अध्याय १४१
श्लोक 8.2.1
॥ स यदि पितृलोककामो भवति संकल्पादेवास्य पितरः समुत्तिष्ठन्ति तेन पितृलोकेन सम्पन्नो महीयते
|| sa yadi pitR^ilokakAmo bhavati saMkalpAdevAsya pitaraH samuttiShThanti tena pitR^ilokena sampanno mahIyate
हिन्दी अर्थ
अथ यदि च्ञीरोककामो भवति संकल्पादेवास्य जियः समुत्तिष्ठन्ति तेन च्लीरोकेन सम्पन्नो महीयते छीर यदि वह ख्ीरोफकी कामनावाख होता है तो उके संकल्य- मात्रसे ही र्या उसके पास उपस्थित हो जातो है उ श्चीरो्षत घम्प्न हो वह महिमान्वित होता है समानमन्यत् । मातरो जनयि- रोष सव इसीके समान है। त्योऽतीताः सुखहेतभूताः साम- मातुगण अर्थात् अतीत जन्म देन ति । न हि दःखेतभूतस पुलकी हेतुभूता है, क्योंकि दुःखकी
English
'Thus he who desires the world of the fathers, by his mere will the fathers come to receive him, and having obtained the world of the fathers, he is happy.