अध्याय ३२
श्लोक 2.19.1
॥ लोम हिंकारस्त्वक्प्रस्तावो माँसमुद्गीथोस्थि प्रतिहारो मज्जा निधनमेतद्यज्ञायज्ञीयमङ्गेषु प्रोतम्
|| loma hiMkArastvakprastAvo mA{\m+}samudgIthosthi pratihAro majjA nidhanametadyaj~nAyaj~nIyama~NgeShu protam
हिन्दी अर्थ
विनदिगुणवियथिष्ट सामक्री उपासना सामोपासनप्रसङ्गन गान सामोपासनाके प्रसङ्गसे उद्गाता- १. = को गानविशोषादि' सम्पत्तिका सामक "विनर्दिः नामक गानका वरण करता ह; वह पडुोके ल्मि हितकर है ओर अग्निदेवतासम्बन्धी उद्गीथ है । प्रजापतिका उद्गीथ अनिरुक्त है, सोमका निरुक्त है, वायुका मृदुल ओर ररक्ष्ण ८ सरर्तासे विनदिं विशिष्टो नदः स्वर विनर्दि जिसका न्द यानी स्वरविरोष छछषभ ( बेरु ) के शब्द- के समान विरिष्ट है वह विनर्दि
English
The hiṅkâra is hair, the prastâva skin, the udgîtha flesh, the pratihâra bone, the nidhana marrow. That is the Yagñâyagñîya Sâman, as interwoven in the members of the body.