Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 262 / 317

Book 2 - Adhyaya 23

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अध्याय २६२

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे उत्तरखण्डे द्वितीयांशे धर्मकाण्डे प्रेतकल्पे भीष्म युधिष्ठिरसंवादे प्रेतत्वोत्पत्तितन्मुक्तिपेञ्चप्रेतोपाख्यान निरूपणं नाम द्वाविंशो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २३ गरुड उवाच ।किङ्किं कुर्वन्ति वै प्रेताः पिशाचत्वेव्यवस्थिताः ।वदन्ति वा कदाचित्किं तद्वदस्व सुरेश्वर

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe uttarakhaṇḍe dvitīyāṃśe dharmakāṇḍe pretakalpe bhīṣma yudhiṣṭhirasaṃvāde pretatvotpattitanmuktipeñcapretopākhyāna nirūpaṇaṃ nāma dvāviṃśo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 23 garuḍa uvāca / kiṅkiṃ kurvanti vai pretāḥ piśācatvevyavasthitāḥ / vadanti vā kadācitkiṃ tadvadasva sureśvara

हिन्दी अर्थ

आजीवन श्राद्ध करना चाहिए, तभी वह अतिवाहात्मक प्राशन करे, तब उसकी शुद्धि होती है। शूद्र सभी प्रेतरूप पिता पुत्रद्वारा दानमें दिये गये पदार्थोके वर्णोके शवोंका अनुगमन कर उन्हें जलाञ्जलि दे भोगोंसे सुख प्राप्त करता है । दग्ध हुए प्रेतके निमित्त सकता है, वैश्य तीन वर्णो (ब्राह्मण, क्षत्रिय और परिजनोंके द्वारा जो जलाञ्जलि दी जाती है, उससे वैश्य)-के शवोंका अनुगमन कर उन्हें जलाञ्जलि

English

What do the ghosts do in their ghosthood? When do they speak sometime? Please tell me, O lord of gods!

अध्याय २६२

श्लोक 2

श्रीभगवानुवाच ।तेषां स्वरूपं वक्ष्यामि चिह्नं स्वप्नं यथातथम् ।क्षुत्पिपासार्दितास्ते वै प्रविशेयुः स्ववेश्मनि

śrībhagavānuvāca / teṣāṃ svarūpaṃ vakṣyāmi cihnaṃ svapnaṃ yathātatham / kṣutpipāsārditāste vai praviśeyuḥ svaveśmani

हिन्दी अर्थ

प्रसन्न होकर वह प्रेत यमलोकमें जाता है। प्रेतकी दे सकता है, क्षत्रिय दो वर्णो (ब्राह्मण और संतृसिके लिये तीन दिनतक रात्रिमें एक चौराहेपर क्षत्रिय)-के शवोंका अनुगमन कर उन्हें जलाञ्जलि रस्सी बाँधकर तीन लकड़ियोंके द्वारा बनायी गयी दे सकता है और ब्राह्मण केवल अपने ही वर्णके तिगोड़ियाके ऊपर कच्ची मिट्टीके पात्रमें दूध भरकर शवका अनुगमन कर उसे जलाञ्जलि दे सकता है।'

English

I shall tell about their form, signs and dreams. Being oppressed by hunger and thirst they enter their former home.

अध्याय २६२

श्लोक 3

प्रतिष्ठा वायुदेहेषु शयानांस्तु स्ववंशजान् ।तत्र यच्छन्ति लिङ्गानि दर्शयन्ति खगेश्वर

pratiṣṭhā vāyudeheṣu śayānāṃstu svavaṃśajān / tatra yacchanti liṅgāni darśayanti khageśvara

हिन्दी अर्थ

रखना चाहिए। है पक्षिन्! वायुभूत वह प्रेत मृत्युके। है काश्यप! जलाञ्जलि देनेके पश्चात् दन्तधावन करना

English

Though possessed of airy forms, they give signs to their sleeping descendents, O bird.

अध्याय २६२

श्लोक 4

स्वपुत्रस्वकलत्राणि स्वबन्धुन्तत्र गच्छति ।हयो गजो वृषो मर्त्योदृश्यते विकृताननः

svaputrasvakalatrāṇi svabandhuntatra gacchati / hayo gajo vṛṣo martyodṛśyate vikṛtānanaḥ

हिन्दी अर्थ

१-अस्थि-संचयनके विषयमें संवर्त-वचनके अनुसार

English

They visit the place where their sons, wives and relatives sleep.

अध्याय २६२

श्लोक 5

शयानं विपरीतं तु आत्मानं च विपर्ययम् ।उत्थितः पश्यति यस्तु तद्विन्द्यात्प्रेतनिर्मितम्

śayānaṃ viparītaṃ tu ātmānaṃ ca viparyayam / utthitaḥ paśyati yastu tadvindyātpretanirmitam

हिन्दी अर्थ

(क) प्रथमेऽहनि तृतीये वा सप्तमे नवमे तथा। अस्थिसञ्चयनं कार्य दिने तद्गोत्रजैः सह ॥

English

If a person dreams of a horse, an elephant, a bull, or a man with deformed face, if a person awakened from sleep sees himself in the opposite side of the bed, this is all due to the working of a ghost.

अध्याय २६२

श्लोक 6

स्वप्ने नरौ हि निगडैर्बध्यते बहुधा यदि ।अन्नं च याचते स्वप्ने कुवेषः पूर्वजो मृतः

svapne narau hi nigaḍairbadhyate bahudhā yadi / annaṃ ca yācate svapne kuveṣaḥ pūrvajo mṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रथम दिन, तृतीय, सप्तम अथवा नवम दिन या दाहके पश्चात् ही चिताको जलसे शान्त करके अपने गोत्रवालोंके साथ अस्थि-संचयन करना चाहिए।

English

If one snatches the food from him while he is eating in dream, if thirsty, one drinks water,

अध्याय २६२

श्लोक 7

स्वप्ने यो भुज्यमानस्य गृहीत्वान्नं पलायते ।आत्मनस्तु परो वापि तृषार्तस्तु जलं पिबेत्

svapne yo bhujyamānasya gṛhītvānnaṃ palāyate / ātmanastu paro vāpi tṛṣārtastu jalaṃ pibet

हिन्दी अर्थ

२-इसका तात्पर्य यह है कि इस व्यवस्थाके अनुसार शवका अनुगमन करनेमें किसी विशेष प्रकारकी अशुचिता एवं उसकी

English

If in dream one rides a bull or moves with bulls or if one springs up in the sky or goes to a holy place hungry,

अध्याय २६२

श्लोक 8

वृषभारोहणं स्वप्ने वृषभैः सह गच्छति ।उत्पत्य गगनं याति तीर्थे याति क्षुधातुरः

vṛṣabhārohaṇaṃ svapne vṛṣabhaiḥ saha gacchati / utpatya gaganaṃ yāti tīrthe yāti kṣudhāturaḥ

हिन्दी अर्थ

शुद्धिके लिये किसी विशेष प्रायश्चि्तकी आवश्यकता नहीं होती। किसी तरहके आपत्कालमें अथवा लोकसंग्रहकी दृष्टिसे या अन्य किसी सहायकके अनृपलब्ध होनेपर जिस किसी भी जातिके शवकी अन्त्येष्टिके लिये यथोचित सहयोग सबको ही करना चाहिए और ऐसा करनेपर शास्त्रीय व्यवस्थाके अनुसार अशुचिताके निराकरणके लिये यथाविधान प्रायश्चित्त भी कर लेना चाहिए।

English

He who begs in dream oppressed by hunger or thirst should give pindas to the manes to ward off coming distress.

अध्याय २६२

श्लोक 9

स्ववाचा वदते यस्तु गोवृषद्विजावाजिषु ।लिङ्गे गजे तथा देवे भूते प्रेते निशाचरे

svavācā vadate yastu govṛṣadvijāvājiṣu / liṅge gaje tathā deve bhūte prete niśācare

हिन्दी अर्थ

चाहिए। सभी सगोत्री नौ दिनोंतक दन्तधावनका आदरपूर्वक भूमिपर तिल और दर्भको बिछाना परित्याग कर देते हैं तथा यथाविधान नौ दिनतक चाहिए ।

English

If one sees in dream his son, cattle, father, brother, wife, getting out of house, it is due to the working of a ghost.

अध्याय २६२

श्लोक 10

स्वप्नमध्ये तु पक्षीन्द्र प्रेतलिङ्गान्यनेकधा ।स्वकलत्रं स्वबन्धुं वा स्वसुतं स्वपतिं विभुम् ।विद्यमानं मृतं पश्येत्प्रेतदोषेण निश्चितम्

svapnamadhye tu pakṣīndra pretaliṅgānyanekadhā / svakalatraṃ svabandhuṃ vā svasutaṃ svapatiṃ vibhum / vidyamānaṃ mṛtaṃ paśyetpretadoṣeṇa niścitam

हिन्दी अर्थ

जलाझलि देनेके लिये जलाशयपर जाते हैं। विद्वानोंका जीव जहाँ-कहीं भी पशु या स्थावरयोनिमें कहना है कि जो भी मनुष्य जिस स्थान, मार्ग जन्म लेता है, जहाँ वह रहता है, वहींपर उसके अथवा घरमें मृत्युको प्राप्त करता है, उसको वहाँसे उद्देश्यसे दी गयी श्राद्धीय वस्तु पहुँच जाती है । श्मशानभूमिके अतिरिक्त कहीं अन्यत्र नहीं ले जिस प्रकार धनुर्धारीके द्वारा लक्ष्यवेधके लिये

English

These signs, O bird, call for atonement. One should bathe at home or at a holy place, give water oblation to a deity at the root of a fig tree.

