Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 264 / 317

Book 2 - Adhyaya 25

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अध्याय २६४

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे उत्तरखण्डे द्वितीयांशाख्ये धर्मकाण्डे प्रेतकल्पे श्रीकृष्णगरुडसंवादे ऽल्पायुर्मरणहे तुबालान्त्येष्ट्योर्निरूपणं नाम चतुर्विशो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २५ श्रीविष्णुरुवाच ।अतः परं प्रवक्ष्यामि पुरुषस्त्री विनिर्णयम् ।जीवन्वापि मृतो वापि पञ्चवर्षाधिको ऽपि वा

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe uttarakhaṇḍe dvitīyāṃśākhye dharmakāṇḍe pretakalpe śrīkṛṣṇagaruḍasaṃvāde 'lpāyurmaraṇahe tubālāntyeṣṭyornirūpaṇaṃ nāma caturviśo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 25 śrīviṣṇuruvāca / ataḥ paraṃ pravakṣyāmi puruṣastrī vinirṇayam / jīvanvāpi mṛto vāpi pañcavarṣādhiko 'pi vā

हिन्दी अर्थ

विष्णुको शय्या शून्य नहीं होती है, उसी प्रकार सकती है। स्त्रीको अपने मृत पतिके लिये दधि, जन्म-जन्मान्तरमें मेरी शय्या भी शून्य न हो। अन्न, शयन, अञ्जन, कुंकुम, वस्त्राभूषण तथा इस प्रकार ब्राह्मणको उस निर्मल शय्याका शय्यादि सभी प्रकारके दान देना चाहिए । स्त्रियोंके दान देकर क्षमापन करके उसे विदा करे। यही लिये इस लोकमें जो कुछ वस्तुएँ उपकारक हों, जो

English

Death after bii ih and birth ufter de.atli—thus moves the cyt Ic in rirrle, till tint soul is reh-ased from tlte bondage of action. Cr>mparc lihaiffivndi'ilA

अध्याय २६४

श्लोक 2

पूर्णे तु पञ्चमे वर्षे पुमांश्चैव प्रतिष्ठितः ।सर्वैन्द्रियाणि जानाति रूपारूपविपर्ययौ

pūrṇe tu pañcame varṣe pumāṃścaiva pratiṣṭhitaḥ / sarvaindriyāṇi jānāti rūpārūpaviparyayau

हिन्दी अर्थ

प्रेतशय्याकी विधि एकादशाह-संस्कारमें बतायी कुछ शरीरपर प्रयोग किये जाने योग्य वस्त्राभूषण गयी है । और भोग्य वस्तुएँ हो, उन सभीको मिला करके हे गरुड! अपने बान्धवकी मृत्यु होनेपर प्रेतकी प्रतिमा बनाकर उन्हें यथास्थानपर नियोजित उनके निमित्त बन्थुजन धर्मार्थ जो दान देते है, करके लोकपाल, इन्द्रादि देवगण, सूर्यादिक ग्रह,

English

A boy's death occurring at the fifth year whether normally or due to accident, all rites as mentioned above, sJionJd be carrietl out including the ten pittdas.

अध्याय २६४

श्लोक 3

पूर्वकर्मविपाकेन प्राणिनां वधबन्धनम् ।विप्रादीनन्त्यजान्सर्वान्पापं मारयति ध्रुवम्

pūrvakarmavipākena prāṇināṃ vadhabandhanam / viprādīnantyajānsarvānpāpaṃ mārayati dhruvam

हिन्दी अर्थ

उसके विषयमें विशेष बात मैं कह रहा हूँ, उसको गौरी तथा गणेशकी पूजा करे। उसके बाद श्वेत तुम सुनो। वस्त्र धारण करके पुष्पाञ्जलि सहित ब्राह्मणके हे पक्षिराज! अपने घरमें पहलेसे जो कुछसमक्ष इस मन्त्रका उच्चारण करे- उपयुक्त वस्तु हो, उस मृतकके शरीरसे सम्बन्धित प्रेतस्य प्रतिमा ह्येषा सर्वोपकरणैर्युता।

English

Since the rites are not many, since contact with the w(rldly objects is of short duration and since body loo is of small stature, the obsequies also are not elaborat(\

अध्याय २६४

श्लोक 4

गर्भे नष्टे क्रिया नास्ति दुग्धं देयं मृते शिशौ ।परं च पायसं क्षीरं दद्याद्वलविपत्तितः

garbhe naṣṭe kriyā nāsti dugdhaṃ deyaṃ mṛte śiśau / paraṃ ca pāyasaṃ kṣīraṃ dadyādvalavipattitaḥ

हिन्दी अर्थ

जो वस्त्र, पात्र और वाहन हो, जो कुछ उसको सर्वरल्रसमायुक्ता तव विप्र निवेदिता॥ अभीष्ट रहा हो, वह सब एकत्र करे। शय्याके ऊपर आत्मा शम्भुः शिवा गौरी शक्रः सुरगणैः सह। भगवान् विष्णुको स्वर्णमयी प्रतिमाको स्थापित तस्माच्छय्याप्रदानेन सैष आत्मा प्रसीदतु॥

English

Tonsute ceremony —wherein the buy's lieacl is shavctl and only.t.''ingle lock on the ciown of the he.ul is lelt. I'iic ceieinony is perfoirned either in the fust or in the thud ye.ir. t'l. M.itiu 2.3.).

