Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 23 / 317

Book 1 - Adhyaya 23

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पूर्ण अध्याय पाठ59 श्लोक

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अध्याय २३

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे शिवार्चनप्रकारो नाम द्वाविंशो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २३ सूत उवाच ।शिवार्चनं प्रवक्ष्यामि धर्ंमकामादिसाधनम् ।त्रिभिर्मन्त्रैराचामेत्तु स्वाहान्तैः प्रणवादिकैः

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe śivārcanaprakāro nāma dvāviṃśo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 23 sūta uvāca / śivārcanaṃ pravakṣyāmi dharṃmakāmādisādhanam / tribhirmantrairācāmettu svāhāntaiḥ praṇavādikaiḥ

हिन्दी अर्थ

निर्गुण तथा ब्रह्मा, विष्णु और शिव--इन तीन रूपोंमें अवस्थित रहनेवाले मोक्षदायक भगवान् विष्णु परमेश्वरको नमस्कार है। मोक्षके द्वारभूत, धर्मस्वरूप, निर्वाणरूप, समस्त अभीष्टोंको प्रदान

English

For the bath of ashes and Tarpana the mantras are Orh Hdth Tdm Svdhi. For all devas all sages the adoration is with the Manira ending with NcmaJjt and Vauaf*.

अध्याय २३

श्लोक 2

ॐ हां आत्मतत्त्वाय विद्यातत्त्वाय हीं तथा ।ॐ हूं शिवतत्त्वाय स्वाहा हृदा स्याच्छ्रोत्रवन्दनम्

oṃ hāṃ ātmatattvāya vidyātattvāya hīṃ tathā / oṃ hūṃ śivatattvāya svāhā hṛdā syācchrotravandanam

हिन्दी अर्थ

करनेवाले परब्रह्मस्वरूप आपके लिये बार-बार नमस्कार है। इस गहन संसारसागरमें मैं डूब रहा हूँ, आप मेरा उद्धार करें। है देवदेवेश्वर! है जगत्के स्वामी! आपके अतिरिक्त मेरा कोई भी रक्षक नहीं

English

For all the Pitrs and Pitdmahas (fathers and grand* fathers) the manira should end with Svadha.

अध्याय २३

श्लोक 3

भस्मस्नानं तर्पणं च ॐ हां स्वाहा सर्वमन्त्रकाः ।सर्वे देवाः सर्वमुनिर्नमो ऽन्तो वौषडन्तकः

bhasmasnānaṃ tarpaṇaṃ ca oṃ hāṃ svāhā sarvamantrakāḥ / sarve devāḥ sarvamunirnamo 'nto vauṣaḍantakaḥ

हिन्दी अर्थ

है। सर्वत्र व्याप्त रहनेवाले है भगवान् विष्णु! मैं आपकी शरणमे हूँ। है भगवन् ! ज्ञानरूपी दीपकको प्रज्जलितकर मेरे (अज्ञानरूपी) अन्धकारको दूर करके मुझे प्रकाशित कर दें।

English

Hdrh JiJ'amak to all mothers.Then Prdfmydma should be performed. Acamana and Mdtjana should be made. Cdyatrl be recited next.

अध्याय २३

श्लोक 4

स्वधान्ताः सर्वपितरः स्वधान्ताश्च पितामहाः ।ॐ हां प्रपितामहेभ्यस्तथा मातामहादयः

svadhāntāḥ sarvapitaraḥ svadhāntāśca pitāmahāḥ / oṃ hāṃ prapitāmahebhyastathā mātāmahādayaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार समस्त कष्टोंको दूर करनेवाले

English

After Sdryopasikdpana (special recital of prayers with mystic gesticulations with the hand) he should begin worship with solar mantras,

अध्याय २३

श्लोक 5

हां नमः सर्वमातृभ्यस्ततः स्यात्प्राणसंयमः ।आचामं मार्जनं चाथो गायत्रीं च जपेत्ततः

hāṃ namaḥ sarvamātṛbhyastataḥ syātprāṇasaṃyamaḥ / ācāmaṃ mārjanaṃ cātho gāyatrīṃ ca japettataḥ

हिन्दी अर्थ

“हे वासुदेव! है संकर्षण (बलराम)! आपको देवेश भगवान् वासुदेवकी स्तुति करके है नीललोहित

English

Om and Am for the sun in the heart; head and tuft of hair and BhObybuvabi Svaby Om, Jvdlini should be worshipp* ed with Hrdm, Coat of xnail and weapon should be assigned duly.

अध्याय २३

श्लोक 6

ॐ हां तन्महेशाय विद्महे,वाग्विशुद्धाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्

oṃ hāṃ tanmaheśāya vidmahe,vāgviśuddhāya dhīmahi, tanno rudraḥ pracodayāt

हिन्दी अर्थ

नमस्कार है। है प्रद्युम्र, आदिदेव, अनिरुद्ध! आपके शिव! अन्य वैदिक स्तोत्र-पाठोंसे भी स्तुति करके लिये नमस्कार है। है नारायण! नराधिपति! आपको पञ्चतत््वाँसे युक्त उन भगवान् विष्णुका अपने हृदयमें नमन है, कीर्तन करने योग्य, मनुष्योंसे पूजनीय, स्तुति ध्यान करे। इसके बाद विसर्जन करना चाहिए। करने योग्य, वर देनेवाले, आदि तथा अन्तसे रहित इस प्रकार है शङ्कर! सम्पूर्ण कामनाओंको प्रदान

English

The queen properly initiated should be worshipped with Suiya-Hfdaya Mantra. The planet Soma (Moon) should be worshipped with Sofn; Mahgala (Mars) with Mam; Budha (Mercury) with Bam; Brhaspati (Jupiter) with r; (Sukravenus) with Bham; the planet SanaiScara (Saturn) with Sam.

