Chandogya Upanishad· Chāndogyopaniṣad
103
अध्याय 103 / 154

Adhyāya 103

5 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ5 श्लोक

अध्याय १०३

श्लोक 6.6.1

॥ दध्नः सोम्य मथ्यमानस्य योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति तत्सर्पिर्भवति

|| dadhnaH somya mathyamAnasya yo.aNimA sa UrdhvaH samudIShati tatsarpirbhavati

हिन्दी अर्थ

ते रसा यथा मधुेनैकतां । मधुरूप्से पकताको प्रा हुए यथा हि लोके बहूनां चेतनावर्ता नप्तास्मीति । ते च खच्धविवेका यस्माच्चैवमात्मनः सूद्रुप- कोकरि इस भकार वे पनी तास्तात्वैव सत्सम्पद्यते, सदरपताको विना जाने ही त्को अतः- म्रा होते है इसस्यि-- , वे इस लोकम व्याघ्र, सिंह, भेद्या, शक्र, कीट, पतङ्ग, ठस अथवा मच्छर नो-नो भी घुषुति आदिसे पूवं होते है वे ष्टौ एनः

English

'That which is the subtile portion of curds, when churned, rises upwards, and becomes butter.

अध्याय १०३

श्लोक 6.6.2

एवमेव खलु सोम्यान्नस्याश्यमानस्य योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति तन्मनो भवति

evameva khalu somyAnnasyAshyamAnasya yo.aNimA sa UrdhvaH samudIShati tanmano bhavati

हिन्दी अर्थ

त इह लोके यत्कर्मनिमिततां वे इस रोक्मं जिस-जिस कके = आसु कारण व्याप्रादिर्मेसे जिक्न-निस याँ यां जातिं वि आसु- जातिको श व्याघ्र ह च िष् बाः प्रजा यस्मिन्परविश्य निस परेश्च करके वह प्रजा पुमरािभेवरि चितोल्ये एनः आविर्ूत होती है, तथा उने निवेश रखनेवले है वे जि षणु

English

'In the same manner, my child, the subtile portion of earth (food), when eaten, rises upwards, and becomes mind.

अध्याय १०३

श्लोक 6.6.3

अपाँसोम्य पीयमानानां योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति सा प्राणो भवति

apA{\m+}somya pIyamAnAnAM yo.aNimA sa UrdhvaH samudIShati sA prANo bhavati

हिन्दी अर्थ

इद चो यह्‌ भणिमा है पतप ही यह सुव ह । वह सत्य है, बह मासा है ओर है श्वेतकेतो बहीतू है। आरुणिके इस पभम कहनेप्र शतकेतु बोख- .मगवः तव नदीके दष्टान्तद्रारा उपदेश्च इस विषयमे दृशन्त श्रवण कर । ह सोम्य ये नदिया पूरववादिनी होकर पूर्वकी भोर बहती ह तथ माच्य पूरववाहिनी होकर पुरस्तात्‌ पूवे दिशाकी ही जर बहती है तथा सिन्धु आदि, जो पश्चिमको ओर जाती

English

'That which is the subtile portion of water, when drunk, rises upwards, and becomes breath.

अध्याय १०३

श्लोक 6.6.4

तेजसः सोम्याश्यमानस्य योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति सा वाग्भवति

tejasaH somyAshyamAnasya yo.aNimA sa UrdhvaH samudIShati sA vAgbhavati

हिन्दी अर्थ

वासिश्टोवा वराहौवा कीटो वापतङ्खोवा दश्शो वा मशको वा यद्यद्धवन्ति तदाभवन्ति तक्तमसि श्वेतकेतो इति भूय एव मा भगवाचिज्ञा-

English

'That which is the subtile portion of fire, when consumed, rises upwards, and becomes speech.

अध्याय १०३

श्लोक 6.6.6

अन्नमयँ हि सोम्य मन आपोमयः प्राणस्तेजोमयी वागिति भूय एव मा भगवान्विज्ञापयत्विति तथा सोम्येति होवाच

annamaya{\m+} hi somya mana ApomayaH prANastejomayI vAgiti bhUya eva mA bhagavAnvij~nApayatviti tathA somyeti hovAcha

हिन्दी अर्थ

ठीक इसी प्रकार है सोम्य ये सम्पूणं प्रजाप सत्‌से अनेपर यह नहीं जानतीं क्ति दम सत्के पासे अयी है । इस टोक्रये वे व्याघ्र, सिह, शकर, कीट, पतङ्ग, डं स अथवा मच्छर जो-नो भी होते हैँ वे हो वह जो यह अणिमा है, एतद्रप ही यह सव हे । वह सत्य है, वह अत्मा है ओरं है धेतकेतो वीत्‌ है । आरुणिके इस रकार कटनेपर श्वेतकेतु बोल-- “भगवन्‌ सुक्षे फिर एवमेव खलु सोम्येमाः सर्वाः ठीक इसी प्रकार दहे सोम्ध ! = व ये सम्पूणं प्रनाए क्योंकि सते जा यस्मास्सति सम्पद्य न विड लीन होकर अपना पार्थक्यक्ञान

English

'Please, Sir, inform me still more,' said the son. 'Be it so, my child,' the father replied.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Chandogya Upanishad — Chapter 103
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.