अध्याय २६४

श्लोक 5

एकादशाहं द्वादशाहं वृषं वृषविधिं विना ।महादानविहीनं च कुमारे कृत्यमादिशेत्

ekādaśāhaṃ dvādaśāhaṃ vṛṣaṃ vṛṣavidhiṃ vinā / mahādānavihīnaṃ ca kumāre kṛtyamādiśet

हिन्दी अर्थ

करके विद्वान् व्यक्ति उनकी पूजा करे और जैसा (३४।९६-९७) पहले कहा गया है, उसीके अनुसार ब्राह्मणको उस है विप्रदेव! प्रेतकी यह प्रतिमा सभी उपकरणों मृतशय्याका दान कर दे। और समस्त रत्नोंसे युक्त है। मैं आपको इसे प्रदान

English

Pniii'ittiifa —.\ecoi ding to S.Sl'.U the boy tioni the fifth to the sixteenth year is called paugancla.

अध्याय २६४

श्लोक 6

कुमाराणां चैव बालानां भोजनं वस्त्रवेष्टनम् ।बाले वा तरुणे वृद्धे घटो भवति वै मृते

kumārāṇāṃ caiva bālānāṃ bhojanaṃ vastraveṣṭanam / bāle vā taruṇe vṛddhe ghaṭo bhavati vai mṛte

हिन्दी अर्थ

शय्यादानके प्रभावसे प्राणीको प्राप्त होनेवाला करता हूँ। आत्मा ही शिव है। यही शिवा और सम्पूर्ण सुख इन्द्र और यमराजके घरमें विद्यमान गौरी है। यही सभी देवताओंके साथ इन्द्र है। अतः रहता है। इसके प्रभावसे महाभयंकर मुखवाले इस शय्यादानसे यह आत्मा प्रसन्न हो। यमदूत उसको पीडित नहीं करते हैं। वह मनुष्य इसके बाद उस शय्याको परिवारवाले आचार्य

English

If a child dies before the fifth year, the articles of diet and daily necessaries to which it is accustomed can be made over as gifts.

अध्याय २६४

श्लोक 7

भूमौ विनिः क्षिपेद्बालं द्विमासोनं द्विवार्षिकम् ।ततः परं खगश्रेष्ठ देहदाहो विधोयते

bhūmau viniḥ kṣipedbālaṃ dvimāsonaṃ dvivārṣikam / tataḥ paraṃ khagaśreṣṭha dehadāho vidhoyate

हिन्दी अर्थ

यमलोकमें कहीं धूप और ठंडकसे कष्ट नहीं ब्राह्मणको प्रदान करे। ब्राह्मण उसको ग्रहण करनेके पाता है। शय्यादानके प्रभावसे प्रेत बन्धनमुक्त हो बाद “को5दात० ' इत्यादि मन्त्रका पाठ करे। जाता है। इस दानसे पापी व्यक्ति भी स्वर्गलोक तत्पश्चात् उस ब्राह्मणकी प्रदक्षिणा करके प्रणाम

English

Therefore, certainly, gifts should be made. From the birth to the fifth year, uncooked things should be gifted to the Brahmana.

अध्याय २६४

श्लोक 8

शिशुरा दन्तजननाद्बालः स्याद्यावदाशिखम् ।कथ्यते सर्वशास्त्रेषु कुमारो मौञ्जिबन्धनात्

śiśurā dantajananādbālaḥ syādyāvadāśikham / kathyate sarvaśāstreṣu kumāro mauñjibandhanāt

हिन्दी अर्थ

करे और उन्हें वहाँसे विदा करे। हे पक्षिन्! इस विधिसे एक शय्याका एक ही ब्राह्मणको दान देना चाहिए। एक गौ, एक गृह, एक शय्या और एक स्त्रीका दान बहुतोंके लिये

English

In the case of all persons beyond the age of five at death brahmins should be fed and major gifts offered according to capacity. The gift of earthen lamp should also be made.

अध्याय २६४

श्लोक 9

शूद्रादीनां कथं कुर्यात्संशयो मौञ्जिवर्जनात् ।गर्भाच्च नवमं हित्वा शिशुरामासषोडशम्

śūdrādīnāṃ kathaṃ kuryātsaṃśayo mauñjivarjanāt / garbhācca navamaṃ hitvā śiśurāmāsaṣoḍaśam

हिन्दी अर्थ

नहीं होता है। विभाजित करके दिये गये ये दान दाताको पापकी कोटिमें गिरा देते हैं। हे ताक्ष्य! इस प्रकार बतायी गयी विधिके अनुसार जो प्राणी शय्यादिका दान करे तो उसे जो

English

O foremost among birds, ghosts should be propitiated by due performance of rites. If the person does not perform the rite he himself will become a ghost.

