Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 22 / 317

Book 1 - Adhyaya 22

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पूर्ण अध्याय पाठ17 श्लोक

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अध्याय २२

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डं पञ्चवक्क्रपूजनं नामैकविंशो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २२ सूत उवाच ।शिवार्चनं प्रवक्ष्यामि बुक्तिमुक्तिकरं परम् ।शान्तं सर्वगतं शून्यं मात्राद्वादशके स्थितम्

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍaṃ pañcavakkrapūjanaṃ nāmaikaviṃśo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 22 sūta uvāca / śivārcanaṃ pravakṣyāmi buktimuktikaraṃ param / śāntaṃ sarvagataṃ śūnyaṃ mātrādvādaśake sthitam

हिन्दी अर्थ

आत्मसात्कर शयन करनेवाले विष्णुको प्रणाम है । जाता है। इसे जो सुनता है अथवा सुनाता है, वह देवोंके अधिपति तथा यज्ञोंके अधिपति विष्णुको विष्णुलोकको प्राप्त करता है। (अध्याय २८-३१)

English

I shall now explain the process of worship of Siva which brings enjoyment and salvation. He is quiet, omni* present, void amd stationed in a diagram of twelve parts.

अध्याय २२

श्लोक 2

पञ्च वक्क्राणि ह्रस्वानि दीर्घाण्यङ्गानि बिन्दुना ।सविसर्गं वदेदस्त्रं शिव ऊर्घ्वं तथा पुनः

pañca vakkrāṇi hrasvāni dīrghāṇyaṅgāni bindunā / savisargaṃ vadedastraṃ śiva ūrghvaṃ tathā punaḥ

हिन्दी अर्थ

महेश्वरने कहा--हे शङ्ख-चक्र-गदाधर! आप उस परम पवित्र कलिदोष-विनाशक पूजन-विधिका

English

The five faces are short vowels. His limbs are long vowels with bindu

अध्याय २२

श्लोक 3

षष्ठेनाधो महामन्त्रो हौमित्येवाखिलार्थदः ।हस्ताभ्यां संस्पृशेत्पादावूर्ध्वं पादान्मस्तकम्

ṣaṣṭhenādho mahāmantro haumityevākhilārthadaḥ / hastābhyāṃ saṃspṛśetpādāvūrdhvaṃ pādānmastakam

हिन्दी अर्थ

पञ्चतत्त्वोंको उस पूजा-विधिको मुझे बतानेकीआप श्रवण करें। कृपा करें, जिसका ज्ञान प्राप्त कर लेनेमात्रसे ही है सदाशिव! एक ही परमात्मा जो वासुदेव मनुष्य परमपदको प्राप्त कर लेता है। श्रीहरि हैं, वे ही अविनाशी, शान्त, सनातन, सत्- श्रीहरिने कहा--हे सुव्रत शिव! मैं आपसे स्वरूप हैं।वे ध्रुव (नित्य, अचल), शुद्ध, सर्वव्याप्त

English

Then perform AAgavinjfdsa beginning with the little finger and ending with the forefinger.

अध्याय २२

श्लोक 4

महामुद्रा हि सर्वेषां कराङ्गन्यासमाचरेत् ।तालहस्तेन पृष्ठं च अस्त्रमन्त्रेण शोधयेत्

mahāmudrā hi sarveṣāṃ karāṅganyāsamācaret / tālahastena pṛṣṭhaṃ ca astramantreṇa śodhayet

हिन्दी अर्थ

पञ्चतत्त्-पूजा-विधिको कह रहा हूँ, यह दिव्य, तथा निरञ्जन हैं। वे ही विष्णुदेव अपनी मायाके मङ्गलस्वरूप, कल्याणकारी, रहस्यपूर्ण, श्रेष्ठ तथा प्रभावसे पाँच प्रकारसे अवस्थित है । वे जगतका अभीष्टोंकी सिद्धि करनेवाली है। है महादेव! ऐसे कल्याण करनेवाले हैं। वे ही अद्वितीय विष्णु

English

After performing GarbhddhSna and other rites (mystical conception), performing all activities with the heart he should perform Homa of Siva with all the Aftgas (parts).