अध्याय २३

श्लोक 7

सूर्योपस्थानकं कृत्वा सूर्यमन्त्रैः प्रपूजयेत् ।ॐ हां हीं हूं हैं हौं हः शिवसूर्याय नमः ।ॐ हं खखोल्काय सूर्यमूर्तये नमः ।ॐ ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः

sūryopasthānakaṃ kṛtvā sūryamantraiḥ prapūjayet / oṃ hāṃ hīṃ hūṃ haiṃ hauṃ haḥ śivasūryāya namaḥ / oṃ haṃ khakholkāya sūryamūrtaye namaḥ / oṃ hrāṃ hrīṃ saḥ sūryāya namaḥ

हिन्दी अर्थ

सनातन प्रभुको बारम्बार नमस्कार है। सृष्टि और संहार- करनेवाली वासुदेवकी श्रेष्ठ पूजा कही गयी। इस कर्ता, ब्रह्माके भी स्वामी तथा शङ्ख, चक्र, गदाधारी पूजाके करनेमात्रसे मनुष्य कृतकृत्य हो जाता है। भगवान् विष्णुको नमस्कार है। नमस्कार है।' है रुद्र! जो व्यक्ति इस पञ्चतत्त्वार्चनको पढ़ता

English

Rdhu with Atfm; Ketu with A*emand the fierce lustre should be worshipped with Om. After worshipping the sun and performing Acojnana the AAganydsa should be made begin¬ ning with the little finger.

अध्याय २३

श्लोक 8

दण्डिने पिङ्गले त्वातिभूतानि च ततः स्मरेत् ।अग्नयादौ विमलेशानमाराध्य परमं सुखम्

daṇḍine piṅgale tvātibhūtāni ca tataḥ smaret / agnayādau vimaleśānamārādhya paramaṃ sukham

हिन्दी अर्थ

कलिकालके दोषोंको नष्ट करनेवाले, देवोंके है, सुनता है अथवा दूसरोंको सुनाता है, वह ईश! आपको बारम्बार प्रणाम है। सम्पूर्ण जगत्- विष्णुलोकको प्राप्त होता है। (अध्याय ३२)

English

Hdrh Him for the head; HUm for the tuft, Haim for the coat of mail and Hcitm for the eyes, hub the weapon. Having fixed Sakti Hydsa should be made for the purification of elements.

अध्याय २३

श्लोक 9

यजेत्पद्मां च रां दीप्तां रीं सूक्ष्मां रूं जयां च रें ।भद्रां च रैं विभूतिं र्ॐ विमलां रौममोधि (रोधि) काम्

yajetpadmāṃ ca rāṃ dīptāṃ rīṃ sūkṣmāṃ rūṃ jayāṃ ca reṃ / bhadrāṃ ca raiṃ vibhūtiṃ roṃ vimalāṃ raumamodhi (rodhi) kām

हिन्दी अर्थ

रुद्र्ने कहा--हे शङ्ख-गदाधर! उस। श्रीहरिने कहा--हे वृषभध्वज सुदर्शनचक्रकी सुदर्शनकी पूजाके विषयमें मुझे बतायें, जिसे पूजा-विधिको मैं कह रहा हुँ, आप सुनें। सर्वप्रथम

English

Then making a vessd for Argfa it shall be sprinkled with holy water.

अध्याय २३

श्लोक 10

रं विद्युतां च पूर्वादौ रा (रं) मध्ये सर्वतोमुखीम् ।अर्कासनं सूर्यमूर्तें ह्रां ह्रूं (ह्रीं) सः सूर्यमर्चयेत्

raṃ vidyutāṃ ca pūrvādau rā (raṃ) madhye sarvatomukhīm / arkāsanaṃ sūryamūrteṃ hrāṃ hrūṃ (hrīṃ) saḥ sūryamarcayet

हिन्दी अर्थ

करनेसे ग्रहदोष और रोगादि--सभी कष्ट विनष्ट रान करके हरिका पूजन करे। साधकको चाहिए

English

The Atman should be worshipped as seated on the lotus. With Hattrh Sivdya the exterior should be worshipped. Jifandin and Mahdkdla at the gate;GaQga, Yamuni, Sarasvatt,.

अध्याय २३

श्लोक 11

ॐ आं हृदर्काय च शिरः शिखा च भूर्भुवः स्वरोम् ।ज्वालिनीं ह्रं कवचस्य चास्त्रं राज्ञां च दीक्षिताम्

oṃ āṃ hṛdarkāya ca śiraḥ śikhā ca bhūrbhuvaḥ svarom / jvālinīṃ hraṃ kavacasya cāstraṃ rājñāṃ ca dīkṣitām

हिन्दी अर्थ

कि अपने निर्मल एवं शुभ हृदय-कमलमें भगवान्

English

The chief of Siva's (penonal attendants).

अध्याय २३

श्लोक 12

यजेत्सूर्यहृदा सर्वान्स्ॐ सोमं मं च मङ्गलम् ।बं बुधं बृं बृहस्पतिं भं भार्गवं शं शनैश्चरम्

yajetsūryahṛdā sarvānsoṃ somaṃ maṃ ca maṅgalam / baṃ budhaṃ bṛṃ bṛhaspatiṃ bhaṃ bhārgavaṃ śaṃ śanaiścaram

हिन्दी अर्थ

सुदर्शनदेव विष्णुका ध्यान करे । है महादेव! उसके स पापं भस्मसात्कृत्वा विष्णुलोकाय कल्पते॥ बाद मण्डलमें शङ्क, चक्र, गदा तथा पद्म धारण (३३। ८--१६) करनेवाले, सौम्य आकृतिवाले, किरीटी भगवान् सहरस्रों सूर्यके समान तेज:सम्पन्न सुदर्शनचक्रके विष्णुदेवका आवाहन करके गन्ध, पुष्प, धूप, दीप लिये नमस्कार है। तेजस्वी किरणोंकी मालाओंसे

English

rioatsa, Vdsivadkipati (presiding deity of the plot); Brahma, GaM, preceptor, akti and Anania —all those in the middle, Dhama and others in the east;

अध्याय २३

श्लोक 13

रं राहुं कं यजेत्केतुं ॐ तेजश्चण्डमर्चयेत् ।सूर्यमभ्यर्च्य चाचम्य कनिष्ठातो ऽङ्गकांन्यसेत्

raṃ rāhuṃ kaṃ yajetketuṃ oṃ tejaścaṇḍamarcayet / sūryamabhyarcya cācamya kaniṣṭhāto 'ṅgakāṃnyaset

हिन्दी अर्थ

आदि विविध उपचारोंसे पूजा करे । प्रदीप्त हजारों अरे (चक्रके अवयव) -वाले, नेत्रस्वरूप, पूजाके अन्तमें मूल मन्त्रका १०८ बार जप करे। है सर्वदुष्टविनाशक तथा सभी प्रकारके पापोंको नष्ट रुद्र! जो इस प्रकार सुदर्शनचक्रका उत्तम पूजन करता है, करनेवाले आपको नमन है। सुचक्र तथा विचक्र वह इस लोकमें समस्त रोगोंसे विमुक्त होकर विष्णुलोकको नामधारी, सम्पूर्ण मन्त्रका भेदन करनेवाले, जगतूकी

English

Adharma in the south-east; Vdmd and Jye;thd in the middle and in the pericarp of the lotus; Raudrf, A*d/f, Siva and Sita in the east.

