyābhiṣekaṃ kuryācchiṣyādike śriye / kumbhānīśādikāṣṭhāsu kramaśo nava vinyaset
हिन्दी अर्थ
तथा अस्त्र-मन्त्रसे नालच्छेदनके उद्देश्यसे पाँच समिधाओंके मूलभागको घीमें डुबोकर उन पाँचोंकी आहुति दे। तदनन्तर ब्रह्मा, शंकर, विष्णु और अनन्तका दूर्वा और अक्षत आदिसे पूजन करे। पूजनके समय उनके नामके अन्तमें 'नमः' जोड़कर उच्चारण करे। यथा--'ब्रह्मणे नमः।' “शंकराय नमः।' 'विष्णवे नमः।' ' अनन्ताय नमः।' फिर कुण्डके चारों ओर निछे हुए पूर्वोक्त
English
Having worshipped lord Siva, the (rite of) bathing should be done for the welfare of the disciple. Nine pitchers should duly be placed in the directions of north-east etc.