Chandogya Upanishad· Chāndogyopaniṣad
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अध्याय 11 / 154

Adhyāya 11

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पूर्ण अध्याय पाठ9 श्लोक

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अध्याय ११

श्लोक 1.11.1

॥ अथ हैनं यजमान उवाच भगवन्तं वा अहं विविदिषाणीत्युषस्तिरस्मि चाक्रायण इति होवाच

|| atha hainaM yajamAna uvAcha bhagavantaM vA ahaM vividiShANItyuShastirasmi chAkrAyaNa iti hovAcha

हिन्दी अर्थ

ज्यं ऋछत्विकर्माथमस्त्वि- ऋलिक्कर्मोके स्यि रहं एेसा मया समतिसृष्टा मया सम्यक वरणकर ल्या हैवे ही ऋवि- ताम्‌ । त्वया त्वेत › म्रसन्नतासे आज्ञा पराप्त कर स्तवन उषस्तिके प्रति प्रस्तोताका प्रदन अथ हैनं प्रस्तोतोपससाद शस्तोतर्या देवता तदनन्तर उस ( उपस्ति ) के पास शिष्यभावसे प्रस्तोता आथा ओर बोा-- “भगवन्‌ आपने जो मुक्षत कहा था कि है प्रस्तोतः जो देवता प्रप्तावमे अनुगत है यदि तू उसे. विना जाने प्रस्तवन करेगा तो

English

Then the sacrificer said to him: 'I should like to know who you are, Sir.' He replied: 'I am Ushasti Kâkrâyana.'

अध्याय ११

श्लोक 1.11.2

स होवाच भगवन्तं वा अहमेभिः सर्वैरार्त्विज्यैः पर्यैषिषं भगवतो वा अहमवित्त्यान्यानवृषि

sa hovAcha bhagavantaM vA ahamebhiH sarvairArtvijyaiH paryaiShiShaM bhagavato vA ahamavittyAnyAnavR^iShi

हिन्दी अर्थ

अथ हैनमौपर्त्यं वचः शरुत्वा तदनन्तर उपस्तिका यह वचन सुनकर प्र्तोता उषस्तिके प्रति उपसन्न ्रस्तोतोपससादोपसिति विनये- । हुभा- विनीत ावसे उपत्तके उष्स्तिका द देवता प्राण हे प्राणमेवाभिसंविशन्ति ष्राणमभ्युजिहते। सेषा देवता उस ८ उत्ति) ने "वह ( देवता ) प्राण हे" एसा कय क्योंकि ये सभो भृत प्राणे ही प्रवे कर जते है ओर भाणे ही उलन होते है । वह यह प्राणदेवता ही प्रस्तावे अनुगत हे, यदि तु उसे बिना

English

He said: 'I looked for you, Sir, for all these sacrificial offices, but not finding you , I chose others.'

अध्याय ११

श्लोक 1.11.3

भगवाँस्त्वेव मे सर्वैरार्त्विज्यैरिति तथेत्यथ तर्ह्येत एव समतिसृष्टाः स्तुवतां यावत्त्वेभ्यो धनं दद्यास्तावन्मम दद्या इति तथेति ह यजमान उवाच

bhagavA{\m+}stveva me sarvairArtvijyairiti tathetyatha tarhyeta eva samatisR^iShTAH stuvatAM yAvattvebhyo dhanaM dadyAstAvanmama dadyA iti tatheti ha yajamAna uvAcha

हिन्दी अर्थ

ृष्टः प्राण इति होवाच । युक्तं ईस प्रकार पूछे जानेपर उसने "वह देवता प्राण हैः एसा कहा । प्राण म्तावका देवता हे- यह कथन दीक तदनन्तर उसके समीप उद्गाता आया जर ॒बोख-- “भगवन्‌ ! आपने मुक्षसे जो कहा था कि है उदुगातः जो देवता उदुगौथमे अनुगत है यदि उसे बिना जने ही तु उद्गान करेगा तो तेरा तथोद्गाता पप्रच्छ कतमा इसी प्रकार उससे उद्गाताने भी सोद्रीथभक्तिमनुगतान्वायत्ता दे- पूछा किं वह उद्गीथमक्तिमे अनुगत वता ? इति ॥ ॥ कोन देवता है १

English

'But now, Sir, take all the sacrificial offices.' Ushasti said: 'Very well; but let those, with my permission, perform the hymns of praise. Only as much wealth as you give to them, so much give to me also.' The sacrificer assented.