अध्याय २३

श्लोक 14

हां हृच्छिरो हूं शिखा हैं वर्ंम हौं चैव नेत्रकम् ।हो ऽस्त्रं शक्तिस्थितिं कृत्वा भूतशुद्धिं पुनर्न्यसेत्

hāṃ hṛcchiro hūṃ śikhā haiṃ varṃma hauṃ caiva netrakam / ho 'straṃ śaktisthitiṃ kṛtvā bhūtaśuddhiṃ punarnyaset

हिन्दी अर्थ

प्राप्त करता है। मन्त्र-जपके पश्चात् सभी व्याधियोंको सृष्टि करनेवाले, पालन-पोषण करनेवाले एवं जगत्का

English

After imagining the deity in its solitary form recital of prayers and the dedication thereof should be performed. This is called JVdmdftga worship—i.e. prayer, kneeling etc. by means of the heart.

अध्याय २३

श्लोक 15

अर्घ्यपात्रं ततः कृत्वा तदद्भिः प्रोक्षयेद्यजेत्

arghyapātraṃ tataḥ kṛtvā tadadbhiḥ prokṣayedyajet

हिन्दी अर्थ

विनष्ट करनेबाले इस स्तोत्रका पाठ करना चाहिए--

English

In the south-east, north-east, north-west and south¬ west, the worship mentioned for the east should be made in the middle. He should worship Indra and others and Pfirmdlya should be applied to Canda,

अध्याय २३

श्लोक 16

आत्मानं पद्मसंस्थं च हौं शिवाय ततो बहिः ।द्वारे नन्दिमहाकालौ गङ्गा च यमुनाथ गौः

ātmānaṃ padmasaṃsthaṃ ca hauṃ śivāya tato bahiḥ / dvāre nandimahākālau gaṅgā ca yamunātha gauḥ

हिन्दी अर्थ

नमः सुदर्शनायैव सहतस्त्रादित्यवर्चसे॥

English

Endoniog, covering up.

अध्याय २३

श्लोक 17

श्रीरस्त्रं वास्त्वधिपतिं ब्रह्माणं च गणं गुरुम् ।शक्त्यनन्तौ यजेन्मध्ये पूर्वादौ धर्ंमकादिकम्

śrīrastraṃ vāstvadhipatiṃ brahmāṇaṃ ca gaṇaṃ gurum / śaktyanantau yajenmadhye pūrvādau dharṃmakādikam

हिन्दी अर्थ

पालनार्थाय लोकानां दुष्टासुरविनाशिने।

English

Pasiion.

अध्याय २३

श्लोक 18

अधर्ंमाद्यं च वह्न्यादौ मध्ये पद्मस्य कर्णिके ।वामाज्येष्ठा च पूर्वादौ रौद्री काली च पूर्षदः

adharṃmādyaṃ ca vahnyādau madhye padmasya karṇike / vāmājyeṣṭhā ca pūrvādau raudrī kālī ca pūrṣadaḥ

हिन्दी अर्थ

कालाय मृत्यवे चैव भीमाय च नमो नमः ॥

English

JealousV.

अध्याय २३

श्लोक 19

ॐ हौं कलविकरिण्यै बलविकरिणी ततः ।बलप्रमथिनी सर्वभूतानां दमनी ततः

oṃ hauṃ kalavikariṇyai balavikariṇī tataḥ / balapramathinī sarvabhūtānāṃ damanī tataḥ

हिन्दी अर्थ

विष्णुरूपाय शान्ताय चायुधानां धराय च॥

English

Obviously opposite of (time).

अध्याय २३

श्लोक 20

मनोन्मनी यजेदेताः पठिमध्ये शिवाग्रतः ।शिवासनं महामूर्ति मूर्तिमध्ये शिवाय च

manonmanī yajedetāḥ paṭhimadhye śivāgrataḥ / śivāsanaṃ mahāmūrti mūrtimadhye śivāya ca

हिन्दी अर्थ

विष्णुशस्त्राय चक्राय नमो भूयो नमो नमः।

English

Destiuy.

अध्याय २३

श्लोक 21

आवाहनं स्थापनं च सन्निधानं निरोधनम् ।सकलीकरणं मुद्रादर्शनं चार्घ्यपाद्यकम्

āvāhanaṃ sthāpanaṃ ca sannidhānaṃ nirodhanam / sakalīkaraṇaṃ mudrādarśanaṃ cārghyapādyakam

हिन्दी अर्थ

इति स्तोत्रं महत्पुण्यं चक्रस्य तव कीर्तितम्॥

English

Illuibn. Deception. Illusion bpenonified at a female form of

अध्याय २३

श्लोक 22

आचामाभ्यङ्गमुद्वर्तं स्नानं निर्ंमथनं चरेत् ।वस्त्रं विलेपनं पुष्पं धूपं दीपं चरुं ददेत्

ācāmābhyaṅgamudvartaṃ snānaṃ nirṃmathanaṃ caret / vastraṃ vilepanaṃ puṣpaṃ dhūpaṃ dīpaṃ caruṃ dadet

हिन्दी अर्थ

यः पठेत् परया भक्त्या विष्णुलोकं स गच्छति।

English

According to the TMraSph Is the principal nerve in the human nervous system, being on the left side of the body. {CSL, ).

