अध्याय १२
श्लोक 1.12.1
॥ अथातः शौव उद्गीथस्तद्ध बको दाल्भ्यो ग्लावो वा मैत्रेयः स्वाध्यायमुद्वव्राज
|| athAtaH shauva udgIthastaddha bako dAlbhyo glAvo vA maitreyaH svAdhyAyamudvavrAja
हिन्दी अर्थ
देशे भा भां प्रातः प्रातःकालडउपः उन कोने, जिस प्रकार कर्मे बहिष्पवमान सतोतसे स्तवन कने- वारे उद्गाता परस्पर भिरकर भमण करते है उसी प्रकारं अमण क्या ओर परर वहो वठकर हकार करने रगे ते शधानस्तत्रैवागम्य ऋषेः उन कुतोने वहो उ ऋष्क समक्षं यथेह कर्माणि बहिष्पवमा- सम्पुल आकर, जिस प्रकार कर्मे नेन स्तोत्रेणस्तोष्यमाणाउद्वात्- बदिष्पवमान स्तोत्रस स्तवन करने.
English
Now follows the udgîtha of the dogs. Vaka Dâlbhya, or, as he was also called, Glâva Maitreya, went out to repeat the Veda (in a quiet place).