अध्याय २६४

श्लोक 10

बालश्चाथ परञ्ज्ञेय आमाससप्तविंशति ।आ पञ्च वर्षात्कौमारः पौगण्डो नवहांयनः

bālaścātha parañjñeya āmāsasaptaviṃśati / ā pañca varṣātkaumāraḥ paugaṇḍo navahāṃyanaḥ

हिन्दी अर्थ

फल प्राप्त होता है, उसको तुम सुनो। इस दानसे दाता सौ दिव्य वर्षोतक स्वर्गलोकमें निवास करता है। व्यतीपात योग, कार्तिक पूर्णिमा, मकर तथा कर्कको संक्रान्तिमें, सूर्य-चन्द्रग्रहणमें, द्वारका, प्रयाग,

English

Thereby a son yields all pleasure to his parents. If dead early he is born again in the family.

अध्याय २६४

श्लोक 11

किशोरः षोडशाब्दः स्यात्ततो यौवनमादिशेत् ।मृतो ऽपि पञ्चमे वर्षे अवृतः सवृतो ऽपि वा

kiśoraḥ ṣoḍaśābdaḥ syāttato yauvanamādiśet / mṛto 'pi pañcame varṣe avṛtaḥ savṛto 'pi vā

हिन्दी अर्थ

यमुना तथा सिन्धु नदी और सागरके संगम-तटपर जो दान दिया जाता है, यह उससे भी बड़ा दान है। इस शय्यादानके सोलहवें अंशको भी वे सभी दान प्राप्त नहीं कर पाते हैं । वह प्राणी जहाँ जन्म

English

The Ksetraja and other sons contribute to his worldly welfare. The Aurasa (legitimate) son performsduly.

अध्याय २६४

श्लोक 12

पूर्वोक्तमेव कर्तव्यमीहते दशपिण्डकम् ।स्वल्पकर्मप्रसङ्गाच्च स्वल्पाद्विषयबन्धनात्

pūrvoktameva kartavyamīhate daśapiṇḍakam / svalpakarmaprasaṅgācca svalpādviṣayabandhanāt

हिन्दी अर्थ

लेता है, वहीं उस पुण्यका फल भोगता है। स्वर्गमें रहनेयोग्य पुण्यके क्षय होनेके बाद वह सुन्दर स्वरूप धारण करके पृथ्वीपर पुनः जन्म लेता है। वह महाधनी, धर्मज्ञ तथा सर्वशास्त्रोंका निष्णात

English

Manu, however entimoiMtcs twelve kinds of sons grouped into two divisions, viz. six gotriyas and six agotriyas. To the fo> mer belong Anrasd, KseUnja, Datlnkn, Krtlriuui Cudliotfinnnn and Aftaviddha. To the latter belong KAniria, Sahodha, hril/i, Pauuarbhava, Svajamdntta and Stiudra —.Ms. IX,

अध्याय २६४

श्लोक 13

स्वल्षाद्वपुषि वस्त्राच्च क्रियां स्वल्पामपीच्छति ।यावदुपचयो जन्तुर्यावद्विषयवेष्टितः

svalṣādvapuṣi vastrācca kriyāṃ svalpāmapīcchati / yāvadupacayo janturyāvadviṣayaveṣṭitaḥ

हिन्दी अर्थ

पण्डित होता है और मृत्यु होनेके बाद वह नरश्रेष्ठ पुनः वैकुण्ठलोक चला जाता है। अद्भुत है! अप्सराओंसे चारों ओर घिरा हुआ वह प्राणी दिव्य विमानपर चढ़कर स्वर्गमें अपने पितरोंके साथ

English

\'idc footnote 2, jj 844

अध्याय २६४

श्लोक 14

यद्यद्यस्योपजीव्यं स्यात्तत्तद्देयमिहेच्छति ।ब्रह्मबीजोद्भवाः पुत्रा देवर्षोणां च वल्लभाः

yadyadyasyopajīvyaṃ syāttattaddeyamihecchati / brahmabījodbhavāḥ putrā devarṣoṇāṃ ca vallabhāḥ

हिन्दी अर्थ

हव्य-कव्य ग्रहण करते हुए प्रसन्न रहता है। हे ताक्ष्य! यदि पितर प्रेतत्वको प्राप्त हैं तो सपिण्डीकरणके बिना अष्टका, अमावास्या, मघा नक्षत्र तथा पितृपर्वमें किये गये जो-जो श्राद्ध हैं,

English

The other nine types of son perform Ekocidifa hadciha, not Parvana®. The brahmin son takes one upward but the adopted son causes his down-fall. If the latter were to perform the annual iraddha it will result only in his falling into hell.

अध्याय २६४

श्लोक 15

यमेन यमदूतैश्च शास्यन्ते निश्चितं खग ।बालो वृद्धो युबा वापि घटमिच्छन्ति देहिनः

yamena yamadūtaiśca śāsyante niścitaṃ khaga / bālo vṛddho yubā vāpi ghaṭamicchanti dehinaḥ

हिन्दी अर्थ

वे पितरोंको नहीं प्राप्त होते हैं। सपिण्डीकरणका कार्य वर्ष पूरा हो जानेपर करना चाहिए। इसमें संशय नहीं है। शवकी शुद्धिके लिये आद्य श्राद्ध

English

O bird, the Safigrhitr son may very well make gifts excluding cooked food-stuff. He shall perform only Ekoddila and not Patvana.

