अध्याय ७०
श्लोक 4.14.1
॥ ते होचुरुपकोसलैषा सोम्य तेऽस्मद्विद्यात्मविद्या चाचार्यस्तु ते गतिं वक्तेत्याजगाम हास्याचार्यस्तमाचार्योऽभ्युवादोपकोसल३ इति
|| te hochurupakosalaiShA somya te.asmadvidyAtmavidyA chAchAryastu te gatiM vaktetyAjagAma hAsyAchAryastamAchAryo.abhyuvAdopakosala3 iti
हिन्दी अर्थ
सतौ धनः पत्यतरन््ाणाल- रहकर फिर लौटकर अन्य परणेपि वाच कथं केन प्रकारेणाशकत कला मूका यथा लोकेण्वदन्तो ध्यायन्तो मनसेवमिति प्रविवेश ह चक्षुः फिर चुने उक्तमण किया । उसने एक वषं प्रवा करनेके अनन्तर फिर लौटकर पूष्ा-भिरे बिना तुम कैसे जीवित रह सके ¢ उन्होने कडा- “निष प्रकार अन्धे रोग बिना देखे प्राणसे प्राणन
English
Then they all said: 'Upakosala, this is our knowledge, our friend, and the knowledge of the Self, but the teacher will tell you the way (to another life).'