Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
24
अध्याय 24 / 317

Book 1 - Adhyaya 24

10 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ10 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय २४

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे शिवार्चननिरूपणं नाम त्रयोविंशो ऽध्यायः (इति शिवादिपूजा समाप्ता) ।श्रीगरुडमहापुराणम्- २४ सूत उवाच ।वक्ष्ये गणादिकाः पूजाः सर्वदा स्वर्गदाः पराः ।गणासनं गणमूर्ति गणाधिपतिमर्चयेत्

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe śivārcananirūpaṇaṃ nāma trayoviṃśo 'dhyāyaḥ (iti śivādipūjā samāptā) / śrīgaruḍamahāpurāṇam- 24 sūta uvāca / vakṣye gaṇādikāḥ pūjāḥ sarvadā svargadāḥ parāḥ / gaṇāsanaṃ gaṇamūrti gaṇādhipatimarcayet

हिन्दी अर्थ

जप, ध्यान, यज्ञादि कृत्य एवं पूजनके कार्योमें गायत्रीदेवीके मन्त्रका जप करके मनुष्य जिन- नित्य इस सर्वपापविनाशिनी गायत्रीदेवीका विधिवत् जिन वस्तुओंका हाथसे स्पर्श करता है और नेत्रोंसे

English

I shall now describe the most excellent worship of

अध्याय २४

श्लोक 2

गामादिहृदयाद्यङ्गं दुर्गाया गुरुपादुकाः ।दुर्गासनं च तन्मूर्तिं ह्रीं दुर्गे रक्षणीति च

gāmādihṛdayādyaṅgaṃ durgāyā gurupādukāḥ / durgāsanaṃ ca tanmūrtiṃ hrīṃ durge rakṣaṇīti ca

हिन्दी अर्थ

१-जिस गायत्री-मन्त्रका जप किया जाता है, वह त्रिपदा गायत्री कहलाती है। परोरजसेऽसावदोम्०' यह गायत्रीका चतुर्थ पाद है। इस चतुष्पदा गायत्रीका प्रयोग सूर्योपस्थान, पूजन आदिमें होता है। २-गुल्फ (पैरकी घुट्टी) पाँवोंकी गाँठें। ३-जानु (घुटना) । ४-ऊरु-घुटनेके ऊपरका भाग।

English

Heart and other limbs should be assigned to Durgfi

अध्याय २४

श्लोक 3

त्दृदादिकं नव शक्त्यो रुद्रचण्डा प्रचण्डया ।चण्डोग्रा चण्डनायिका चण्डा चण्डवती क्रमात्

tdṛdādikaṃ nava śaktyo rudracaṇḍā pracaṇḍayā / caṇḍogrā caṇḍanāyikā caṇḍā caṇḍavatī kramāt

हिन्दी अर्थ

जिनका-जिनका अवलोकन करता है, वे सभी मा मन्युश्चे०' इस मन्त्रके द्वारा यथाविधि आचमन पवित्र हो जाते हैं । गायत्रीसे श्रेष्ठ कोई दूसरा मन्त्र करके प्रणव-मन्त्रसे युक्त 'आपों हि०' इस ऋचासे

English

With the heart etc. assignment should be made to the eight akti :— Rudracaod, Pracadd, Candogrd, Cad<" Myikd, Cad Catjidpcti.

अध्याय २४

श्लोक 4

चणारूपा चण्डिकाख्या दुर्गेदुर्गे ऽथ रक्षिणि ।वज्रखड्गादिका मुद्राः शिवाद्या वह्निदेशतः

caṇārūpā caṇḍikākhyā durgedurge 'tha rakṣiṇi / vajrakhaḍgādikā mudrāḥ śivādyā vahnideśataḥ

हिन्दी अर्थ

नहीं है, ऐसा समझना चाहिए-- कुशोदकके द्वारा मार्जन करते हुए प्रत्येक पदपर यद्यत्स्पृशति हस्तेन यच्च पश्यति चक्षुषा। । जल सिरपर छिड़के। पूतं भवति तत् सर्व गायत्र्या न परं विदुः॥ रजोगुणसे उत्पन्न होनेवाले पाप, तमोगुण और

English

CaniarUpd, and Ca94itd with the mantra— Durgi DurgtUha rakfitfu The MudrSs (myatic signs) Vajraf Khaiga etc. shall be assigned to iva and othen in the south-east.

अध्याय २४

श्लोक 5

सदाशिवमहाप्रेतपद्मासन मथापि वा ।ऐं क्लीं (ह्रीं) सौस्त्रिपुरायै नमः ।ॐ ह्रां ह्रीं क्षें क्षैं स्त्रीं स्कीं र्ॐ स्फें स्फीं शां पद्मासनं च मूर्तिं च त्रिपुरात्दृदयादिकम्

sadāśivamahāpretapadmāsana mathāpi vā / aiṃ klīṃ (hrīṃ) saustripurāyai namaḥ / oṃ hrāṃ hrīṃ kṣeṃ kṣaiṃ strīṃ skīṃ roṃ spheṃ sphīṃ śāṃ padmāsanaṃ ca mūrtiṃ ca tripurātdṛdayādikam

हिन्दी अर्थ

(३५। ११) अज्ञानजन्य पाप, जाग्रत्, स्वप्न और सुषुप्तिको श्रीहरिने पुनः कहा- है रुद्र! अब पापविनाशिनी स्थितिमें होनेवाले पाप तथा कायिक, वाचिक एवं संध्याकी विधिका वर्णन कर रहा हूँ । उसे आप मानसिक--ये नवों पाप इन नौ मन्त्रोंसे (मार्जनद्वारा) सुनें। तीन बार प्राणायाम करके संध्या -स्नानका भस्म हो जाते हैं-

English

Then SadUiva the lord of the big goblins and the lotus-seat also shall be worshiped.