अध्याय २६४

श्लोक 16

सुखं दुः खं सदा वेत्ति देही वै सर्वगस्त्विह ।परित्यज्य तदात्मानं जीर्णां त्वचमिवोरगः

sukhaṃ duḥ khaṃ sadā vetti dehī vai sarvagastviha / parityajya tadātmānaṃ jīrṇāṃ tvacamivoragaḥ

हिन्दी अर्थ

(पितरोंकी पंक्तिमें प्रवेशके लिये) शुद्धिके लिये पचासवें प्रेतपिण्डका अन्य पिण्डोंके साथ मेलन करे। वृद्धि श्राद्धकी सम्भावना होनेपर एक वर्षके पहले ही (छः अथवा तीन माह या डेढ़ माहमें एवं

English

If they are of good nature he will be happy. If they arc of bad nature he will go to hell. Even sons of lower caste people, if good-natured, cause happiness.

अध्याय २६४

श्लोक 17

अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषो वायुभृतः क्षुधान्वितः ।तस्माद्देयानि दानानि मृते बाले सुनिश्चितम्

aṅguṣṭhamātraḥ puruṣo vāyubhṛtaḥ kṣudhānvitaḥ / tasmāddeyāni dānāni mṛte bāle suniścitam

हिन्दी अर्थ

बारहवें दिन सपिण्डीकरण श्राद्ध कर देना चाहिए। शूद्रका श्राद्ध स्वेच्छापूर्वक हो सकता है । अग्निहोत्री ब्राह्मणको मृत्यु होनेपर द्वादशाहको सपिण्डन- कर्म होना चाहिए। जबतक वह कर्म नहीं किया

English

nine types oj ions. l''outiioic l, tU.

अध्याय २६४

श्लोक 18

जन्मतः पञ्च वर्षाणि भुङ्क्ते दत्तमसंस्कृतम् ।पञ्चवर्षाधिके बाले विपत्तिर्यदि जायते

janmataḥ pañca varṣāṇi bhuṅkte dattamasaṃskṛtam / pañcavarṣādhike bāle vipattiryadi jāyate

हिन्दी अर्थ

जाता है, तबतक वह मृत अग्निहोत्री ब्राह्मण प्रेतयोनिमें ही रहता है । अत: अग्निहोत्र करनेवाले ब्राह्मणको द्वादशाहमें ही सपिण्डीकरणको क्रिया कर देनी चाहिए । गङ्गा आदि महानदियोंमें अस्थि-

English

the gcncial ccrcinoiiy of otfering obhitions to tlie Manes on the fourteenth day of each liaif inontli and tl»c days of the full and new moon,

अध्याय २६४

श्लोक 19

वृषोत्सर्गादिकं कर्म सपिण्डीकरणं विना ।द्वादशे हनि सम्प्राप्ते कुर्याच्छ्राद्धानि षोडश

vṛṣotsargādikaṃ karma sapiṇḍīkaraṇaṃ vinā / dvādaśe hani samprāpte kuryācchrāddhāni ṣoḍaśa

हिन्दी अर्थ

क्षेपण, गयातीर्थ-श्राद्ध, पितृपक्षमें होनेवाले श्राद्ध सपिण्डीकरणके बिना वर्षके मध्यमें नहीं करना चाहिए । यदि बहुत-सी सपलियाँ हों और उनमेंसे एक भी स्त्री पुत्रवती हो जाय तो उसी एक पुत्रसे

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 20

पायसेन गुडेनापि पिण्डान्दद्याद्यथाक्रमम् ।उदकुम्भप्रदानं च पद (उप) दानानि यानि च

pāyasena guḍenāpi piṇḍāndadyādyathākramam / udakumbhapradānaṃ ca pada (upa) dānāni yāni ca

हिन्दी अर्थ

ही वे सभी पुत्रवती होती हैं।

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 21

भोजनानि द्विजे दद्यान्महादानादि शक्तितः ।दीपदानादि यत्किञ्चित्पञ्चवर्षाधिके सदा

bhojanāni dvije dadyānmahādānādi śaktitaḥ / dīpadānādi yatkiñcitpañcavarṣādhike sadā

हिन्दी अर्थ

असपिण्ड अग्निहोत्री पुत्रको पितृयज्ञ नहीं करना चाहिए। यदि वह ऐसा आचरण करता है तो पापी होगा और उसे पितृहत्याका भी पाप लगेगा। पतिको मृत्यु होनेपर जो स्त्री अपने

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 22

कर्तव्यं च खगश्रेष्ठ व्रतात्प्राक् प्रेततृप्तये ।यदा नक्रियते सर्वं मुद्गलत्वं स गच्छति

kartavyaṃ ca khagaśreṣṭha vratātprāk pretatṛptaye / yadā nakriyate sarvaṃ mudgalatvaṃ sa gacchati

हिन्दी अर्थ

प्राणोंका परित्याग कर देती है तो पतिके साथ ही उसका भी सपिण्डीकरण कर देना चाहिए। पिताकी अनुचित रूपसे लायी गयी विवाहिता

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 23

व्रतात्प्राङ्गेव देयं तु ततः पितृगणस्य च ।स्वाहाकारेण वै कुर्यादेकोद्दिष्टानि षोडश

vratātprāṅgeva deyaṃ tu tataḥ pitṛgaṇasya ca / svāhākāreṇa vai kuryādekoddiṣṭāni ṣoḍaśa