अध्याय २३

श्लोक 23

आचामं मुखवासं च ताम्बूलं हस्तशोधनम् ।छत्रचामरपावित्रं परमीकरणं चरेत्

ācāmaṃ mukhavāsaṃ ca tāmbūlaṃ hastaśodhanam / chatracāmarapāvitraṃ paramīkaraṇaṃ caret

हिन्दी अर्थ

संहार करनेवाले है सुदर्शनचक्र! आपको नमस्कार है। (संसारकी रक्षा करनेके लिये) देवताओंका कल्याण करनेवाले, दुष्ट राक्षसोंका विनाश करनेवाले, दुष्टोंका संहार करनेके लिये उग्र-स्वरूप एवं प्रचण्ड-

English

The principal nerve on the right side of the body. (C5t, )*

अध्याय २३

श्लोक 24

रूपक्पेन चैकाहजपो जाप्यसमर्पणम् ।स्तुतिर्नतिर्हृदाद्यैश्च ज्ञेयं नामाङ्ग पूजनम्

rūpakpena caikāhajapo jāpyasamarpaṇam / stutirnatirhṛdādyaiśca jñeyaṃ nāmāṅga pūjanam

हिन्दी अर्थ

स्वरूप और सञ्जनोंके लिये सौम्य-स्वरूप धारण करनेवाले आपको बारम्बार नमस्कार है। जगत्के लिये नेत्रस्वरूप संसारभयको काटनेवाले मायारूपी पिंजड़ेका भेदन करनेवाले, कल्याणकारी सुदर्शनचक्रको

English

(beginnings) are four times. The dhydna is Svita (white). The lotus of the neck should be made thus. The mandala (diagram) shall be called Ardhacandra (Crescent moon).

अध्याय २३

श्लोक 25

अग्नीशरक्षो वायव्ये मध्ये पूर्वादितन्त्रकम् ।इन्द्राद्यांश्च यजेच्चण्डं तस्मै निर्माल्यमर्पयेत्

agnīśarakṣo vāyavye madhye pūrvāditantrakam / indrādyāṃśca yajeccaṇḍaṃ tasmai nirmālyamarpayet

हिन्दी अर्थ

नमस्कार है। ग्रह एवं अतिग्रहस्वरूप, ग्रहपति, कालस्वरूप, मृत्युस्वरूप, पापात्माओंके लिये महाभयंकर आपके लिये बार-बार नमन है। भक्तोंपर कृपा करनेवाले, उनके अभिरक्षक, विष्णुस्वरूप,

English

Marked by a lotus it shall extend to two hundred crorea. The Atman ninetyfour (times) in height shall be thought of as with face downwards.

अध्याय २३

श्लोक 26

गुहायातिगुह्यगोप्ता त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् ।सिद्धिर्भवतु मे देव तत्प्रसादात्त्वयि स्थितिः

guhāyātiguhyagoptā tvaṃ gṛhāṇāsmatkṛtaṃ japam / siddhirbhavatu me deva tatprasādāttvayi sthitiḥ

हिन्दी अर्थ

शान्तस्वभाव, समस्त आयुधोंको शक्तिको अपनेमें धारणकर स्थित रहनेवाले विष्णुके शस्त्रभूत हे सुदर्शनचक्र! आपके लिये बारम्बार नमस्कार है। हे शङ्कर! सुदर्शनचक्रके इस महत्पुण्यशाली

English

There arc places and lotuses. The Aghora (non-ter¬ rific )shall be accompanied by learning.

अध्याय २३

श्लोक 27

यत्किञ्चित्क्रियते कर्म सदा सुकृतदुष्कृतम् ।तन्मे शिवपदस्थस्य रुद्र क्षपय शङ्कर

yatkiñcitkriyate karma sadā sukṛtaduṣkṛtam / tanme śivapadasthasya rudra kṣapaya śaṅkara

हिन्दी अर्थ

स्तोत्रका जो मनुष्य परम भक्तिसे पाठ करता है, वह विष्णुलोकको प्राप्त करता है । (अध्याय ३३)

English

o.l.ctfArtf.

अध्याय २३

श्लोक 28

शिवो दाता शिवो भोक्ता शिवः सर्वमिदं जगत् ।शिवो जयति सर्वत्र यः शिवः सो ऽहमेव च

śivo dātā śivo bhoktā śivaḥ sarvamidaṃ jagat / śivo jayati sarvatra yaḥ śivaḥ so 'hameva ca

हिन्दी अर्थ

भगवान् हयग्रीवके पूजनकी विधि

English

The most important nerve in the buman nervous system, being in the middle of the body. (CSL )

अध्याय २३

श्लोक 29

यत्कृतं यत्करिष्यामि तत्सर्वं सुकृतं तव(तस्तवम्) ।त्वं त्राता विश्वनेता च नान्योनाथो ऽस्तिमेशिव

yatkṛtaṃ yatkariṣyāmi tatsarvaṃ sukṛtaṃ tava(tastavam) / tvaṃ trātā viśvanetā ca nānyonātho 'stimeśiva

हिन्दी अर्थ

रुद्रने कहा--हे हृषीकेश! है गदाधर! आप

English

In a lotus of twelve ends the ISvaras are beyond.

अध्याय २३

श्लोक 30

अथान्येन प्रकारेण शिवपूजां वदाम्यहम् ।गणः सरस्वती नन्दी महाकालो ऽथगङ्गया

athānyena prakāreṇa śivapūjāṃ vadāmyaham / gaṇaḥ sarasvatī nandī mahākālo 'thagaṅgayā

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने कहा- है रुद्र! अब मैं हयग्रीव

English

Cat?agurUf Bijaguru Anania Dhamaka jfiunr,

अध्याय २३

श्लोक 31

पवनास्त्रं वास्त्वधिपो द्वारि पूर्वादितस्त्विमे ।इन्द्राद्याः पूजनीयाश्च तत्त्वानि पृथिवी जलम्

pavanāstraṃ vāstvadhipo dvāri pūrvāditastvime / indrādyāḥ pūjanīyāśca tattvāni pṛthivī jalam

हिन्दी अर्थ

पुनः देवार्चनविधिको बतायें। आपके द्वारा बार- नामके देवके पूजनविधानको कहता हूँ, आप सुनें। बार देव-पूजनविधिको सुनकर भी मुझे तृप्ति नहीं उसके करनेसे जगत्के स्वामी भगवान् विष्णु

English

Both of them are pronefaced and supine*faced. The pericarp and filaments of the lotus are contemplated. One should always contemplate iheAtmavidyd (study of soul) and those others beginning with Vdmd.

अध्याय २३

श्लोक 32

तेजो वायुर्व्योम गन्धो रसरूपे च शब्दकः ।स्पर्शो वाक् पाणि पादं च पायूपस्थं श्रुतित्वचम्

tejo vāyurvyoma gandho rasarūpe ca śabdakaḥ / sparśo vāk pāṇi pādaṃ ca pāyūpasthaṃ śrutitvacam

हिन्दी अर्थ

काण्ड भगवान् हयग्रीवके पूजनकी विधि ५९

English

The Taltva named u>a should be thought of in the seal of Siva. The Murti is Ho Haum, Obeisance to Vidya deha.