अध्याय २४

श्लोक 6

पीठाम्बुजे तु ब्राहयादीर्ब्रह्माणी च महेश्वरी ।कौमारी वैष्णवी पूज्या वाराही चेन्द्रदेवता

pīṭhāmbuje tu brāhayādīrbrahmāṇī ca maheśvarī / kaumārī vaiṣṇavī pūjyā vārāhī cendradevatā

हिन्दी अर्थ

उपक्रम करे। प्राणवायुको संयतकर प्रणवमन्त्र रजस्तमःस्वमोहोत्थान् जाग्रत्स्वप्नसुषुप्तिजान्। (३कार) तथा सप्त व्याहतिसे युक्त गायत्री- वाङ्मनःकर्मजान् दोषान् नवैतान् नवभिर्दहित्॥

English

Cdmuvdi Catf>4ikd. Then the devotees shall wor¬ ship the Bhairavas, There are eight Bhairavasi Asiidfigay Rufat Cadt Krodhat Unmattabhairaim.

अध्याय २४

श्लोक 7

चामुण्डा चण्डिका पूज्या भैरवाख्यांस्ततो यजेत् ।असिताङ्गोरुरुश्चण्डः क्रोध उन्मत्तभैरवः

cāmuṇḍā caṇḍikā pūjyā bhairavākhyāṃstato yajet / asitāṅgoruruścaṇḍaḥ krodha unmattabhairavaḥ

हिन्दी अर्थ

इस गायत्री सिरके साथ तीन बार उच्चारण करनेको दाहिने हाथमें जल लेकर उसे 'द्रुपदा०' प्राणायाम कहते हैं । द्विज प्राणायामोंके द्वारा मानसिक, मन्त्रके द्वारा अभिमन्त्रितकर सिरपर छोड़ दे। वाचिक तथा कायिक दोषोंको भस्म कर लेता है। अघमर्घर्णं मन्त्रकी तीन, छः, आठ अथवा बारह इसीलिये यथाविधि यथानियत सभी कालोंमें आवृत्ति करके अघमर्षण करे। छ

English

By reciting for a hundred thousand times the names of Vardka fOtra pustakdbhaya samamUd (having

अध्याय २४

श्लोक 8

कपाली भीषणश्चैव संहारश्चाष्ट भैरवाः ।रतिः प्रीतिः कामदेवः पञ्च बाणाश्च योगिनी

kapālī bhīṣaṇaścaiva saṃhāraścāṣṭa bhairavāḥ / ratiḥ prītiḥ kāmadevaḥ pañca bāṇāśca yoginī

हिन्दी अर्थ

प्राणायामपरायण होना चाहिए । तत्पश्चात् 'उदु त्यं०' तथा “चित्र '--इन मन्त्रोंसे प्रातः 'सूर्यश्च०' इस मन्त्रके द्वारा, मध्याहमें सूर्योपस्थान करना चाहिए। इससे दिन तथा रात्रिमें

English

By reciting for a hundred thousand times the names of Vardka fOtra pustakdbhaya samamUd (having

अध्याय २४

श्लोक 9

वटुकं दुर्गया विघ्नराजो गुरुश्च क्षेत्रपः ।पद्मगर्भे मण्डले च त्रिकोणे चिन्तयेद्धृदि

vaṭukaṃ durgayā vighnarājo guruśca kṣetrapaḥ / padmagarbhe maṇḍale ca trikoṇe cintayeddhṛdi

हिन्दी अर्थ

आप: पुनन्तु० ' इस मन्त्रसे तथा सायंकाल ' अग्निश्च किये गये समस्त पाप उसी क्षण नष्ट हो जाते हैं। १-यहाँ संध्याका प्रकरण प्राणायामसे प्रारम्भ किया गया है, परंतु प्राणायामसे पूर्व संध्योपासनमें मालाधारण, पवित्रीकरण, शिखाबन्धन, भस्मधारण आदि करनेका विधान है । तत्पश्चात् आचमन, मार्जन, भूमिशोधनके अनन्तर संकल्प करके “क्रतञ्च०' इस मन्त्रसे आचमन करना चाहिए । तदनन्तर गायत्री-मन्त्रसे दिग्रक्षण करनेके पश्चात् विनियोगपूर्वक प्राणायाम करनेकी विधि

English

By reciting for a hundred thousand times the names of Vardka fOtra pustakdbhaya samamUd (having

अध्याय २४

श्लोक 10

शुक्लां वरदाक्षसूत्रपुस्ताभयसमन्विताम् ।लक्षजप्याच्च होमाच्च त्रिपुरा सिद्धिदा भवेत्

śuklāṃ varadākṣasūtrapustābhayasamanvitām / lakṣajapyācca homācca tripurā siddhidā bhavet

हिन्दी अर्थ

२-संध्यासे संध्याकाल लेना है । यह काल प्रातः, सायं एवं मध्याहमें आता है । ३-सूर्यश्च मा मन्युश्च मन्युपतयश्च मन्युकृतेभ्यः पापेभ्यो रक्षन्ताम् । यद्रात्र्या पापमकार्षं मनसा वाचा हस्ताभ्यां पद्भ्यामुदरेण

English

By reciting for a hundred thousand times the names of Vardka fOtra pustakdbhaya samamUd (having

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 24
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.