हिन्दी अर्थ

उनका सपिण्डन कोई भी पुत्र कर सकता है। जब प्रमादवश ब्राह्मण किसी शूद्रा कन्यासे ही विवाह कर लेता है तो मरनेके बाद उसके लिये एकोददिष्ट- श्राद्ध बताया गया है और सपिण्डीकरण- श्राद्ध

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 24

ऋजुदर्भैस्तिलैः शुक्लैः प्राचीनावीति निश्चितम् ।अपसव्यं च कर्तव्यं कृते यान्ति परां गतिम्

ṛjudarbhaistilaiḥ śuklaiḥ prācīnāvīti niścitam / apasavyaṃ ca kartavyaṃ kṛte yānti parāṃ gatim

हिन्दी अर्थ

उसीके साथ करना चाहिए। अन्य चारों वर्णासे ब्राह्मणके चाहे दसों पुत्र हों, किंतु उन्हें अपनी- अपनी माँके सपिण्डीकरणकी क्रियामें नियुक्त

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 25

पुनश्चिरायुषो भूत्वा जायन्ते स्वकुले ध्रुवम् ।सर्वसौख्यप्रदः पुत्रः पित्रोः प्रीतिविवर्धनः

punaścirāyuṣo bhūtvā jāyante svakule dhruvam / sarvasaukhyapradaḥ putraḥ pitroḥ prītivivardhanaḥ

हिन्दी अर्थ

करके षोडशीका सम्पादन करे। तदनन्तर पितृपंक्तिकी होना चाहिए। अन्वष्टका पौष, माघ और

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 26

आकाशमेकं हि यथा चन्द्रादित्यौ यथैकतः ।घटादिषु पृथक् सर्वं पश्य रूपं च तत्समम्

ākāśamekaṃ hi yathā candrādityau yathaikataḥ / ghaṭādiṣu pṛthak sarvaṃ paśya rūpaṃ ca tatsamam

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प इष्टापूर्तकर्मकी महिमा तथा और्ध्वदेहिक कृत्य ५६७

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 27

आत्मा तथैव सर्वेषु पुत्त्रेषु विचरेत्सदा ।या यस्य प्रकृतिः पूर्वं शुक्रशोणितसङ्गमे

ātmā tathaiva sarveṣu puttreṣu vicaretsadā / yā yasya prakṛtiḥ pūrvaṃ śukraśoṇitasaṅgame

हिन्दी अर्थ

फाल्गुनमासके कृष्णपक्षकी नवमी तिथि (जोऔर्ध्वदेहिक कृत्य करना चाहिए। मुनियोंने भी साग्नियोंका मातृक श्राद्ध होता है)-को होनेवाला इस बातको कहा है कि पिताकी अन्त्येष्टि एक ही तथा वृद्धिहेतुक श्राद्ध एवं सपिण्डन-श्राद्धमें पितासे पुत्र करता है । यदि पुत्रोंमें परस्पर बँटवारा हो गया पृथक् माताका पिण्ड प्रदान करना चाहिए । है है तो उन सभी पुत्रोंको पृथक्-पृथक् सांवत्सरादिक

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 28

सा (स) तेन भावयोगेन पुत्त्रास्तत्कर्मकारिणः ।पितृरूपं समादाय कस्यचिज्जायते सुतः

sā (sa) tena bhāvayogena puttrāstatkarmakāriṇaḥ / pitṛrūpaṃ samādāya kasyacijjāyate sutaḥ

हिन्दी अर्थ

ताक्ष्य/ पितामहीके साथ माता और पितामहके क्रिया करनी चाहिए स्वयं प्रत्येक पुत्रको अपने साथ पिताका सपिण्डन अपेक्षित है, ऐसा मेरा पिताका श्राद्ध करना चाहिए। जिनके निमित्त ये अभिमत है । यदि स्त्री पुत्रहीन ही मर जाती है तो षोडश प्रेतश्राद्ध सम्पन्न नहीं किये जाते हैं, उनका उसका सपिण्डन पति करे । धर्मतः पतिको अपनी अन्य सैकड़ों श्राद्ध करनेपर भी पिशाचत्व स्थिर

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 29

पितृतः को ऽपि रूपाढ्यो गुणज्ञो दानतत्परः ।सदृशः को ऽपि लोके ऽस्मिन्न भूतो न भविष्यति

pitṛtaḥ ko 'pi rūpāḍhyo guṇajño dānatatparaḥ / sadṛśaḥ ko 'pi loke 'sminna bhūto na bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

माता, पितामही एवं प्रपितामही--इन तीनोंके साथ रहता है । अपनी पत्नीका सपिण्डन करना चाहिए । है खगेश्वर! पुत्रहीनका सपिण्डीकरण उसके हे गरुड! यदि स्त्रियोंके पुत्र तथा पति दोनों भाई, भतीजे, सपिण्ड अथवा शिष्यको करना नहीं हैं तो वृद्धिकालके आनेपर स्त्रीका भाई चाहिए। सभी पुत्रहीन पुरुषोंका सपिण्डन पत्नी

