अध्याय २६५
श्लोक 1
इति श्रीगारुडे महापुराणे उत्तरखण्डे द्वितीयांशे धमकाण्डे प्रेतकल्पे श्रीकृष्णगरुडसवादे मृतबालान्त्येष्टिभिन्नाभिन्नसुतकृतान्त्येष्ट्योर्वर्णनं नाम पञ्चविंशो ऽध्यायः श्रीगरुडमाहपुराणम्- २६ गरुड उवाच ।सत्यं ब्रूहि सुरश्रेष्ठ कृपां कृत्वा मयि प्रभो ।मृतानां चैव जन्तूनां कदा कुर्यात्सपिण्डनम्
iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe uttarakhaṇḍe dvitīyāṃśe dhamakāṇḍe pretakalpe śrīkṛṣṇagaruḍasavāde mṛtabālāntyeṣṭibhinnābhinnasutakṛtāntyeṣṭyorvarṇanaṃ nāma pañcaviṃśo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamāhapurāṇam- 26 garuḍa uvāca / satyaṃ brūhi suraśreṣṭha kṛpāṃ kṛtvā mayi prabho / mṛtānāṃ caiva jantūnāṃ kadā kuryātsapiṇḍanam
हिन्दी अर्थ
संदेहकी स्थिति नहीं रह जाती है तो उसका जो मृत्यु प्राप्त करता है, उसके घरमें हानि होती है। फल होता है, उसे भी तुम सुनो। इस पञ्चककी अवधिमें जो प्राणी मर जाता है, हे खगेश! पिता प्रसन्न होकर पुत्रोंको संतान उसका दाह-संस्कार तत्सम्बन्धित नक्षत्रके मन्त्रसे प्रदान करता है, जिससे उनकी वंश-परम्परा आहुति प्रदान करके नक्षत्रके मध्यकालमें भी
English
O foremost among deities, take pity on me and tell me truly when the sapinda rite has to be performed for the dead.