अध्याय २६२

श्लोक 11

याचते यः परं स्वप्ने क्षुत्तृड्भ्यां च परिप्लुतः ।तीर्थे गत्वा दहेत्पिण्डान्प्रेतदौषैर्न संशयः

yācate yaḥ paraṃ svapne kṣuttṛḍbhyāṃ ca pariplutaḥ / tīrthe gatvā dahetpiṇḍānpretadauṣairna saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

जाना चाहिए। दाह-संस्कारके पश्चात् स्त्रियोंको आगे-आगे चलना चाहिए उनके पीछे-पीछे अन्य व्यक्तियोंके समूहको चलना चाहिए । वहाँसे आनेके बाद उन सभीको एक पत्थरके ऊपर बैठकर

English

Or give black corn, perform worship, offer gifts to a Vedic scholar and do homa as far as his means can allow.

अध्याय २६२

श्लोक 12

निर्गच्छेद्वा गृहाद्वापि स्वप्ने पुत्रस्तथा पशुः ।पिता भ्राता कलत्रं च प्रेतदोषैस्तु पश्यति

nirgacchedvā gṛhādvāpi svapne putrastathā paśuḥ / pitā bhrātā kalatraṃ ca pretadoṣaistu paśyati

हिन्दी अर्थ

आचमन करना चाहिए । तत्पश्चात् वे पूर्णपात्रमें रखी गयी यव, सरसों और दूर्बाका दर्शन करें, नीमकी पत्तियोंका प्राशन करें तथा तेल लगाकर स्नान करें। सगोत्रियोंमें जिनके यहाँ मृत्यु हुई है,

English

If, in faith, one reads or hears this discourse, the ghosts disappear immediately from his vicinity.

अध्याय २६२

श्लोक 13

चिह्नान्येतानि पक्षीन्द्र प्रायश्चित्तं निवेदयेत् ।कृत्वा स्नानं गृहे तीर्थे श्रीवृक्षे तर्पणं जलैः

cihnānyetāni pakṣīndra prāyaścittaṃ nivedayet / kṛtvā snānaṃ gṛhe tīrthe śrīvṛkṣe tarpaṇaṃ jalaiḥ

हिन्दी अर्थ

उनका भोजन नहीं करना चाहिए। अपने घरका अन्न नहीं खाना चाहिए और न ही खिलाना चाहिए। भोजन करनेमें मृत्पात्रका प्रयोग करना चाहिए एवं उस उच्छिष्ट पात्रको ऊपर मुख करके

English

If, in faith, one reads or hears this discourse, the ghosts disappear immediately from his vicinity.

अध्याय २६२

श्लोक 14

कृष्णधान्यानि पूजां च प्रदद्याद्वेदपारगे ।होमं कुर्याद्यथाशक्ति सम्पूर्णं वाचयेत्सुधीः

kṛṣṇadhānyāni pūjāṃ ca pradadyādvedapārage / homaṃ kuryādyathāśakti sampūrṇaṃ vācayetsudhīḥ

हिन्दी अर्थ

ही एकान्त स्थानमें रख देना चाहिए । मृतकके गुणोंका कीर्तन करे, “यमगाथा' का पाठ करे और पूर्वजन्ममें संचित शुभाशुभका चिन्तन करे ।

English

If, in faith, one reads or hears this discourse, the ghosts disappear immediately from his vicinity.

अध्याय २६२

श्लोक 15

एतद्धि श्रद्धया यस्तु प्रेतलिङ्गनिदर्शनम् ।पठते शृणुते वापि प्रेतचिह्नं विनश्यति

etaddhi śraddhayā yastu pretaliṅganidarśanam / paṭhate śṛṇute vāpi pretacihnaṃ vinaśyati

हिन्दी अर्थ

वह मृत प्राणी वायुरूप धारण करके इधर- उधर भटकता है और वायुरूप होनेसे ऊपरकी ओर जाता है। वह प्राप्त हुए शरीरके द्वारा ही अपने पुण्य और पापके फलोंका भोग करता है।

English

If, in faith, one reads or hears this discourse, the ghosts disappear immediately from his vicinity.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 262
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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