अध्याय २३

श्लोक 33

चक्षुर्जिह्वा घ्राणमनो बुद्धिश्चाहं प्रकृत्यपि ।पुमान्नागो बुद्धिविद्ये कला कालो नियत्यपि

cakṣurjihvā ghrāṇamano buddhiścāhaṃ prakṛtyapi / pumānnāgo buddhividye kalā kālo niyatyapi

हिन्दी अर्थ

हे शङ्कर! उस पूजनका मूल मन्त्र है वृषध्वज! “समस्तपरिवाराय अच्युताय ही वाचक है। वह परम पुण्यशाली मन्त्र इसनमः'-इस मन्त्रसे मण्डलके मध्यमें भगवान् प्रकार है— विष्णुका पूजन करके द्वारपर गङ्गा, महादेवी तथा “ॐ सौं क्षौं शिरसे नमः” यह प्रणव-युक्त शङ्ख एवं पद्म नामक निधिकी पूजा करके

English

He has five faces. Of his ten hands the five on the right carry Abhaya Prasdda Sakti Sdla (trident) and }\hatt>dikgaA

अध्याय २३

श्लोक 34

माया च शुद्ध विद्या च ईश्वरश्च सदाशिवः ।शक्तिः शिवश्च ताञ्ज्ञात्वा मुक्तो ज्ञानी शिवो भवेत्

māyā ca śuddha vidyā ca īśvaraśca sadāśivaḥ / śaktiḥ śivaśca tāñjñātvā mukto jñānī śivo bhavet

हिन्दी अर्थ

है। शक्तिकी पूजा करनी चाहिए। ॐ क्षां हृदयाय नमः, ॐ क्षीं शिरसे स्वाहा, है महादेव! तदनन्तर कूर्म, अनन्त एवं पृथ्वीका 3 क्षूं शिखायै वषट्, ॐ क्षैं कवचाय हुम्, पूजन करे और अग्निकोणमें धर्म, नै्ऋत्यकोणमें क्षौं नेत्रत्रयाय वौषट्, ३ हः अस्त्राय फट्-इन ज्ञान, वायुकोणमें वैराग्य तथा ईशानकोणमें ऐश्वर्यका

English

And the left ones carry Serpent, Aksasuirefi drums, blue lotus and the pomegranate.

अध्याय २३

श्लोक 35

यः शिवः स हरिर्ब्रह्मा सो ऽहं ब्रह्मास्मि शङ्कर

yaḥ śivaḥ sa harirbrahmā so 'haṃ brahmāsmi śaṅkara

हिन्दी अर्थ

हे शङ्कर! वे हयग्रीव देव शङ्क, कुन्दपुष्प, अधर्म, दक्षिण दिशामें अज्ञान, पश्चिम दिशामें चन्द्रके सदृश श्वेतवर्ण, कमलनालतन्तु और अवैराग्य तथा उत्तर दिशामें अनैश्वर्यका भी पूजन रजतधातुकी कान्तिके समान देहकान्तिको धारण करना चाहिए। इसके बाद मण्डलके मध्यमें सत्त्व, करनेवाले, गौके दुग्धकी भाँति और करोड़ोंरजस् तथा तमस्-इन तीन गुणोंकी पूजा करके

English

A particular posture ia religious meditation. uTum&U I'ifftapddath puTiastu dakijh podant /

अध्याय २३

श्लोक 36

भूतशुद्धिं प्रवक्ष्यामि यया शुद्धः शिवो भवेत् ।हृत्पद्मे सद्योमन्त्रः स्यान्निवृत्तिश्च कला इडा

bhūtaśuddhiṃ pravakṣyāmi yayā śuddhaḥ śivo bhavet / hṛtpadme sadyomantraḥ syānnivṛttiśca kalā iḍā

हिन्दी अर्थ

सूर्योके सदृश प्रतिभासित होनेवाले, शङ्ख, चक्र, मध्यभागमें ही कन्द, नाल और पद्मकी विधिवत् गदा तथा पद्मको धारण किये हुए चार भुजावाले पूजा करे। तदनन्तर मध्यदेशमें अर्क, सोम और हैं। वे सर्वव्यापी देवता मुकुट, कुण्डल, वनमालासे अग्निमण्डलका पूजन करना चाहिए। सुशोभित, सुदर्शनचक्रसे युक्त, सुन्दर-सुन्दर है वृषध्वज! विमला, उत्कर्षिणी, ज्ञाना, क्रिया,

English

A particular mvdrd of hand promising protection.

अध्याय २३

श्लोक 37

पिङ्गला द्वे च नाड्यौ तु प्राणो ऽपानश्च मारुतौ ।इन्द्रो देहो ब्रह्महेतुश्चतुरस्त्रं च मण्डलम्

piṅgalā dve ca nāḍyau tu prāṇo 'pānaśca mārutau / indro deho brahmahetuścaturastraṃ ca maṇḍalam

हिन्दी अर्थ

कपोलोंवाले, पीताम्बरको धारण किये हुए हैं । योगा, प्रह्ली, सत्या, ईशाना तथा अनुग्रहा नामक ये सभी देवॉसे युक्त उन विराट्देबकी अपनेमें भावना शक्तियाँ हैं । पूर्वादि दिशाओंमें-पूर्व, दक्षिण, करके अङ्गमन्त्रोंसे तथा मूल मन्त्रसे न्यास करना पश्चिम तथा उत्तरमें अवस्थित पद्मपत्रोंपर यथाक्रम, चाहिए। इसके पश्चात् मूल मन्त्रसे ही शङ्ख, '3 विमलायै नमः ', ' ॐ उत्कर्षिण्यै नमः ', ' ॐ

English

A rosary.