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 30

अन्धादन्धो न भवति मूकान्मूको न जायते ।बधिराद्बधिरो नैव विद्यावान्विदुषो न हि ।अनुरूपा न दृश्यन्ते मदीयं वचनं शृणु

andhādandho na bhavati mūkānmūko na jāyate / badhirādbadhiro naiva vidyāvānviduṣo na hi / anurūpā na dṛśyante madīyaṃ vacanaṃ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

अथवा दायभागका गृहीता या देवर उसका सपिण्डन करे अथवा ऋत्विज् या पुरोहितसे उस कार्यको करें। यदि पति एवं पुत्ररहित स्त्रियोंके न तो कोई सम्पन्न कराये। पिताकी मृत्यु हो जानेपर वर्षके सगोत्री हो और न देवर ही हो तो उस समय अन्य मध्य जब सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण हों तो पुत्रोंको व्यक्ति उसके भाइयोंके साथ उसका एकोदिष्ट पार्वणश्राद्ध, नान्दीश्राद्ध नहीं करना चाहिए । माता-

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 31

गरुड उवाच ।औरसक्षेत्रजाद्याश्च पुत्त्रा दशविधाः स्मृताः ।संगृहीतः सुतो यस्तु दासीपुत्त्रश्च तेन किम्

garuḍa uvāca / aurasakṣetrajādyāśca puttrā daśavidhāḥ smṛtāḥ / saṃgṛhītaḥ suto yastu dāsīputtraśca tena kim

हिन्दी अर्थ

विधानसे श्राद्ध कर सकता है। यदि भूलवशपिता और आचार्यको मृत्यु होनेपर वर्षके मध्यमें अथवा विघ्नके कारण सपिण्डन-क्रिया किसीकी तीर्थश्राद्ध, गयाश्राद्ध तथा अन्य पैतृक श्राद्ध नहीं नहीं हो सकी है तो उसके पुत्र या बन्धु-बान्धवको करना चाहिए। पितृपक्ष, गजच्छाया योग, मन्वादि चाहिए कि वे नवक श्राद्ध, षोडश श्राद्ध तथाऔर युगादि तिथियोंमें सपिण्डीकरणके बिना

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 32

काङ्कां गतिमवाप्नोति जायो मृत्युवशं गतः ।भवेन्न दुहिता यस्य न दौहित्रो न वा सुतः

kāṅkāṃ gatimavāpnoti jāyo mṛtyuvaśaṃ gataḥ / bhavenna duhitā yasya na dauhitro na vā sutaḥ

हिन्दी अर्थ

आब्दिक श्राद्ध करे । पिताको पिण्डदान नहीं देना चाहिए । कुछ लोगोंका जिसका दाह नहीं हुआ है, उसके लिये श्राद्ध विचार है कि वर्षके मध्यमें भी यज्ञपुरुष तथा नहीं करना चाहिए । दर्भका पुत्तल बनाकर अग्रिसे देवतादिके लिये जो देय है, उसका दान देना उसे जलाकर ही श्राद्ध करना चाहिए । पुत्रके द्वारा चाहिए। पितरोंको भी अर्घ्य और पिण्डसे रहित

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 33

श्राद्धं तस्य कथं कार्यं विधिना केन तद्भवेत् ।श्रीभगवानुवाच ।मुखं दृष्ट्वा तु पुत्रस्य मुच्यते पैतृकादृणात्

śrāddhaṃ tasya kathaṃ kāryaṃ vidhinā kena tadbhavet / śrībhagavānuvāca / mukhaṃ dṛṣṭvā tu putrasya mucyate paitṛkādṛṇāt

हिन्दी अर्थ

पिताका सपिण्डीकरण किया जा सकता है, किंतु जो कुछ देय है, वह सब दिया जा सकता है । यही पुत्रमें पिताका पिण्डमेलन नहीं किया जा सकता । विधि कही गयी है। प्रेमाधिक्यके कारण भी पिताको पुत्रमें सपिण्डीकरण देवोंके लिये पितर देवता हैं, पितरोंके पितर नहीं करना चाहिए। जब बहुत-से पुत्र हों, तब भी ऋषि हैं, ऋषियोंके पितर देवता हैं, इस कारण

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 34

पौत्त्रस्य दर्शनाज्जन्तुर्मुच्यते चः ऋणत्रयात् ।लोकानन्त्यं दिवः प्राप्तिः पुत्त्रपौत्त्र प्रपौत्त्रकैः

pauttrasya darśanājjanturmucyate caḥ ṛṇatrayāt / lokānantyaṃ divaḥ prāptiḥ puttrapauttra prapauttrakaiḥ

हिन्दी अर्थ

ज्येष्ठ पुत्र ही उस क्रियाको सम्पन्न करे। नवक, पिता सर्वश्रेष्ठ है। पितर, देवतागण और मनुष्योंके सपिण्डन तथा षोडशादि अन्य सभी श्राद्धोंको यज्ञनाथ भगवान् विभु हैं। यज्ञञाथको जो कुछ करनेका अधिकारी वही एक है। धनका बँटवारा दिया जाता है, वह समस्त शरीरधारियोंको दिया न होनेपर भी एक ही पुत्रको पिताके समस्त हुआ माना जाता है। पिताके मरनेपर वर्षके मध्य

