अध्याय ४४
श्लोक 1
कृतकार्ये गते काले जगत्यां च यथानयम् अंशावतरणे वृत्ते सुराणां भारते कुले
kṛtakārye gate kāle jagatyāṃ ca yathānayam aṃśāvataraṇe vṛtte surāṇāṃ bhārate kule
हिन्दी अर्थ
भी अवश्य उत्साहपूर्वक वहाँ चलेंगे'॥ १०-११॥ यह समाचार सुनकर श्रीकृष्णको ऐसा लगा, जैसे उनके हृदयमें किसीने काँट-सा चुभो दिया हो। वे यदुश्रेष्ठ गोविन्द यदुवंशियोंकी सेनाके साथ नगरसे बाहर निकले चक्रोद्यतकरः कृष्णे गदापाणिद्यरोचत। यादवाश्वापरे तत्र वासुदेवानुयायिनः। रथैरादित्यसंकाशै: किद्धिणीप्रतिनादितैः उग्रसेनं॑ तु गोविन्दः प्राह निश्चितदर्शनः। तिष्ठ त्वं नृपशार्दूल क्षात्रा मे सहितोडनघ
English
²⁴⁷ Sukra promised not to consign the _mantras_ of reviving a dead man to any body but this promise was falsified.