अध्याय २३

श्लोक 38

वक्त्रेण लाञ्छितं वायुमेकोद्धातगुणाः शराः ।त्दृत्स्थानसादृश्यरुतं शतकोटिप्रविस्तरम्

vaktreṇa lāñchitaṃ vāyumekoddhātaguṇāḥ śarāḥ / tdṛtsthānasādṛśyarutaṃ śatakoṭipravistaram

हिन्दी अर्थ

पद्मादिकी मङ्गलमयी मुद्राएँ प्रदर्शित करनी चाहिए । ज्ञानायै नमः ', ' ॐ क्रियायै नमः”, ' 3 योगायै हे शङ्कर! इस प्रकार मुद्राएँ दिखा करके मूलनमः' इत्यादि मन्त्रोंसे विमलादि शक्तियोंका पूजन

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 39

ॐ ह्रीं प्रतिष्ठायै ह्रूं ह्रः फट् ।ॐ ह्रीं ह्रूं विद्यायै ह्रं ह्रः फट् ।चतुरशीतिकोटीनामुच्छ्रयं भूमितन्त्रकम्

oṃ hrīṃ pratiṣṭhāyai hrūṃ hraḥ phaṭ / oṃ hrīṃ hrūṃ vidyāyai hraṃ hraḥ phaṭ / caturaśītikoṭīnāmucchrayaṃ bhūmitantrakam

हिन्दी अर्थ

हे रुद्र! इसके बाद हयग्रीवके आसनके संनिकटकि वे अनुग्रहा नामक शक्तिकी पूजा पद्मकी अवस्थित रहनेवाले जो अन्य देव हैं, उनका कर्णिकामें ' ॐ अनुग्रहायै नमः' इस मन्त्रसे करें। आवाहन करना चाहिए। यथा-- इस विधिसे स्नान, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, ॐ हयग्रीवासनस्य आगच्छत च देवताः।' नैवेद्य समर्पण करके देवके आसनका मङ्गलमय

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 40

तन्मध्ये भववृक्षं च आत्मानं च विचिन्तयेत् ।अधोमुखीं ततः पृथ्वीं तत्तच्छुध्दं भवेद्ध्रुवम्

tanmadhye bhavavṛkṣaṃ ca ātmānaṃ ca vicintayet / adhomukhīṃ tataḥ pṛthvīṃ tattacchudhdaṃ bhaveddhruvam

हिन्दी अर्थ

¬इस प्रकार आवाहन करके स्वस्तिक यापूजन करना चाहिए। इस पूजाके पश्चात् देवाधिदेव सर्वतोभद्रमण्डलके अन्तर्गत उन देवोंका पूजन भगवान् हयग्रीवदेवका मण्डलमें आवाहन करना करके द्वारपर धाता और विधाताकी पूजा सम्पन्नचाहिए। आवाहन करके समाहित होकर उनका करनी चाहिए। न्यास भी करना चाहिए। न्यास करनेके पश्चात्

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 41

वामा देवी प्रतिष्ठा च सुषुम्ना धारिका तथा ।समानोदानवरुणा देवता विष्णु कारणम्

vāmā devī pratiṣṭhā ca suṣumnā dhārikā tathā / samānodānavaruṇā devatā viṣṇu kāraṇam

हिन्दी अर्थ

जव SS त ता म सिसि त रि सति नि सि तर कारक

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 42

अद्धाताश्च गुणा वेदाः श्वेतं ध्यानं तथैव च ।एवं कुर्यात्कण्ठपद्ममर्धचन्द्राख्यमण्डलम्

addhātāśca guṇā vedāḥ śvetaṃ dhyānaṃ tathaiva ca / evaṃ kuryātkaṇṭhapadmamardhacandrākhyamaṇḍalam

हिन्दी अर्थ

देवों और असुरोंसे नमस्कृत देवाधिदेव परमेश्वर नमः ', ' ॐ सवाहनाय सपरिवाराय अग्नये नमः , भगवान् हयग्रीवका पुनः ध्यान करना चाहिए और ' ॐ यमाय नमः”, ॐ निर्त्रश्तये नमः”, “३० शङ्ख-चक्रादि मङ्गलमयी मुद्रा प्रदर्शित करनी वरुणाय नमः ', ' ॐ वायवे नमः ', ॐ सोमाय चाहिए। उसके बाद पाद्य, अर्घ्य, आचमन तथा नमः ', ' ३ ईशानाय नमः ', ३० अनन्ताय नमः ',

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 43

पद्माङ्कितं द्विविंशतिककोटिविस्तीर्णमौ स्मरेत् ।चतुर्नवत्युच्छ्रयं च आत्मानं च अधोमुखम्

padmāṅkitaṃ dviviṃśatikakoṭivistīrṇamau smaret / caturnavatyucchrayaṃ ca ātmānaṃ ca adhomukham

हिन्दी अर्थ

स्नान प्रदान करे। है वृषध्वज! उन्हें वस्त्र प्रदान : ॐ ब्रह्मणे नमः '-- इन मन्त्रोंसे पूर्व आदि दिशाओंसे करनेके बाद आचमन प्रदानकर उनको सुन्दर ऊर्ध्वदिशापर्यन्त इन्द्र, अग्नि आदि सभी दिगू- यज्ञोपवीत समर्पित करना चाहिए और उन्हें पाद्य, देवताओंकी पूजा करनी चाहिए। अर्घ्य आदि प्रदान करना चाहिए। अनन्तर मूल इसके बाद “3 वज्राय नमः, ' ३ शक्तये

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 44

तालुस्थानं च पद्मं च अघोरो विद्ययान्वितः ।नाभ्यो(ड्यो) ष्ठयोर्हस्तिजिह्वाध्यानो नागोग्निदेवता

tālusthānaṃ ca padmaṃ ca aghoro vidyayānvitaḥ / nābhyo(ḍyo) ṣṭhayorhastijihvādhyāno nāgognidevatā

हिन्दी अर्थ

उनका विधिवत् पूजन करना चाहिए। ' ॐ पाशाय नमः', “3७ ध्वजाय नमः', ' ॐ हे शिव! इसके बाद शुभदायिनी तथा ऐश्वर्य गदायै नमः', ' ॐ त्रिशूलाय नमः ', ' ३७ चक्राय प्रदान करनेवाली परमादेवी लक्ष्मीकी पूजा करे । नमः ', ॐ पद्माय नमः '--इन मन्त्रोंसे वज्र, शक्ति पूर्व दिशामें ' ॐ शङ्खाय नमः” कहकर शङ्का, आदि आयुधोंको पूजा करे।

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 45

रुद्रहेतुस्त्रिरुद्धातास्त्रिगुणा रक्तवर्णकम् ।ज्वालाकृते त्रिकोणं च चतुः कोटिशतानि च

rudrahetustriruddhātāstriguṇā raktavarṇakam / jvālākṛte trikoṇaṃ ca catuḥ koṭiśatāni ca

