अध्याय ६०
श्लोक 4.4.1
॥ सत्यकामो ह जाबालो जबालां मातरमामन्त्रयांचक्रे ब्रह्मचर्यं भवति विवत्स्यामि किंगोत्रो न्वहमस्मीति
|| satyakAmo ha jAbAlo jabAlAM mAtaramAmantrayAMchakre brahmacharyaM bhavati vivatsyAmi kiMgotro nvahamasmIti
हिन्दी अर्थ
स होवाच बरह्चारी विजाना- वह ब्रह्मचारी षोरा-'आपने जो उपरिष्यमा- म्यहं यद्धवद्धिरुक्त यस्मिन्सति जीवनं यद्पगमे च स्तदाकाशः प्राणस्य संबन्ध्या- भ्रयत्वेन दाद आकाश इत्यथः, खगुणविरिष्टं ब्रह्म तस्स्थं च फिर उसे गा्हपत्याम्नने शिक्षा दी-- पृथिवी, ग्नि, अन्न जोर आदित ये मेरे चार शरीर है । आदित्यके अन्तर्गत जो यह पुर्ष दिखायी देता है वह भ ह, हीमे
English
Satyakâma, the son of Gabâlâ, addressed his mother and said: 'I wish to become a Brahmakârin (religious student), mother. Of what family am I?'