अध्याय ३३
श्लोक 2.20.1
॥ अग्निर्हिंकारो वायुः प्रस्ताव आदित्य उद्गीथो नक्षत्राणि प्रतिहारश्चन्द्रमा निधनमेतद्राजनं देवतासु प्रोतम्
|| agnirhiMkAro vAyuH prastAva Aditya udgItho nakShatrANi pratihArashchandramA nidhanametadrAjanaM devatAsu protam
हिन्दी अर्थ
समू सवर इन््रके भासा रै, समस्त ऊष्मवणं प्रनापतिके आमा है, समस्त स्पकशैवणे मृयुके मात्मा है । ईइ प्रकार जाननेवलि उस उद्गाताको यदि को पुरुष स्वरोके उचचारणमे रोष प्रदश्चित ऋरे तो वह सर्वे स्वरा अकारादय इन्द्रस्य बलकर्मणः प्राणस्यात्मानो देदा- सपर्शाः कादयो व्यञ्जनानि अकारादि सम्पूणं स्वर, वरु ही जिसका कर्म है उस इन्द्र॒ यानी पराणके आत्मा अर्थात् देह देदावयव-
English
The hiṅkâra is fire, the prastâva air, the udgîtha the sun, the pratihâra the stars, the nidhana the moon. That is the Râgana Sâman, as interwoven in the deities.