अध्याय ९५
श्लोक 1
इति श्रीकूर्मपुराणे षट्साहस्त्र्यां संहितायामुपरिविभागे त्रिचत्वारिंशो ऽध्यायः कूर्म उवाच अतः परं प्रवक्ष्यामि प्रतिसर्गमनुत्तमम् ।प्राकृतं हि समासेन शृणुध्वं गदतो मम
iti śrīkūrmapurāṇe ṣaṭsāhastryāṃ saṃhitāyāmuparivibhāge tricatvāriṃśo 'dhyāyaḥ kūrma uvāca ataḥ paraṃ pravakṣyāmi pratisargamanuttamam / prākṛtaṃ hi samāsena śṛṇudhvaṃ gadato mama
हिन्दी अर्थ
यह महत्तत्त्व पृथ्वीसे अहंकारपर्यन्त समस्त तत्त्वोंका मूल होनेके कारण एक प्रकारसे अमित तेजस्वी ब्रह्मा ही हैं। अतः ब्रह्मारूप तथा अपनेमें पृथ्वी आदि समस्त तत्त्वोंको समाविष्ट कर लेनेवाले इस अद्वितीय महत्तत्त्वका संहार वह प्रकृति कर देती है, जो अव्यक्त है एवं समस्त जगतूका मूल कारण है। इस प्रकार (पञ्च) भूतों तथा तत्त्वोंका संहारकर महेश्वर प्रधान--प्रकृति और पुरुषको परस्पर वियुक्त कर देते हैं
English
After saying "So be it" the lord vanished from the scene. The holy one (i.e. Nandin) performed a crore of Japa with his mind centred on him.