अध्याय २२

श्लोक 5

कनिष्ठामादितः कृत्वा तर्जन्यङ्गानि विन्यसेत् ।पूजनं संप्रवक्ष्यामि कर्णिकायां त्दृदम्बुजे

kaniṣṭhāmāditaḥ kṛtvā tarjanyaṅgāni vinyaset / pūjanaṃ saṃpravakṣyāmi karṇikāyāṃ tdṛdambuje

हिन्दी अर्थ

वासुदेव, संकर्षण (बलराम), प्रद्युम्न, अनिरुद्ध तथा ॐ ऊं शिखायै नमः, ॐ ऐं कवचाय नमः, ३ नारायणस्वरूपसे पाँच रूपों (तत्त्वों) -में स्थित हैं। औं नेत्रत्रयाय नमः, ३ अः अस्त्राय फट्, ३» हे वृषध्वज! जनार्दन विष्णुके उक्त पञ्चरूपोंके समस्तपरिवारायाच्युताय नमः, 3 धात्रे नमः, वाचक मन्त्र इस प्रकार हैं- 3 विधात्रे नमः, ३० आधारशक्त्यै नमः, ॐ

English

Sodkfi (ones ovm eye) goes up to Indra and Sun by means of fortyoac vartanas (revolutions) in the whole sky.

अध्याय २२

श्लोक 6

धर्मं ज्ञानं च वैराग्यमैश्वर्यादि त्दृदार्चयेत् ।आवाहनं स्थापनं च पाद्यमर्घ्यं हृदार्पयेत्

dharmaṃ jñānaṃ ca vairāgyamaiśvaryādi tdṛdārcayet / āvāhanaṃ sthāpanaṃ ca pādyamarghyaṃ hṛdārpayet

हिन्दी अर्थ

ॐ अं वासुदेवाय नमः, ॐ आं संकर्षणाय कूर्माय नमः, 3३ अनन्ताय नमः, 3» पृथिव्यै नमः, ॐ अं प्रद्युम्नाय नमः, ॐ अः अनिरुद्धाय नमः, ३2 धर्माय नमः, 3» ज्ञानाय नमः, नमः, ३७ ॐ नारायणाय नमः। ॐ वैराग्याय नमः, ३ ऐश्वर्याय नमः, ३ अधर्माय --ये पाँच मन्त्र उक्त पाँच देवताओंके वाचक हैं, नमः, ३ अज्ञानाय नमः, ३ अनैश्वर्याय नमः,

English

The groups of Rostra hrdoya are devoted to the Sastra of five. Astra should be placed in the border of the quarters and 8ada$iva in the pericarp,

अध्याय २२

श्लोक 7

आचामं स्नपनं पूजामेकाधारणतुल्यकम्? ।अग्निकार्यविधिं वक्ष्ये अस्त्रेणोल्लेखनं चरेत्

ācāmaṃ snapanaṃ pūjāmekādhāraṇatulyakam? / agnikāryavidhiṃ vakṣye astreṇollekhanaṃ caret

हिन्दी अर्थ

जो सभी पातक, महापातकोंके विनाशक, पुण्यजनक ३» अं अर्कमण्डलाय नमः, ३ सों सोममण्डलाय तथा समस्त रोगोंको दूर करनेवाले हैं। अब मैं आपसे नमः, ॐ बं वह्निमण्डलाय नमः, ३ वं वासुदेवाय मङ्गलमय पञ्चतत््वार्चन-विधिको कह रहा हूँ। है परब्रह्मणे शिवाय तेजोरूपाय व्यापिने शिव! उसको जिस विधिसे और जिन मन्त्रोंके द्वारा सर्वदेवाधिदेवाय नमः, ॐ पाञ्चजन्याय नमः, ॐ

English

I shall now mention Dikfd (preparation for sacred

अध्याय २२

श्लोक 8

वर्ंमणाभ्युक्षणं कार्यं शक्तिन्यासं हृदा चरेत् ।त्दृदि वा शक्तिगर्ते च प्रक्षिपेज्जातवेदसम्

varṃmaṇābhyukṣaṇaṃ kāryaṃ śaktinyāsaṃ hṛdā caret / tdṛdi vā śaktigarte ca prakṣipejjātavedasam