हिन्दी अर्थ

दक्षिण दिशामें ' ॐ पद्माय नमः' कहकर पद्मका, तत्पश्चात् ईशानकोणमें ' ॐ विष्वक्सेनाय नमः ' पश्चिम दिशामें ' ॐ चक्राय नमः' से चक्रका तथा इस मन्त्रसे विष्वक्सेनको पूजा करे इसी प्रकार उत्तर दिशामें ' ॐ गदायै नमः ' से गदाका यथाक्रम अनन्तकी भी पूजा करे। है वृषभध्वज! भगवान् पूजन करे। हयग्रीबके मूल मन्त्रसे गन्ध, पुष्प, धूप, दीप तथा

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 46

विस्तीर्णं च समुत्सेधं रुद्रतत्त्वं विचिन्तयेत् ।ललाटे वै तत्पुरुषः शान्तिर्यः शाद्वलं बुधाः (वृषा)

vistīrṇaṃ ca samutsedhaṃ rudratattvaṃ vicintayet / lalāṭe vai tatpuruṣaḥ śāntiryaḥ śādvalaṃ budhāḥ (vṛṣā)

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार पुनः पूर्व दिशामें ' ॐ खड्गाय नैवेद्यके द्वारा उनकी पूजा करनी चाहिए। तत्पश्चात् नमः' से खड्ग, दक्षिण दिशामें ॐ मुसलाय उन (देव हयग्रीव)-को प्रदक्षिणा करके नमस्कार नमः ' से मुसल, पश्चिम दिशामें ' ॐ पाशाय नमः ' करे और यथाशक्ति मूल मन्त्रका जपकर उन्हें से पाश, उत्तर दिशामें '३ॐ अंकुशाय नमः? से समर्पित कर दे। तदनन्तर देवेश्वर भगवान् हयग्रीवकी

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 47

कूर्मश्च कृकरो वायुर्देव ईश्वरकारणम् ।द्विरुद्धातो गुणौ द्वौ च धूम्रषट्कोणमण्डलम्

kūrmaśca kṛkaro vāyurdeva īśvarakāraṇam / dviruddhāto guṇau dvau ca dhūmraṣaṭkoṇamaṇḍalam

हिन्दी अर्थ

अंकुश तथा मध्यमें सशराय धनुषे नमः' इस प्रकार स्तुति करनी चाहिए कहकर शरयुक्त धनुषकी पूजा करनी चाहिए। ३ नमो हयशिरसे विद्याध्यक्षाय वै नमः॥ हे रुद्र! पुनः पूर्व आदि चार दिशाओंमें नमो विद्यास्वरूपाय विद्यादात्रे नमो नमः। श्रीवत्स, कौस्तुभ, वनमाला और मङ्गलमय नमः शान्ताय देवाय त्रिगुणायात्मने नमः॥

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 48

बिन्द्वङ्कितं चाष्टकोटिविस्तीर्णं चोच्छ्रयस्तथा ।चतुर्दशाधिकं कोटिवायुतत्त्वं विचिन्तयेत्

bindvaṅkitaṃ cāṣṭakoṭivistīrṇaṃ cocchrayastathā / caturdaśādhikaṃ koṭivāyutattvaṃ vicintayet

हिन्दी अर्थ

पीताम्बरकी पूजा करके पुनः शङ्कु, चक्र, गदाधारी सुरासुरनिहन्त्रे च सर्वुष्टविनाशिने। भगवान् हयग्रीवकी पूजा करे। सर्वलोकाधिपतये ब्रहारूपाय वै नमः॥ तदनन्तर ॐ ब्रह्मणे नमः' से ब्रह्मा, '३७ नमश्चेश्वरवन्द्याय शङ्खचक्रधराय च। नारदाय नमः ' से नारद, ' ॐ सिद्धाय नमः” से नम आद्याय दान्ताय सर्वसत्त्वहिताय च॥

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 49

द्वादशति सरसिजे शान्त्य तीतास्तथेश्वराः ।कुहूश्च शङ्खिनी नाड्यो देवदत्तो धनञ्जयः

dvādaśati sarasije śāntya tītāstatheśvarāḥ / kuhūśca śaṅkhinī nāḍyo devadatto dhanañjayaḥ

हिन्दी अर्थ

सिद्ध, ' ॐ गुरुभ्यो नमः ' से गुरु, ' ० परगुरुभ्यो त्रिगुणायागुणायैव ब्रह्मविष्णुस्वरूपिणे। नमः! से परगुरु और ' ॐ गुरुपादुकाभ्यां नमः' से कर्त्रे इत्रे सुरेशाय सर्वगाय नमो नमः॥ गुरुपादुकाकी पूजा करे । (३४। ५०-५४) तत्पश्चात् ' ३० सवाहनाय सपरिवाराय इन्द्राय 'सर्वविद्याधिपति अश्वशिर भगवान्को नमस्कार

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 50

शिखैशानकारणं च सदाशिव इति स्मृतः ।गुण एकस्तथोद्धातः शुद्धस्फटिकवत्स्मरेत्

śikhaiśānakāraṇaṃ ca sadāśiva iti smṛtaḥ / guṇa ekastathoddhātaḥ śuddhasphaṭikavatsmaret

हिन्दी अर्थ

काण्ड गायत्रीन्यास तथा संध्या-विधि ६१

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 51

षोडशकोटिविस्तीर्णं पञ्चविंशतिकोच्छ्रयम् ।वर्तुलं चिन्तयेव्द्योम भुतशुद्धिरुदाहृता

ṣoḍaśakoṭivistīrṇaṃ pañcaviṃśatikocchrayam / vartulaṃ cintayevdyoma bhutaśuddhirudāhṛtā

हिन्दी अर्थ

है। विद्यास्वरूप, विद्याप्रदायक उन देवके लिये हयग्रीवको बारम्बार नमस्कार है।

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 52

गुणयो गुरुर्बोजगुरुः शक्तयनन्तौ च धर्ंमकः ।ज्ञानवैराग्यमैश्वर्यैस्ततः पूर्वादिपत्रके

guṇayo gururbojaguruḥ śaktayanantau ca dharṃmakaḥ / jñānavairāgyamaiśvaryaistataḥ pūrvādipatrake

हिन्दी अर्थ

बार-बार नमन है । शान्तस्वरूप, त्रिगुणात्मक, सुर इस प्रकार स्तुति करके अपने हृदयकमलके तथा असुरोंका निग्रह करनेवाले, सभी दुष्टोंका मध्य शङ्क, चक्र और गदाको धारण करनेवाले, विनाश करनेवाले, सर्वलोकाधिपति ब्रह्मस्वरूप करोड़ों सूर्योके समान कान्तिमान्, सर्वाङ्गसुन्दर, उन देव हयग्रीवके लिये नमस्कार है । महेश्वरके अविनाशी महेश्वरके भी ईश, देवाधिदेव, परमात्मा

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 53

अधोर्ध्ववदने द्वे च पद्मकर्णिककेसरम् ।वामाद्या आत्मविद्या च सदा ध्यायेच्छिवाख्यकम्

adhordhvavadane dve ca padmakarṇikakesaram / vāmādyā ātmavidyā ca sadā dhyāyecchivākhyakam

हिन्दी अर्थ

लिये भी वन्दनीय, शङ्क-चक्रधारी, जगत्के आदि हयग्रीवका ध्यान करना चाहिए ।

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 54

तत्त्वं शिवासने मूर्तिर्हे हौं विद्यादेहाय नमः ।बद्धपद्मासनासीनः सितः षोडशवार्षिकः

tattvaṃ śivāsane mūrtirhe hauṃ vidyādehāya namaḥ / baddhapadmāsanāsīnaḥ sitaḥ ṣoḍaśavārṣikaḥ

हिन्दी अर्थ

कारण, परम उदार तथा सभी प्राणियोंका हित है शङ्कर! इस प्रकार मैंने भगवान् हयग्रीवकी करनेवाले देवके लिये नमस्कार है । त्रिगुणात्मक, पूजा-विधिका वर्णन किया। परम भक्तिपूर्वक त्रिगुणातीत, ब्रह्मा-विष्णुस्वरूप, जगतूकी सृष्टिके जो इसका पाठ करता है, वह परमपदको प्राप्त कर्ता, संहर्ता, देवेश्वर तथा सर्वव्यापक उन भगवान् होता है । (अध्याय ३४)

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 55

पञ्चवक्त्रः कराग्रैः स्वैर्दशभिश्चैव धारयन् ।अभयं प्रसादं शक्तिं शूलं खट्वाङ्गमीश्वरः

pañcavaktraḥ karāgraiḥ svairdaśabhiścaiva dhārayan / abhayaṃ prasādaṃ śaktiṃ śūlaṃ khaṭvāṅgamīśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने कहा--हे शङ्कर! अब मैं गायत्रीदेवीके अपने अङ्गोंमें न्यास करना चाहिए । पूजनमें न्यासादिका वर्णन करूँगा, आप इसका पैरके अंगुष्ठ-भागमें, गुल्फके मध्यमें, दोनों श्रवण करें। इस (गायत्री-मन्त्र)-के ऋषि विश्वामित्र, जंघाओं, दोनों जानुंओं, ऊरु-भाग, गुह्यस्थान,

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 56

दक्षैः करैर्वामकैश्च भुजङ्गं चाक्षसूत्रकम् ।डमरुकं नीलोत्पलं बीजपूरकमुत्तमम्

dakṣaiḥ karairvāmakaiśca bhujaṅgaṃ cākṣasūtrakam / ḍamarukaṃ nīlotpalaṃ bījapūrakamuttamam

हिन्दी अर्थ

ये विष्णुके हृदयमें रहनेवाली हैं। ये विनियोग- स्तन, हृदय, कण्ठ, ओष्ठ, मुख, तालु, दोनों कालमें एकनेत्रा हैं। इनका प्रादुर्भाव कात्यायन- स्कन्धप्रदेश, दोनों नेत्र और भौंहों तथा मस्तकमें गोत्रमें हुआ है, तीनों लोक इनके चरण हैं तथा ये इस (गायत्री) -मन्त्रका न्यास करके क्रमश:--पूर्व, पृथ्वीकी कोखमें स्थित रहती हैं। गायत्रीदेवीके दक्षिण, उत्तर तथा पश्चिम दिशामें इनका न्यास

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 57

इच्छाज्ञानक्रियाशक्तिस्त्रिनेत्रो हि सदाशिवः ।एवं शिवार्चनध्यानी सर्वदा कालवर्जितः

icchājñānakriyāśaktistrinetro hi sadāśivaḥ / evaṃ śivārcanadhyānī sarvadā kālavarjitaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वरूपको इस प्रकार जानकर गायत्री-मन्त्रका करना चाहिए। बारह लाख जप करना चाहिए। है रुद्र! इन गायत्रीदेवीके मन्त्रके वर्णो (रंगों)-

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 58

इहाहोरा वचारेण त्रीणि वर्षाणि जीवति ।दिनद्वयस्य चारेण जीवेद्वर्षद्वयं नरः

ihāhorā vacāreṇa trīṇi varṣāṇi jīvati / dinadvayasya cāreṇa jīvedvarṣadvayaṃ naraḥ

हिन्दी अर्थ

इस मन्त्रके त्रिपाद तथा चतुष्पाद अर्थात् तीन को कह रहा हूँ। क्रमशः इसके (चौबीस) अक्षर चरण तथा चार चरण होते हैं। त्रिपादके प्रत्येक इन्द्रनीलमणि, अग्निसदूश, पीत, श्याम, कपिलवर्ण, चरणमें आठ अक्षर तथा चतुष्पादके प्रत्येक चरणमें श्वेत, विद्युत्प्रभ, मौक्तिकवर्ण, कृष्ण, रक्त, श्याम, छः अक्षर होते हैं। जपमें त्रिपदा और पूजनमें शुक्ल, पीत, श्वेत, पद्मरागतुल्य, शङ्खवर्ण, पाण्डुर,

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

अध्याय २३

श्लोक 59

दिनत्रयस्य चारेण वर्षमेकं स जीवति ।नाकाले शीतले मृत्युरुष्णे चैव तु कारके

dinatrayasya cāreṇa varṣamekaṃ sa jīvati / nākāle śītale mṛtyuruṣṇe caiva tu kārake

हिन्दी अर्थ

चतुष्पदा गायत्रीके मन्त्रका प्रयोग करनेके लिये रक्त, आसवके समान रक्तकृष्णमिश्रित, सूर्यसदुश, कहा गया है । सौम्य, श्वेत, शङ्खकी आभाके समान तथा श्वेत हैं।

English

If in three days he shall live for one year. He will never have premature death or death due to cold or heat.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 23
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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