अध्याय १६
श्लोक 1
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते पूर्वभागे द्वीतीये ऽनुषङ्गपादे पृथिव्यायामविस्तरो नाम पञ्चदशो ऽध्यायः सूत उवाच एवमेव निसर्गो वै वर्षाणां भारते शुभे ।दृष्टः परमतत्त्वज्ञैर्भूयः किं वर्णयामि वः
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte pūrvabhāge dvītīye 'nuṣaṅgapāde pṛthivyāyāmavistaro nāma pañcadaśo 'dhyāyaḥ sūta uvāca evameva nisargo vai varṣāṇāṃ bhārate śubhe / dṛṣṭaḥ paramatattvajñairbhūyaḥ kiṃ varṇayāmi vaḥ
हिन्दी अर्थ
शत्रु होते हैं। ऐसे ही लोग बहुधा उत्पन्न हो जाता करते हैं ।६५-६६। धर्म के अर्थ के पण्डित बनने बॉले शूद्र लोग उस समय में वेदों का अध्ययन किया करते हैं जिनको वेदों के पढ़ने का शास्त्रानुसार कभी भी अधिकार नहीं होता है । शूद्र योनि वाले अश्वमेध यज्ञ का यजन किया करते हैं
English
shall recount to you all the subjects here in the Bh&rata Var$a.