Chandogya Upanishad· Chāndogyopaniṣad
42
अध्याय 42 / 154

Adhyāya 42

4 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ4 श्लोक

अध्याय ४२

श्लोक 3.5.1

॥ अथ येऽस्योर्ध्वा रश्मयस्ता एवास्योर्ध्वा मधुनाड्यो गुह्या एवादेशा मधुकृतो ब्रह्मैव पुष्पं ता अमृता आपः

|| atha ye.asyordhvA rashmayastA evAsyordhvA madhunADyo guhyA evAdeshA madhukR^ito brahmaiva puShpaM tA amR^itA ApaH

हिन्दी अर्थ

वह यह मृजा तरहमने विराट भ्जापतिसे का आ, परनापतिन मनुसे कहा ओर मनुने प्रजावर्गके प्रति कहा । तथा अपने.ज्ये्ठ पत्र अरुणनन्दन उदालकको उसके पिताने ईस ्रहमविज्ञानका उपदेश दिया था तद्धतन्मधुक्ानं ब्रह्मा हिरण्य- , वह यह मधुशान रह्मा-दिरण्य- गर्भने विराट्‌ प्रनापतिको घुनाय। था । गभो विराजे प्रजापतय उवाच। । उने भी इसे मनुको सुनाया ओर इद वाव तज्ज्येष्ठाय पुत्राय पिता ब्रह्म परब्र

English

The upward rays of the sun are the honey cells above. The secret doctrines are the bees, Brahman (the Om) is the flower, the water is the nectar.

अध्याय ४२

श्लोक 3.5.2

ते वा एते गुह्या आदेशा एतद्ब्रह्माभ्यतपँ स्तस्याभितप्तस्य यशस्तेज इन्द्रियं वीर्यमन्नाद्यँरसोऽजायत

te vA ete guhyA AdeshA etadbrahmAbhyatapa{\m+} stasyAbhitaptasya yashasteja indriyaM vIryamannAdya{\m+}raso.ajAyata

हिन्दी अर्थ

जतः इस ब्रहविज्ञानका पिता अपने ज्येष्ठ पुत्रो अथवा घुयोण इदं वाव तद्यथोक्तमन्योऽपि अतः कोई दूसरा विद्वन्‌ भी ग उयेष्ठाय पुत्राय स्प्रियार्हाय बहम उपर्ु् ्रहमविञान सबसे पिय वतु ्रनूयात्‌ । प्रणाय्याय वा योग्या- पात्र अपने ज्येष्ठ पुत्रको ही बति । जो शिष्य सुयोग्य हो उससे कहै

English

Those secret doctrines (as bees) brooded over Brahman (the Om); and from it, thus brooded on, sprang as its (nectar) essence, fame, glory of countenance, brightness, vigour, strength, and health.

अध्याय ४२

श्लोक 3.5.3

तद्व्यक्षरत्तदादित्यमभितोऽश्रयत्तद्वा एतद्यदेतदादित्यस्य मध्ये क्षोभत इव

tadvyakSharattadAdityamabhito.ashrayattadvA etadyadetadAdityasya madhye kShobhata iva

हिन्दी अर्थ

परिवेष्टित जर ते परं 9 इस आचायको यह सयुर" दूसरेको इस विदयाका उपदेश न कर, क्योंकि उससे यदी बढ़कर है, नान्यस्म कस्मैचन प्र्ुयात्ती। क्रिसी जोरको इसका उपदेश न करे-पेसा ककर श्रतिने धद्यमलुक्तातमनेकेषां प्राप्तानां आचारं (विचा देकर विधा सीसने- गायश्री द्वारा बह्मकी उपाक्तना यत एवमातशयफलेषा ब्रह्म- क्योंकि इस प्रकार तऋव्धि अतिशय फल्वती है ६सरिये उपक

English

That flowed forth, and went towards the sun. And that forms what seems to stir in the centre of the sun.

अध्याय ४२

श्लोक 3.5.4

ते वा एते रसानाँरसा वेदा हि रसास्तेषामेते रसास्तानि वा एतान्यमृतानाममृतानि वेदा ह्यमृतास्तेषामेतान्यमृतानि

te vA ete rasAnA{\m+}rasA vedA hi rasAsteShAmete rasAstAni vA etAnyamR^itAnAmamR^itAni vedA hyamR^itAsteShAmetAnyamR^itAni

हिन्दी अर्थ

गायत्री ही ये सब मूत-प्राणिवगं हैँ । जो कुछ भी ये स्थावर-जंगम माणी है बे गात्री ही है । वाक्‌ ही गायत्री है जौर वाक्‌ ही ये सव पराणी है, क्योंकि यदी गायत्री उनक्षा गान ( नामोक्चारण ) करती ओर उनकी “गायत्री वै" इस पद मे “वै शब्द्‌ निश्चयार्थक है । ये समस्त भूत अर्थात्‌ ये जो कुछ स्थावर-जङ्गम ठेस कहफर श्रुति गायत्रीकी कार. मूत शब्दरूप वाकको ही गाणी वाक्‌ ही यह सव भूतसपुद

English

These (the different colours in the sun) are the essences of the essences. For the Vedas are essences (the best things in the world); and of them (after they have assumed the form of sacrifice) these (the colours rising to the sun) are again the essences. They are the nectar of the nectar. For the Vedas are nectar (immortal), and of them these are the nectar. Next: III, 6 Sacred Texts | Hinduism

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Chandogya Upanishad — Chapter 42
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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