अध्याय ११

श्लोक 1.11.4

अथ हैनं प्रस्तोतोपससाद प्रस्तोतर्या देवता प्रस्तावमन्वायत्ता तां चेदविद्वान्प्रस्तोष्यसि मूर्धा ते विपतिष्यतीति मा भगवानवोचत्कतमा सा देवतेति

atha hainaM prastotopasasAda prastotaryA devatA prastAvamanvAyattA tAM chedavidvAnprastoShyasi mUrdhA te vipatiShyatIti mA bhagavAnavochatkatamA sA devateti

हिन्दी अर्थ

उषस्तिका उच्तर-उद्गीथानुगत देवता आदित्य है भूतान्यादित्यमुचैः सन्तं गायन्ति सेषा देवतोद्वीथम- उषस्तिने वह ( देवता ) आदित्य है" एेसा कहा, क्योंकि ये सभी भूत ऊँचे उठे आदित्यका ही गान करते हैँ । वह यह आदित्य देवता ही उदुगीथमं अनुगत है । यदि तू उसे बिना जाने ही उद्गान करता पष्ट आदित्य इति होवाच । इस प्रकार पूरे जानेपर उसने “वह देवता आदित्य है' एसा सर्वाणि ह वा इमानि भूतान्या- कदा; क्योंकि ये समी प्राणी उंचे

English

Then the Prastotri approached him, saying: 'Sir, you said to me, "Prastotri, if you, without knowing the deity which belongs to the prastâva, are going to sing it, your head will fall off,"--which then is that deity?'

अध्याय ११

श्लोक 1.11.5

प्राण इति होवाच सर्वाणि ह वा इमानि भूतानि प्राणमेवाभिसंविशन्ति प्राणमभ्युज्जिहते सैषा देवता प्रस्तावमन्वायत्ता तां चेदविद्वान्प्रास्तोष्यो मूर्धा ते व्यपतिष्यत्तथोक्तस्य मयेति

prANa iti hovAcha sarvANi ha vA imAni bhUtAni prANamevAbhisaMvishanti prANamabhyujjihate saiShA devatA prastAvamanvAyattA tAM chedavidvAnprAstoShyo mUrdhA te vyapatiShyattathoktasya mayeti

हिन्दी अर्थ

अथ हैनं प्रतिहर्तोपससाद प्रतिहर्तर्या देवता भरति. किर परतिहर्त उसके पास आया भौर वोर-- भगवन्‌ आपने जो सुन्ञसे कहा था कि टे प्रतिहतः नो देवता प्रतिहारं अनुगत है यदि उसे बिना जने ही तु प्रतिह्रण करेगा तो तेरा मस्तक गिर एवमेवाथ हैनं प्रतिहर्तोपस- ¦ इसी प्रकार फिर उसके पास

English

He said: 'Breath (prâna). For all these beings merge into breath alone, and from breath they arise. This is the deity belonging to the prastâva. If, without knowing that deity, you had sung forth your hymns, your head would have fallen off, after you had been warned by me.'

अध्याय ११

श्लोक 1.11.6

अथ हैनमुद्गातोपससादोद्गातर्या देवतोद्गीथमन्वायत्ता तां चेदविद्वानुद्गास्यसि मूर्धा ते विपतिष्यतीति मा भगवानवोचत्कतमा सा देवतेति

atha hainamudgAtopasasAdodgAtaryA devatodgIthamanvAyattA tAM chedavidvAnudgAsyasi mUrdhA te vipatiShyatIti mA bhagavAnavochatkatamA sA devateti

हिन्दी अर्थ

न्यन्नमेव पतिहरमाणानि जीवन्ति सेषा देवता पतिहार- मन्वायत्ता तां चेदविद्रान्प्रत्यहरिष्यो मूर्धा ते व्यपति- इसपर उसने "वह ८ देवता ) अन्न है" रसा कहा; क्योंकि ये सम्पूणं भूत अपने प्रति अन्नका ही हरण करते हुए जीवित रहते है । वह यहं अन्न देवता प्रतिहारमे अनुगत है । यदि तु उसे विना जाने ही प्रतिहरण इ प्रकार पूछे जानेपर उसने वहं देवता अन्न हैः एेसा उत्तर दिया, वर्थोकि ये सम्पूणं मूत सब ओरसे

English

Then the Udgâtri approached him, saying: 'Sir, you said to me, "Udgâtri, if you, without knowing the deity which belongs to the udgîtha, are going to sing it, your head will fall off,"--which then is that deity?'