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 35

अन्यक्षेत्रोद्भवाद्या ये भुक्तिमात्रप्रदाः सुताः ।कुर्वीत पार्वणं श्राद्धमारैसो विधिवत्सुतः

anyakṣetrodbhavādyā ye bhuktimātrapradāḥ sutāḥ / kurvīta pārvaṇaṃ śrāddhamāraiso vidhivatsutaḥ

हिन्दी अर्थ

अन्वष्टकासु यच्छाद्धं यच्छाद्धं वृद्धिहेतुकम्। पितुः पृथक् प्रदातव्यं स्त्रिया: पिण्डं सपिण्डने ॥ (३४। १२०)

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 36

कुर्वन्त्यन्ये सुताः श्राद्धमे कोद्दिष्टं न पार्वणम् ।ब्राह्मोढाजस्तून्नयति संगृहीतस्त्वधो नयेत् ।श्राद्धं सांवत्सरं कुर्वञ्जायते नरकाय वै

kurvantyanye sutāḥ śrāddhame koddiṣṭaṃ na pārvaṇam / brāhmoḍhājastūnnayati saṃgṛhītastvadho nayet / śrāddhaṃ sāṃvatsaraṃ kurvañjāyate narakāya vai

हिन्दी अर्थ

जो पुत्र अन्य श्राद्ध करता है, निस्संदेह सात यदि माताकी मृत्यु हो जाय, पिता और पितामही जन्मोंमें किये गये अपने धर्मसे हीन हो जाता है। अर्थात् दादी जीवित रहती है तो माताका सपिण्डन पिण्डोदक क्रियादिसे रहित प्राणी प्रेत हो जाते हैं, प्रपितामहीके साथ ही करना चाहिए। है गरुड! मेरे वे इसी रूपमें भूख-प्याससे अत्यन्त पीडित होकर इस वचनको सुनो । यह सर्वथा सत्य है। इस पृथ्वीपर

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 37

सर्वदानानि देयानि ह्यन्न दानादृते खग ।संगृहीतः सुतः कुर्यादेकोद्दिष्टं न पार्वणम्

sarvadānāni deyāni hyanna dānādṛte khaga / saṃgṛhītaḥ sutaḥ kuryādekoddiṣṭaṃ na pārvaṇam

हिन्दी अर्थ

वायुके साथ चक्कर काटते हैं । यदि पिता प्रेतत्वयोनिमें जिन मरे हुए मनुष्योंका पिण्डमेलन अर्थात् सपिण्डीकरण पहुँच जाता है तो पुत्रके द्वारा की गयी समस्त नहीं होता है, उनके लिये पुत्रोंके द्वारा अनेक प्रकारसे पैतृकी क्रिया नष्ट हो जाती है। यदि माताकी मृत्यु दिया गया हन्तकार, उपहार, श्राद्ध तथा जलाञ्जलि हो जाती है तो पितृकार्य नष्ट नहीं होता है। उन्हें प्राप्त नहीं होती है। (अध्याय ३४)

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 38

प्रत्यब्दं पितृमातृभ्यां श्राद्धं दत्त्वा न लिप्यते ।एकोद्दिष्टं परित्यज्य पार्वणं कुरुते यदि

pratyabdaṃ pitṛmātṛbhyāṃ śrāddhaṃ dattvā na lipyate / ekoddiṣṭaṃ parityajya pārvaṇaṃ kurute yadi

हिन्दी अर्थ

सपिण्डीकरण-श्राद्धमें प्रेतपिण्डके मेलनका विधान, पितरोंकी प्रसन्नताका फल, पञ्चक-मरण तथा शान्तिविधान, पुत्तलिकादाह, प्रेतश्राद्धमें त्याज्य अठारह पदार्थ, मलिनषोडशी, मध्यमषोडशी तथा

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 39

आत्मानं च पितॄंश्चैव स नयेद्यममन्दिरम् ।संगृहीतस्तु यः केचिद्दासीपुत्त्रादयश्च ये

ātmānaṃ ca pitṝṃścaiva sa nayedyamamandiram / saṃgṛhītastu yaḥ keciddāsīputtrādayaśca ye

हिन्दी अर्थ

ताक्ष्यने कहा--हे जनार्दन! अब मुझे दूसरा पुरुष पंक्तिसंनिध होता है। पिता तथा माताके संदेह उत्पन्न हो गया है। यदि किसी भी पुरुषको कुलमें इन्हीं पुरुषोंकी प्रसिद्धि होती है। यजमान माताका देहावसान हो गया है, किंतु उसकी अपनेसे पूर्व दस पुरुषों एवं अपनेसे बादके दस पितामही, प्रपितामही, वृद्धप्रपितामही जीवित है पुरुषोंका उद्धार कर सकता है। पहले जो तीन

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 40

तीर्थे कुर्युः पितृश्राद्धं दानं (मासं) दद्युर्द्विजन्मने ।संगृहीतसुतो भूत्वा पाकं वा यः प्रयच्छति

tīrthe kuryuḥ pitṛśrāddhaṃ dānaṃ (māsaṃ) dadyurdvijanmane / saṃgṛhītasuto bhūtvā pākaṃ vā yaḥ prayacchati

