अध्याय ६९
श्लोक 4.13.1
॥ अथ हैनमाहवनीयोऽनुशशास प्राण आकाशो द्यौर्विद्युदिति य एष विद्युति पुरुषो दृश्यते सोऽहमस्मि स एवाहमस्मीति
|| atha hainamAhavanIyo.anushashAsa prANa AkAsho dyaurvidyuditi ya eSha vidyuti puruSho dR^ishyate so.ahamasmi sa evAhamasmIti
हिन्दी अर्थ
ते ह प्राणाः ्रजापति पितरमेस्योचुभेगवन्को नः श्रेष्ठ इति तान्होवाच यस्मिन्व उत्कान्ते शरीरं उन प्राणोने अपने पिता प्रनापतिके पास जाकर कहा--भगवन् हममे कोन श्रेष्ठ है प्रनापतिने उनसे कहा--तुममेसे जिसके तेह ते हैवं विवदमाना देत्योचुरुक्तबन्तः- है भगवन्को नोऽस्माकं मध्ये श्रष्ठोऽभ्यधिको
English
Then the Âhavanîya fire taught him: 'Breath, ether, heaven, and lightning (these are my forms). The person that is seen in the lightning, I am he, I am he indeed.