Chandogya Upanishad· Chāndogyopaniṣad
81
अध्याय 81 / 154

Adhyāya 81

2 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय ८१

श्लोक 5.8.1

॥ योषा वाव गौतमाग्निस्तस्या उपस्थ एव समिद्यदुपमन्त्रयते स धूमो योनिरर्चिर्यदन्तः करोति तेऽङ्गारा अभिनन्दा विस्फुलिङ्गाः

|| yoShA vAva gautamAgnistasyA upastha eva samidyadupamantrayate sa dhUmo yonirarchiryadantaH karoti te.a~NgArA abhinandA visphuli~NgAH

हिन्दी अर्थ

वैयाघ्रपद्य कं स्वमात्मानयुपस्से धमस कहा--ह भेयघ्रपय । ठम स लं क्रिस आत्माकी उपासना करते हो ¢ त्वाद्‌ समानम्‌ । 91१८ इल्यादि पूर्ववत्‌ समञ्ञना चाहिये । (तुम अन्न भक्षण करते हो जर प्रियका दर्शन करते हो । नो कोई इस प्रकार इस वेशवानर आस्माकी उपासना करता है वह्‌ अत्न भक्षण करता है, श्रिया दशन करता है ओर उषके कुलम बरहतेज होता है । तु

English

'The altar is woman, O Gautama .

अध्याय ८१

श्लोक 5.8.2

तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवा रेतो जुह्वति तस्या आहुतेर्गर्भः संभवति

tasminnetasminnagnau devA reto juhvati tasyA AhutergarbhaH saMbhavati

हिन्दी अर्थ

अर्स्यन्नमित्यादि समानम्‌ । (अल्स्यननम्‌' इत्यादि वाक्यका भासाक्रा प्राण ही है" ेसा रानाने प्राणस्ते तबोदकरमिष्यदुतरान्तो- कहा ओर यह भी कहा कि दि अश्वपति ओर जनका संबाद्‌ पास्स इत्याकाशमेव भगवो राजन्निति होवाचेष वै वहुरु आत्मा वेरवानरो यं तमास्मानमुपास्से तदनन्तर रानने जनसे कहा-!हे शाकराक्ष्य तुम किस आसाकी उपासना करते हो ¢ उघने कहा -हे पूज्य रानन्‌ म आकाराकी हौ उपासना करता ह ।' राजा बोख- "यह निश्चय दी

English

'On that altar the Devas (prânas) offer seed, From that oblation rises the germ.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Chandogya Upanishad — Chapter 81
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.