हिन्दी अर्थ

और यदि पिता भी जीवित हो, मातामह, प्रमातामह पुरुष बताये गये हैं अर्थात् पिता, पितामह तथा एवं वृद्धप्रमातामह भी जीवित हों तो उस माताका प्रपितामह-ये सपिण्डीकरण करनेपर सपिण्ड सपिण्डन किसके साथ किया जायगा? है प्रभो! माने गये हैं। जो प्रपितामहके पूर्व वृद्धप्रपितामह इसको बतानेकी कृपा करें। और उनसे दो पूर्व पुरुष हैं, उन्हें त्याजक रूपमें

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 41

वृथा श्राद्धं विजानीयाच्छूद्रान्नेन यथा द्विजः ।न प्रीणयति तच्छ्राद्धं पितामहमुखान्पितॄन् ।एवं ज्ञात्वा स्वगश्रेष्ठ हीनजातीन्सुतांस्त्यजेत्

vṛthā śrāddhaṃ vijānīyācchūdrānnena yathā dvijaḥ / na prīṇayati tacchrāddhaṃ pitāmahamukhānpitṝn / evaṃ jñātvā svagaśreṣṭha hīnajātīnsutāṃstyajet

हिन्दी अर्थ

श्रीकृष्णने कहा- है पक्षिन्! पूर्वमें कहे गये स्वीकार करना चाहिए। इस अन्तिम त्याजक सपिण्डीकरणविधानको मैं पुनः कह रहा हूँ। यदि पुरुषके बाद जो पुरुष होता है, वह प्रथम लेपक माताके उपर्युक्त सभी सम्बन्धी जीवित हैं तो होता है, उसके पूर्वमें जो अन्य दो पुरुष होते हैं, माताके पिण्डका सम्मेलन उमा, लक्ष्मी तथा उन्हें भी उसी लेपककी कोटिमें समझना चाहिए।

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 42

(ब्राह्मण्यां ब्राह्मणाज्जातश्चाण्डालादधमः स्मृतः ) ।यस्तु प्रव्रजिताज्जातो ब्राह्मण्यां शूद्रतश्च यः

(brāhmaṇyāṃ brāhmaṇājjātaścāṇḍālādadhamaḥ smṛtaḥ ) / yastu pravrajitājjāto brāhmaṇyāṃ śūdrataśca yaḥ

हिन्दी अर्थ

सावित्रीके साथ कर देना चाहिए। इस संसारमें इस कोटिके तीसरे पुरुषके पूर्व जो पुरुष होता है, तीन पुरुष पिण्डका भोग करनेवाले हैं, तीन पुरुष वह पंक्तिसंनिध है। इस प्रकार दस पूर्व पुरुषोंके त्याजक हैं, तीन पुरुष पिण्डानुलेप और दसवाँ बाद स्वयं यजमान एक पुरुष है। भविष्यमें जो

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 43

द्वावेतौ विद्धि चाण्डालौ सगोत्राद्यस्तु जायते ।स्वर्यातिविहितान्पुत्रः समुत्पाद्य खगेश्वर

dvāvetau viddhi cāṇḍālau sagotrādyastu jāyate / svaryātivihitānputraḥ samutpādya khageśvara

हिन्दी अर्थ

'विनापि प्रत्ययं पूर्वोत्तरपदयोर्वा लोपो वाच्य: '--इस वार्तिकसे “प्र' शब्दका लोप हो जानेसे मूलमें पितामही पदको “प्रपितामही ' समझना चाहिए।

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 44

तैः सुवृत्तैः सुखं प्राप्यं कुवृत्तैर्नरकं व्रजेत् ।हीनजातिसमुद्भूतैः सुवृत्तैः सुखमेधते

taiḥ suvṛttaiḥ sukhaṃ prāpyaṃ kuvṛttairnarakaṃ vrajet / hīnajātisamudbhūtaiḥ suvṛttaiḥ sukhamedhate

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प सपिण्डीकरण-श्राद्धमें प्रेतपिण्डके मेलनका विधान ५६९

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

अध्याय २६४

श्लोक 45

कलिकलुषविमुक्तः पूजितः सिद्धसङ्घैरमरचमरमालावीज्यमानो ऽप्सरोभिः ।पितृशतमपि बन्धून्पुत्त्रपौत्त्रप्रपौत्त्रानपि नरकनिमग्नानुद्धरेदेक एव

kalikaluṣavimuktaḥ pūjitaḥ siddhasaṅghairamaracamaramālāvījyamāno 'psarobhiḥ / pitṛśatamapi bandhūnputtrapauttraprapauttrānapi narakanimagnānuddharedeka eva

हिन्दी अर्थ

यथाक्रम दस पुरुष होते हैं, उन सभीको मिलाकर चाहिए। स्वजनको पञ्चककी शान्तिके बाद ही पितरोंकी संख्या इक्कीस होती है। मृतका सब संस्कार करना चाहिए, अन्यथा पुत्र इस संसारमें विधिपूर्वक जो मनुष्य उक्त और सगोत्रियोंको उस अशुभ पञ्चकके कुप्रभावसे श्रेष्ठतम श्राद्ध करता है, उसमें कर्ताकी ओरसे कोई दुःख ही झेलना पड़ता है । जो मनुष्य इन नक्षत्रोंमें

English

lower caste wotw-n —Women of Sudra caste.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 264
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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