अध्याय ५९
श्लोक 4.3.1
॥ वायुर्वाव संवर्गो यदा वा अग्निरुद्वायति वायुमेवाप्येति यदा सूर्योऽस्तमेति वायुमेवाप्येति यदा चन्द्रोऽस्तमेति वायुमेवाप्येति
|| vAyurvAva saMvargo yadA vA agnirudvAyati vAyumevApyeti yadA sUryo.astameti vAyumevApyeti yadA chandro.astameti vAyumevApyeti
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मविदिव वै सोम्य भासि को नु तानुशाशासे दे सोम्य तू ब्रहमवेत्त-सा भाषित हो रहा है; त्े किसने उपदेश दिया है ® टेसा आचार्यने पूछा तब उसने उत्तर दिया नुष्योसे भिन्न देवतार्ं ने .मञ्ञे उपदेश दिया है, भव मेरी इच्छाके ब्रह्मविदिव वै सोभ्य मासि । दे सोम्य तु त्रहवे्ता-सा मासित हो रहा है ॥ इतां ब्रह्म निधिन्तः कृताथोँ जह्यविद्धवति वाखा जर चिन्तारदित हुमा करता
English
'Air (vâyu) is indeed the end of all . For when fire goes out, it goes into air. When the sun goes down, it goes into air. When the moon goes down, it goes into air.