अध्याय २
श्लोक 2.1
ॐ ह्रीं ऋषिरुवाच
OM hrIM R^iShiruvAcha
हिन्दी अर्थ
ओम गम कह नै १. 3० चण्डीदेवीको नमस्कार है। २. 'कोलाविध्वंसी” यह किसी विशेष कुलके क्षत्रियोंकी संज्ञा है। दक्षिणमें “कोला” नगरी प्रसिद्ध है, वह प्राचीन कालमें राजधानी थी। जिन क्षत्रियोंने उसपर आक्रमण करके उसका विध्वंस किया, वे “कोलाविध्वंसी” कहलाये। ३. पाठान्तर--ममत्वाकृष्टमानस:। ३. पा०--निष्कृत:। पा०--तत्केनैत०। ३. पा०-व्याश्ष। २. पा०--यान्ति। ३. पा०--किन्तु ते। ४. पा०--नन्वेते। ५. पा०--रिण:। ६. पा०--चैतत्। $. पा०-कर्म चास्याश्च। २. पा०--यत्स्वभावा। ३. पा०--किसी-किसी प्रतिमें इसके बाद ही “ब्रह्मोवाच” है तथा “निद्रां भगवतीम” इस श्लोकार्थके स्थानमें--'स्तौमि निद्रां भगवती विष्णोरतुलतेजस: ।। ” ऐसा पाठ है। ३. पा०--सा त्वं। २. पा०--महेश्वरी। ३. पा०--मया। ४. पा०--पातात्ति। ३. पा०-णौ हन्तुं। ३. पा०-मया। २३. मार्कण्डेयपुराणकी कई प्रतियोंमें यहाँ “प्रीतौ स्वस्तव युद्धेन श्लाध्यस्त्वं मृत्युरावयो: ।” इतना अधिक पाठ है। द्वितीयोउ ध्याय: देवताओंके तेजसे देवीका प्रादुर्भाव और महिषासुरकी सेनाका वध विनियोग [+ मध्यमचरित्रस्थ विष्णुर्ऋषिर्महालक्ष्मीदेवता, उष्णिक् छन््द:, शाकम्भरी शक्ति:; दुर्गा बीजम्, वायुस्तत्त्वम, यजुर्वेद: स्वरूपम्, श्रीमहालक्ष्मीप्रीत्यर्थ मध्यमचरित्रजपे विनियोग: । ३० मध्यम चरित्रके विष्णु ऋषि, महालक्ष्मी देवता, अष्णिक् छनन््द, शाकम्भरी शक्ति, दुर्गा बीज, वायु तत्त्व और यजुर्वेद स्वरूप है। श्रीमहालक्ष्मीकी प्रसन्नताके लिये मध्यम चरित्रके पाठमें इसका विनियोग है। ध्यान ३० अक्षस्रकपरशुं गदेषुकुलिशं पद्म धनुष्कुण्डिकां दण्डं शक्तिमसिं च चर्म जलजं घण्टां सुराभाजनम् । शूलं पाशसुदर्शने च दधतीं हस्तै: प्रवालप्रभां सेवे सैरिभमर्दिनीमिह महालक्ष्मी सरोजस्थिताम् ।। मैं कमलके आसनपर बैठी हुई महिषासुरमर्दिनी भगवती महालक्ष्मीका भजन करता हूँ, जो अपने हाथोंमें अक्षमाला, फरसा, गदा, बाण, वज्र, पद्म, धनुष, कुण्डिका, दण्ड, शक्ति, खड़्ग, ढाल, शंख, घण्टा, मधुपात्र, शूल, पाश और चक्र धारण करती हैं तथा जिनके श्रीविग्रहकी कान्ति मूँगेके समान लाल है। “उ5 द्वी' ऋषिरुवाच
English
By whose power this world is pervaded — she who is the aggregate form of all the powers of the entire host of gods — that Ambika, worshipped by all gods and great sages, to her we bow in devotion. May she grant us auspiciousness.