Chandogya Upanishad· Chāndogyopaniṣad
80
अध्याय 80 / 154

Adhyāya 80

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पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय ८०

श्लोक 5.7.1

॥ पुरुषो वाव गौतमाग्निस्तस्य वागेव समित्प्राणो धूमो जिह्वार्चिश्चक्षुरङ्गाराः श्रोत्रं विस्फुलिङ्गाः

|| puruSho vAva gautamAgnistasya vAgeva samitprANo dhUmo jihvArchishchakShura~NgArAH shrotraM visphuli~NgAH

हिन्दी अर्थ

पिं है प्राचीनयोभ्य कं त्वमा- त्मानषास्से ? इत्यादित्यमेव र उसने पुटषके पुत्र सत्ययज्ञ- प्रबत्तोऽङइवतरीरथो दासीनिष्कोऽस्स्यन्नं परयति

English

'The altar is man, O Gautama; its fuel speech itself, the smoke the breath, the light the tongue, the coals the eye, the sparks the ear.

अध्याय ८०

श्लोक 5.7.2

तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवा अन्नं जुह्वति तस्या आहुते रेतः सम्भवति

tasminnetasminnagnau devA annaM juhvati tasyA Ahute retaH sambhavati

हिन्दी अर्थ

वरिस जुता हभ रथ ओर दपिके सहित हर परदरृत है । तुम अन्न भक्षण करते हो ओर प्रियका दशन करते हौ । नो इस प्रकार इस वेधानर॒ आस्माकी उपासना करता टै वह अन्न भक्षण करता है ्रबृत्तोऽ्चतरीभ्यां युक्तो रथा-! अश्वतरीरथ-दो सचरिोसे ऽश्वत्रीरथो दासीनिष्को दासी- युक्त रथ जर दासीनिष्क-दासिरथो भियुक्तो निष्को हारो दासी- से युक्त निष्क यानी हार भरवृत्त है । तदनन्तर रानाने भाल्खवेय इन्द्रुम्नसे कहा-हे वैयाघ्रपद्य तुम किस आत्माक्ी उपासना करते हो ? वह वोला- शे पूज्य राजन्‌ मँ वायुकी दी उपासना करता ह । राजाने कहा- जि स्त आत्माकी तुम

English

'On that altar the Devas (prânas) offer food. From that oblation rises seed. Next: V, 8 Sacred Texts | Hinduism

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Chandogya Upanishad — Chapter 80
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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