हिन्दी अर्थ

सम्पन्न करना चाहिए, उसको आप श्रवण करें। सुदर्शनाय नमः, ३» गदायै नमः, ॐ पद्याय --इन पाँच देवोंकी पूजामें सर्वप्रथम स्नान नमः, ॐ श्रियै नमः, ॐ हिये नमः, 3 पुष्टयै करके विधिवत् संध्या करनी चाहिए। तदनन्तर नमः, 3» गीत्यै नमः, ॐ शक्त्यै नमः, ॐ प्रीत्यै हाथ-पैर धोकर पूजा-गृहमें प्रवेश करके विद्वान् नमः, 3» इन्द्राय नमः, ॐ अग्नये नमः, ॐ

English

In the homa Sdnli goes beyond. After that the immutable is quiescent. For each there shall be a hundred homa. Thus homa shall be performed five times.

अध्याय २२

श्लोक 9

गर्भाधानादिकं कृत्वा निष्कृतिं चारस्य पश्चिमाम् ।हृदा कृत्वा सर्वकर्ंम शिवं सांगं तु होमयेत्

garbhādhānādikaṃ kṛtvā niṣkṛtiṃ cārasya paścimām / hṛdā kṛtvā sarvakarṃma śivaṃ sāṃgaṃ tu homayet

हिन्दी अर्थ

साधकको चाहिए कि वह आचमन करके मनोऽनुकूल यमाय नमः, ३ निर्ऋतये नमः, ॐ वरुणाय आसन लगाकर बैठ जाय और- “औं क्षौं रम्'- नमः, ३ वायवे नमः, ॐ सोमाय नमः, ॐ इन मन्त्रोसे शोषणादि क्रिया करे। ईशानाय नमः, ३» अनन्ताय नमः, वे वासुदेव कृष्ण जगतूके स्वामी, पीतवर्णके ॐ ब्रह्मणे नमः, ॐ विष्वक्सेनाय नमः।'

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

अध्याय २२

श्लोक 10

पूजयेन्मण्डले शम्भुं पद्मगर्भे गराङ्कितम् ।चतुः षष्ट्यन्तमष्टादि खाक्षि खाद्यादिमण्डलम्

pūjayenmaṇḍale śambhuṃ padmagarbhe garāṅkitam / catuḥ ṣaṣṭyantamaṣṭādi khākṣi khādyādimaṇḍalam

हिन्दी अर्थ

कौशेय (रेशमी) वस्त्रोंसे विभूषित, सहस्रों सूर्यकी तत्पश्चात् ' ॐ पद्माय नमः' ऐसा कहकर किरणोंके समान तेजःस्वरूप तथा देदीप्यमान स्वस्तिक और सर्वतोभद्रादि मण्डलोंका निर्माण मकराकृति-कुण्डलोंसे सुशोभित हैं, ऐसे उन भगवान् करके उस मण्डलमें इन्हीं मन्त्रोंसे देवोंका पूजन कृष्णका अपने हृदय-कमलमें ध्यान करना चाहिए । करना चाहिए।

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

अध्याय २२

श्लोक 11

खाक्षीन्द्रसूर्यगं सर्वखादिवेदेन्दु (देवेन्दु) वर्तनम् ।आग्नेय्यां कारयेत्कुण्डमर्धचन्द्रनिभं शुभम्

khākṣīndrasūryagaṃ sarvakhādivedendu (devendu) vartanam / āgneyyāṃ kārayetkuṇḍamardhacandranibhaṃ śubham

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर भगवान् संकर्षणका ध्यान करे। उसके मूल मन्त्रसे पाद्य आदिका निवेदन करके बाद यथाक्रम प्रद्युम्न, अनिरुद्ध तथा श्रीमन्नारायणके स्नान, वस्त्र, आचमन, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप तथा स्वरूपका ध्यान करके उन देवाधिदेवसे प्रादुर्भूत नैवेद्य प्रदान करके नमस्कार तथा प्रदक्षिणा करनी इन्द्रादि देवोंका ध्यान करके मूल मन्त्रकेचाहिए। है शङ्कर! उसके बाद यथाशक्ति मूल

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

अध्याय २२

श्लोक 12

अग्निशास्त्र परायुस्थो त्दृदयादिगणोच्यते ।अस्त्रं दिशा सुपद्मस्य कर्णिकायां सदाशिवः

agniśāstra parāyustho tdṛdayādigaṇocyate / astraṃ diśā supadmasya karṇikāyāṃ sadāśivaḥ

हिन्दी अर्थ

द्वारा दोनों हाथोंसे व्यापक रूपमें करन्यास करे, मन्त्रका जपकर उसे प्रभुको समर्पित कर दे। तत्पश्चात् अङ्गन्यासके मन्त्रोसे अङ्गन्यास करे। हो तदनन्तर भगवान् वासुदेवका स्मरणकर इस महादेव! सुव्रत! उन न्यास एवं पूजाके मन्त्र इस स्तोत्रका पाठ करे- प्रकार हैँ , ॐ नमो वासुदेवाय नमः संकर्षणाय च॥

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

अध्याय २२

श्लोक 13

दीक्षां वक्ष्ये पञ्चतत्त्वे स्थितां भूम्यादिकां परे ।निवृत्तिर्भूप्रतिष्ठाद्यैर्विद्याग्निः शान्तिवन्निजः

dīkṣāṃ vakṣye pañcatattve sthitāṃ bhūmyādikāṃ pare / nivṛttirbhūpratiṣṭhādyairvidyāgniḥ śāntivannijaḥ

हिन्दी अर्थ

“ॐ आं हृदयाय नमः, ॐ ई शिरसे प्रद्मम्नायादिदेवायानिरुद्धाय नमो नमः।

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

अध्याय २२

श्लोक 14

शान्त्यतीतं भवेव्द्योम तत्परं शान्तमव्ययम् ।एकैकस्य शतं होमा हत्येवं पञ्च होमयेत्

śāntyatītaṃ bhavevdyoma tatparaṃ śāntamavyayam / ekaikasya śataṃ homā hatyevaṃ pañca homayet

हिन्दी अर्थ

नरपूज्याय कीर्त्याय स्तुत्याय वरदाय च। अनादिनिधनायैव पुराणाय नमो नमः॥ सृष्टिसंहारकत्रे च ब्रह्मणः पतये नमः।

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

अध्याय २२

श्लोक 15

पश्चात्पूर्णाहुतिं दत्त्वा प्रा(प्र)सोदन शिवं स्मरेत् ।प्रायश्चित्तविशुद्ध्यर्थमेकैकाष्टाहुतिं क्रमात्

paścātpūrṇāhutiṃ dattvā prā(pra)sodana śivaṃ smaret / prāyaścittaviśuddhyarthamekaikāṣṭāhutiṃ kramāt

हिन्दी अर्थ

ब्र्मविष्णवीशरूपाय मोक्षदाय नमो नमः॥ मोक्षद्वाराय धर्माय निर्वाणाय नमो नमः। सर्वकामप्रदायैव परब्रह्मस्वरूपिणे॥

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

अध्याय २२

श्लोक 16

होमयेदस्त्रबीजेन एवं दीक्षां समापयेत् ।यजनव्यतिरेकेण गोप्यं संस्कारमुत्तमम्

homayedastrabījena evaṃ dīkṣāṃ samāpayet / yajanavyatirekeṇa gopyaṃ saṃskāramuttamam

हिन्दी अर्थ

त्वदन्यो नास्ति देवेश नास्ति त्राता जगत्प्रभो॥ त्वामेव सर्वगं विष्णुं गतोऽहं शरणां ततः। ज्ञानदीपप्रदानेन तमोमुक्तं प्रकाशय॥

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

अध्याय २२

श्लोक 17

एवं संस्कारशुद्धस्य शिवत्वं जायते ध्रुवम्

evaṃ saṃskāraśuddhasya śivatvaṃ jāyate dhruvam

हिन्दी अर्थ

रूपी मूल वृक्षका छेदन करनेवाले, मायाका भेदन करनेवाले, बहुतसे रूपोंको धारण करनेवाले,

English

If the devotee thus becomes purified ritualistically he attains to Sivahood, indeed.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 22
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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