अध्याय ११

श्लोक 1.11.7

आदित्य इति होवाच सर्वाणि ह वा इमानि भूतान्यादित्यमुच्चैः सन्तं गायन्ति सैषा देवतोद्गीथमन्वायत्ता तां चेदविद्वानुदगास्यो मूर्धा ते व्यपतिष्यत्तथोक्तस्य मयेति

Aditya iti hovAcha sarvANi ha vA imAni bhUtAnyAdityamuchchaiH santaM gAyanti saiShA devatodgIthamanvAyattA tAM chedavidvAnudagAsyo mUrdhA te vyapatiShyattathoktasya mayeti

हिन्दी अर्थ

अथातः शोव उद्गीथस्तद्ध वको दारभ्यो ग्लावो तदनन्तर अव अन्नरभके लिये जपेत्‌ सौव उदगीथका आरम्भ भरसिद्ध है छि पूर्वकास्मे द्मा पुत्र बक अथवा मित्राका पुत्र ग्लाव स्वाध्याये रयि गोवके बहर जङाशयके तत्तत्र ह किक बको नामतो अतीत खण्डमे अन्नकी अप्रा्िसे अवस्थाका वणेन करिया गया था,

English

He said: 'The sun (âditya). For all these beings praise the sun when it stands on high. This is the deity belonging to the udgîtha. If, without knowing that deity, you had sung out your hymns, your head would have fallen off, after you had been warned by me.'

अध्याय ११

श्लोक 1.11.8

अथ हैनं प्रतिहर्तोपससाद प्रतिहर्तर्या देवता प्रतिहारमन्वायत्ता तां चेदविद्वान्प्रतिहरिष्यसि मूर्धा ते विपतिष्यतीति मा भगवानवोचत्कतमा सा देवतेति

atha hainaM pratihartopasasAda pratihartaryA devatA pratihAramanvAyattA tAM chedavidvAnpratihariShyasi mUrdhA te vipatiShyatIti mA bhagavAnavochatkatamA sA devateti

हिन्दी अर्थ

( ओर ) के अर्थम है । अवद्य ही वह दरयाभरुष्यायण हे, कर्कि वस्तुके विषयमे क्रिया्जौके समान उसके समोप एक श्त कृत्ता प्रकट हुआ । उसके पास दूसरे कुततोने आकर कदा-- भगवन्‌ अप हमारे ल्य अन्रका आगान कीजिये, प्रादुर्बभूव प्राुकार । तमन्ये शुङ्ग श्वानं क्षुल्लकाः श्वान उप-

English

Then the Pratihartri approached him, saying: 'Sir, you said to me, "Pratihartri, if you, without knowing the deity belonging to the pratihâra, are going to sing it, your head will fall off,"--Which then is that deity?'

अध्याय ११

श्लोक 1.11.9

अन्नमिति होवाच सर्वाणि ह वा इमानि भूतन्यन्नमेव प्रतिहरमाणानि जीवन्ति सैषा देवता प्रतिहारमन्वायत्ता तां चेदविद्वान्प्रत्यहरिष्यो मूर्धा ते व्यपतिष्यत्तथोक्तस्य मयेति तथोक्तस्य मयेति

annamiti hovAcha sarvANi ha vA imAni bhUtanyannameva pratiharamANAni jIvanti saiShA devatA pratihAramanvAyattA tAM chedavidvAnpratyahariShyo mUrdhA te vyapatiShyattathoktasya mayeti tathoktasya mayeti

हिन्दी अर्थ

तान्होवाचेहैव मा पात दाल्भ्यो गावो वा सेत्रेय स्वाध्यायसे संतुष्ट हो उस शण्ड १९ 1 काङ्करमाष्याथ १४१ उनसे उस ( शेत श्वान ) ने कहा--“तुम परातःकार यहीं मेरे पाच जाना ! ठव दारभ्य बक अथवा मेत्रेय ग्छाव उनकी प्रतीक्षा करता = छोटे-छोटे कुत्तौसे कहा- वम प्रातः- ता्॒नकाञ्ुन॒इवास्ममेव कार इसी स्थानपर मेरे पास आना। प्समीयातः इसत ॒करियापदमें दीर्धपाठ

English

He said: 'Food (anna). For all these beings live when they partake of food. This is the deity belonging to the pratihâra. If, without knowing that deity, you had sung your hymns, your head would have fallen off, after you had been warned by me 1 .'

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Chandogya Upanishad — Chapter 11
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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