अध्याय १६
श्लोक 1
इति श्रीकूर्मपुराणे षट्साहस्त्र्यां संहितायां पूर्वविभागे पञ्चदशो ऽध्यायः श्रीकूर्म उवाच अन्दके निगृहीते वै प्रह्लादस्य महात्मनः ।विरोचनो नाम सुतो बभूव नृपतिः पुरा
iti śrīkūrmapurāṇe ṣaṭsāhastryāṃ saṃhitāyāṃ pūrvavibhāge pañcadaśo 'dhyāyaḥ śrīkūrma uvāca andake nigṛhīte vai prahlādasya mahātmanaḥ / virocano nāma suto babhūva nṛpatiḥ purā
हिन्दी अर्थ
जयध्वज बलवान् तथा नारायणका भक्त था। शूरसेन आदि चार पुत्र महात्मा एवं अति तेजस्वी और रुद्रके भक्त थे। वे सभी शंकरको पूजा करते थे। धर्मपरायण एवं बुद्धिमान् जयध्वज नारायण देव हरि विष्णु देवताकी शरणमें गया। अन्य पुत्रों (उसके चार भाइयों)-ने उससे कहा--अनघ ! यह तुम्हारा धर्म नहीं है। हमारे पिता शंकरको आराधना करते थे
English
Observing that all Devas and sages were antagonistic to Rudra, the holy sage Dadhica spoke thus to Daksa: