Brihadaranyaka Upanishad· Bṛhadāraṇyakopaniṣad
33
अध्याय 33 / 45

Adhyāya 33

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पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय ३३

श्लोक 1

॥ सप्तमं ब्राह्मणम् ।[V.vI.1] विद्युद् ब्रह्मेत्याहुर् विदानाद्विद्युद् विद्यत्येनं पाप्मनो य एवं वेद विद्युद्ब्रह्मेति ।विद्युद्ध्येव ब्रह्म

|| saptamaM brAhmaNam . ##[V.vI.1]## vidyud brahmetyAhur vidAnAdvidyud vidyatyenaM pApmano ya evaM veda vidyudbrahmeti | vidyuddhyeva brahma

हिन्दी अर्थ

हृदयस्थ मनोमय पुरषकी उपासना उपाधीनामनेकखादनेकविशे- उपाधिया भेक है ओर उनके षृणत्वाच्च तस्येव प्रकृतस्य बहुतसे विशेषण है, इसलिये उस करिचिदमाव्यादितन्त्रोऽयं तुन मनमें उपलब्ध होनेवाला होनेसे यहु मनोमय-मनःप्राय है। इसे विद्‌ दुब्रह्मको उपासना तथेवोपासनान्तरं सत्यस्य इसी प्रकार सत्यब्रह्मकी विशिष्ट फलवाली एक दुसरी उपासनाका

English

They say that lightning is Brahman, because lightning (vidyut) is called so from cutting off (vidânât) . Whosoever knows this, that lightning is Brahman, him (that Brahman) cuts off from evil, for lightning indeed is Brahman.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/brihadaaraNyaka.itx · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brihadaranyaka Upanishad — Chapter 33
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.